निकोड़ी धाम ग्वालियर के पास बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह बने जरूरतमंदों के सहारे, दुखियों की सेवा को समर्पित है जीवन अमर दीप सेन, डीग। राजस्थान आस्था, सेवा और मानवता की भावना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। इसी भावना से जुड़ा नाम ग्वालियर के पास छोटे से गांव स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का भी लिया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच बाबा देवेंद्र सिंह को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। उनके अनुयायी उन्हें दुखी, परेशान और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने वाले संत के रूप में मानते हैं। बाबा देवेंद्र सिंह के दरबार में अपनी समस्याओं और परेशानियों को लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु अपनी बात रखते हैं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मन की शांति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के सान्निध्य में उन्हें हौसला, सकारात्मक सोच और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का भाव भी समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, जरूरतमंद की सहायता करना और निराश लोगों में उम्मीद जगाना ही सेवा का वास्तविक स्वरूप है। बाबा देवेंद्र सिंह के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था भी इसी विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है। आस्था के साथ सेवा और सद्भाव का संदेश ग्वालियर के पास स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का नाम श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक विश्वास के साथ जुड़ा हुआ है। उनके अनुयायी बाबा से आशीर्वाद लेने और अपनी परेशानियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों पर लोगों का ऐसा जुड़ाव उन्हें मानसिक संबल देने और समाज में आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बाबा कहां जो नंबर पर आएगा उसी को देखते हैं बीच में किसी के नहीं लेते नंबरएकदम फ्री सेवा होती है बाबा देवेंद्र सिंह के अनुयायियों के लिए निकोड़ी धाम
निकोड़ी धाम ग्वालियर के पास बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह बने जरूरतमंदों के सहारे, दुखियों की सेवा को समर्पित है जीवन अमर दीप सेन, डीग। राजस्थान आस्था, सेवा और मानवता की भावना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। इसी भावना से जुड़ा नाम ग्वालियर के पास छोटे से गांव स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का भी लिया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच बाबा देवेंद्र सिंह को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। उनके अनुयायी उन्हें दुखी, परेशान और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने वाले संत के रूप में मानते हैं। बाबा देवेंद्र सिंह के दरबार में अपनी समस्याओं और
परेशानियों को लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु अपनी बात रखते हैं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मन की शांति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के सान्निध्य में उन्हें हौसला, सकारात्मक सोच और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का भाव भी समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, जरूरतमंद की सहायता करना और निराश लोगों में उम्मीद जगाना ही सेवा का वास्तविक स्वरूप है। बाबा देवेंद्र सिंह के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था भी इसी विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है। आस्था के
साथ सेवा और सद्भाव का संदेश ग्वालियर के पास स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का नाम श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक विश्वास के साथ जुड़ा हुआ है। उनके अनुयायी बाबा से आशीर्वाद लेने और अपनी परेशानियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों पर लोगों का ऐसा जुड़ाव उन्हें मानसिक संबल देने और समाज में आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बाबा कहां जो नंबर पर आएगा उसी को देखते हैं बीच में किसी के नहीं लेते नंबरएकदम फ्री सेवा होती है बाबा देवेंद्र सिंह के अनुयायियों के लिए निकोड़ी धाम
- निकोड़ी धाम ग्वालियर के पास बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह बने जरूरतमंदों के सहारे, दुखियों की सेवा को समर्पित है जीवन अमर दीप सेन, डीग। राजस्थान आस्था, सेवा और मानवता की भावना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। इसी भावना से जुड़ा नाम ग्वालियर के पास छोटे से गांव स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का भी लिया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच बाबा देवेंद्र सिंह को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। उनके अनुयायी उन्हें दुखी, परेशान और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने वाले संत के रूप में मानते हैं। बाबा देवेंद्र सिंह के दरबार में अपनी समस्याओं और परेशानियों को लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालु अपनी बात रखते हैं तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मन की शांति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा के सान्निध्य में उन्हें हौसला, सकारात्मक सोच और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानव सेवा का भाव भी समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, जरूरतमंद की सहायता करना और निराश लोगों में उम्मीद जगाना ही सेवा का वास्तविक स्वरूप है। बाबा देवेंद्र सिंह के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था भी इसी विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है। आस्था के साथ सेवा और सद्भाव का संदेश ग्वालियर के पास स्थित निकोड़ी धाम के बंगाली बाबा देवेंद्र सिंह का नाम श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक विश्वास के साथ जुड़ा हुआ है। उनके अनुयायी बाबा से आशीर्वाद लेने और अपनी परेशानियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने पहुंचते हैं। धार्मिक स्थलों पर लोगों का ऐसा जुड़ाव उन्हें मानसिक संबल देने और समाज में आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।बाबा कहां जो नंबर पर आएगा उसी को देखते हैं बीच में किसी के नहीं लेते नंबरएकदम फ्री सेवा होती है बाबा देवेंद्र सिंह के अनुयायियों के लिए निकोड़ी धाम3
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- डीग में श्री कृष्ण जन्मोत्सव एवं बधाई लीला का हुआ भव्य मंचन डीग। श्री बृज लठावन धाम स्थानीय रामलीला महोत्सव समिति, डीग के तत्वावधान में आयोजित श्री कृष्ण लीला एवं भक्त चरित्रामृत लीला महोत्सव के दूसरे दिन पदम श्री विभूषित स्वामी श्री रामस्वरूप शर्मा जी के सुपुत्र स्वामी श्री हरिबल्लभ जी शर्मा छोटे ठाकुर श्री श्यामा श्याम लीला संस्थान श्रीधाम वृंदावन द्वारा मुख्य बाजार स्थित लक्ष्मण मंदिर चौक पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव बधाई,पूतना वध ,श्याम सगाई लीला का मंचन किया गया।लीला के दौरान दौरान महाराज कंस के अत्याचारों का भावपूर्ण चित्रण किया गया। लीला में दिखाया गया कि कंस अपने पिता को कारागार में बंद कर सत्ता पर अधिकार कर लेता है। इसके बाद वह अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव को भी जेल में बंद कर देता है। आकाशवाणी में देवकी के आठवें पुत्र के हाथों अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी सुनने के बाद कंस भयभीत हो जाता है और देवकी के आठवें पुत्र के जन्म की प्रतीक्षा करने लगता है। लीला के इस प्रसंग ने दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा से रूबरू कराया। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की मनमोहक लीला का मंचन किया गया। लीला के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी और ब्रज में उत्सव के उल्लास को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ लीला का आनंद लिया। कार्यक्रम में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और भक्त चरित्रों के माध्यम से धर्म, संस्कृति एवं भक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है।श्रद्धालुओं ने श्री कृष्ण लीला के मंचन को भक्ति, आस्था और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में धर्म और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं जीवन में प्रेम, सद्भाव, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।इस अवसर पर बाबा शिवराम दास जी महाराज,समिति के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण मंदिर के मंहत पंडित मुरारी लाल पाराशर,प्रकाश पाराशर,गौरी शंकर पाराशर ,नागेन्द्र इन्दोलिया,सभासद गौरव सोनी,सभासद प्रतिनिधि राहुल बजाज, क्षेत्र पाल सिंह फौजदार,अमित जैन ,खेमचंद कोली,जगदीश टकसालिया,रघुवीर गुर्जर,दाऊ दयाल नसवारिया,सतीश तमोलिया विशाल गोयल मामा,इन्द्रमोहन शर्मा,बबली शर्मा,पंकज सौखिया,खगेन्द्र खग्गू,लोकी शर्मा,पंकज पाराशर, मंच निर्देश एडवोकेट सुरेश शर्माकाव्य पाराशर,मोहित पाराशर,रवि बौहरे,मनोज बीडी वाले, कवि मनोज पाराशर मनु ,सुनिल पाराशर मौजूद थे।4