27 साल पहले खुद झेली परेशानी, अब कांवड़ियों के लिए बनीं संजीवनी कांवड़ यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बीच में छोड़ी थी यात्रा, वर्ष 2000 से जुंडला से शामली तक चल रहा तीन दिवसीय मेडिकल सेवा अभियान 27 साल पहले खुद झेली परेशानी, अब कांवड़ियों के लिए बनीं संजीवनी कांवड़ यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बीच में छोड़ी थी यात्रा, वर्ष 2000 से जुंडला से शामली तक चल रहा तीन दिवसीय मेडिकल सेवा अभियान झिंझाना,09 अगस्त। कांवड़ यात्रा के दौरान 27 वर्ष पहले उपचार और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की परेशानी झेल चुके हरियाणा के जुंडला निवासी रविंद्र जैन ने उसी समय कांवड़ियों की सेवा का संकल्प लिया। वर्ष 2000 से वह अपनी टीम के साथ जुंडला से शामली तक तीन दिवसीय चलते-फिरते मेडिकल शिविर के माध्यम से कांवड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। रविवार को मेरठ-करनाल हाईवे पर लगाए गए कांवड़ सेवा शिविर में रविंद्र जैन और विनोद चौहान अपनी टीम के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए थे। बातचीत के दौरान रविंद्र जैन ने बताया कि करीब 27 वर्ष पहले वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर वापस लौट रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उचित उपचार और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्होंने अपनी कांवड़ दूसरे साथी को सौंप दी और यात्रा बीच में ही छोड़कर घर लौट आए। इस घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि भविष्य में कांवड़ यात्रा के दौरान किसी अन्य शिवभक्त को चिकित्सा सुविधा के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। इसी संकल्प के बाद वर्ष 2000 से उन्होंने अपने साथियों के साथ वाहनों में दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सामग्री रखकर कांवड़ियों की सेवा शुरू कर दी। पिछले 26 वर्षों से उनकी टीम जुंडला से शामली तक कांवड़ यात्रा मार्ग पर चलते-फिरते मेडिकल शिविर के माध्यम से शिवभक्तों की सेवा कर रही है। टीम में रविंद्र जैन, विनोद गुज्जर एचला, चिकित्सक डॉ. जोनी, अमित अग्रवाल, दीपक गुप्ता, पाल्लाराम जांगड़ा और सुनील बंसल सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। टीम के सदस्य कांवड़ियों को रास्ते में प्राथमिक उपचार, दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान वर्षों से लगातार चल रही यह सेवा शिवभक्तों के लिए राहत और मदद का माध्यम बनी हुई है। रविंद्र जैन का कहना है कि कांवड़ यात्रा में सेवा से बढ़कर कोई दूसरा कार्य नहीं है। जिस परेशानी को उन्होंने स्वयं झेला था, आज उसी परेशानी को दूसरे कांवड़ियों से दूर करने का प्रयास उनकी टीम कर रही है। रवि गहलोत
27 साल पहले खुद झेली परेशानी, अब कांवड़ियों के लिए बनीं संजीवनी कांवड़ यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बीच में छोड़ी थी यात्रा, वर्ष 2000 से जुंडला से शामली तक चल रहा तीन दिवसीय मेडिकल सेवा अभियान 27 साल पहले खुद झेली परेशानी, अब कांवड़ियों के लिए बनीं संजीवनी कांवड़ यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बीच में छोड़ी थी यात्रा, वर्ष 2000 से जुंडला से शामली तक चल रहा तीन दिवसीय मेडिकल सेवा अभियान झिंझाना,09 अगस्त। कांवड़ यात्रा के दौरान 27 वर्ष पहले उपचार और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की परेशानी झेल चुके हरियाणा के जुंडला निवासी रविंद्र जैन ने उसी समय कांवड़ियों
की सेवा का संकल्प लिया। वर्ष 2000 से वह अपनी टीम के साथ जुंडला से शामली तक तीन दिवसीय चलते-फिरते मेडिकल शिविर के माध्यम से कांवड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। रविवार को मेरठ-करनाल हाईवे पर लगाए गए कांवड़ सेवा शिविर में रविंद्र जैन और विनोद चौहान अपनी टीम के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए थे। बातचीत के दौरान रविंद्र जैन ने बताया कि करीब 27 वर्ष पहले वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर वापस लौट रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उचित उपचार और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्होंने अपनी
कांवड़ दूसरे साथी को सौंप दी और यात्रा बीच में ही छोड़कर घर लौट आए। इस घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि भविष्य में कांवड़ यात्रा के दौरान किसी अन्य शिवभक्त को चिकित्सा सुविधा के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। इसी संकल्प के बाद वर्ष 2000 से उन्होंने अपने साथियों के साथ वाहनों में दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सामग्री रखकर कांवड़ियों की सेवा शुरू कर दी। पिछले 26 वर्षों से उनकी टीम जुंडला से शामली तक कांवड़ यात्रा मार्ग पर चलते-फिरते मेडिकल शिविर के माध्यम से शिवभक्तों की सेवा कर रही है। टीम में
रविंद्र जैन, विनोद गुज्जर एचला, चिकित्सक डॉ. जोनी, अमित अग्रवाल, दीपक गुप्ता, पाल्लाराम जांगड़ा और सुनील बंसल सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। टीम के सदस्य कांवड़ियों को रास्ते में प्राथमिक उपचार, दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान वर्षों से लगातार चल रही यह सेवा शिवभक्तों के लिए राहत और मदद का माध्यम बनी हुई है। रविंद्र जैन का कहना है कि कांवड़ यात्रा में सेवा से बढ़कर कोई दूसरा कार्य नहीं है। जिस परेशानी को उन्होंने स्वयं झेला था, आज उसी परेशानी को दूसरे कांवड़ियों से दूर करने का प्रयास उनकी टीम कर रही है। रवि गहलोत
- 27 साल पहले खुद झेली परेशानी, अब कांवड़ियों के लिए बनीं संजीवनी कांवड़ यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बीच में छोड़ी थी यात्रा, वर्ष 2000 से जुंडला से शामली तक चल रहा तीन दिवसीय मेडिकल सेवा अभियान 27 साल पहले खुद झेली परेशानी, अब कांवड़ियों के लिए बनीं संजीवनी कांवड़ यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बीच में छोड़ी थी यात्रा, वर्ष 2000 से जुंडला से शामली तक चल रहा तीन दिवसीय मेडिकल सेवा अभियान झिंझाना,09 अगस्त। कांवड़ यात्रा के दौरान 27 वर्ष पहले उपचार और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की परेशानी झेल चुके हरियाणा के जुंडला निवासी रविंद्र जैन ने उसी समय कांवड़ियों की सेवा का संकल्प लिया। वर्ष 2000 से वह अपनी टीम के साथ जुंडला से शामली तक तीन दिवसीय चलते-फिरते मेडिकल शिविर के माध्यम से कांवड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। रविवार को मेरठ-करनाल हाईवे पर लगाए गए कांवड़ सेवा शिविर में रविंद्र जैन और विनोद चौहान अपनी टीम के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए थे। बातचीत के दौरान रविंद्र जैन ने बताया कि करीब 27 वर्ष पहले वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर वापस लौट रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उचित उपचार और चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्होंने अपनी कांवड़ दूसरे साथी को सौंप दी और यात्रा बीच में ही छोड़कर घर लौट आए। इस घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि भविष्य में कांवड़ यात्रा के दौरान किसी अन्य शिवभक्त को चिकित्सा सुविधा के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। इसी संकल्प के बाद वर्ष 2000 से उन्होंने अपने साथियों के साथ वाहनों में दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सामग्री रखकर कांवड़ियों की सेवा शुरू कर दी। पिछले 26 वर्षों से उनकी टीम जुंडला से शामली तक कांवड़ यात्रा मार्ग पर चलते-फिरते मेडिकल शिविर के माध्यम से शिवभक्तों की सेवा कर रही है। टीम में रविंद्र जैन, विनोद गुज्जर एचला, चिकित्सक डॉ. जोनी, अमित अग्रवाल, दीपक गुप्ता, पाल्लाराम जांगड़ा और सुनील बंसल सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। टीम के सदस्य कांवड़ियों को रास्ते में प्राथमिक उपचार, दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान वर्षों से लगातार चल रही यह सेवा शिवभक्तों के लिए राहत और मदद का माध्यम बनी हुई है। रविंद्र जैन का कहना है कि कांवड़ यात्रा में सेवा से बढ़कर कोई दूसरा कार्य नहीं है। जिस परेशानी को उन्होंने स्वयं झेला था, आज उसी परेशानी को दूसरे कांवड़ियों से दूर करने का प्रयास उनकी टीम कर रही है। रवि गहलोत4
- कपिल कुमार ग्राम प्रधान ने कांवड़ सेवा शिविर का किया उद्धघाटन, शिवभक्तों के लिए समर्पित सेवा का सुंदर उदाहरण बिड़ौली/झिंझाना। सावन माह के पावन अवसर पर ग्राम प्रधान वह ग्रामवासियों द्वारा मेरठ करनाल हाईवे पर केरटू म्यान कस्बा के बीच बिड़ौली बस स्टॉप के पास ढाबा पर आयोजित 37वें कांवड़ सेवा शिविर का भव्य शुभारंभ 11बजे रविवार को श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सैनी, जय नारायण द्धारा किया गया।कावड़ शिविर प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी कांवड़ियों की विश्राम, भोजन और फलाहार हेतु उत्कृष्ट प्रबंध किए गए हैं। सेवा शिविर के पहले दिन मालिश मशीन द्वारा थके हुए कांवड़ियों की मालिश की गई, उन्हें भोजन कराया गया और विश्राम हेतु उचित व्यवस्था दी गई। शिविर का विधिवत उद्घाटन ग्राम प्रधान कपिल कुमार ने संयुक्त रूप से किया।उद्घाटन के दौरान मुख्य अतिथियों ने कांवड़ियों के साथ मिलकर फीता काटकर शिविर का शुभारंभ किया। खुशीराम ने अपने संबोधन में कहा हर वर्ष यह शिविर संस्थान द्वारा श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है, जो भगवान शिव की सच्ची भक्ति और मानव सेवा का अद्भुत उदाहरण है। ऐसे आयोजन सामाजिक सहयोग और अध्यात्मिक ऊर्जा के संगम हैं।"उन्होंने सेवा शिविर के निदेशक खुशीराम को इस पुनीत कार्य के लिए बधाई दी और कांवड़ यात्रा के दौरान सरकारी गाइडलाइनों का पालन करने को सलाह दी उन्होंने कहा कि यदि हम सभी शिवभक्तों की सेवा में तन-मन से लगे रहें, तो निश्चित ही भोलेनाथ का आशीर्वाद हमें प्राप्त होगा। सेवा का यह मार्ग समाज में सकारात्मकता लाने का एक सशक्त माध्यम है उन्होंने कांवड़ियों से अपील कि किसी भी प्रकार की अफवाह या असुविधा की जानकारी पुलिस को तत्काल दें ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। इस सेवा आयोजन में, राजीव कुमार,फुल्लू कश्यप,संजीव सैनी,प्रमोद सैनी,पुष्पाल कस्यप,सोमसिंह, सहेंद्र, गोविंद मिस्तरी, योगेंदर कश्यप,गुलाब सिंह,एडवोकेट श्यामू, शिव कुमार,विक्रम सिंह,जय कुमार मिस्तरी,राजू,दीपक सैनी, अंकुश कश्यप,गोर्धन सहित भूमिका निभाने वालों में आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। ग्राम वासियों द्वारा लगाया गया सेवा शिविर श्रद्धा और सेवा का समन्वय है। यह कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और आध्यात्मिक विश्राम स्थल की भूमिका निभा रहा है। ऐसे सेवा कार्य न केवल सामाजिक सौहार्द का निर्माण करते हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि श्रद्धा के साथ किया गया प्रत्येक कार्य समाज को दिशा देने की शक्ति रखता है।4
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