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प्रतापगढ़ रियासत का धामोतर ठिकाना, जो कि एक प्रमुख प्रथम श्रेणी का ताजिमी ठिकाना था, अपनी वीरता, राजनीतिक महत्व और दरबार में प्राप्त विशेष सम्मान के लिए जाना जाता है। प्रतापगढ़ मुख्यालय के उत्तर में स्थित इस ठिकाने में लगभग 11 गांव शामिल थे, जिनकी अनुमानित आय 60,000 रुपये थी, और यह सालाना 6,000 रुपये का खिराज अदा करता था (19वीं सदी के आंकड़ों के अनुसार)। धामोतर के ठाकुर को दरबार में मुख्य सरदार के दाहिने हाथ की ओर सबसे पहली सीट मिलती थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि महारावत के निधन पर धामोतर के ठाकुर अस्थायी रूप से राज्य के मामलों का प्रबंध संभालते थे और विधवाओं व प्रभावशाली सरदारों से परामर्श के बाद नए शासक की स्थापना करते थे; उनके हस्तक्षेप के बिना कोई उत्तराधिकार मान्य नहीं माना जाता था, जो ठिकाने की उच्च स्थिति को दर्शाता है। धामोतर ठिकाने का परिवार सिसोदिया वंश से जुड़ा है, जो मेवाड़ के राजसी घराने से संबंधित है। इस ठिकाने की स्थापना प्रतापगढ़ के रावत सूरज माल के छोटे पुत्र कुंवर सहस माल को दी गई थी। लगभग 70 वर्ष बाद, 1571 में सहसमल के पुत्र कमलजी को कंठल क्षेत्र में जागीर प्रदान की गई। कमलजी ने 1576 की प्रसिद्ध हल्दीघाटी की लड़ाई में महाराणा प्रताप के पक्ष में मुगलों के विरुद्ध युद्ध लड़ा और वीरतापूर्वक शहीद हो गए, जिसे ठिकाने की वीर गाथा में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया गया है। 19वीं सदी में ठाकुर रोर सिंह (मृत्यु 1848) के तीन पुत्र और दो पुत्रियां थीं, जिनमें से एक पुत्री का विवाह जोधपुर के महाराजा तख्त सिंह से हुआ। उनके बड़े पुत्र ठाकुर हमीर सिंह (1848-1866) ने कोई पुत्र न होने पर भतीजे केसरी सिंह को गोद लिया, जो 1866 से ठाकुर बने। ठाकुर केसरी सिंह के दो पुत्र थे और उनके छोटे भाई मदन सिंह ठिकाने का प्रबंधन संभालते थे। ब्रिटिश काल में भी धामोतर ठिकाने ने अपने विशेष विशेषाधिकार बनाए रखे और 1818 की ब्रिटिश-प्रतापगढ़ संधि के बाद भी यह एक प्रमुख ठिकाना बना रहा। स्वतंत्रता के बाद 1947-49 में इसे अन्य रियासतों की तरह आधुनिक राजस्थान में विलय कर दिया गया और जागीरदारी प्रथा समाप्त हो गई। वर्तमान में, ठाकुर बृजराज सिंह धामोतर के प्रमुख हैं, जो ठाकुरानी अंजलि सिंह से विवाहित हैं और उनके पुत्र कंवर हेमांग सिंह तथा पुत्री बाईसा कामाक्षी सिंह हैं। धामोतर ठिकाना राजपूत सम्मान, वीरता और प्रशासनिक जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

1 hr ago
user_Dharmendra Soni
Dharmendra Soni
कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
1 hr ago
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प्रतापगढ़ रियासत का धामोतर ठिकाना, जो कि एक प्रमुख प्रथम श्रेणी का ताजिमी ठिकाना था, अपनी वीरता, राजनीतिक महत्व और दरबार में प्राप्त विशेष सम्मान के लिए जाना जाता है। प्रतापगढ़ मुख्यालय के उत्तर में स्थित इस ठिकाने में लगभग 11 गांव शामिल थे, जिनकी अनुमानित आय 60,000 रुपये थी, और यह सालाना 6,000 रुपये का खिराज अदा करता था (19वीं सदी के आंकड़ों के अनुसार)। धामोतर के ठाकुर को दरबार में मुख्य सरदार के दाहिने हाथ की ओर सबसे पहली सीट मिलती थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि महारावत के निधन पर धामोतर के ठाकुर अस्थायी रूप से राज्य के मामलों का प्रबंध संभालते थे और विधवाओं व प्रभावशाली सरदारों से परामर्श के बाद नए शासक की स्थापना करते थे; उनके हस्तक्षेप के बिना कोई उत्तराधिकार मान्य नहीं माना जाता था, जो ठिकाने की उच्च स्थिति को दर्शाता है। धामोतर ठिकाने का परिवार सिसोदिया वंश से जुड़ा है, जो मेवाड़ के राजसी घराने से संबंधित है। इस ठिकाने की स्थापना प्रतापगढ़ के रावत सूरज माल के छोटे पुत्र कुंवर सहस माल को दी गई थी। लगभग 70 वर्ष बाद, 1571 में सहसमल के पुत्र कमलजी को कंठल क्षेत्र में जागीर प्रदान की गई। कमलजी ने 1576 की प्रसिद्ध हल्दीघाटी की लड़ाई में महाराणा प्रताप के पक्ष में मुगलों के विरुद्ध युद्ध लड़ा और वीरतापूर्वक शहीद हो गए, जिसे ठिकाने की वीर गाथा में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया गया है। 19वीं सदी में ठाकुर रोर सिंह (मृत्यु 1848) के तीन पुत्र और दो पुत्रियां थीं, जिनमें से एक पुत्री का विवाह जोधपुर के महाराजा तख्त सिंह से हुआ। उनके बड़े पुत्र ठाकुर हमीर सिंह (1848-1866) ने कोई पुत्र न होने पर भतीजे केसरी सिंह को गोद लिया, जो 1866 से ठाकुर बने। ठाकुर केसरी सिंह के दो पुत्र थे और उनके छोटे भाई मदन सिंह ठिकाने का प्रबंधन संभालते थे। ब्रिटिश काल में भी धामोतर ठिकाने ने अपने विशेष विशेषाधिकार बनाए रखे और 1818 की ब्रिटिश-प्रतापगढ़ संधि के बाद भी यह एक प्रमुख ठिकाना बना रहा। स्वतंत्रता के बाद 1947-49 में इसे अन्य रियासतों की तरह आधुनिक राजस्थान में विलय कर दिया गया और जागीरदारी प्रथा समाप्त हो गई। वर्तमान में, ठाकुर बृजराज सिंह धामोतर के प्रमुख हैं, जो ठाकुरानी अंजलि सिंह से विवाहित हैं और उनके पुत्र कंवर हेमांग सिंह तथा पुत्री बाईसा कामाक्षी सिंह हैं। धामोतर ठिकाना राजपूत सम्मान, वीरता और प्रशासनिक जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

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  • राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोहकमपुरा में खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र स्थित नरसिंह मंदिर की जमीन पर कथित तौर पर जबरन अतिक्रमण किया गया है। पुजारी संघ की एक बैठक में यह मुद्दा उठा, जिसमें बताया गया कि उपखंड प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन और न्यायालय तक का सहारा लेने तथा कानूनी कार्रवाई करने के बावजूद अब तक यह अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। इसके चलते ग्रामीणों और पुजारी संघ में घोर विरोध व्याप्त है। पुजारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुदामा ने बताया कि मोहकमपुरा स्थित नरसिंह मंदिर के पुजारी प्रकाश बैरागी को आए दिन परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे संघ ने घोर निंदनीय बताया। संघ ने जोर देकर कहा कि जब न्यायालय ने पुजारी के पक्ष में फैसला दिया है, तो पुजारी प्रकाश को परेशान और प्रताड़ित करना सरासर नाइंसाफी है। पुजारी संघ ने एक स्वर में कहा कि अब पानी सर से ऊपर चला गया है और परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुजारी संघ के अध्यक्ष सुदामा ने चेतावनी दी कि यदि मंदिर की जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो पुजारी और मंदिर के समर्थन में संगठन जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगा। इस बैठक में पुजारी संघ के संगठन मंत्री गौरी शंकर शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, बांसवाड़ा जिले के जिला अध्यक्ष मगनलाल, जिला उपाध्यक्ष भरतलाल, मोहनलाल शर्मा, जिला संगठन मंत्री ललित बैरागी, प्रकाश बैरागी, हरिदास, दीपक और मोहनदास बैरागी सहित कई सदस्य उपस्थित थे।
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    राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोहकमपुरा में खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र स्थित नरसिंह मंदिर की जमीन पर कथित तौर पर जबरन अतिक्रमण किया गया है। पुजारी संघ की एक बैठक में यह मुद्दा उठा, जिसमें बताया गया कि उपखंड प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन और न्यायालय तक का सहारा लेने तथा कानूनी कार्रवाई करने के बावजूद अब तक यह अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। इसके चलते ग्रामीणों और पुजारी संघ में घोर विरोध व्याप्त है।

पुजारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष सुदामा ने बताया कि मोहकमपुरा स्थित नरसिंह मंदिर के पुजारी प्रकाश बैरागी को आए दिन परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे संघ ने घोर निंदनीय बताया। संघ ने जोर देकर कहा कि जब न्यायालय ने पुजारी के पक्ष में फैसला दिया है, तो पुजारी प्रकाश को परेशान और प्रताड़ित करना सरासर नाइंसाफी है। पुजारी संघ ने एक स्वर में कहा कि अब पानी सर से ऊपर चला गया है और परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुजारी संघ के अध्यक्ष सुदामा ने चेतावनी दी कि यदि मंदिर की जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो पुजारी और मंदिर के समर्थन में संगठन जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगा। इस बैठक में पुजारी संघ के संगठन मंत्री गौरी शंकर शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, बांसवाड़ा जिले के जिला अध्यक्ष मगनलाल, जिला उपाध्यक्ष भरतलाल, मोहनलाल शर्मा, जिला संगठन मंत्री ललित बैरागी, प्रकाश बैरागी, हरिदास, दीपक और मोहनदास बैरागी सहित कई सदस्य उपस्थित थे।
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    1 hr ago
  • कुशलगढ़ वृत्त के तहत छोटा डूंगरा चौकी पुलिस और डीएसटी (जिला विशेष शाखा) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए डूंगरा मार्ग पर अवैध बजरी से भरे एक डंपर को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई डीएसटी अधिकारी श्री भंवरलाल और पुलिस टीम द्वारा की गई। डंपर को जब्त करने के बाद उसे छोटा डूंगरा थाना परिसर में खड़ा कराया गया है, और खनन विभाग को इसकी सूचना दे दी गई है। प्रशासन द्वारा इस मामले में आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
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    कुशलगढ़ वृत्त के तहत छोटा डूंगरा चौकी पुलिस और डीएसटी (जिला विशेष शाखा) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए डूंगरा मार्ग पर अवैध बजरी से भरे एक डंपर को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई डीएसटी अधिकारी श्री भंवरलाल और पुलिस टीम द्वारा की गई। डंपर को जब्त करने के बाद उसे छोटा डूंगरा थाना परिसर में खड़ा कराया गया है, और खनन विभाग को इसकी सूचना दे दी गई है। प्रशासन द्वारा इस मामले में आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • कुवैत से मिली खबर के अनुसार, दो एशियाई प्रवासियों को झूठी लड़ाई की खबर देने के आरोप में देश से निकाला जाएगा। यह निर्णय कुवैत में हुए इस घटनाक्रम से जुड़ा है।
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    कुवैत से मिली खबर के अनुसार, दो एशियाई प्रवासियों को झूठी लड़ाई की खबर देने के आरोप में देश से निकाला जाएगा। यह निर्णय कुवैत में हुए इस घटनाक्रम से जुड़ा है।
    user_OFFICIAL NEWS EXPLAINER
    OFFICIAL NEWS EXPLAINER
    News Anchor बांसवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • उज्जैन जिले के ग्राम रुन खेड़ा में रतलाम रोड की स्थिति पिछले दो साल से खराब बनी हुई है।
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    उज्जैन जिले के ग्राम रुन खेड़ा में रतलाम रोड की स्थिति पिछले दो साल से खराब बनी हुई है।
    user_K.b
    K.b
    खाचरोद, उज्जैन, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • प्रतापगढ़ जिले के देवल्दी में तस्कर भाइयों के एक अवैध फार्म हाउस पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए की गई, जिससे अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन को खाली कराया गया।
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    प्रतापगढ़ जिले के देवल्दी में तस्कर भाइयों के एक अवैध फार्म हाउस पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए की गई, जिससे अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन को खाली कराया गया।
    user_Baba
    Baba
    अरनोद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • समाज सेवी अहारी ने बच्चों की परवरिश को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। उनके अनुसार, बचपन से ही बच्चों में अच्छी आदतें डालनी चाहिए, जिससे वे बड़े होकर अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब न बनें। अहारी ने जोर देकर कहा कि बच्चों को संस्कार अपने घर में ही मिलते हैं, जबकि शिक्षा उन्हें स्कूल में प्राप्त होती है।
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    समाज सेवी अहारी ने बच्चों की परवरिश को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। उनके अनुसार, बचपन से ही बच्चों में अच्छी आदतें डालनी चाहिए, जिससे वे बड़े होकर अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब न बनें। अहारी ने जोर देकर कहा कि बच्चों को संस्कार अपने घर में ही मिलते हैं, जबकि शिक्षा उन्हें स्कूल में प्राप्त होती है।
    user_समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी
    समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी
    Teacher सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • कुशलगढ़ की हिरण नदी, जिसे कभी नगर की जीवनरेखा और आत्मा माना जाता था, आज अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण अपना मूल स्वरूप खो रही है। कोटड़ा मार्ग से महादेव मंदिर की ओर बहने वाली यह नदी, जो पहले लगभग 50 मीटर चौड़ी और करीब 45 फीट गहरी हुआ करती थी, अब कई स्थानों पर संकरे नाले जैसी दिखती है, और कुछ हिस्सों में बच्चे क्रिकेट खेलते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी किनारों पर लगातार मिट्टी भरने, निर्माण सामग्री फेंकने और कचरा डालने से इसकी चौड़ाई और गहराई में भारी कमी आई है। पांडवसाथ मार्ग पर पूर्व में बनी सुरक्षा दीवार भी शिकायतों के बाद कायम नहीं रह सकी। क्षेत्रवासियों को आशंका है कि इस वर्ष तेज बारिश होने पर पांडवसाथ सहित आसपास के मोहल्लों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि करीब दो वर्ष पहले भी भारी बारिश से क्षेत्र में नुकसान हुआ था। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राघवेश चरपोटा ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से हिरण नदी पर हुए अतिक्रमण को हटाने, गहरीकरण और सफाई का काम कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी के पुनर्जीवन से बेहतर जल निकासी होगी, भू-जल स्तर बढ़ेगा और भविष्य के जल संकट से राहत मिलेगी। क्षेत्रवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर हिरण नदी को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का आग्रह किया है।
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    कुशलगढ़ की हिरण नदी, जिसे कभी नगर की जीवनरेखा और आत्मा माना जाता था, आज अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण अपना मूल स्वरूप खो रही है। कोटड़ा मार्ग से महादेव मंदिर की ओर बहने वाली यह नदी, जो पहले लगभग 50 मीटर चौड़ी और करीब 45 फीट गहरी हुआ करती थी, अब कई स्थानों पर संकरे नाले जैसी दिखती है, और कुछ हिस्सों में बच्चे क्रिकेट खेलते नजर आते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी किनारों पर लगातार मिट्टी भरने, निर्माण सामग्री फेंकने और कचरा डालने से इसकी चौड़ाई और गहराई में भारी कमी आई है। पांडवसाथ मार्ग पर पूर्व में बनी सुरक्षा दीवार भी शिकायतों के बाद कायम नहीं रह सकी। क्षेत्रवासियों को आशंका है कि इस वर्ष तेज बारिश होने पर पांडवसाथ सहित आसपास के मोहल्लों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि करीब दो वर्ष पहले भी भारी बारिश से क्षेत्र में नुकसान हुआ था।

पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राघवेश चरपोटा ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से हिरण नदी पर हुए अतिक्रमण को हटाने, गहरीकरण और सफाई का काम कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी के पुनर्जीवन से बेहतर जल निकासी होगी, भू-जल स्तर बढ़ेगा और भविष्य के जल संकट से राहत मिलेगी। क्षेत्रवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर हिरण नदी को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का आग्रह किया है।
    user_गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    गाण्डीव न्यूज नेटवर्क
    बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर में आदिवासी समुदाय की शादी के विशेष रीति-रिवाज और संस्कृति देखने को मिली। इस अवसर पर आदिवासी परंपराओं के अनुसार विवाह संपन्न हुआ, जो स्थानीय संस्कृति को दर्शाता है।
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    मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर में आदिवासी समुदाय की शादी के विशेष रीति-रिवाज और संस्कृति देखने को मिली। इस अवसर पर आदिवासी परंपराओं के अनुसार विवाह संपन्न हुआ, जो स्थानीय संस्कृति को दर्शाता है।
    user_Mahesh Ajnar
    Mahesh Ajnar
    Psychologist रतलाम, रतलाम, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
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