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उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के नेत्रत्व फिरोजाबाद महापौर कामिनी राठौड़ के द्वार कम्बल वितरण का योजना
Bahujan Samachar
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के नेत्रत्व फिरोजाबाद महापौर कामिनी राठौड़ के द्वार कम्बल वितरण का योजना
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- *भूमाफियाओं का बेलगाम आतंक: तहसीलदार की सरपरस्ती में महिलाओं पर बर्बर हमला, पुलिस ने पीड़ितों को ही पुलिस गाड़ी में खींचा* एटा (जलेसर), 07 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में भूमाफियाओं का खुल्लमखुल्ला राज चल रहा है। जलेसर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश के दौरान सैकड़ों की भीड़ में आए माफिया गिरोह ने उनके परिवार की महिलाओं पर जानलेवा हमला बोल दिया। मारपीट इतनी क्रूर थी कि एक महिला की हड्डी टूट गई और दूसरी बेहोश हो गई। पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन मूकदर्शक बनी रही और पीड़ित पक्ष की महिलाओं को जबरन पुलिस की गाड़ी में खींचकर बैठा लिया।विवाद गाटा संख्या 306 (रकबा 1.627 हेक्टेयर) की पैतृक भूमि का है, जिसका मुकदमा अलीगढ़ मंडल के अपर आयुक्त न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को तय है। इसके बावजूद तहसीलदार संदीप सिंह बिना हल्का लेखपाल अरुण कुमार जादौन की मौजूदगी के इंची टेप से पैमाइश करने पहुंच गए। वीडियो में तहसीलदार खुद दावा करते सुनाई दे रहे हैं - "जब मैं मौजूद हूं तो लेखपाल की क्या आवश्यकता है?" सवाल उठता है कि बिना लेखपाल के तहसीलदार कब से पैमाइश करने लगे? क्या यह माफिया गिरोह की मिलीभगत का सबूत नहीं?घटना के दौरान मजिस्ट्रेट लिखी सरकारी गाड़ी (नंबर UP82 AS4469) का शीशा मारपीट में टूट गया, जिसे तहसीलदार वीडियो में खुद स्वीकार करते सुनाई दे रहे हैं। महिलाओं को खींचकर इसी मजिस्ट्रेट गाड़ी में नहीं, बल्कि पुलिस लिखी गाड़ी में जबरन बैठाया गया। वीडियो फुटेज में सब साफ दिख रहा है - माफिया की भीड़ बेखौफ हमला कर रही है, पुलिस पीड़ितों को ही दबा रही है।गीतम सिंह ने पहले ही एसएसपी एटा को शिकायत देकर जान का खतरा बताया था। आरोपियों में सतेंद्र सिंह (महापुर याना शकरौली), माधवेंद्र सिंह (बदनपुर), जय सिंह (ममला महायुत्र), अमर सिंह (नगला धारा), संजीव कुमार गुप्ता उर्फ वासी (गंडी जवाहरगंज), पुष्पेंद्र कुमार उर्फ बड्डन (शंकरगढ़) और गौहर सिंह उर्फ टीक शामिल हैं। इन पर 03 मार्च 2025 को छद्म महिला लोंगश्री से फर्जी बैनामा कराने और "कब्जा नहीं छोड़ा तो परिवार समेत मार डालेंगे" जैसी खुली धमकियां देने के आरोप हैं।सूत्र बताते हैं कि तहसील के कुछ कर्मचारी माफिया के साथ मिलकर फर्जी नामों से जमीन खरीद-फरोख्त करते हैं और बाद में सांठ-गांठ से कब्जा करा देते हैं। पूर्व ब्लॉक प्रमुख होने से मामला राजनीतिक भी हो गया है।गीतम सिंह ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस शिकायत पर "विचार" कर रही है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया। योगी सरकार का 'भूमाफिया पर जीरो टॉलरेंस' का दावा एटा में महज खोखला साबित हो रहा है। जब तहसीलदार खुद नियम तोड़कर माफिया के पक्ष में खड़े हों, पुलिस पीड़ितों को ही सताए, तो आम आदमी की सुरक्षा कौन करेगा? प्रशासन की यह नाकामी कब तक बर्दाश्त की जाएगी?2
- ठंडी सबको लगती है, ये वीडियो देख के आपको कम लगेगी। जिम्मेदारियां बहुत बड़ा दायित्व हो जाता है🙏🇮🇳1
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