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सुल्तानगंज क्षेत्र में छुरी मारकर लूट की सनसनीखेज घटना, पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। चंद्रेश यादव पर दो अज्ञात आरोपियों ने हमला कर बाइक, मोबाइल और नकदी लूटी, श्यामराज सिंह ने इसे मिशन बनाकर मुखबिर तंत्र और तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंच बनाई। मुख्य आरोपी दीपेश और एक नाबालिग गिरफ्तार हुए। उनके पास से लूटी गई बाइक, मोबाइल, छुरी और अवैध कट्टा बरामद हुआ। सुल्तानगंज पुलिस अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकालती है।
KKREPORTER
सुल्तानगंज क्षेत्र में छुरी मारकर लूट की सनसनीखेज घटना, पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। चंद्रेश यादव पर दो अज्ञात आरोपियों ने हमला कर बाइक, मोबाइल और नकदी लूटी, श्यामराज सिंह ने इसे मिशन बनाकर मुखबिर तंत्र और तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंच बनाई। मुख्य आरोपी दीपेश और एक नाबालिग गिरफ्तार हुए। उनके पास से लूटी गई बाइक, मोबाइल, छुरी और अवैध कट्टा बरामद हुआ। सुल्तानगंज पुलिस अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकालती है।
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- चंद्रेश यादव पर दो अज्ञात आरोपियों ने हमला कर बाइक, मोबाइल और नकदी लूटी, श्यामराज सिंह ने इसे मिशन बनाकर मुखबिर तंत्र और तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंच बनाई। मुख्य आरोपी दीपेश और एक नाबालिग गिरफ्तार हुए। उनके पास से लूटी गई बाइक, मोबाइल, छुरी और अवैध कट्टा बरामद हुआ। सुल्तानगंज पुलिस अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकालती है।1
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- रायसेन जिले से स्पेशल रिपोर्ट- अलग अलग शहरों से अलग अलग खबरें4
- सम्मिलित हुए। उन्होंने नागरिकों से संवाद कर उन्हें स्वगणना की प्रक्रिया में जानकारी देते हुए अंतिम तिथि के पहले मोबाईल द्वारा स्वगणना के लिए प्रेरित किया।2
- रायसेन/बरेली। जनगणना–2027 को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बरेली में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से सीधे संवाद कर स्वगणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया और सभी से निर्धारित अंतिम तिथि से पहले मोबाइल के माध्यम से स्वगणना पूर्ण करने की अपील की। कार्यक्रम में राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश की योजनाओं और विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने नागरिकों को बताया कि अब डिजिटल माध्यम से स्वगणना की सुविधा उपलब्ध है, जिससे लोग घर बैठे ही आसानी से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि अधिक से अधिक नागरिक स्वयं आगे आकर इस प्रक्रिया में भाग लें, ताकि सटीक और पारदर्शी डेटा तैयार हो सके। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव और वार्ड स्तर तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने जनगणना–2027 को सफल बनाने का संकल्प लिया।3
- दिल्ली एयरपोर्ट से मैंने आदरणीय एम. शरण जी को कॉल कर सूचित किया कि मैं भोपाल आ रहा हूँ और किसी आवश्यक कार्य के संबंध में आपसे मुलाकात करना चाहता हूँ। उन्होंने स्नेहपूर्वक आने के लिए कहा। भोपाल पहुँचकर माननीय डीजीपी साहब से आत्मीय मुलाकात हुई। इस दौरान भाभी जी से भी भेंट हुई, जिन्होंने अपने हाथों से बने स्वादिष्ट लड्डू व अन्य व्यंजन खिलाकर विशेष स्नेह दिया। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस मुलाकात में मेरे साथ छोटे भाई मंजिते भी उपस्थित रहे।1
- Post by मो। शादाब पत्रकार1
- रायसेन जिले के बेगमगंज में बुधवार की सुबह एक साधारण दिन, अचानक एक दर्दनाक हादसे में बदल गया। करीब सुबह 6 बजे, 48 वर्षीय सीमा जैन अपने घर की छत पर रोज़ की तरह गेहूं सुखाने गई थीं। यह काम उनके लिए नया नहीं था, लेकिन उस दिन हालात ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। जानकारी के मुताबिक, सीमा जैन गेहूं फैलाने के दौरान एक पॉलिथीन को धोकर उसका पानी झाड़ रही थीं। तभी अचानक हवा का एक झोंका आया और वह पॉलिथीन उड़कर मकान के सामने से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से जा चिपकी। यह एक छोटा सा पल था, लेकिन वही पल उनकी जिंदगी का आखिरी साबित हुआ। जैसे ही पॉलिथीन तार से टकराई, करंट ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि नीचे रह रहे किराएदार राजेश यादव तुरंत छत की ओर दौड़े। उन्होंने देखा कि सीमा जैन अचेत अवस्था में पड़ी हैं। घबराहट में उन्होंने तुरंत परिवार को सूचना दी। कुछ ही मिनटों में पूरा परिवार छत पर पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घर में चीख-पुकार मच गई और खुशहाल परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। इस दर्दनाक हादसे की खबर पूरे बेगमगंज में फैलते ही व्यापारियों में शोक की लहर दौड़ गई और सम्मान स्वरूप कई प्रतिष्ठान बंद कर दिए गए। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है। छतों के ऊपर से गुजरती हाईटेंशन लाइनें कितनी खतरनाक हो सकती हैं, इसका यह जीता-जागता उदाहरण है। एक छोटी सी लापरवाही या अनजाने में हुई गलती, एक पूरे परिवार की खुशियों को खत्म कर सकती है। केके का सवाल: आखिर कब तक खुले आसमान में लटकती ये हाईटेंशन लाइनें लोगों की जान लेती रहेंगी? जिम्मेदार कौन—लापरवाही या सिस्टम?1