एजेंसियों पर भीड़, नहीं मिल रही गैस, लोग हो रहे चिलचिलाती धूप में परेशान डीएम ने दिया था चार दिन में बैकलाग खत्म करने का आदेश अब डण्ठे बस्ते में, बुकिंग के 15-20 दिन बाद भी आम जनता तरस रही गैस के लिए धारा लक्ष्य समाचार अब्दुल मुईद, बाराबंकी। जिले का ग्रामीण इलाक तो छोड़ दीजिए सबसे ज्यादा गैस की दिक्कत शहरवासियों को हो रही है, वहीं ब्लैक मार्केटिंग जमकर हो रही, घरेलू गैस सिलेण्डर दो हजार रूपये में बिक रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं को गैस आसानी से नहीं मिल पा रही है, लोगों पहले काफी मशक्कत के बाद बुकिंग होती है, उसके बाद कई चक्कर एजेंसी के लगाने के बाद पर्ची काटी जाती है, होम डिलेवरी सिस्टम अब तो बिल्कुल खत्म ही नजर आ रहा है। उपभोक्ताओं की दिक्कत पर पूर्ति विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है, कई बार फोन मिलाने पर सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। शहर की ज्यादातर एजेंसियों पर दलालों का जमवाड़ा लगा रहता है, उपभोक्ता सुबह से लेकर शाम तक खड़े रहकर अपने नम्बर का इंतिजार किया करते हैं शाम को बताया जाता है कि आज लोड कम आया था, इसलिए अब कल आओ, इसी तरह करके हफ्तों दौड़ाया जाता है वहीं अगर कोई रसूखदार व्यक्ति आ जाता है तो यही एजेंसी संचालक उसको हाथों हाथ सिलेण्डर उपलब्ध करवा देते हैं। बड़े-बड़े होटल के कारखानों में घरेलू गैस जमकर प्रयोग हो रही है, वहां पर दर्जनों सिलेण्डर रात के अंधेरे में पहुंचाये जाते हैं औन मनमर्जी के दाम वसूले जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि जो सिलेण्डर एक हजार का मिलता था अब हमें अठ्ठारह सौ रूपये चुकाने पड़ते हैं, इसलिए दस रूपये वाला समोसा अब 12 रूपये में बेचना पड़ता है। वहीं रेलवे स्टेशन के पास बिकने वाली दस रूपये की चाय अब 12 रूपये में खुलेआम बिक रही है। सूत्रों से पता चला है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं और डिलेवरी के नाम पर सिलेण्डर महंगे दामों पर बेचकर जेबें भर रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि मेरे नम्बर पर ओटीपी नहीं आई लेकिन गैस डिलेवरी दिखा रहा है, केवाईसी के नाम पर जमकर वसूली 100-150 रूपये कई एजेंसियों पर हो रही है, तो कहीं अनपढ़ व्यक्ति जो करीब एक वर्ष से गैस सिलेण्डर बुक नहीं कराये थे जब वह एजेंसी लेने जाते हैं तो पहले कहा जाता है कि केवाईसी कराओ उसके बाद जब बुकिंग के लिए कहा जाता है तो मालूम चलता है कि इनके नाम की गैस करीब दस दिन पहले ही डिलेवरी हो चुकी है। चिलचिलाती धूप में लगी कतारे, जिला प्रशासन मौन घरेलू गैस की भारी किल्लत के चलते आम उपभोक्ताओं के साथ साथ वैवाहिक आयोजनों की मुश्किले बढ़ गई है, आपूर्ति कम होने के कारण गैस एजेसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइने दिख रही है, पिछले दो महीनों से सिलेण्डर के लिए मची अफरा तफरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 63 गैस एजेंसियों के माध्यम से लगभग 6.75 लाख उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जाती है, वर्तमान में स्थिति यह है कि सुबह आठ बजे से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुट जाती है लेकिन घण्टों इंतिजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है, स्थानीय निवासियों के अनुसार बुकिंग के बावजूद समय पर सिलेण्डर नहीं मिल रहे हैं। क्या बोले पूर्ति अधिकारी? जिला पूर्ति अधिकारी डा० राकेश तिवारी ने बताया कि जनपद में प्रतिदिन लगभग 14,000 सिलेण्डरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कम्पनियों से केवल 11 से 12 हजार सिलेंण्डर ही प्राप्त हो पा रहे इस 2-3 हजार की कमी के कारण बैकलाग बढ़ता जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने दावा किया है कि तेल कम्पनियों से समन्वय स्थापित कर जल्द ही आपूर्ति सामान्य कर ली जायेगी। अब देखना है कि पूर्ति अधिकारी का दावा सही होगा या हवा हवाई साबित होगा।
एजेंसियों पर भीड़, नहीं मिल रही गैस, लोग हो रहे चिलचिलाती धूप में परेशान डीएम ने दिया था चार दिन में बैकलाग खत्म करने का आदेश अब डण्ठे बस्ते में, बुकिंग के 15-20 दिन बाद भी आम जनता तरस रही गैस के लिए धारा लक्ष्य समाचार अब्दुल मुईद, बाराबंकी। जिले का ग्रामीण इलाक तो छोड़ दीजिए सबसे ज्यादा गैस की दिक्कत शहरवासियों को हो रही है, वहीं ब्लैक मार्केटिंग जमकर हो रही, घरेलू गैस सिलेण्डर दो हजार रूपये में बिक रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं को गैस आसानी से नहीं मिल पा रही है, लोगों पहले काफी मशक्कत के बाद बुकिंग होती है, उसके बाद कई चक्कर एजेंसी के लगाने के बाद पर्ची काटी जाती है, होम डिलेवरी सिस्टम अब तो बिल्कुल खत्म ही नजर आ रहा है। उपभोक्ताओं की दिक्कत पर पूर्ति विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है, कई बार फोन मिलाने पर सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। शहर की ज्यादातर एजेंसियों पर दलालों का जमवाड़ा लगा रहता है, उपभोक्ता सुबह से लेकर शाम तक खड़े रहकर अपने नम्बर का इंतिजार किया करते हैं शाम को बताया जाता है कि आज लोड कम आया था, इसलिए अब कल आओ, इसी तरह करके हफ्तों दौड़ाया जाता है वहीं अगर कोई रसूखदार व्यक्ति आ जाता है तो यही एजेंसी संचालक उसको हाथों हाथ सिलेण्डर उपलब्ध करवा देते हैं। बड़े-बड़े होटल के कारखानों में घरेलू गैस जमकर प्रयोग हो रही है, वहां पर दर्जनों सिलेण्डर रात के अंधेरे में पहुंचाये जाते हैं औन मनमर्जी के दाम वसूले जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि जो सिलेण्डर एक हजार का मिलता था अब हमें अठ्ठारह सौ रूपये चुकाने पड़ते हैं, इसलिए दस रूपये वाला समोसा अब 12 रूपये में बेचना पड़ता है। वहीं रेलवे स्टेशन के पास बिकने वाली दस रूपये की चाय अब 12 रूपये में खुलेआम बिक रही है। सूत्रों से पता चला है कि गैस एजेंसी के
कर्मचारी जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं और डिलेवरी के नाम पर सिलेण्डर महंगे दामों पर बेचकर जेबें भर रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि मेरे नम्बर पर ओटीपी नहीं आई लेकिन गैस डिलेवरी दिखा रहा है, केवाईसी के नाम पर जमकर वसूली 100-150 रूपये कई एजेंसियों पर हो रही है, तो कहीं अनपढ़ व्यक्ति जो करीब एक वर्ष से गैस सिलेण्डर बुक नहीं कराये थे जब वह एजेंसी लेने जाते हैं तो पहले कहा जाता है कि केवाईसी कराओ उसके बाद जब बुकिंग के लिए कहा जाता है तो मालूम चलता है कि इनके नाम की गैस करीब दस दिन पहले ही डिलेवरी हो चुकी है। चिलचिलाती धूप में लगी कतारे, जिला प्रशासन मौन घरेलू गैस की भारी किल्लत के चलते आम उपभोक्ताओं के साथ साथ वैवाहिक आयोजनों की मुश्किले बढ़ गई है, आपूर्ति कम होने के कारण गैस एजेसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइने दिख रही है, पिछले दो महीनों से सिलेण्डर के लिए मची अफरा तफरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 63 गैस एजेंसियों के माध्यम से लगभग 6.75 लाख उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जाती है, वर्तमान में स्थिति यह है कि सुबह आठ बजे से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुट जाती है लेकिन घण्टों इंतिजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है, स्थानीय निवासियों के अनुसार बुकिंग के बावजूद समय पर सिलेण्डर नहीं मिल रहे हैं। क्या बोले पूर्ति अधिकारी? जिला पूर्ति अधिकारी डा० राकेश तिवारी ने बताया कि जनपद में प्रतिदिन लगभग 14,000 सिलेण्डरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कम्पनियों से केवल 11 से 12 हजार सिलेंण्डर ही प्राप्त हो पा रहे इस 2-3 हजार की कमी के कारण बैकलाग बढ़ता जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने दावा किया है कि तेल कम्पनियों से समन्वय स्थापित कर जल्द ही आपूर्ति सामान्य कर ली जायेगी। अब देखना है कि पूर्ति अधिकारी का दावा सही होगा या हवा हवाई साबित होगा।
- बाराबंकी। हाई-प्रोफाइल सोसाइटी शालीमार पैराडाइज में करोड़ों रुपये की चोरी रेलवे ठेकेदार के घर करोड़ों की चोरी, 3 करोड़ की ज्वेलरी, रिवॉल्वर और नकदी गायब1
- Post by राम जी दीक्षित पत्रकार1
- लखनऊ धू धू कर जली कार,कार में बैठे सभी लोग बाल बाल बचे सूचना पाकर मौके पर पुलिस व फायर ने आग पर पाया काबू...। मामला लखनऊ के इटौंजा टोल प्लाजा का बताया जा रहा है।1
- पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। क्या बंपर मतदान सत्ता विरोधी लहर है या फिर Mamata Banerjee के पक्ष में मजबूत समर्थन? महिला वोटर, SIR और मुस्लिम फैक्टर—इन सबके बीच चुनाव का असली संदेश क्या है, जानिए इस खास रिपोर्ट में। Record-breaking voter turnout in West Bengal has reshaped political equations. Is it anti-incumbency or strong support for Mamata Banerjee? With factors like women voters, SIR, and community voting, what does this high turnout really indicate? Watch the full analysis. #WestBengal #Voting #MamataBanerjee #TMC #BJP #Election #Trending #IndiaNews #Politics #Bengal1
- जालौन- भतीजे ने चाचा को शादी में नहीं बुलाया तो नाराज चाचा ने घर का मुख्य दरवाजा वेल्डिंग से सील करवा दिया, मामला शहर के मोहल्ला नारो भास्कर का है जहां माजिद की बारात झांसी गई थी और नजमा से निकाह के बाद जब वह दुल्हन को लेकर घर पहुंचा तो मुख्य द्वार वेल्डिंग से बंद मिला, दरवाजे पर ताला भी लटका था जिसे देख दुल्हन हैरान रह गई और वजह पूछी तो सामने आया कि शादी में निमंत्रण न मिलने से नाराज चाचा अजहर ने यह कदम उठाया, घटना के बाद मोहल्ले में चर्चा का माहौल है।1
- बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी को आज हम सब लोग याद कर रहे हैं। जो हजारों सालों का शोषण रहा है उसके खिलाफ सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए हम लोग लगातार संघर्ष करते रहेंगे अखिलेश यादव।1
- राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र स्थित घंटाघर इलाके में देर रात खुली दुकानों के बीच अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। बताया जा रहा है कि घंटाघर पर किन्नर समाज के लोगों के बीच आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट और झगड़े में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल व्यक्ति खून से लथपथ सड़क पर पड़ा रहा, जबकि मौके पर मौजूद भीड़ तमाशबीन बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि घंटाघर क्षेत्र में देर रात तक कई दुकानें खुली रहती हैं, जहां चाय की महफिलें और भीड़भाड़ बनी रहती है। आरोप है कि यही लापरवाही और अव्यवस्था भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। लोगों ने पुलिस व्यवस्था और देर रात तक दुकानों के संचालन पर सवाल उठाए हैं। यदि समय रहते सख्ती नहीं हुई तो घंटाघर क्षेत्र किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकता है।1
- डीएम ने दिया था चार दिन में बैकलाग खत्म करने का आदेश अब डण्ठे बस्ते में, बुकिंग के 15-20 दिन बाद भी आम जनता तरस रही गैस के लिए धारा लक्ष्य समाचार अब्दुल मुईद, बाराबंकी। जिले का ग्रामीण इलाक तो छोड़ दीजिए सबसे ज्यादा गैस की दिक्कत शहरवासियों को हो रही है, वहीं ब्लैक मार्केटिंग जमकर हो रही, घरेलू गैस सिलेण्डर दो हजार रूपये में बिक रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं को गैस आसानी से नहीं मिल पा रही है, लोगों पहले काफी मशक्कत के बाद बुकिंग होती है, उसके बाद कई चक्कर एजेंसी के लगाने के बाद पर्ची काटी जाती है, होम डिलेवरी सिस्टम अब तो बिल्कुल खत्म ही नजर आ रहा है। उपभोक्ताओं की दिक्कत पर पूर्ति विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है, कई बार फोन मिलाने पर सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है। शहर की ज्यादातर एजेंसियों पर दलालों का जमवाड़ा लगा रहता है, उपभोक्ता सुबह से लेकर शाम तक खड़े रहकर अपने नम्बर का इंतिजार किया करते हैं शाम को बताया जाता है कि आज लोड कम आया था, इसलिए अब कल आओ, इसी तरह करके हफ्तों दौड़ाया जाता है वहीं अगर कोई रसूखदार व्यक्ति आ जाता है तो यही एजेंसी संचालक उसको हाथों हाथ सिलेण्डर उपलब्ध करवा देते हैं। बड़े-बड़े होटल के कारखानों में घरेलू गैस जमकर प्रयोग हो रही है, वहां पर दर्जनों सिलेण्डर रात के अंधेरे में पहुंचाये जाते हैं औन मनमर्जी के दाम वसूले जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि जो सिलेण्डर एक हजार का मिलता था अब हमें अठ्ठारह सौ रूपये चुकाने पड़ते हैं, इसलिए दस रूपये वाला समोसा अब 12 रूपये में बेचना पड़ता है। वहीं रेलवे स्टेशन के पास बिकने वाली दस रूपये की चाय अब 12 रूपये में खुलेआम बिक रही है। सूत्रों से पता चला है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी जमकर कालाबाजारी कर रहे हैं और डिलेवरी के नाम पर सिलेण्डर महंगे दामों पर बेचकर जेबें भर रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि मेरे नम्बर पर ओटीपी नहीं आई लेकिन गैस डिलेवरी दिखा रहा है, केवाईसी के नाम पर जमकर वसूली 100-150 रूपये कई एजेंसियों पर हो रही है, तो कहीं अनपढ़ व्यक्ति जो करीब एक वर्ष से गैस सिलेण्डर बुक नहीं कराये थे जब वह एजेंसी लेने जाते हैं तो पहले कहा जाता है कि केवाईसी कराओ उसके बाद जब बुकिंग के लिए कहा जाता है तो मालूम चलता है कि इनके नाम की गैस करीब दस दिन पहले ही डिलेवरी हो चुकी है। चिलचिलाती धूप में लगी कतारे, जिला प्रशासन मौन घरेलू गैस की भारी किल्लत के चलते आम उपभोक्ताओं के साथ साथ वैवाहिक आयोजनों की मुश्किले बढ़ गई है, आपूर्ति कम होने के कारण गैस एजेसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी लाइने दिख रही है, पिछले दो महीनों से सिलेण्डर के लिए मची अफरा तफरी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 63 गैस एजेंसियों के माध्यम से लगभग 6.75 लाख उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जाती है, वर्तमान में स्थिति यह है कि सुबह आठ बजे से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जुट जाती है लेकिन घण्टों इंतिजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ता है, स्थानीय निवासियों के अनुसार बुकिंग के बावजूद समय पर सिलेण्डर नहीं मिल रहे हैं। क्या बोले पूर्ति अधिकारी? जिला पूर्ति अधिकारी डा० राकेश तिवारी ने बताया कि जनपद में प्रतिदिन लगभग 14,000 सिलेण्डरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कम्पनियों से केवल 11 से 12 हजार सिलेंण्डर ही प्राप्त हो पा रहे इस 2-3 हजार की कमी के कारण बैकलाग बढ़ता जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने दावा किया है कि तेल कम्पनियों से समन्वय स्थापित कर जल्द ही आपूर्ति सामान्य कर ली जायेगी। अब देखना है कि पूर्ति अधिकारी का दावा सही होगा या हवा हवाई साबित होगा।2