84 कोसी परिक्रमा में गिट्टी, गड्ढे, गंदगी लेती आस्था की परीक्षा , नुकीली गिट्टियों से छलनी हो रहे श्रद्धालुओं के पांव —खबर सूत्रों पर आधारित 84 कोसी परिक्रमा में गिट्टी, गड्ढे, गंदगी लेती आस्था की परीक्षा श्रद्धालुओं की राह में बिखरी प्रशासनिक पड़ी लापरवाही शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। प्रदेश में धर्म, आस्था और सनातन परंपराओं के संरक्षण को सरकार अपनी पहचान बताती है। मंदिरों के विकास से लेकर धार्मिक आयोजनों के भव्य प्रचार तक, सत्ता के मंचों से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन 84 कोसी परिक्रमा की ज़मीनी तस्वीर इन दावों को कठोर सच्चाई के कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। नैमिषारण्य से निकलने वाली यह पौराणिक परिक्रमा जैसे ही हरदोई जिले की सीमा में प्रवेश करती है, श्रद्धालुओं की आस्था की असली परीक्षा शुरू हो जाती है— जहाँ नंगे पांव चल रहे लोग, कंकड़-पत्थरों से भरे रास्ते, कीचड़ और जलभराव, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक उपचार की भारी कमी जबकि यह कोई आकस्मिक आयोजन नहीं है। परिक्रमा की तिथि, मार्ग और पड़ाव वर्षों से तय हैं। हर साल शासन और प्रशासन को तैयारी का पूरा समय मिलता है। फिर भी हर साल वही बदहाली और वही मौन उदासीनता का आलम आखिर यह सब क्या है? क्या यह आस्था की सहनशीलता को समझने की कलियुगी मानसिकता तो नहीं? विचारणीय है की 84 कोसी परिक्रमा का हर श्रद्धालु इसलिए नंगे पांव नहीं चल रहा कि व्यवस्था अच्छी है, बल्कि वह इसलिए चल रहा है क्योंकि उसकी आस्था अडिग है। लेकिन क्या यही अडिग आस्था सत्ता और सिस्टम के लिए सबसे सुविधाजनक बहाना बन गई है? क्या शासन यह मान बैठा है कि श्रद्धालु छाले झेलेगा, कीचड़ में गिरेगा, अंधेरे में चलेगा और फिर भी सवाल नहीं करेगा? अगर ऐसा है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि यह घोर कलियुगी मानसिकता है और अब इस बिषय पर मुख्यमंत्री और प्रशासन की मनमानी पर उठते वे सवाल, जो वास्तव में टाले नहीं जा सकते किन्तु कलियुगी मानसिकता से किसी भी जिम्मेदारी को मनमाने ढंग से नाकारा जा सकता है। विचारणीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक आयोजनों को अपनी प्राथमिकता बताती है। तो फिर—यह 84 कोसी परिक्रमा के लिए आज तक स्थायी, सुगम और सुरक्षित पथ क्यों नहीं? हर साल बजट आने के बावजूद हरदोई में वही अस्थायी इंतजाम क्यों? क्या मुख्यमंत्री कार्यालय तक यह जमीनी सच्चाई नहीं पहुंचती, या जानबूझकर अनदेखी होती है? अगर यही हाल किसी वीआईपी कार्यक्रम या सरकारी उत्सव में होता, तो क्या सिस्टम यूं ही चुप रहता? ये सवाल केवल हरदोई के नहीं हैं। ये सवाल राज्य शासन की निगरानी और संवेदना से जुड़े हैं। हरदोई प्रशासन की यह जिम्मेदारी या औपचारिकता? शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक तैयारी हर साल एक ही पैटर्न पर दिखाई देती है—आखिरी समय में मिट्टी डाल दी, गड्ढों में रोड़ा भर दिया, कागजों में निरीक्षण दर्ज कर लिया। लेकिन श्रद्धालुओं की पीड़ा कागजों में दर्ज नहीं होती। पेयजल के लिए खराब हैंडपंप, महिलाओं के लिए अपर्याप्त शौचालय, स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी और रात में अंधेरे रास्ते— ये सब बताते हैं कि व्यवस्था ने संवेदना को अपने एजेंडे से बाहर कर दिया है। सत्ता—शासन बनाम परिक्रमा ज़मीनी सच शाहाबाद (हरदोई) 18 फरवरी। सरकारी बयान कहते हैं कि तैयारी पूरी है लेकिन ज़मीनी सच्चाई बताती है कि “हर साल बाला हाल इस साल भी है। यही अंतर सबसे बड़ा सवाल है। अगर शासन के दावे सही हैं, तो परिक्रमा मार्ग पर चल रहा श्रद्धालु सवाल क्यों खड़े कर रहा है। भले 84 कोसी परिक्रमा केवल हरदोई या उत्तर प्रदेश का मामला नहीं बल्कि यह भारत की पौराणिक चेतना और सनातन परंपरा का हिस्सा है। अगर ऐसी परंपरा में श्रद्धालु कष्ट, पीड़ा और उपेक्षा झेले, तो सवाल राष्ट्रीय स्तर पर भी उठना स्वाभाविक हैं— यह कि क्या भारत में आस्था केवल भाषणों और मंचों तक सीमित है? क्या धार्मिक परंपराएं केवल राजनीतिक दावों का हिस्सा बन गई हैं? क्या श्रद्धालु की पीड़ा अब सिस्टम के लिए अदृश्य हो चुकी है? इसलिए सच्चाई यही है कि आस्था चल रही है, किन्तु व्यवस्था से व्यथित है। वह कहीं शिकायत कर रहा तो कहीं नहीं कर रहा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब ठीक है। श्रद्धालुओं की यह चुप्पी संतोष नहीं, विवशता है। अब समय है कि शासन, प्रशासन और पूरा सिस्टम स्वयं को परिक्रमा मार्ग पर आस्था के दर्पण में देखे। नुकीली गिट्टियों से छलनी हो रहे श्रद्धालुओं के पांव शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। बरौली–गोवर्धनपुर–वाजीदपुर मार्ग पर श्रद्धालुओं के पांव नुकीली गिट्टियों से छलनी होते बताए जा रहे हैं। पड़ाव स्थलों पर गंदगी, पेयजल-बिजली संकट के सूत्र मिले हैं। सूत्रों की मानें तो क्षतिग्रस्त पुल, गायब पौराणिक रास्ते… सुरक्षा और श्रद्धा दोनों पर सवाल हैं। असंतुष्ट संतों द्वारा शासन-प्रशासन से तीखे प्रश्न किए जाने के भी सूत्र मिले हैं। बताया गया है कि नैमिषारण्य से आज ही 18 फरवरी को शुरू हुई 84 कोसी परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था से अधिक अग्निपरीक्षा बनती दिख रही है। हरदोई जिले में परिक्रमा मार्गों और पड़ाव स्थलों की बदहाल व्यवस्थाओं ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। दूर-दराज और देश–विदेश से आए श्रद्धालु, जो नंगे पांव परिक्रमा करते हैं, उन्हें गिट्टी, गड्ढों और अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। परिक्रमा मार्ग पर पड़ी गिट्टी पर चलती श्रद्धा शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। बताया गया है कि बरौली, गोवर्धनपुर और वाजीदपुर मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर महीनों पहले डाली गई नुकीली गिट्टियां अब तक जस की तस पड़ी हैं। यही मार्ग रामादल के साथ परिक्रमार्थियों का मुख्य रास्ता है। नंगे पांव चल रहे साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए यह रास्ता असहनीय पीड़ा का कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण तो हुए, पर सुधार कागजों से आगे नहीं बढ़ा। सीतापुर–हरदोई संपर्क मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे केवल “खानापूर्ति” के तौर पर पत्थर डालकर भरे गए हैं, जो किसी भी समय हादसे को न्योता दे सकते हैं। वहीं साखिन पड़ाव से द्रोणाचार्य घाट तक का पौराणिक मार्ग देखरेख के अभाव में लगभग गायब हो चुका है। परिक्रमा पड़ावों पर डामाडोल इंतजाम शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। बताया गया है कि हरैया, कोथावां, नगवां और गिरधरपुर–उमरारी जैसे प्रमुख पड़ावों पर व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। हरैया पड़ाव पर गोमती नदी के स्नान घाट पर जलकुंभी का अंबार लगा है। श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए जूझ रहे हैं। कई स्थानों पर पेयजल संकट और अस्थाई बिजली आपूर्ति ने परेशानी और बढ़ा दी है। कोथावां में पड़ाव भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। सुरक्षा भी भगवान भरोसे बताई गई है। टड़ियावां क्षेत्र में जनकापुर–बहादुरपुर के बीच नहर की पुलिया की टूटी रेलिंग गंभीर खतरा बताई गई है। आदेशों के बावजूद मरम्मत न होना प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े करता है। यही कारण है कि संतों का आक्रोश, सवालों की बौछार हो रही है क्योंकि सूत्र बताते हैं कि व्यवस्थाओं की बदहाली से आहत विख्यात कथावाचक अनिल शास्त्री ने इस वर्ष स्वयं परिक्रमा न करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं की शिकायतें की गईं, आश्वासन मिले, पर जमीन पर बदलाव नहीं दिखा। संतों का कहना है कि जब सरकार परिक्रमा को अंतरराष्ट्रीय महत्व का बताती है, तो फिर श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है? हालांकि प्रशासन की कागजी चमक की चर्चा यह है कि प्रशासन मंदिरों में सीसीटीवी, दुकानों पर पाबंदी और सफाई ड्यूटी के दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सुविधाएं पिछले वर्षों से भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। श्रद्धालुओं का सवाल है—क्या आस्था के इस महापर्व में व्यवस्थाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगी? नंगे पांव चल रहे श्रद्धालुओं की पीड़ा की जिम्मेदारी कौन लेगा? 84 कोसी परिक्रमा का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व देश–विदेश में माना जाता है। पर हरदोई में मौजूदा हालात यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या शासन-प्रशासन आस्था के इस सैलाब के लिए वास्तव में तैयार है, या फिर श्रद्धालुओं की परीक्षा लेने को ही व्यवस्था मान लिया गया है?
84 कोसी परिक्रमा में गिट्टी, गड्ढे, गंदगी लेती आस्था की परीक्षा , नुकीली गिट्टियों से छलनी हो रहे श्रद्धालुओं के पांव —खबर सूत्रों पर आधारित 84 कोसी परिक्रमा में गिट्टी, गड्ढे, गंदगी लेती आस्था की परीक्षा श्रद्धालुओं की राह में बिखरी प्रशासनिक पड़ी लापरवाही शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। प्रदेश में धर्म, आस्था और सनातन परंपराओं के संरक्षण को सरकार अपनी पहचान बताती है। मंदिरों के विकास से लेकर धार्मिक आयोजनों के भव्य प्रचार तक, सत्ता के मंचों से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन 84 कोसी परिक्रमा की ज़मीनी तस्वीर इन दावों को कठोर सच्चाई के कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। नैमिषारण्य से निकलने वाली यह पौराणिक परिक्रमा जैसे ही हरदोई जिले की सीमा में प्रवेश करती है, श्रद्धालुओं की आस्था की असली परीक्षा शुरू हो जाती है— जहाँ नंगे पांव चल रहे लोग, कंकड़-पत्थरों से भरे रास्ते, कीचड़ और जलभराव, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक उपचार की भारी कमी जबकि यह कोई आकस्मिक आयोजन नहीं है। परिक्रमा की तिथि, मार्ग और पड़ाव वर्षों से तय हैं। हर साल शासन और प्रशासन को तैयारी का पूरा समय मिलता है। फिर भी हर साल वही बदहाली और वही मौन उदासीनता का आलम आखिर यह सब क्या है? क्या यह आस्था की सहनशीलता को समझने की कलियुगी मानसिकता तो नहीं? विचारणीय है की 84 कोसी परिक्रमा का हर श्रद्धालु इसलिए नंगे पांव नहीं चल रहा कि व्यवस्था अच्छी है, बल्कि वह इसलिए चल रहा है क्योंकि उसकी आस्था अडिग है। लेकिन क्या यही अडिग आस्था सत्ता और सिस्टम के लिए सबसे सुविधाजनक बहाना बन गई है? क्या शासन यह मान बैठा है कि श्रद्धालु छाले झेलेगा, कीचड़ में गिरेगा, अंधेरे में चलेगा और फिर भी सवाल नहीं करेगा? अगर ऐसा है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि यह घोर कलियुगी मानसिकता है और अब इस बिषय पर मुख्यमंत्री और प्रशासन की मनमानी पर उठते वे सवाल, जो वास्तव में टाले नहीं जा सकते किन्तु कलियुगी मानसिकता से किसी भी जिम्मेदारी को मनमाने ढंग
से नाकारा जा सकता है। विचारणीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक आयोजनों को अपनी प्राथमिकता बताती है। तो फिर—यह 84 कोसी परिक्रमा के लिए आज तक स्थायी, सुगम और सुरक्षित पथ क्यों नहीं? हर साल बजट आने के बावजूद हरदोई में वही अस्थायी इंतजाम क्यों? क्या मुख्यमंत्री कार्यालय तक यह जमीनी सच्चाई नहीं पहुंचती, या जानबूझकर अनदेखी होती है? अगर यही हाल किसी वीआईपी कार्यक्रम या सरकारी उत्सव में होता, तो क्या सिस्टम यूं ही चुप रहता? ये सवाल केवल हरदोई के नहीं हैं। ये सवाल राज्य शासन की निगरानी और संवेदना से जुड़े हैं। हरदोई प्रशासन की यह जिम्मेदारी या औपचारिकता? शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक तैयारी हर साल एक ही पैटर्न पर दिखाई देती है—आखिरी समय में मिट्टी डाल दी, गड्ढों में रोड़ा भर दिया, कागजों में निरीक्षण दर्ज कर लिया। लेकिन श्रद्धालुओं की पीड़ा कागजों में दर्ज नहीं होती। पेयजल के लिए खराब हैंडपंप, महिलाओं के लिए अपर्याप्त शौचालय, स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी और रात में अंधेरे रास्ते— ये सब बताते हैं कि व्यवस्था ने संवेदना को अपने एजेंडे से बाहर कर दिया है। सत्ता—शासन बनाम परिक्रमा ज़मीनी सच शाहाबाद (हरदोई) 18 फरवरी। सरकारी बयान कहते हैं कि तैयारी पूरी है लेकिन ज़मीनी सच्चाई बताती है कि “हर साल बाला हाल इस साल भी है। यही अंतर सबसे बड़ा सवाल है। अगर शासन के दावे सही हैं, तो परिक्रमा मार्ग पर चल रहा श्रद्धालु सवाल क्यों खड़े कर रहा है। भले 84 कोसी परिक्रमा केवल हरदोई या उत्तर प्रदेश का मामला नहीं बल्कि यह भारत की पौराणिक चेतना और सनातन परंपरा का हिस्सा है। अगर ऐसी परंपरा में श्रद्धालु कष्ट, पीड़ा और उपेक्षा झेले, तो सवाल राष्ट्रीय स्तर पर भी उठना स्वाभाविक हैं— यह कि क्या भारत में आस्था केवल भाषणों और मंचों तक सीमित है? क्या धार्मिक परंपराएं केवल राजनीतिक दावों का हिस्सा बन गई हैं? क्या श्रद्धालु की पीड़ा अब सिस्टम के लिए अदृश्य हो चुकी है? इसलिए सच्चाई यही
है कि आस्था चल रही है, किन्तु व्यवस्था से व्यथित है। वह कहीं शिकायत कर रहा तो कहीं नहीं कर रहा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब ठीक है। श्रद्धालुओं की यह चुप्पी संतोष नहीं, विवशता है। अब समय है कि शासन, प्रशासन और पूरा सिस्टम स्वयं को परिक्रमा मार्ग पर आस्था के दर्पण में देखे। नुकीली गिट्टियों से छलनी हो रहे श्रद्धालुओं के पांव शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। बरौली–गोवर्धनपुर–वाजीदपुर मार्ग पर श्रद्धालुओं के पांव नुकीली गिट्टियों से छलनी होते बताए जा रहे हैं। पड़ाव स्थलों पर गंदगी, पेयजल-बिजली संकट के सूत्र मिले हैं। सूत्रों की मानें तो क्षतिग्रस्त पुल, गायब पौराणिक रास्ते… सुरक्षा और श्रद्धा दोनों पर सवाल हैं। असंतुष्ट संतों द्वारा शासन-प्रशासन से तीखे प्रश्न किए जाने के भी सूत्र मिले हैं। बताया गया है कि नैमिषारण्य से आज ही 18 फरवरी को शुरू हुई 84 कोसी परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था से अधिक अग्निपरीक्षा बनती दिख रही है। हरदोई जिले में परिक्रमा मार्गों और पड़ाव स्थलों की बदहाल व्यवस्थाओं ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। दूर-दराज और देश–विदेश से आए श्रद्धालु, जो नंगे पांव परिक्रमा करते हैं, उन्हें गिट्टी, गड्ढों और अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। परिक्रमा मार्ग पर पड़ी गिट्टी पर चलती श्रद्धा शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। बताया गया है कि बरौली, गोवर्धनपुर और वाजीदपुर मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर महीनों पहले डाली गई नुकीली गिट्टियां अब तक जस की तस पड़ी हैं। यही मार्ग रामादल के साथ परिक्रमार्थियों का मुख्य रास्ता है। नंगे पांव चल रहे साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए यह रास्ता असहनीय पीड़ा का कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण तो हुए, पर सुधार कागजों से आगे नहीं बढ़ा। सीतापुर–हरदोई संपर्क मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे केवल “खानापूर्ति” के तौर पर पत्थर डालकर भरे गए हैं, जो किसी भी समय हादसे को न्योता दे सकते हैं। वहीं साखिन पड़ाव से द्रोणाचार्य घाट तक का पौराणिक मार्ग देखरेख के अभाव में लगभग गायब हो चुका है। परिक्रमा पड़ावों पर
डामाडोल इंतजाम शाहाबाद (हरदोई)18 फरवरी। बताया गया है कि हरैया, कोथावां, नगवां और गिरधरपुर–उमरारी जैसे प्रमुख पड़ावों पर व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। हरैया पड़ाव पर गोमती नदी के स्नान घाट पर जलकुंभी का अंबार लगा है। श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए जूझ रहे हैं। कई स्थानों पर पेयजल संकट और अस्थाई बिजली आपूर्ति ने परेशानी और बढ़ा दी है। कोथावां में पड़ाव भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। सुरक्षा भी भगवान भरोसे बताई गई है। टड़ियावां क्षेत्र में जनकापुर–बहादुरपुर के बीच नहर की पुलिया की टूटी रेलिंग गंभीर खतरा बताई गई है। आदेशों के बावजूद मरम्मत न होना प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े करता है। यही कारण है कि संतों का आक्रोश, सवालों की बौछार हो रही है क्योंकि सूत्र बताते हैं कि व्यवस्थाओं की बदहाली से आहत विख्यात कथावाचक अनिल शास्त्री ने इस वर्ष स्वयं परिक्रमा न करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं की शिकायतें की गईं, आश्वासन मिले, पर जमीन पर बदलाव नहीं दिखा। संतों का कहना है कि जब सरकार परिक्रमा को अंतरराष्ट्रीय महत्व का बताती है, तो फिर श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है? हालांकि प्रशासन की कागजी चमक की चर्चा यह है कि प्रशासन मंदिरों में सीसीटीवी, दुकानों पर पाबंदी और सफाई ड्यूटी के दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सुविधाएं पिछले वर्षों से भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। श्रद्धालुओं का सवाल है—क्या आस्था के इस महापर्व में व्यवस्थाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेंगी? नंगे पांव चल रहे श्रद्धालुओं की पीड़ा की जिम्मेदारी कौन लेगा? 84 कोसी परिक्रमा का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व देश–विदेश में माना जाता है। पर हरदोई में मौजूदा हालात यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या शासन-प्रशासन आस्था के इस सैलाब के लिए वास्तव में तैयार है, या फिर श्रद्धालुओं की परीक्षा लेने को ही व्यवस्था मान लिया गया है?
- पाली, हरदोई। पाली-शाहाबाद मार्ग पर महिला सभासद की बहू से दिनदहाड़े झपटमारी की घटना हुई, जिसने पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। बाइक सवार दो अज्ञात झपटमारों ने महिला सभासद रामदेवी की बहू के कान से सोने के झाले नोच लिए और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार पाली कस्बे के मोहल्ला पटियानीम की सभासद रामदेवी का पुत्र रंजन अपनी पत्नी रोशनी को लेकर मंगलवार दोपहर हरदोई स्थित उसके मायके भतीजे के मुंडन समारोह में शामिल होने जा रहा था। इसी दौरान शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र में पाली-शाहाबाद मार्ग पर आगमपुर और मुरीदापुर के बीच पीछे से बाइक पर आए दो झपटमारों ने रोशनी के कान से सोने के झाले नोच लिए और तेज रफ्तार में फरार हो गए। घटना इतनी अचानक हुई कि पीड़ित दंपति संभल भी नहीं सके। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी। हालांकि दिनदहाड़े मुख्य मार्ग पर हुई इस वारदात ने पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस की नियमित गश्त होती, तो इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता था। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी की फुटेज की जांच की जा रही है, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी की प्रेस कांफ्रेंस1
- मेरी घर की Majhli भाभी जी | Ghar par Birthday party 🎉 #BhabhiJi #FamilyMoment #safetyfirstBhanjaBirthday #BirthdayCelebration #Parivar #FamilyLove #SpecialDay #HappyMoments #BhabhiJi #BadiBhabhi #FamilyMoment #BhanjaBirthday #BirthdayParty #GharParBirthday #BirthdayCelebration #Parivar #FamilyLove #HappyMoments #SpecialDay #IndianFamily #DesiFamily #FamilyTime #BirthdayVibes #BirthdayFun #GharKiKhushi #FamilyBond #LoveYouFamily #BirthdayMemories #HappyBirthday #BirthdayBoy #BhanjaLove #BhabhiLove #GharKaFunction #IndianCulture #DesiLife #FamilyFirst #ParivarikPal #EmotionalMoment #SmileMore #Blessings #GoodVibes #HappyLife #BirthdayStatus #BirthdayPost #ReelsIndia #ShortsIndia #ViralReels #TrendingReels #FamilyReels #BirthdayReels #IndianReels #DailyVlog #FamilyVlog #GharKaVideo #DesiVlog #YouTubeShorts #InstagramReels #FacebookReels #LoveStatus #EmotionalReel #CuteMoment #SweetFamily #PyarKaRishta #RishtonKaBandhan #BhaiBhabhi #BuaBhanja #MamuBhanja #ChachaBhatija #FamilyGoals #HappyFamily #IndianTradition #DesiCelebration #BirthdayMood #PartyAtHome #HomeParty #CakeCutting #BalloonDecor #BirthdayDecor #SimpleCelebration #RealLife #VillageLife #CityLife #MiddleClassFamily #IndianHome #FamilySupport #StrongBond #Respect #Sanskar #CultureVibes #TraditionLove #FestiveMood #SmileEveryday #PositiveVibes #GoodTimes #GoldenMoments #LifetimeMemory #PureLove #InnocentLove #CuteFamily #BlessedFamily #Thankful #Grateful #Joyful #Happiness #Peace #Unity #TogetherForever #FamilyPower #FamilyUnity #FamilyEmotion #FamilyFeeling #BhabhiStatus #BirthdayStatusHindi #FamilyStatusHindi #DesiStatus #IndianStatus #ViralVideo #TrendingVideo #SupportFamily #LoveAndCare #TrueRelation #SweetRelation #IndianRelation #RealEmotion #HeartTouching #LovelyMoment #MemorableDay #BirthdaySpecial #HomeCelebration #GharKiParty #DesiParty #FamilyFunction #IndianFunction #ParivarikFunction #BlessedDay #GodBlessYou #HappyTimes1
- हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद डंपर चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया।1
- एक घंटे में 60 मिनट इसलिए होते हैं क्योंकि यह प्राचीन बेबीलोन (Babylonian) सभ्यता की 4,000 साल गणना प्रणाली पर आधारित है। 60 एक ऐसी संख्या है जो आसानी से 1, 2, 3, 4, 5, 6, 10, 12, 15, 20 और 30 से विभाजित हो सकती है, जिससे समय को छोटे भागों में बांटना बेहद सुविधाजनक हो जाता है। [1, 2, 3, 4 • गणितीय सुविधा (Mathematical Ease (12 और 60 का महत्व) बताते हैं कि 10 या 100 की तुलना में 60 के अधिक विभाजक (divisors) होते हैं, जो गणनाओं को आसान बनाते हैं। • प्राचीन खगोल विज्ञान (Ancient Astronomy): बेबीलोनियन और सुमेरियन खगोलविदों ने 60-आधारित प्रणाली का उपयोग किया क्योंकि यह खगोलीय गणनाओं (जैसे 360-डिग्री का वृत्त) के साथ अच्छी तरह से मेल खाता था। • इतिहास और परंपरा: यूनानियों (Greeks) ने इसी पद्धति को आगे बढ़ाया, और समय के साथ यह पूरी दुनिया में समय मापने का मानक (Standard) बन गया। [1, 2, 3, 5, 6, 7] संक्षेप में: यह एक ऐतिहासिक और सुविधाजनक गणितीय परंपरा है, न कि 59 या 61 की कोई अन्य तार्किक आवश्यकता।1
- पाली के मुहल्ला पटियानीम निवासी रंजन श्रीवास्तव सभासद प्रतिनिधि है, उनकी ससुराल हरदोई में है। मंगलवार दोपहर वह अपनी पत्नी को लेकर मोटरसकिल से ससुराल जा रहे थे तभी पाली शाहाबाद मार्ग पर आगामपुर के आगे पीछे से आए बाइक सवार ने उसकी पत्नी के एक कान का कुंडल नोच लिया और शाहाबाद की ओर भाग गए। सूचना पर पहुंची पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।3
- Post by Rahul Kumar1
- new car1
- Post by Shiva Gautam1