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राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा में अपना जन्मदिन धूमधाम से मनाया। इसी दौरान कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत को लेकर शहर में शोक और चिंता का माहौल था। इस विरोधाभास ने जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर अब शहर में बहस छिड़ गई है।
Ravi Samariya
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा में अपना जन्मदिन धूमधाम से मनाया। इसी दौरान कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत को लेकर शहर में शोक और चिंता का माहौल था। इस विरोधाभास ने जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर अब शहर में बहस छिड़ गई है।
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- नर्सिंग दिवस पर कोटा में बांके बिहारी मित्र मंडल ने शहीद कोरोना वॉरियर्स को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शहर में एक कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें लोगों ने कोरोना काल में अपनी जान गंवाने वाले योद्धाओं के त्याग को याद किया।1
- बंगाल की सड़कों पर अब वसूली और दलालों का डर खत्म हो गया है। जहां पहले हर मोड़ पर हफ्ता देना पड़ता था, वहीं अब ईमानदारी का रास्ता साफ है। यह व्यवस्था परिवर्तन एक मजबूत संकल्प और सही सरकार के आने से संभव हुआ है।1
- राजस्थान की स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौर ने खानापूर्ति के लिए दौरा किया। उन्होंने चार मृतक महिलाओं के परिजनों से मुलाकात नहीं की, जिससे प्रभावित परिवार निराश हुए।1
- Post by Mahendar.merotha2
- प्रसूताओं की मौत और किडनी खराब होने के मामलों में मुआवजे व कार्रवाई की मांग को लेकर कोटा में कांग्रेस और परिजनों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया, बिजली भी काटी गई, वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष व उनके पति के खिलाफ परिवाद भी दर्ज हुआ है। यह मामला अब स्थायी लोक अदालत में भी पहुंच गया है, जिसने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।4
- कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की लगातार मौतों पर पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजल भड़क उठे हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए 'ईंट से ईंट बजाने' की चेतावनी दी। इस मुद्दे पर बुधवार को अस्पताल के बाहर बड़े आंदोलन और घेराव की तैयारी है।3
- राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा में अपना जन्मदिन धूमधाम से मनाया। इसी दौरान कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत को लेकर शहर में शोक और चिंता का माहौल था। इस विरोधाभास ने जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर अब शहर में बहस छिड़ गई है।1
- कोटा में जल संकट ने विकट रूप ले लिया है, जहाँ आदिवासी परिवार और जंगली सूअर एक ही गड्ढे से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्थानीय लोग सालों से गंदा पानी पीने को विवश हैं, पर सरकारी योजनाओं और करोड़ों के बजट के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।1
- कोटा के तलवंडी, सेक्टर-3 में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। केडीए की लापरवाही के चलते नालियों में सीवरेज का पानी बह रहा है, जिससे क्षेत्रवासी बदबू और गंदगी से परेशान हैं। अब पुरानी खामियां छिपाने के लिए नया प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जिसपर जनता ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।2