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नीमच, 07 जुलाई 2026 को कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने अपने परिवार के साथ नीमच जिले के सुप्रसिद्ध श्री संकट मोचन हरकियाखाल बालाजी मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भगवान बालाजी के दर्शन किए और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेश और देश के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि, शांति और वैभवपूर्ण जीवन की मंगलकामना की।
मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
नीमच, 07 जुलाई 2026 को कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने अपने परिवार के साथ नीमच जिले के सुप्रसिद्ध श्री संकट मोचन हरकियाखाल बालाजी मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भगवान बालाजी के दर्शन किए और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेश और देश के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि, शांति और वैभवपूर्ण जीवन की मंगलकामना की।
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- नीमच, 07 जुलाई 2026 को कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने अपने परिवार के साथ नीमच जिले के सुप्रसिद्ध श्री संकट मोचन हरकियाखाल बालाजी मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भगवान बालाजी के दर्शन किए और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेश और देश के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि, शांति और वैभवपूर्ण जीवन की मंगलकामना की।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस ने एक बेहद सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया है, जिसमें एक महिला को अपने 45 वर्षीय पति सुरेंद्र शर्मा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पत्नी ने पति की बेरहमी से हत्या करने के बाद उनके शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफना दिया था। हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या के बाद महिला ने खुद ही पति के लापता होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई और लगभग 45 दिनों तक पुलिस के साथ मिलकर उन्हें खोजने का नाटक करती रही। यह खौफनाक वारदात आगरा के सिकंदरा स्थित प्राची टावर चौकी की रुनकता धाम कॉलोनी में हुई। पुलिस के अनुसार, 18 मई को रूबी नाम की महिला ने पुलिस थाने में पति सुरेंद्र के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। करीब 45 दिन बाद, जब परिजनों ने रूबी से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरी वारदात का खुलासा किया। रूबी ने बताया कि उसने अपने पति को खीर में नींद की गोलियां दी थीं, जिससे उनकी मौत हो गई। उस वक्त उसकी सास और बेटियां वायु विहार में जेठ के घर गई हुई थीं। शव पलंग पर था, जिसे बाद में वह घसीटते हुए बाथरूम में लाई। उसने 400 रुपये देकर मिट्टी मंगवाई, बाथरूम का फर्श तोड़ा, शव को लिटाया, उस पर नमक और मिट्टी डालकर समतल किया, और 19 जून को एक मिस्त्री बुलाकर फर्श पर प्लास्टर करवा दिया। फर्श सूखने के बाद वह खुद जेठ के घर चली गई और नाटक किया कि सुरेंद्र चार दिनों से घर नहीं आए हैं। पुलिस ने घर के बाथरूम, जो करीब दस फीट लंबा और साढ़े चार फीट चौड़ा है, के फर्श के नीचे से सुरेंद्र कुमार शर्मा का कंकाल बरामद किया है। हालांकि पुलिस खीर में नींद की गोलियां देकर हत्या करने की बात को सही मान रही है, लेकिन उन्हें इस बात पर संदेह है कि रूबी अकेले शव को कैसे ठिकाने लगा पाई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस जघन्य हत्याकांड में और कौन-कौन शामिल है। पुलिस ने जल्द से जल्द पूरे मामले का खुलासा करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।1
- प्रतापगढ़ में जिला कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है, जहाँ बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों को भी पेट्रोल दिया जा रहा है। हालाँकि प्रतापगढ़ शहर के पेट्रोल पंपों पर "बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं" के बोर्ड लगे हुए हैं, लेकिन कई जगहों पर इन आदेशों का पालन होता नहीं दिख रहा है। इसके साथ ही, कुछ उपभोक्ताओं ने पेट्रोल कम भरने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि जीरो पॉइंट से पेट्रोल भरवाने के बावजूद उन्हें असामान्य रूप से कम माइलेज मिल रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इन स्थितियों को देखते हुए, यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन के आदेशों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा और उपभोक्ताओं की इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कब की जाएगी।1
- राजस्थान के गंगानगर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 13 साल की एक बच्ची 'मानसिक नपुंसक मर्दों' यानी दरिंदों के हाथ लग गई। हंसने-खेलने की उम्र में, जब उसे किताबें-कलम मिलनी चाहिए थीं, उसे अस्पताल की दीवारें मिलीं। बच्ची को 4 दिन तक 4 होटलों में दरिंदों की हवस का शिकार बनाया गया, जिसके बाद वह 5 दिनों तक ICU में जिंदगी और मौत से जूझती रही। दुर्भाग्यवश, माँ की दुआएँ भी काम न आ सकीं और 'अभी तो कली थी, फूल भी ना बन पाई' वह 'नन्ही सी चिरैया' अपनी जिंदगी की जंग हार गई। उसकी अर्थी के साथ 'सवालों का जनाज़ा' भी जा रहा है। इस घटना से गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि सरकारों के पास ऐसे दरिंदों के लिए कोई 'इलाज' नहीं है और वर्तमान 'तंत्र' केवल अपनी प्रक्रिया कर रहा है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि 'विदेशी रद्दी' से बनी इस व्यवस्था की बजाय यदि 'वैदिक दंडविधान' या मनुस्मृति का पालन होता, तो ऐसे कृत्य का एक ही दंड होता: अधर्मी का सार्वजनिक वध, जिसे दूसरी भाषा में 'सर तन से जुदा' कहा गया है। यह घटना हमें इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर करती है कि क्या हम इंसान कहलाने के लायक भी रह गए हैं।1