चंदनपट्टी गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबुर दरभंगा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है… जो विकास के दावों की पोल खोलती है। जहां सड़क तो बनी… लेकिन नाला नहीं… और अब यही ‘अधूरा विकास’ ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं… बरसात में सड़क नहीं, पानी नजर आता है… और जिम्मेदारों के पास अब भी सिर्फ आश्वासन है... वीओ-1: ये तस्वीरें हैं दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी गांव की… जहां विकास की कहानी अधूरी है… और परेशानी पूरी। सड़क बनी… लेकिन नाला नहीं… और अब यही कमी लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हालात ये हैं कि बरसात के दिनों में सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है… चारों तरफ जलजमाव… और उसी पानी से होकर गुजरने को मजबूर ग्रामीण। नाले के अभाव में पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं… और हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार मुखिया से लेकर सरकारी दफ्तरों तक गुहार लगा चुके हैं… लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला… समाधान नहीं। कुछ महीने पहले गांव में सड़क और नाले का निर्माण शुरू हुआ… हीरा पान दुकान से लेकर इमामबाड़ा होते हुए फूलबाबू डीलर के घर तक काम हुआ… लेकिन शिया जामा मस्जिद से मानू जाने वाले रास्ते तक नाला का निर्माण आज तक अधूरा है। इतना ही नहीं… ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि बिना नाले के सड़क बनाना… सीधे-सीधे पैसे और मेहनत की बर्बादी है। हैरानी की बात ये है कि पिछले 20-25 सालों से पंचायत और जिला परिषद की राजनीति का केंद्र यही गांव रहा… लेकिन विकास के नाम पर हालात आज भी जस के तस हैं। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का खामियाजा अब गांव के लोग भुगत रहे हैं। आउट्रो: अब बड़ा सवाल ये है… क्या प्रशासन, विधायक और जिम्मेदार अधिकारी इस गांव की सुध लेंगे? और सबसे अहम… चंदनपट्टी गांव में नाले का निर्माण आखिर कब तक पूरा होगा? ये सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं… बल्कि उस सिस्टम की हकीकत है… जहां आधा विकास… लोगों के लिए पूरी परेशानी बन जाता है। अब देखना होगा… जिम्मेदार जागते हैं… या चंदनपट्टी के लोग यूं ही जलजमाव में जीने को मजबूर होंगे
चंदनपट्टी गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबुर दरभंगा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है… जो विकास के दावों की पोल खोलती है। जहां सड़क तो बनी… लेकिन नाला नहीं… और अब यही ‘अधूरा विकास’ ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं… बरसात में सड़क नहीं, पानी नजर आता है… और जिम्मेदारों के पास अब भी सिर्फ आश्वासन है... वीओ-1: ये तस्वीरें हैं दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी गांव की… जहां विकास की कहानी अधूरी है… और परेशानी पूरी। सड़क बनी… लेकिन नाला नहीं… और अब यही कमी लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हालात ये हैं कि बरसात के दिनों में सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है… चारों तरफ जलजमाव… और उसी पानी से होकर गुजरने को मजबूर ग्रामीण। नाले के अभाव में पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं… और हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार मुखिया से लेकर सरकारी दफ्तरों तक गुहार लगा चुके हैं… लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला… समाधान नहीं। कुछ महीने पहले गांव में सड़क और नाले का निर्माण शुरू हुआ… हीरा पान दुकान से लेकर इमामबाड़ा होते हुए फूलबाबू डीलर के घर तक काम हुआ… लेकिन शिया जामा मस्जिद से मानू जाने वाले रास्ते तक नाला का निर्माण आज तक अधूरा है। इतना ही नहीं… ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि बिना नाले के सड़क बनाना… सीधे-सीधे पैसे और मेहनत की बर्बादी है। हैरानी की बात ये है कि पिछले 20-25 सालों से पंचायत और जिला परिषद की राजनीति का केंद्र यही गांव रहा… लेकिन विकास के नाम पर हालात आज भी जस के तस हैं। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का खामियाजा अब गांव के लोग भुगत रहे हैं। आउट्रो: अब बड़ा सवाल ये है… क्या प्रशासन, विधायक और जिम्मेदार अधिकारी इस गांव की सुध लेंगे? और सबसे अहम… चंदनपट्टी गांव में नाले का निर्माण आखिर कब तक पूरा होगा? ये सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं… बल्कि उस सिस्टम की हकीकत है… जहां आधा विकास… लोगों के लिए पूरी परेशानी बन जाता है। अब देखना होगा… जिम्मेदार जागते हैं… या चंदनपट्टी के लोग यूं ही जलजमाव में जीने को मजबूर होंगे
- समस्तीपुर में पुलिस के ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत बड़ी सफलता मिली है। चोरी, छिनतई और गुम हुए मोबाइल फोन को बरामद कर उनके असली मालिकों को वापस किया गया। एसपी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दर्जनों लोगों को उनके खोए हुए मोबाइल सौंपे गए। लंबे समय बाद अपना मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ देखने को मिली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसका उद्देश्य न सिर्फ लोगों का खोया सामान वापस दिलाना है, बल्कि आम जनता के बीच पुलिस के प्रति भरोसा भी मजबूत करना है। साथ ही पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात भी कही है।1
- Post by Santu Kumar SAH1
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- बिहार में एक से बढ़कर एक विभत्स कांड देखने को मिल रहे हैं! कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ ही नहीं बच गई है बिहार में फारबिसगंज अररिया हत्या कांड सामाजिक क्रूरता का काला सच1
- दरभंगा: ₹1200 के टेस्ट से पाएं पूरी पढ़ाई फ्री का मौका, 24 अप्रैल आखिरी तारीख, 25–27 अप्रैल को परीक्षा; अब पैसों की नहीं होगी बाधा1
- #80_साल_बाद_बना_दरभंगा_जिला_मोहर्रम_कमिटी का #बायलॉज, #सवाल के कटघरा में बायलॉज, कानून बनाने में कानून के जानकार कितने? Darpan24 News Darbhanga : The Heart of Mithila DARBHANGA CITY Darbhanga All Videos हायाघाट विधानसभा Darbhanga "Capital of Mithila" Darbhanga Kanhaiya Kumar Nazia Hasan Journalist Abdullah Ahmad Shoaib Ahmed Khan दरभंगा हवाई अड्डा Darbhanga Airport Darpan24 News1
- अररिया जिले का फारबिसगंज का न्यूज़, लोग बोले- छाती पर बैठकर ग/ला रेता ! #forbesganj #ArariaNews #socialmedia #thepmmedia #forbesganjnews #ईलमासनगरटुडे1
- रसोई गैस की किल्लत, कीमतों में वृद्धि और कालाबाजारी के खिलाफ गुरुवार को सीपीआई(एम) के बैनर तले दरभंगा में जन आक्रोश मार्च निकाला गया। इस मार्च में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। मार्च पोलो मैदान से शुरू होकर आयुक्त कार्यालय, दरभंगा समाहरणालय, लहेरियासराय टावर और लोहिया चौक होते हुए पुनः पोलो मैदान पहुंचा, जहां धरना स्थल पर सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता पार्टी के जिला सचिव मंडल सदस्य दिनेश झा ने की। सभा को संबोधित करते हुए राज्य सचिव मंडल सदस्य श्याम भारती ने कहा कि जिले में रसोई गैस की गंभीर समस्या बनी हुई है। लोग कई-कई दिनों तक लाइन में लगने के बावजूद गैस नहीं पा रहे हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि एक ओर कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी भी जारी है। उन्होंने प्रशासन के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें गैस की कोई कमी नहीं होने की बात कही जा रही है। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैस की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए और कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगे। देकुली निवासी 25 वर्षीय कुमर जी सहनी की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि गैस लेने के लिए बार-बार चक्कर लगाने की मजबूरी के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित गैस एजेंसी की लापरवाही के कारण यह घटना हुई और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। सभा में प्रस्ताव पारित कर 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ” अभियान के तहत गांव-गांव में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही गैस किल्लत और फसल क्षति अनुदान की मांग को लेकर 20 अप्रैल को सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई। सभा को गोपाल ठाकुर, नीरज कुमार, वीरेंद्र पासवान, मुकेश पोद्दार, तबस्सुम, आरती देवी, घनश्याम पासवान और गंगा पासवान ने भी संबोधित किया।1