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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सोन नदी में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां नहाने गईं तीन लड़कियों को बचाने के प्रयास में एक लड़के सहित कुल चार लोगों की डूबने से मौत हो गई।
Sandeep Kumar Saket
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सोन नदी में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां नहाने गईं तीन लड़कियों को बचाने के प्रयास में एक लड़के सहित कुल चार लोगों की डूबने से मौत हो गई।
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- घूरपुर पुलिस थाना परिसर में आगामी मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता एसीपी अब्दुल सलाम खान ने की, जबकि घूरपुर थानाध्यक्ष अतुल कुमार मिश्रा ने इसका सफल संचालन किया। बैठक में घूरपुर थाना क्षेत्र की विभिन्न ग्राम सभाओं से पहुंचे ताजियादारों, ग्राम प्रधानों और गणमान्य नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अधिकारियों ने उपस्थित सभी लोगों से मुहर्रम का जुलूस और ताजिया पारंपरिक तरीके से निकालने के साथ-साथ आपसी भाईचारे एवं सौहार्द की भावना बनाए रखने की विशेष अपील की। एसीपी अब्दुल सलाम खान ने इस बात पर जोर दिया कि मुहर्रम का पर्व शांति, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाया जाए। उन्होंने सभी ताजियादारों से प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करने का अनुरोध करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दिया जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दी जाए। थानाध्यक्ष अतुल कुमार मिश्रा ने यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि जुलूस निर्धारित मार्ग एवं तय समय के अनुसार ही निकाला जाए, साथ ही डीजे, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा मानकों एवं अन्य प्रशासनिक निर्देशों का पालन हो ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो। उन्होंने दोहराया कि पुलिस प्रशासन मुहर्रम पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए पूरी तरह सतर्क एवं तैयार है। इस दौरान, विभिन्न ग्राम सभाओं से आए ताजियादारों और स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बिजली, साफ-सफाई, मार्ग की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था तथा जुलूस मार्ग में आने वाली अन्य समस्याओं से अवगत कराया। अधिकारियों ने इन सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। बैठक का समापन आपसी सहयोग, भाईचारे और शांति व्यवस्था बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर पुलिस विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, पत्रकार बन्धु, ग्राम प्रधान, ताजियादार तथा क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।4
- जयपुर में अभिजीत दीपके को थप्पड़ मारने वाले व्यक्ति ने एक बयान में खुद को राष्ट्रवादी बताया है। इस व्यक्ति ने अपनी बात रखते हुए कहा, "मैं राष्ट्रवादी हूं। मच्छर, तेरे को बताऊं अभी, क्या हूं मैं"।1
- प्रयागराज के झूंसी इलाके में एक तेंदुए के दिखाई देने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो वहाँ के एक स्थानीय निवासी ने रिकॉर्ड कर साझा किया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद से पूरे क्षेत्र में इस घटना पर चर्चा का माहौल बना हुआ है।1
- प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र में शास्त्री पुल के पास ईदगाह के सामने एक तेंदुआ फिर से देखा गया है। एसटीपी पर मौजूद लोगों ने तेंदुए को अपने मोबाइल कैमरे में एकदम साफ-साफ कैद कर लिया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह तेंदुआ एक मां है जो अपने दोनों शावकों के लिए भोजन की तलाश में निकली है। कुत्तों को तेंदुए के स्वादिष्ट भोजन में से एक माना जाता है, इसलिए यह मां तेंदुआ कुत्तों के शिकार पर निकली थी। जानकारी के अनुसार, तेंदुआ इंसानों पर तभी हमला करता है जब उसे भोजन के लिए कोई अन्य जानवर उपलब्ध न हो। इस तेंदुआ मां ने झूंसी के गंगा नदी के किनारे वाले क्षेत्र पर अपना डेरा डाल रखा है और यह अनुमान है कि उसके दोनों शावक भी वहीं पर होंगे।1
- रीवा में कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन निरस्त किए जाने को केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया, निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रहार बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि जिन आपत्तियों और व्याख्याओं के आधार पर यह नामांकन रद्द किया गया, उससे पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह प्रश्न उठा रहा है कि क्या चुनावी प्रक्रिया कानून के अनुसार चलेगी या राजनीतिक दबावों के अनुरूप। कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में उल्लेख किए गए निजी परिवाद पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें मीनाक्षी नटराजन को अभियुक्त नहीं, बल्कि प्रतिवादी के रूप में दर्शाया गया है। पार्टी का कहना है कि प्रतिवादी और अभियुक्त की कानूनी स्थिति अलग-अलग होती है, और दोनों को समान मानकर की गई व्याख्या से गंभीर कानूनी प्रश्न उत्पन्न होते हैं। कांग्रेस के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A और फॉर्म-26 का उद्देश्य ऐसे आपराधिक मामलों की जानकारी प्राप्त करना है जिनमें उम्मीदवार के विरुद्ध विधिवत आपराधिक कार्यवाही चल रही हो और कानून के अनुरूप प्रकटीकरण अपेक्षित हो। कांग्रेस का मत है कि नामांकन निरस्त करने का आधार इन प्रावधानों की मूल भावना और व्याख्या से मेल नहीं खाता। पार्टी ने चेताया कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन ऐसे आधारों पर निरस्त किया जाता है, जिनकी स्पष्ट अपेक्षा नामांकन प्रपत्र में नहीं है, तो यह भविष्य में किसी भी उम्मीदवार के लिए अनिश्चितता और मनमानी की स्थिति पैदा कर सकता है। कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की आत्मा प्रतिस्पर्धी और निष्पक्ष चुनाव में निहित है। यदि विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को तकनीकी और विवादित आधारों पर चुनावी मैदान से बाहर किया जाने लगे, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर आघात पहुंचेगा। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश की जनता को आश्वस्त किया है कि संविधान, लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा, क्योंकि लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव से चलता है।2
- प्रयागराज के जसरा स्थित मदरहा जसरा इरादतगंज रेलवे स्टेशन पर तेंदू पत्ते का बड़े पैमाने पर काला कारोबार चल रहा है, जिससे प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि शंकरगढ़ वन क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले जसरा बीट प्रभार के सह पर ही तेंदू पत्ते की यह तस्करी की जा रही है। इस अवैध कारोबार में जीआरपी, आरपीएफ के साथ-साथ रेलवे स्टेशन का एक स्थानीय दबंग वेंडर और स्थानीय ठेकेदार भी कथित तौर पर पूरी तरह से संलिप्त हैं। सूत्रों के अनुसार, तेंदू पत्ता लाने वाले लोगों से अवैध वसूली की जाती है, जिसमें दबंग वेंडर और ठेकेदार मिलकर प्रति बोरी 100 रुपये की धन उगाही कर रहे हैं। वन विभाग इस तस्करी को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है, जिसके चलते यह अवैध धंधा बेरोकटोक जारी है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- पटना में एक ज्वेलरी शॉप लूटने आईं दो लड़कियाँ दुकानदार की सूझबूझ से पकड़ी गईं। ये लड़कियाँ दुकान पर पहुँचीं और दुकानदार से जेवरात दिखाने को कहा। जैसे ही दुकानदार ने गहने निकाले, एक लड़की ने अपने बैग से स्प्रे निकालकर दुकानदार पर छिड़कना शुरू कर दिया। हालाँकि, दुकानदार ने लड़कियों के चेहरे पर मास्क लगे होने के कारण उन्हें पहले ही संदिग्ध मान लिया था। उसने तुरंत फुर्ती दिखाते हुए दुकान से बाहर निकलकर उसे बाहर से बंद कर दिया, जिससे दोनों लूटेरी लड़कियाँ दुकान के अंदर फँस गईं और पकड़ी गईं।1
- कौंधियारा क्षेत्र में बिना लाइसेंस और परमिशन के बड़े पैमाने पर अवैध खनन का गोरखधंधा धड़ल्ले से जारी है। इस अवैध कारोबार में जुटे लोगों का एक वीडियो इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप से अवैध खनन गतिविधियों और संबंधित बातचीत को देखा और सुना जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले की संबंधित विभागों को भनक तक नहीं लगी। वायरल वीडियो के माध्यम से स्थानीय पुलिस, खनन विभाग और तहसील स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ये संबंधित विभाग हमेशा की तरह अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने में लगे रहते हैं। वीडियो में चल रही बातचीत से यह संकेत मिलता है कि अवैध कारोबारियों को स्थानीय पुलिस की 'परमिट' पर पूरी छूट मिली हुई है, जिसके चलते वे रात के सन्नाटे में चोरी-छिपे इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या रात में गश्त के दौरान पुलिस को यह सब दिखाई नहीं पड़ता, या संभव है कि इलाकाई पुलिस गश्त पर जाती ही न हो। बताया जाता है कि संबंधित पुलिस को सब कुछ पता होने के बावजूद वे कार्रवाई करने या उच्च अधिकारियों को सूचना देने से कतराते हैं। जब भी अवैध खनन का यह 'महाखेल' सामने आता है, तो पुलिस सीधे तौर पर खनन विभाग और तहसील स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी डाल देती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या खाकी (पुलिस) अपने कर्तव्यों का पालन करने से पीछे हट रही है, खासकर जब उनके थाना क्षेत्र में बिना लाइसेंस और परमिट के इस तरह का अवैध कारोबार चल रहा हो। यदि वे कार्रवाई में अक्षम हैं, तो संबंधित विभागों को जानकारी भी क्यों नहीं मुहैया कराई जाती? वायरल वीडियो के जरिए ऐसे ही कई सवाल इलाकाई पुलिस और संबंधित विभागों की पोल खोलकर रख रहे हैं, जिसमें रात के सन्नाटे में अवैध खनन करते हुए कारोबारियों को साफ देखा जा सकता है।1
- सीधी जिले के जनपद पंचायत कुसमी के ग्राम टमसार में कुसमी-महखोर मार्ग पर सड़क किनारे खोदी गई एक नाली को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने इस निर्माण के लिए वन विभाग पर मनमानी का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि यह नाली राजनीतिक षड्यंत्र के तहत, चौराहे क्षेत्र में व्यापारियों और गुमटी संचालकों को जानबूझकर परेशान करने की नीयत से खोदी गई है। इस नाली के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और दुर्घटनाओं की आशंका काफी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के कथित तानाशाही रवैये के चलते क्षेत्र में अक्सर दुर्घटनाओं जैसी स्थितियां बनती रहती हैं। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि बरसात के मौसम में यह नाली और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान को खतरा उत्पन्न होने की आशंका है। इस संबंध में स्थानीय व्यापारियों और गुमटी संचालकों ने ग्राम पंचायत के सरपंच मकरंद सिंह के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जानकारी मिलने पर तहसीलदार कुसमी नारायण सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थल का निरीक्षण कर नाप-जोख कराई। बताया गया है कि तहसीलदार ने ग्रामीणों को सूचित किया कि संबंधित भूमि के रिकॉर्ड और सीमांकन के अनुसार, उक्त क्षेत्र में खोदी गई नाली अवैध है और पचासा क्षेत्र में स्थित है। बावजूद इसके, ग्रामीणों और व्यापारियों ने मांग की है कि यदि नाली आवश्यक है तो उसकी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिसमें ढक्कन लगाना और चेतावनी संकेत स्थापित करना शामिल हो, ताकि कोई दुर्घटना न हो। अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि यदि बरसात के दौरान इस अवैध नाली के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जनहित में उचित निर्णय लेने का आग्रह किया है।3