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दुनिया में एक ऐसी मछली मौजूद है जो अपने बच्चों का पालन-पोषण दूध पिलाकर करती है।
Satish mishra
दुनिया में एक ऐसी मछली मौजूद है जो अपने बच्चों का पालन-पोषण दूध पिलाकर करती है।
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- यमुनानगर जिले के कलानौर नाके पर आरटीओ (RTO) द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई है, जिसमें भूसे से भरे हुए ओवरलोड वाहनों के बड़ी संख्या में चालान काटे गए। इस दौरान कलानौर नाके पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए पूरी तरह से हाई सिक्योरिटी तैनात की गई। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप, अब बड़े वाहनों के कलानौर नाके को पार करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।1
- यह सवाल उठाया गया है कि क्या पुलिस कर्मचारियों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट न पहनने की कोई छूट प्राप्त है। उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया गया है कि वे इस संबंध में अपनी राय और जानकारी टिप्पणी अनुभाग में साझा करें।1
- नर्सिंग कॉलेज की मान्यता समाप्त होने की स्थिति में छात्रों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे उनके भविष्य पर गहरा संकट छा गया है। ऐसे में छात्रों के लिए कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं। इस स्थिति में नए प्रवेश बंद किए जा सकते हैं, जिससे आगामी बैच प्रभावित होगा। साथ ही, मौजूदा छात्रों की परीक्षाएं और उनके परिणाम भी प्रभावित या रोके जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, छात्रों को अपनी डिग्री प्राप्त करने और पंजीकरण कराने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। मान्यता रद्द होने पर छात्र मान्यता प्राप्त अन्य कॉलेजों में अपने स्थानांतरण की मांग उठा सकते हैं। छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कोर्ट या नर्सिंग काउंसिल विशेष निर्देश जारी कर सकती है। मध्य प्रदेश (MP) नर्सिंग मामले में अंतिम स्थिति हाईकोर्ट जबलपुर तथा MPNRC/INC की रिपोर्ट और आदेशों पर निर्भर करेगी। इसलिए, सभी संबंधित छात्रों को आधिकारिक नोटिस और अपडेट पर लगातार नज़र बनाए रखने की सलाह दी गई है।1
- लक्सर में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आसमान में घनी काली घटा छा जाने के बाद, इलाके में जमकर बारिश हुई। इस बारिश के चलते लोगों को गर्मी और लू की मार से काफी राहत मिली।1
- अभिनेता शेखर सुमन ने NEET परीक्षा के विषय पर अपनी बात रखी है। इस संबंध में यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि आखिर जनता को इस स्थिति का खामियाजा कब तक भुगतना पड़ेगा।1
- गतवर्ष मनसा देवी सीढ़ी मार्ग पर हुई दुर्घटना में 9 लोगों की जान चली गई थी। उस समय प्रथमदृष्टया माना गया था कि किसी खंबे से बिजली का तार टूटने के बाद मची भगदड़ में लोग हादसे का शिकार हुए थे। इस घटना के बाद व्यवस्थाओं में सुधार के दावे तो किए गए, लेकिन अब भी हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर बिजली के खंभे ही टूटकर गिरने को तैयार खड़े हैं, जो बिजली के बल्ब और तारों का बोझ भी नहीं संभाल पा रहे हैं। हालाँकि सीढ़ी मार्ग प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बंद करा रखा है, लेकिन आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ने पर इस मार्ग को खोलने की ज़रूरत कभी भी पड़ सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ खंभों को तो विभाग ने नीचे से ईंट और लकड़ी का सहारा देकर अस्थायी 'जुगाड़' से टिका रखा है। लगभग एक माह पूर्व भी यहाँ एक बिजली का पोल गिर गया था, जिसे बाद में फिर जुगाड़ से खड़ा कर दिया गया था। अब कांवड़ मेला नजदीक है और ऐसे में इस मार्ग पर बिजली के ये झूलते खंभे फिर किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बनने के लिए तैयार खड़े हैं, जो बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।1