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पटना-गया पैसेंजर ट्रेन में उस समय हड़कंप मच गया जब एक सीट पर कपड़े में लिपटी लगभग 15 दिन की एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। बच्ची लगातार रो रही थी, जिसकी आवाज सुनकर यात्रियों ने तुरंत उसकी देखभाल की और रेलवे तथा प्रशासन को घटना की जानकारी दी, जिससे मानवता की मिसाल पेश हुई। ट्रेन के पुनपुन स्टेशन पहुंचने पर बच्ची को पुलिस के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पुनपुन थाना पुलिस और तारेगना जीआरपी की मदद से नवजात को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजा गया। डॉक्टरों की जांच में बच्ची पूरी तरह स्वस्थ पाई गई है और फिलहाल उसे एक सुरक्षित संरक्षण गृह में रखा गया है। यह हृदय विदारक घटना मानवता और समाज दोनों को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कौन ऐसे माता-पिता होंगे जिन्होंने अपनी 15 दिन की इस मासूम बच्ची को ट्रेन में अकेला छोड़ दिया।
Niraj kumar
पटना-गया पैसेंजर ट्रेन में उस समय हड़कंप मच गया जब एक सीट पर कपड़े में लिपटी लगभग 15 दिन की एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। बच्ची लगातार रो रही थी, जिसकी आवाज सुनकर यात्रियों ने तुरंत उसकी देखभाल की और रेलवे तथा प्रशासन को घटना की जानकारी दी, जिससे मानवता की मिसाल पेश हुई। ट्रेन के पुनपुन स्टेशन पहुंचने पर बच्ची को पुलिस के हवाले कर दिया गया। इसके बाद पुनपुन थाना पुलिस और तारेगना जीआरपी की मदद से नवजात को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजा गया। डॉक्टरों की जांच में बच्ची पूरी तरह स्वस्थ पाई गई है और फिलहाल उसे एक सुरक्षित संरक्षण गृह में रखा गया है। यह हृदय विदारक घटना मानवता और समाज दोनों को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कौन ऐसे माता-पिता होंगे जिन्होंने अपनी 15 दिन की इस मासूम बच्ची को ट्रेन में अकेला छोड़ दिया।
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