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फेमस यूट्यूब शादाब जगती पर लगाए गए गंभीर आरोप को लेकर शादाब जगती ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल करते हुए की निष्पक्ष जांच की मांग और लगाए गए आरोप को बताया बेबुनियाद
Satish Kumar Sharma
फेमस यूट्यूब शादाब जगती पर लगाए गए गंभीर आरोप को लेकर शादाब जगती ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल करते हुए की निष्पक्ष जांच की मांग और लगाए गए आरोप को बताया बेबुनियाद
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- Post by सरताज अहमद पत्रकार1
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- मुजफ्फरनगर जनपद के चरथावल क्षेत्र में इन दिनों सड़कों पर ओवरलोड गन्ना ट्रक खुलेआम फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गन्ना पेराई सत्र के दौरान क्षमता से कहीं अधिक गन्ना लादकर चल रहे ये ट्रक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरलोड ट्रकों के कारण चरथावल मे जाम की स्थिति व हादसा होने की आशंका बनी रहती हैं, वहीं दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और पैदल राहगीरों के लिए हर दिन जान का खतरा बना हुआ है। कई बार ट्रकों के असंतुलित होने से जाम और छोटे हादसे भी हो चुके हैं1
- फेमस यूट्यूबर शादाब जगाती पर लगाए गए आरोपों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सभी आरोपों को सिरे से बेबुनियाद बताया। शादाब जगाती ने कहा कि उनकी छवि खराब करने की साजिश की जा रही है और उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।1
- बिग न्यूज मुजफ्फरनगर खतौली किसान की हताशा की तस्वीर: भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष ने हरा-भरा सरसों का खेत उखाड़ा भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष ठाकुर नीरज सिंह ने अपने हरे-भरे सरसों के खेत को चुपचाप उखाड़ कर किसान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी शोर-शराबे या प्रदर्शन के उठाया गया यह कदम इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। ठाकुर नीरज सिंह का आरोप है कि सरकार की नीतियाँ किसानों के हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरसों की फसल पर आई लागत के मुकाबले बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहा, जिससे किसान आर्थिक रूप से टूट चुका है। खाद, बीज, डीज़ल और दवाइयों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। किसान नेता का कहना है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर खरीद की कोई गारंटी नहीं है। कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे निराश होकर उन्होंने अपनी तैयार फसल को ही नष्ट करने का फैसला लिया। ठाकुर नीरज सिंह ने कहा कि “जब किसान दिन-रात मेहनत कर फसल उगाए और बदले में सिर्फ घाटा मिले, तो ऐसी खेती का कोई मतलब नहीं रह जाता। यह कदम मेरी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज की आवाज़ है।” इस घटना के बाद किसान संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।2
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