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दरभंगा: ₹1200 के टेस्ट से पाएं पूरी पढ़ाई फ्री का मौका, 24 अप्रैल आखिरी तारीख, 25–27 अप्रैल को परीक्षा; अब पैसों की नहीं होगी बाधा दरभंगा: ₹1200 के टेस्ट से पाएं पूरी पढ़ाई फ्री का मौका, 24 अप्रैल आखिरी तारीख, 25–27 अप्रैल को परीक्षा; अब पैसों की नहीं होगी बाधा
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दरभंगा: ₹1200 के टेस्ट से पाएं पूरी पढ़ाई फ्री का मौका, 24 अप्रैल आखिरी तारीख, 25–27 अप्रैल को परीक्षा; अब पैसों की नहीं होगी बाधा दरभंगा: ₹1200 के टेस्ट से पाएं पूरी पढ़ाई फ्री का मौका, 24 अप्रैल आखिरी तारीख, 25–27 अप्रैल को परीक्षा; अब पैसों की नहीं होगी बाधा
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- रसोई गैस की किल्लत, कीमतों में वृद्धि और कालाबाजारी के खिलाफ गुरुवार को सीपीआई(एम) के बैनर तले दरभंगा में जन आक्रोश मार्च निकाला गया। इस मार्च में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। मार्च पोलो मैदान से शुरू होकर आयुक्त कार्यालय, दरभंगा समाहरणालय, लहेरियासराय टावर और लोहिया चौक होते हुए पुनः पोलो मैदान पहुंचा, जहां धरना स्थल पर सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता पार्टी के जिला सचिव मंडल सदस्य दिनेश झा ने की। सभा को संबोधित करते हुए राज्य सचिव मंडल सदस्य श्याम भारती ने कहा कि जिले में रसोई गैस की गंभीर समस्या बनी हुई है। लोग कई-कई दिनों तक लाइन में लगने के बावजूद गैस नहीं पा रहे हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि एक ओर कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी भी जारी है। उन्होंने प्रशासन के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें गैस की कोई कमी नहीं होने की बात कही जा रही है। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैस की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए और कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगे। देकुली निवासी 25 वर्षीय कुमर जी सहनी की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि गैस लेने के लिए बार-बार चक्कर लगाने की मजबूरी के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित गैस एजेंसी की लापरवाही के कारण यह घटना हुई और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। सभा में प्रस्ताव पारित कर 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ” अभियान के तहत गांव-गांव में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही गैस किल्लत और फसल क्षति अनुदान की मांग को लेकर 20 अप्रैल को सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई। सभा को गोपाल ठाकुर, नीरज कुमार, वीरेंद्र पासवान, मुकेश पोद्दार, तबस्सुम, आरती देवी, घनश्याम पासवान और गंगा पासवान ने भी संबोधित किया।1
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- आज दिनांक 9 मार्च 2026 गुरुवार को प्रखंड कार्यालय रहिका में बाल संरक्षण समिति की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन मिथिला कला विकास समिति द्वारा किया गया। इस बैठक में रहिका प्रखंड विकास पदाधिकारी आशुतोष कुमार के अध्यक्षता में शुरू किया गया। सभी मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, थाना प्रतिनिधि एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संस्था के सचिव मनोज कुमार झा द्वारा किया गया। बैठक के दौरान बाल संरक्षण से जुड़े गंभीर मुद्दों जैसे बाल विवाह, बाल श्रम, बाल मजदूरी एवं बाल तस्करी पर विस्तार से चर्चा की गई। संस्था द्वारा बताया गया कि मिथिला कला विकास समिति लंबे समय से इन विषयों पर निरंतर कार्य कर रही है तथा पंचायत एवं वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण समिति के गठन का कार्य भी लगातार जारी है। संस्था के सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने हाल ही में बच्चों की तस्करी से संबंधित तेजी से फैली अफवाहों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सभी प्रतिनिधियों के सहयोग से सतत निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाना आवश्यक है। बैठक में बच्चों की शिक्षा, उनके लिए सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण, तथा समय पर पोषक आहार की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि बच्चों के साथ होने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं अन्य प्रकार के शोषण की पहचान कर उसे ग्राम सभा में प्रमुखता से उठाया जाए तथा इस विषय पर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाए। प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा इसका एक शेड्यूल तैयार कर सभी पंचायत में दिया जाएगा जो समय-समय पर पंचायत में बैठक कर एक रिपोर्टिंग प्रखंड विकास पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ऐसा उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधि को कहा। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से बाल संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की गई। विशेष रूप से प्रभारी नितेश पाठक द्वारा समय-समय पर आयोजित बैठकों के माध्यम से बच्चों के हित में किए जा रहे कार्यों को महत्वपूर्ण बताया गया। अंत में संस्था ने पुनः अपने संकल्प को दोहराया कि वह बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा एवं सामाजिक विकास के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य करती रहेगी। संस्था के बाल संरक्षण प्रभारी राहुल कुमार काजल ठाकुर भी उपस्थित रहे। उपस्थित पदाधिकारी खुशबू कुमारी थाना लिखा परवेज आलम अंसारी पंचायत समिति सदस्य शांति कुमारी उप प्रमुख जयंती देवी प्रमुख अरुणा देवी रानी देवी अर्चना देवी विजय राम और भी बहुत सारे मुखिया प्रतिनिधि पंचायत समिति सदस्य उपस्थित रहे4
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- दरभंगा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है… जो विकास के दावों की पोल खोलती है। जहां सड़क तो बनी… लेकिन नाला नहीं… और अब यही ‘अधूरा विकास’ ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं… बरसात में सड़क नहीं, पानी नजर आता है… और जिम्मेदारों के पास अब भी सिर्फ आश्वासन है... वीओ-1: ये तस्वीरें हैं दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी गांव की… जहां विकास की कहानी अधूरी है… और परेशानी पूरी। सड़क बनी… लेकिन नाला नहीं… और अब यही कमी लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हालात ये हैं कि बरसात के दिनों में सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है… चारों तरफ जलजमाव… और उसी पानी से होकर गुजरने को मजबूर ग्रामीण। नाले के अभाव में पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं… और हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार मुखिया से लेकर सरकारी दफ्तरों तक गुहार लगा चुके हैं… लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला… समाधान नहीं। कुछ महीने पहले गांव में सड़क और नाले का निर्माण शुरू हुआ… हीरा पान दुकान से लेकर इमामबाड़ा होते हुए फूलबाबू डीलर के घर तक काम हुआ… लेकिन शिया जामा मस्जिद से मानू जाने वाले रास्ते तक नाला का निर्माण आज तक अधूरा है। इतना ही नहीं… ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि बिना नाले के सड़क बनाना… सीधे-सीधे पैसे और मेहनत की बर्बादी है। हैरानी की बात ये है कि पिछले 20-25 सालों से पंचायत और जिला परिषद की राजनीति का केंद्र यही गांव रहा… लेकिन विकास के नाम पर हालात आज भी जस के तस हैं। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का खामियाजा अब गांव के लोग भुगत रहे हैं। आउट्रो: अब बड़ा सवाल ये है… क्या प्रशासन, विधायक और जिम्मेदार अधिकारी इस गांव की सुध लेंगे? और सबसे अहम… चंदनपट्टी गांव में नाले का निर्माण आखिर कब तक पूरा होगा? ये सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं… बल्कि उस सिस्टम की हकीकत है… जहां आधा विकास… लोगों के लिए पूरी परेशानी बन जाता है। अब देखना होगा… जिम्मेदार जागते हैं… या चंदनपट्टी के लोग यूं ही जलजमाव में जीने को मजबूर होंगे1