पिपराटांड में 35 लाख से बना दो स्पैन का नया पुल, 10 गांवों के 15 हजार लोगों को मिली बड़ी सौगात पिपराटांड में 35 लाख से बना दो स्पैन का नया पुल, 10 गांवों के 15 हजार लोगों को मिली बड़ी सौगात तीसरी प्रखंड के कुड़ियामो-पिपराटांड मुख्य मार्ग स्थित पिपराटांड में ध्वस्त हुई पुरानी पुलिया के स्थान पर विशेष प्रमंडल, गिरिडीह द्वारा दो स्पैन वाले नए मजबूत पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। पुल बन जाने से इस मानसून में स्कूली बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों को आवागमन में कोई परेशानी नहीं होगी। वर्षों पुरानी इस गंभीर समस्या का समाधान होने से स्थानीय ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। 48 लाख की योजना, माइनस टेंडर से बने 35 लाख विभागीय जानकारी के अनुसार, इस दो स्पैन के पुल निर्माण के लिए स्वीकृत प्राक्कलित राशि 48 लाख तय की गई थी। हालांकि, संवेदक द्वारा माइनस में टेंडर डालने के कारण इसका निर्माण महज 35 लाख की लागत में पूरा हो गया। इससे सरकारी बजट की बचत के साथ-साथ क्षेत्र को एक मजबूत ढांचा मिला है। 26 साल पुरानी पुलिया बारिश में हुई थी ध्वस्त यह पुलिया मूल रूप से वर्ष 1997-98 में तत्कालीन विधायक निधि से बनी थी। भारी बारिश के कारण यह पूरी तरह ढह गई थी, जिससे ग्रामीणों को 2 किमी के बजाय 6 किमी का लंबा और कीचड़ भरा रास्ता तय करना पड़ रहा था। घटना के बाद पूर्व विधायक बाबूलाल मरांडी और पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने जिला प्रशासन व आरईओ के कार्यपालक अभियंता से त्वरित निर्माण की मांग की थी। प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए विशेष प्रमंडल के माध्यम से दो स्पैन के पुल का निर्माण कराया। पुल चालू होने से पिपराटांड, चोरनीतारी, कोरचांचो, केदुआ और परसवा सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
पिपराटांड में 35 लाख से बना दो स्पैन का नया पुल, 10 गांवों के 15 हजार लोगों को मिली बड़ी सौगात पिपराटांड में 35 लाख से बना दो स्पैन का नया पुल, 10 गांवों के 15 हजार लोगों को मिली बड़ी सौगात तीसरी प्रखंड के कुड़ियामो-पिपराटांड मुख्य मार्ग स्थित पिपराटांड में ध्वस्त हुई पुरानी पुलिया के स्थान पर विशेष प्रमंडल, गिरिडीह द्वारा दो स्पैन वाले नए मजबूत पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। पुल बन जाने से इस मानसून में स्कूली बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों को आवागमन में कोई परेशानी नहीं होगी। वर्षों पुरानी इस गंभीर समस्या का समाधान होने से स्थानीय ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। 48 लाख की योजना, माइनस टेंडर से बने 35 लाख विभागीय जानकारी के अनुसार, इस दो स्पैन के पुल निर्माण के लिए स्वीकृत प्राक्कलित राशि 48 लाख तय की गई थी। हालांकि, संवेदक द्वारा माइनस में टेंडर डालने के कारण इसका निर्माण महज 35 लाख की लागत में पूरा हो गया। इससे सरकारी बजट की बचत के साथ-साथ क्षेत्र को एक मजबूत ढांचा मिला है। 26 साल पुरानी पुलिया बारिश में हुई थी ध्वस्त यह पुलिया मूल रूप से वर्ष 1997-98 में तत्कालीन विधायक निधि से बनी थी। भारी बारिश के कारण यह पूरी तरह ढह गई थी, जिससे ग्रामीणों को 2 किमी के बजाय 6 किमी का लंबा और कीचड़ भरा रास्ता तय करना पड़ रहा था। घटना के बाद पूर्व विधायक बाबूलाल मरांडी और पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने जिला प्रशासन व आरईओ के कार्यपालक अभियंता से त्वरित निर्माण की मांग की थी। प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए विशेष प्रमंडल के माध्यम से दो स्पैन के पुल का निर्माण कराया। पुल चालू होने से पिपराटांड, चोरनीतारी, कोरचांचो, केदुआ और परसवा सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
- भीगी ज़मीन पर बांस बिछाकर सोने को मजबूर देवा सोरेन, आवास सूची से नाम गायब ,प्रशासनिक बेरुखी उजागर भीगी ज़मीन पर बांस बिछाकर सोने को मजबूर देवा सोरेन, आवास सूची से नाम गायब ,प्रशासनिक बेरुखी उजागर तिसरी प्रखंड अंतर्गत थानसिंगडीह पंचायत के गांवां बॉर्डर पर स्थित मंझलाडीह गांव से गरीबी और प्रशासनिक बेरुखी की झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ के निवासी देवा सोरेन पिता स्व. बंधन सोरेन अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। रहने को पक्का मकान तो दूर, उनके घर में सोने के लिए एक खाट तक नसीब नहीं है। भीगी और नम ज़मीन से बचने के लिए वे बांस के टुकड़े बिछाकर उसी पर बैठते हैं और अपने दो मासूम बच्चों के साथ रात गुज़ारने को मजबूर हैं। करीब एक वर्ष पूर्व देवा सोरेन की पत्नी का देहांत हो चुका है। पत्नी के जाने के बाद दो छोटे बच्चों के लालन पालन की पूरी ज़िम्मेदारी देवा के कंधों पर आ पड़ी। मिट्टी की ढहती दीवारों पर घास फूस डालकर बनाए गए जर्जर खंडहर में, बिना किसी बुनियादी सुविधा के, वे किसी तरह दिन काट रहे हैं। बरसात और ठंड के मौसम में इस जर्जर ढांचे के नीचे रहना जान जोखिम में डालने जैसा है। हैरानी की बात यह है कि इस अत्यंत गरीब परिवार को अब तक न तो प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला और न ही अबुआ आवास योजना में नाम शामिल किया गया। आवास प्लस की आधिकारिक सूची से भी उनका नाम गायब है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, अब तक किसी जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, मुखिया या पंचायत सेवक ने इस बेबस परिवार की सुध लेने की ज़हमत नहीं उठाई। प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिनिधियों के वक्तव्य । आवास सूची में नाम न होने पर सफाई देते हुए पंचायत सचिव प्रभु हाजरा ने कहा कि सूची तैयार करते समय पीड़ित परिवार या वार्ड सदस्य द्वारा जानकारी नहीं दी गई थी, जिस कारण नाम दर्ज नहीं हो सका। मुखिया प्रतिनिधि मदन यादव ने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के लिए जल्द ही अंबेडकर आवास योजना हेतु उनका आवेदन कराया जाएगा। पंचायत समिति सदस्य मनोज सोरेन ने गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त करते हुए कहा देवा सोरेन के पास रहने और खाने पीने का भारी संकट है। पत्नी की मौत के बाद वे मासूम बच्चों के साथ बेहद दयनीय हालत में हैं। प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पक्का आवास उपलब्ध कराना चाहिए।2
- श्रावणी मेला 2026 | सुल्तानगंज में उमड़ा आस्था का सैलाब | कांवरियों से खास बातचीत | Ground Report श्रावणी मेला 2026 के दौरान झारखण्ड बॉर्डर से Satyasahitya News की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। इस रिपोर्ट में हमने देश के अलग-अलग राज्यों से आए कांवरियों से खास बातचीत की। उन्होंने अपनी आस्था, यात्रा के अनुभव और बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कठिन यात्रा के बारे में बताया। मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, प्रशासन की तैयारियां और भक्तिमय माहौल को इस वीडियो में करीब से दिखाया गया है। यदि आपको यह वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Channel Subscribe करना न भूलें। 🔔 Satyasahitya News – आपकी आवाज़, आपका अपना न्यूज़ प्लेटफॉर्म। #ShravaniMela2026 #Sultanganj #BolBam #KanwarYatra #BabaBaidyanath #HarHarMahadev #Jharkhand #Bihar #SatyasahityaNews #GroundReport1
- किसान के जीवन और संघर्ष पर समर्पित कुछ बेहतरीन और दिल को छू लेने वाली शायरी प्रस्तुत हैं, जो उनकी मेहनत, सादगी और जीवन गाथा को बयां करती हैं।1
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- वीडियो ब्लॉगिंग न्यूज़ समचार भरस्टाचार के खिलाफ आवाज 🚩 बरही विधानसभा के 'बेंदी 2' गांव की बदहाली का कड़वा सच! 🚩 कोडरमा: कागजों पर विकास, ज़मीन पर सिर्फ विनाश! (बेंदी 2 गांव की लाइव तस्वीरें) 📸 मैं डिजिटल क्रिएटर जितेन्द्र अगेरी, इन तस्वीरों के माध्यम से कोडरमा जिला, चन्दवारा ब्लॉक के बेंदी पंचायत के 'बेंदी 2' गांव की वो खौफनाक हकीकत दिखा रहा हूँ, जिसे हमारा सिस्टम पिछले 15 सालों से छुपा रहा है पार्टियां आईं और गईं, पर हालात वही हैं: पिछले 15 सालों में सूबे (राज्य) में कई पार्टियां आईं और कई पार्टियां गईं, बरही विधानसभा में कई विधायक बदले, लेकिन हमारे गांव की इस सड़क का जो हाल था, वो आज भी वही है। सत्ता किसी के भी हाथ में हो, बेंदी 2 गांव की जनता को हमेशा सिर्फ धोखा ही मिला है। सिर्फ कागजी टेंडर और घोटाला: इस मार्ग के निर्माण के लिए हर चुनाव से पहले कागजों पर करोड़ों के टेंडर निकलते हैं, लेकिन धरातल पर कभी काम पूरा नहीं होता। यह पैसा जनता के विकास के बजाय सीधे भ्रष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ जाता है। :तस्वीर नंबर 1 (सड़क का दलदल) : यह हमारे गांव की मुख्य सड़क है जो पिछले 15 सालों से ऐसी ही बदहाल है। हर बार चुनाव में बरही विधानसभा के विधायक बदलते हैं, टेंडर निकलते हैं, लेकिन धरातल पर सिर्फ घोटाला और भ्रष्टाचार दिखाई देता है। तस्वीर नंबर 2 (स्कूली बच्चों का दर्द): इस बरसात के मौसम में यह रास्ता मौत का कुआँ बन चुका है। स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों के कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं, वे गिरते हैं और चोटिल होते हैं। नेताओं के घरों तक आलीशान सड़कें पहुँच जाती हैं, लेकिन हमारे बच्चों के लिए सिर्फ यह कीचड़ छोड़ दिया जाता है। तस्वीर नंबर 3 (खेतों का खतरा): आप खुद देखिए, सड़क के दोनों तरफ गहरे खेत हैं। यहाँ बिना गढ़वाल (Retaining Wall) के गाड़ी निकालना जान जोखिम में डालने जैसा है। क्या कोडरमा प्रशासन को यहाँ किसी बड़ी दुर्घटना या लाश के गिरने का इंतज़ार है? निकम्मे जनप्रतिनिधि और चमचे: ऐसा नहीं है कि स्थानीय मुखिया या नेताओं को इस रास्ते का पता नहीं है। सब जानते हुए भी आँखें मूंदकर बैठे हैं। जो प्रतिनिधि अपनी जनता को एक सुरक्षित रास्ता न दे सके, वो पूरी तरह फालतू है।ताज़ा बरसात की हकीकत: मैंने ये तस्वीरें बिल्कुल इसी बरसात के मौसम में ग्राउंड पर जाकर खुद क्लिक की हैं, ताकि सोए हुए अधिकारी और नेता अपनी आँखों से ताज़ा बर्बादी देख सकें। मेरा मकसद किसी राजनीतिक पार्टी, नेता या अधिकारी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना या उन्हें बदनाम करना बिल्कुल नहीं है। मैं सिर्फ अपने गांव का जल्द से जल्द शुरू किया जाए!1
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