फतुहा में जमीन रजिस्ट्री पर लगी रोक को लेकर किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। रविवार को फतुहा प्रखंड के रसलपुर गांव स्थित सुरक्षा बांध के पास राजद किसान प्रकोष्ठ ने एक बड़ी किसान सभा का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। सभा में सरकार के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की गई। इस सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष धर्मवीर गोप ने की, जहाँ प्रदेश किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष गोपाल कृष्ण चंदन, नगर अध्यक्ष दयानंद यादव, वरिष्ठ नेता श्यामनंद यादव, गौतम यादव, संजय यादव समेत कई नेताओं ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। सभा में मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि गांवों में जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवारों की सबसे बड़ी पूंजी और संकट के समय का सहारा होती है। उन्होंने बताया कि बेटी की शादी तय होने पर, किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए, बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्च हेतु या किसी आपात स्थिति में पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेचकर व्यवस्था करते हैं। लेकिन, रजिस्ट्री पर लगी इस रोक ने ऐसे हजारों परिवारों को गहरे असमंजस और परेशानी में डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ा है, जिनके पास आय का कोई अन्य बड़ा साधन नहीं है और जमीन ही उनकी आखिरी उम्मीद है। अब वे न तो अपनी जमीन बेच पा रहे हैं और न ही जरूरत के समय धन का प्रबंध कर पा रहे हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में असंतोष बढ़ रहा है और लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। वक्ताओं ने यह भी बताया कि यह मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है और किसानों को जल्द ही किसी सकारात्मक समाधान की उम्मीद है। राजद नेताओं ने किसानों और ग्रामीणों की आवाज को हर स्तर पर उठाने का संकल्प व्यक्त किया और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में सरकार से अपील की कि आम जनता की परेशानियों को देखते हुए जमीन रजिस्ट्री पर लगी रोक को जल्द हटाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा, क्योंकि यह मुद्दा हजारों परिवारों के भविष्य और जीवन-यापन से जुड़ा एक बड़ा जनसरोकार बन चुका है। ग्रामीणों ने सरकार से कानून-व्यवस्था के साथ-साथ उन परिवारों की मजबूरियों को समझने का आग्रह किया जिनकी उम्मीदें अपनी ही जमीन पर आकर ठहर गई हैं।
फतुहा में जमीन रजिस्ट्री पर लगी रोक को लेकर किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। रविवार को फतुहा प्रखंड के रसलपुर गांव स्थित सुरक्षा बांध के पास राजद किसान प्रकोष्ठ ने एक बड़ी किसान सभा का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। सभा में सरकार के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की गई। इस सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष धर्मवीर गोप ने की, जहाँ प्रदेश किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष गोपाल कृष्ण चंदन, नगर अध्यक्ष दयानंद यादव, वरिष्ठ नेता श्यामनंद यादव, गौतम यादव, संजय यादव समेत कई नेताओं ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। सभा में मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि गांवों में जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवारों की सबसे बड़ी पूंजी और संकट के समय का सहारा होती है। उन्होंने बताया कि बेटी की शादी तय होने पर, किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए, बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्च हेतु या किसी आपात स्थिति में पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेचकर व्यवस्था करते हैं। लेकिन, रजिस्ट्री पर लगी इस रोक ने ऐसे हजारों परिवारों को गहरे असमंजस और परेशानी में डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ा है, जिनके पास आय का कोई अन्य बड़ा साधन नहीं है और जमीन ही उनकी आखिरी उम्मीद है। अब वे न तो अपनी जमीन बेच पा रहे हैं और न ही जरूरत के समय धन का प्रबंध कर पा रहे हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को लेकर पूरे प्रदेश में असंतोष बढ़ रहा है और लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। वक्ताओं ने यह भी बताया कि यह मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है और किसानों को जल्द ही किसी सकारात्मक समाधान की उम्मीद है। राजद नेताओं ने किसानों और ग्रामीणों की आवाज को हर स्तर पर उठाने का संकल्प व्यक्त किया और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में सरकार से अपील की कि आम जनता की परेशानियों को देखते हुए जमीन रजिस्ट्री पर लगी रोक को जल्द हटाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा, क्योंकि यह मुद्दा हजारों परिवारों के भविष्य और जीवन-यापन से जुड़ा एक बड़ा जनसरोकार बन चुका है। ग्रामीणों ने सरकार से कानून-व्यवस्था के साथ-साथ उन परिवारों की मजबूरियों को समझने का आग्रह किया जिनकी उम्मीदें अपनी ही जमीन पर आकर ठहर गई हैं।
- राजधानी पटना के सगुना मोड़ पर स्थित "नन्हे कदम ऑटिज्म सेंटर" के निदेशक चंदन कुमार ने कुछ जानकारी दी है। केंद्र के निदेशक के रूप में चंदन कुमार ने अपने विचार साझा किए हैं।1
- यह एक छात्र की सफलता की कहानी है, जिसने शीर्ष रैंक हासिल कर अपनी पहचान बनाई है। यह कहानी एक 'टॉप रैंकर' के परिश्रम और विजय को दर्शाती है।1
- बाढ़ अनुमंडल के मोकामा थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब औंटा हॉल्ट के समीप एनएच 31 के किनारे एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर मोकामा थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। शव मिलने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुट गई। पुलिस आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों से पूछताछ कर मृतक की पहचान करने का प्रयास कर रही है। प्रारंभिक जाँच में मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, जिसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। एसडीपीओ 1 बाढ़ रामकृष्णा ने बताया कि पुलिस इस अज्ञात शव की पहचान कराने में जुटी हुई है। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जाँच में जुटी हुई है और मृतक की पहचान होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- बिहार के पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम पत्रकारों के सामने ही फूट-फूट कर रोते हुए देखे गए। दरअसल, उन्हें यह उम्मीद थी कि तेजस्वी यादव उन्हें विधान परिषद (MLC) का उम्मीदवार बनाएंगे, लेकिन यह टिकट सुनील सिंह को दे दिया गया। इसी बात से आहत होकर शिवचंद्र राम का धैर्य जवाब दे गया और वे इस कदर भावुक हो गए कि सबके सामने ही उनके आंसू छलक उठे। अब देखना यह है कि इस घटना पर तेजस्वी यादव क्या कदम उठाते हैं।1
- पटना जिले के फतुहा स्थित वरना गांव में 26 वर्षीय श्रीकांत कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक श्रीकांत, रामप्रवेश यादव और प्रेमी देवी के पुत्र थे, जिनकी शादी करीब चार वर्ष पहले रिंकी देवी से हुई थी। इस दंपति की तीन महीने की एक मासूम बच्ची भी है। इस अचानक हुई घटना से परिवार में मातम का माहौल है और पूरे क्षेत्र में बच्ची के सिर से पिता का साया उठ जाने की चर्चा हो रही है। इस मामले में मृतक की सास सविता देवी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि श्रीकांत की हत्या उसके ही परिवार के लोगों ने की है। सविता देवी के अनुसार, श्रीकांत के माता-पिता, भाई विकास कुमार, बहन गुड्डी देवी और बहनोई सन्नी कुमार ने मिलकर पहले श्रीकांत की हत्या की और फिर शव को फांसी के फंदे से लटका दिया, ताकि इसे आत्महत्या का मामला दिखाया जा सके। इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, वहीं तीन महीने की मासूम बच्ची की स्थिति को लेकर लोगों में गहरी संवेदना देखी जा रही है। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और उनका कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही हो पाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह आत्महत्या का मामला है या हत्या का।1
- ज्ञान भवन पटना से 'डेंट श्लोक 2026' से संबंधित एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। यह रिपोर्ट सीधे घटनास्थल से तैयार की गई है।1
- पटना जिले के फतुहा स्थित रसलपुर गाँव में रविवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) किसान प्रकोष्ठ की बैठक आयोजित की गई। किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष धर्मवीर यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों में वृद्धि और किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न सेटेलाइट टाउन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में राजद किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल कृष्ण चंदन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने राजद नेता एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के संदेशों को कार्यकर्ताओं तक पहुँचाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसान, मजदूर और आम जनता मौजूदा समय में कई समस्याओं से जूझ रही है, जहाँ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना आवश्यक बताया गया। इस कार्यक्रम में जिला और प्रखंड स्तर के राजद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। नेताओं ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन चलाने और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को सफल बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में, किसानों के हित में संघर्ष को और तेज करने तथा संगठन विस्तार पर विशेष बल दिया गया।4
- दानापुर थाना क्षेत्र के ताराचक में हुए नितिन हत्याकांड का पुलिस ने 12 घंटे के भीतर उद्भेदन कर दिया है। इस घटना के संबंध में कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान घटना में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिए हैं।1