फर्रुखाबाद के अमृतपुर में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अजय कुमार कटियार के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह आंदोलन लिंक एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीन की जबरन नाप और अधिग्रहण के विरोध में किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “बाबा टिकैत अमर रहे”, “चौधरी राकेश टिकैत जिंदाबाद”, “जबरदस्ती जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा” और “एसडीएम अमृतपुर मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए, साथ ही एसडीएम अमृतपुर कार्यालय का घेराव भी किया और आंदोलन को अनिश्चितकालीन घोषित किया। बताया गया कि जिलाध्यक्ष अजय कुमार कटियार ने पहले ही घोषणा की थी कि किसानों की जमीन को बिना सहमति और उचित प्रक्रिया के लिंक एक्सप्रेसवे के लिए नापे जाने के विरोध में एसडीएम अमृतपुर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इसी क्रम में शुक्रवार दोपहर जिला, तहसील, ब्लॉक, न्याय पंचायत और ग्राम स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान अमृतपुर तहसील पहुंचे। धरने और घेराव की पूर्व सूचना के मद्देनजर प्रशासन अलर्ट था और तहसील परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था, जहाँ थाना अमृतपुर, राजेपुर और शमशाबाद पुलिस के साथ भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। धरने को संबोधित करते हुए अजय कुमार कटियार ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस कानून के तहत किसानों की जमीन बिना नोटिस दिए ली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नोटिस की अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह शून्य है और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार प्रकाशन के बाद किसानों को नोटिस दिया जाना अनिवार्य है, जिसमें स्पष्ट जानकारी हो कि किस किसान की कितनी जमीन ली जाएगी और उसका कितना मुआवजा निर्धारित होगा। कटियार ने जिलाधिकारी से मौके पर पहुंचकर किसानों के सामने 2013 भूमि अधिग्रहण कानून की प्रति प्रस्तुत करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि जमीन अधिग्रहण सहमति के आधार पर होगा या तानाशाही और दबाव के जरिए। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक सरकार और प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समाचार लिखे जाने तक किसान यूनियन का धरना प्रदर्शन जारी था तथा किसान नेता लगातार नारेबाजी कर रहे थे। मौके पर संगठन के कई पदाधिकारी एवं किसान नेता मौजूद रहे।
फर्रुखाबाद के अमृतपुर में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अजय कुमार कटियार के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह आंदोलन लिंक एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीन की जबरन नाप और अधिग्रहण के विरोध में किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “बाबा टिकैत अमर रहे”, “चौधरी राकेश टिकैत जिंदाबाद”, “जबरदस्ती जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा” और “एसडीएम अमृतपुर मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए, साथ ही एसडीएम अमृतपुर कार्यालय का घेराव भी किया और आंदोलन को अनिश्चितकालीन
घोषित किया। बताया गया कि जिलाध्यक्ष अजय कुमार कटियार ने पहले ही घोषणा की थी कि किसानों की जमीन को बिना सहमति और उचित प्रक्रिया के लिंक एक्सप्रेसवे के लिए नापे जाने के विरोध में एसडीएम अमृतपुर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इसी क्रम में शुक्रवार दोपहर जिला, तहसील, ब्लॉक, न्याय पंचायत और ग्राम स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान अमृतपुर तहसील पहुंचे। धरने और घेराव की पूर्व सूचना के मद्देनजर प्रशासन अलर्ट था और तहसील परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था, जहाँ थाना अमृतपुर, राजेपुर और
शमशाबाद पुलिस के साथ भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। धरने को संबोधित करते हुए अजय कुमार कटियार ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस कानून के तहत किसानों की जमीन बिना नोटिस दिए ली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नोटिस की अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह शून्य है और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार प्रकाशन के बाद किसानों को नोटिस दिया जाना अनिवार्य है, जिसमें स्पष्ट जानकारी हो कि किस किसान की कितनी जमीन ली जाएगी और उसका कितना मुआवजा निर्धारित होगा।
कटियार ने जिलाधिकारी से मौके पर पहुंचकर किसानों के सामने 2013 भूमि अधिग्रहण कानून की प्रति प्रस्तुत करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि जमीन अधिग्रहण सहमति के आधार पर होगा या तानाशाही और दबाव के जरिए। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक सरकार और प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समाचार लिखे जाने तक किसान यूनियन का धरना प्रदर्शन जारी था तथा किसान नेता लगातार नारेबाजी कर रहे थे। मौके पर संगठन के कई पदाधिकारी एवं किसान नेता मौजूद रहे।
- फर्रुखाबाद के अमृतपुर में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अजय कुमार कटियार के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह आंदोलन लिंक एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीन की जबरन नाप और अधिग्रहण के विरोध में किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “बाबा टिकैत अमर रहे”, “चौधरी राकेश टिकैत जिंदाबाद”, “जबरदस्ती जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा” और “एसडीएम अमृतपुर मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए, साथ ही एसडीएम अमृतपुर कार्यालय का घेराव भी किया और आंदोलन को अनिश्चितकालीन घोषित किया। बताया गया कि जिलाध्यक्ष अजय कुमार कटियार ने पहले ही घोषणा की थी कि किसानों की जमीन को बिना सहमति और उचित प्रक्रिया के लिंक एक्सप्रेसवे के लिए नापे जाने के विरोध में एसडीएम अमृतपुर कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इसी क्रम में शुक्रवार दोपहर जिला, तहसील, ब्लॉक, न्याय पंचायत और ग्राम स्तर के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान अमृतपुर तहसील पहुंचे। धरने और घेराव की पूर्व सूचना के मद्देनजर प्रशासन अलर्ट था और तहसील परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था, जहाँ थाना अमृतपुर, राजेपुर और शमशाबाद पुलिस के साथ भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। धरने को संबोधित करते हुए अजय कुमार कटियार ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस कानून के तहत किसानों की जमीन बिना नोटिस दिए ली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नोटिस की अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह शून्य है और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार प्रकाशन के बाद किसानों को नोटिस दिया जाना अनिवार्य है, जिसमें स्पष्ट जानकारी हो कि किस किसान की कितनी जमीन ली जाएगी और उसका कितना मुआवजा निर्धारित होगा। कटियार ने जिलाधिकारी से मौके पर पहुंचकर किसानों के सामने 2013 भूमि अधिग्रहण कानून की प्रति प्रस्तुत करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि जमीन अधिग्रहण सहमति के आधार पर होगा या तानाशाही और दबाव के जरिए। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक सरकार और प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समाचार लिखे जाने तक किसान यूनियन का धरना प्रदर्शन जारी था तथा किसान नेता लगातार नारेबाजी कर रहे थे। मौके पर संगठन के कई पदाधिकारी एवं किसान नेता मौजूद रहे।4
- फ़र्रुखाबाद में, अग्निवीरों ने अपनी पासिंग आउट परेड पूरी होने के बाद एक विशेष प्रदर्शन प्रस्तुत किया।1
- एक सार्वजनिक नल पिछले पांच साल से खराब पड़ा है, जिससे उसकी उपयोगिता समाप्त हो गई है।1
- जनपद बाराबंकी के थाना फतेहपुर अंतर्गत ग्राम संदूपुरका में पथरी के इलाज के दौरान जगदीश पुत्र रामपाल की मृत्यु हो गई। बताया गया है कि जगदीश प्रसाद पथरी का ऑपरेशन कराने साईं हॉस्पिटल फतेहपुर गए थे, जहाँ 2 से 3 दिन चले इलाज के दौरान अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों द्वारा सही से इलाज नहीं किया गया, जिसके कारण जगदीश की मृत्यु हुई। उनका यह भी कहना है कि पथरी का इलाज करने वाले डॉक्टर ने गलत ऑपरेशन कर दिया। परिजनों ने यह भी बताया कि इस अस्पताल में पहले भी कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इस घटना से परिजनों में काफी आक्रोश है और वे दोषी डॉक्टर पर कार्यवाही करने तथा अस्पताल को सीज करने की मांग कर रहे हैं। प्रार्थी ने इस संबंध में नजदीकी थाना फतेहपुर में तहरीर दी है, जिसके बाद पुलिस ने पंचनामा कर शव को पीएम हाउस के लिए भेज दिया है। परिजनों ने अस्पताल की जांच कर दोषियों को सजा दिलाने और मृतक के परिवार को सहायता प्रदान करने की भी मांग की है। यह रिपोर्ट जनपद बाराबंकी से ब्यूरो रामजी दीक्षित द्वारा दी गई है।1
- हरदोई जिले के हरपालपुर ब्लॉक के अर्जुनपुर गांव में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान के परिवार द्वारा बरसों से संचालित सरकारी राशन की दुकान पर खुलेआम घटतौली की जा रही है और शासन के निर्देशों का कोई असर नहीं दिख रहा है। कार्डधारकों के अनुसार, दुकान संचालक पहले सरकारी इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर पोटली से वजन कर पर्ची निकालते हैं, लेकिन राशन देते समय अपने निजी कांटे पर दोबारा तौल करते हैं और प्रति यूनिट 500 ग्राम से 1 किलो तक राशन कम देते हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि राशन वितरण केवल सरकारी ई-पॉस मशीन और इलेक्ट्रॉनिक कांटे से ही होगा तथा घटतौली रोकने के लिए सीसीटीवी अनिवार्य है, इसके बावजूद अर्जुनपुर की दुकान पर इन नियमों की अनदेखी का आरोप है। ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह सरकारी राशन की दुकान प्रधान के परिवार के पास ही है, और क्षेत्र में दबंगई का माहौल बना रखा है। इसी डर के कारण कोई शिकायत करने को तैयार नहीं होता, क्योंकि जिसने आवाज उठाई, उसकी खैर नहीं मानी जाती। एक बुजुर्ग कार्डधारक ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि राशन कम मिलता है, पर दुकान प्रधान के घर की होने के कारण शिकायत करने पर गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा। पूर्ति निरीक्षक हरपालपुर ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि शिकायत मिली है और टीम भेजकर दुकान की गोपनीय जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि घटतौली, धमकी या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर दुकान संचालक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम में एफआईआर (FIR) और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी, साथ ही प्रधान की भूमिका की भी जांच होगी। ग्रामीणों ने जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) से मांग की है कि दुकान पर सतर्कता समिति और पुलिस की मौजूदगी में राशन वितरण कराया जाए, और शिकायतकर्ताओं की पहचान गुप्त रखकर उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। खबर लिखे जाने तक दुकान संचालक और ग्राम प्रधान से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।2
- हरदोई के हरपालपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इस समय गंभीर आरोपों और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। क्षेत्रीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल डॉक्टरों के बजाय वार्ड बॉय और बाहरी कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है, जिससे मरीजों की जान लगातार जोखिम में है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टरों की तैनाती और उपस्थिति के बावजूद मरीजों के उपचार, सलाह और रेफर करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय वार्ड बॉय स्तर के कर्मचारी लेते हैं। आरोप है कि शुभम पांडे और भोला शर्मा नाम के कर्मचारियों का अस्पताल में खासा प्रभाव है और वही मरीजों की स्थिति तय करने के साथ-साथ यह भी निर्णय लेते हैं कि किसे कहां रेफर किया जाना है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह CHC अब एक "रेफर सेंटर" बन गया है, जहाँ मामूली बीमारियों और सामान्य प्रसव के मामलों में भी मरीजों को जिला या निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। इससे गरीब ग्रामीण परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर हसमुद्दीन की मौजूदगी में भी रेफर का यह सिलसिला जारी है। कई आशा बहुओं पर भी निजी अस्पतालों की ओर मरीजों को भेजने के लिए दबाव बनाने और कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे गरीब महिलाएं सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो रही हैं। क्षेत्रीय जनता इस बात पर सवाल उठा रही है कि जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव और उपचार की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो फिर मरीजों को निजी अस्पतालों में क्यों धकेला जा रहा है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्रीय नागरिकों ने जिलाधिकारी हरदोई और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से हरपालपुर CHC की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराने और अस्पताल में चल रही कथित मनमानी व "रेफर के खेल" पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।4
- कुल 1497 अग्निवीरों ने अपनी कड़ी सैन्य ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस कठिन सैन्य प्रशिक्षण के उपरांत, अब इन अग्निवीरों ने आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना में कदम रखा है।1
- इस पोस्ट में फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ से संबंधित 'खबर' का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसमें किसी विशिष्ट घटना या विस्तृत जानकारी का विवरण नहीं दिया गया है।1