Shuru
Apke Nagar Ki App…
कानपुर की सड़कों पर पुलिस और वकीलों के बीच एक अनोखा दंगल देखने को मिला। इस टकराव के दौरान पुलिस पर वकील भारी पड़े। इस घटना ने शहर की सड़कों पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।
नवोदय वार्ता
कानपुर की सड़कों पर पुलिस और वकीलों के बीच एक अनोखा दंगल देखने को मिला। इस टकराव के दौरान पुलिस पर वकील भारी पड़े। इस घटना ने शहर की सड़कों पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- उत्तर प्रदेश के बस्ती (हर्रैया और कप्तानगंज क्षेत्र) में योगी आदित्यनाथ ने 504 करोड़ रुपये की लागत वाली 77 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस विकास-केंद्रित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर बेहद तीखे राजनीतिक हमले किए। योगी आदित्यनाथ ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सरकारी फंड कब्रिस्तान की दीवारों पर खर्च होते थे, जबकि उनकी सरकार के कार्यकाल में 1500 मंदिरों का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। मुख्यमंत्री ने कब्रिस्तान बनाम मंदिर के नरेटिव को हवा देते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार कब्रिस्तान और वक्फ के नाम पर अतिक्रमण को बढ़ावा देती थी, जबकि कांवर यात्रा जैसी हिंदू परंपराओं और 'जय श्री राम' के नारों पर रोक लगाती थी। सपा के एक जिलाध्यक्ष की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "कब्रिस्तान के नाम पर कब्जा हो रहा था, सपा जिलाध्यक्ष खुद आए थे। लखनऊ में बैठे लोगों को केवल कब्रिस्तान ही दिखाई देता था।" उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तंज कसा कि अब वे भी भगवा पहनकर कांवर यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, जबकि उनके शासनकाल में हनुमानगढ़ी पर नमाज पढ़ने के प्रयास हुए और कांवर यात्राओं को रोका गया। शिक्षा और युवाओं के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कार्यकाल में केवल नकल और बेरोजगारी ही हाथ लगती थी, जबकि आज बेहतर शिक्षा व्यवस्था मौजूद है। 10 जुलाई 2026 को दिया गया यह भाषण केवल एक विकास कार्यक्रम तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। यह भाषण विकास और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दोहरी रणनीति को मजबूत करते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है।1
- Post by SONI DEVI1
- मऊ जिले के नुरुल्लाहपुर गाँव में विकास कार्य न होने से स्थानीय जनता बेहद परेशान है। यहाँ के ग्राम प्रधान और क्षेत्रीय विधायक दोनों पर ही क्षेत्र में कोई भी काम न करने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि इन दोनों जनप्रतिनिधियों ने यहाँ कोई काम नहीं कराया है, जिसके कारण पूरी जनता त्रस्त है। इसके साथ ही, गाँव में स्वच्छता की स्थिति को लेकर भी लोग काफी परेशान हैं।1
- गाजीपुर जिले की जमानिया तहसील में स्टांप विक्रेताओं द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूलने का मामला सामने आया है। हिंदुस्तान न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, विक्रेता ₹10 के स्टांप और ₹10 की टिकट को ₹20-₹20 में बेच रहे हैं। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दो स्टांप और दो टिकट खरीदने पर कुल ₹80 लिए जा रहे हैं, जबकि रजिस्टर में इनकी कीमत मात्र ₹10 ही अंकित की जा रही है। इस मामले की जानकारी एसडीएम जमानिया को भी दी गई है और उन्हें घटना का वीडियो भी भेजा जा चुका है। आरोप है कि सबूत के तौर पर वीडियो उपलब्ध कराने के बावजूद अधिकारी लिखित शिकायत और गवाही की मांग कर रहे हैं और इस गंभीर विषय को नजरअंदाज कर रहे हैं। अब क्षेत्र में यह देखने का विषय है कि अधिकारियों को वीडियो साक्ष्य मिलने के बाद वे इस मनमानी पर क्या कार्रवाई करते हैं।3
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय की लड़ाई में हर संभव साथ देने का पूरा भरोसा दिया है।1
- उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मुंशीपुरा ओवरब्रिज के नीचे एक बिजली के खम्बे में करंट आने से तीन बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पीड़ित बकरी स्वामी और स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली विभाग को मामले की सूचना दी, लेकिन गंभीर लापरवाही दिखाते हुए विभाग ने सूचना मिलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर बिजली की लाइन काटी। बकरी स्वामी इरसाद का साफ कहना है कि यह घटना पूरी तरह से बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। उन्होंने इस खंभे में करंट आने की शिकायत पहले भी कई बार बिजली विभाग से की थी, लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया है। इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि यह आम जनता के आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहां चौबीसों घंटे लोगों की आवाजाही रहती है। लोगों ने गुस्से में सवाल उठाया कि आज तो तीन बेजुबान जानवरों की जान गई है, लेकिन अगर इनकी जगह कोई इंसान होता तो इस मौत का जिम्मेदार कौन होता? गुस्साए लोगों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक इस बिजली के पोल को रास्ते से नहीं हटाया जाएगा, तब तक वे मृत जानवरों को भी वहां से नहीं हटने देंगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के मौसम में अक्सर यहां बिजली के खंभों में करंट उतर आता है, लेकिन विभाग इसे नजरअंदाज करता है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।3