“51 लाख की DMF योजना में बड़ा खेल? समयसीमा बीती, हितग्राही अब भी इंतज़ार में” जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत नेवार में वन अधिकार प्रमाणपत्र धारकों को कृषि उपकरण वितरण के नाम पर 51.41 लाख रुपये की डी एम एफ राशि स्वीकृत हुई थी। दस्तावेज़ बताते हैं कि इस योजना का लाभ 563 हितग्राहियों को मिलना था और पूरा कार्य मात्र 9 माह में समाप्त किया जाना था। लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी योजना अधूरी है और पोर्टल पर स्थिति अब भी “प्रगति पर” दर्ज है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 51.41 लाख में से 30.84 लाख रुपये पहले ही खर्च किये जा चुके हैं। जब लगभग 60 प्रतिशत राशि व्यय हो चुकी है तो स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि कितने हितग्राहियों को वास्तव में उपकरण मिले। क्या सैकड़ों किसानों तक सामग्री पहुँची या कागज़ों में भुगतान दिखाकर योजना को अधर में छोड़ दिया गया। यदि वितरण हुआ है तो लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। यदि नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया गया। 9 माह में पूरा होने वाला कार्य तीन वर्ष बाद भी अधूरा क्यों है, यह सवाल सीधे तौर पर कार्यान्वयन एजेंसी की जवाबदेही पर खड़ा होता है। क्या निविदा प्रक्रिया पारदर्शी थी, किस एजेंसी को आपूर्ति का कार्य दिया गया, किस तिथि को भुगतान हुआ और शेष 20.57 लाख रुपये किस स्थिति में हैं — इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर अब तक सामने नहीं आए हैं। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनी डी एम एफ निधि यदि समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से खर्च न हो तो यह न केवल प्रशासनिक शिथिलता बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता की ओर भी संकेत करता है। सैकड़ों वन अधिकार धारक हितग्राहियों की उम्मीदें तीन साल से टंगी हैं और सरकारी रिकॉर्ड में योजना अब भी “जारी” बताई जा रही है। ऐसे में यह मामला केवल विलंब का नहीं बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी का बन चुका है।
“51 लाख की DMF योजना में बड़ा खेल? समयसीमा बीती, हितग्राही अब भी इंतज़ार में” जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत नेवार में वन अधिकार प्रमाणपत्र धारकों को कृषि उपकरण वितरण के नाम पर 51.41 लाख रुपये की डी एम एफ राशि स्वीकृत हुई थी। दस्तावेज़ बताते हैं कि इस योजना का लाभ 563 हितग्राहियों को मिलना था और पूरा कार्य मात्र 9 माह में समाप्त किया जाना था। लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी योजना अधूरी है और पोर्टल पर स्थिति अब भी “प्रगति पर” दर्ज है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 51.41 लाख में से 30.84 लाख रुपये पहले ही खर्च किये जा चुके हैं। जब लगभग 60 प्रतिशत राशि व्यय हो चुकी है तो स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि कितने हितग्राहियों को वास्तव में उपकरण मिले। क्या सैकड़ों किसानों तक सामग्री पहुँची या कागज़ों में भुगतान दिखाकर योजना को अधर में छोड़ दिया गया। यदि वितरण हुआ है तो लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। यदि नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया गया। 9 माह में पूरा होने वाला कार्य तीन वर्ष बाद भी अधूरा क्यों है, यह सवाल सीधे तौर पर कार्यान्वयन एजेंसी की जवाबदेही पर खड़ा होता है। क्या निविदा प्रक्रिया पारदर्शी थी, किस एजेंसी को आपूर्ति का कार्य दिया गया, किस तिथि को भुगतान हुआ और शेष 20.57 लाख रुपये किस स्थिति में हैं — इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर अब तक सामने नहीं आए हैं। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनी डी एम एफ निधि यदि समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से खर्च न हो तो यह न केवल प्रशासनिक शिथिलता बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता की ओर भी संकेत करता है। सैकड़ों वन अधिकार धारक हितग्राहियों की उम्मीदें तीन साल से टंगी हैं और सरकारी रिकॉर्ड में योजना अब भी “जारी” बताई जा रही है। ऐसे में यह मामला केवल विलंब का नहीं बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी का बन चुका है।
- ग्राम पंचायत कोरोमा के आश्रित ग्राम कचांदी के ग्रामीण कलेक्टरेट कार्यालय पहुच कर ज्ञापन सौपा । ज्ञापन देने पहुचे ग्रामीणों का कहना है कि उन्हे पिछले तीन महीनों से शासकीय योजना अंतर्गत मिलने वाला राशन नहीं मिला है दुकान संचालक द्वारा फिंगरप्रिंट लेकर भी चावल नहीं दिया जा रहा जिससे समस्या हो रही । ग्रामीणों ने मांग की है की जल्द से जल्द उन्हे राशन दिया जाना चाहिए ।1
- अंबिकापुर | 18 फरवरी 2026 सरगुजा जिले के थाना गांधीनगर क्षेत्र में सूने मकान से हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खरीददार आरोपी सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सोने-चांदी के जेवरात समेत लगभग 1 लाख 30 हजार रुपये का सामान जब्त किया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रार्थी अनिल कुमार दास परिवार सहित बाहर दर्शन पर गए थे, इसी दौरान अज्ञात चोरों ने उनके घर का ताला तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। प्रकरण दर्ज कर विवेचना के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिन्होंने चोरी करना स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर चोरी का सामान बरामद किया गया। जांच में सामने आया कि चोरी किए गए जेवर अंबिकापुर के एक सर्राफा व्यापारी को बेचे गए थे। इसके बाद जेवर खरीदने वाले दुकानदार को भी गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।3
- हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षकों पर VSK ऐप का दबाव गलत, दंडात्मक कार्रवाई और अनिवार्यता पर लगाई ‘अंतरिम रोक’ छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और निगरानी के लिए लागू किए गए ‘VSK ऐप’ को लेकर चल रहे विवाद में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक को उसकी इच्छा के विरुद्ध व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर थर्ड-पार्टी ऐप इंस्टॉल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता शिक्षक के खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। निजी संपत्ति और निजता का अधिकार प्रमुख आधार यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने सरकार के उस फरमान को चुनौती दी, जिसमें शिक्षकों के निजी मोबाइल को शासकीय कार्य के लिए उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने स्वयं कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दो टूक कहा कि शिक्षकों का व्यक्तिगत मोबाइल उनकी निजी संपत्ति है, जिसे सरकार बिना सहमति के ‘ऑफिसियल टूल’ की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकती। साथ ही, थर्ड-पार्टी ऐप से डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता (Privacy) के उल्लंघन का गंभीर खतरा बना रहता है। सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर 14 दिनों के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य न किया जाए और न ही इस आधार पर उसके वेतन या सेवा रिकॉर्ड पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाला जाए। डिजिटल प्रशासन के दौर में मील का पत्थर कानूनी गलियारों में इस आदेश को डिजिटल प्रशासन और कर्मचारी अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार किसी ऐप को अनिवार्य करना चाहती है, तो उसे संसाधन (मोबाइल और डेटा) भी स्वयं उपलब्ध कराने चाहिए। फिलहाल यह राहत तकनीकी रूप से याचिकाकर्ता तक सीमित है, लेकिन आने वाली सुनवाई में होने वाला फैसला प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य और कार्यप्रणाली की दिशा तय करेगा।1
- बनगांव बी में महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित भव्य मेले में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने मंदिर विकास के लिए 20 लाख रुपये की घोषणा की। ग्राम प्रतिनिधियों ने भी समिति को आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की, वहीं बागबहार पुलिस की मुस्तैदी से कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा। 📍 बनगांव बी | जशपुर पूरी खबर देखें – Jashpur Times1
- रात्रि कालीन टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता घोघरी में 17 फरवरी से हुआ शुभारंभ।1
- Post by Gautam karsh1
- कोरबा जिले के उरगा थाना अंतर्गत ग्राम धमनागुड़ी से एक दुखद खबर सामने आई है। गांव की एक युवती ने अज्ञात कारणों से अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही उरगा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।1
- अंबिकापुर | 18 फरवरी 2026 सरगुजा जिले में पुलिस ने गांजा तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए दो अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थाना कोतवाली पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कब्जे से 21 किलो 400 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 4 लाख 28 हजार रुपये बताई जा रही है। साथ ही 3090 रुपये नगद भी जब्त किए गए हैं। पुलिस को 17 फरवरी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नए बस स्टैंड के पीछे गुमटी के सामने दो व्यक्ति सफेद प्लास्टिक बोरे में गांजा रखकर बिक्री के लिए ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान अमित शर्मा (21 वर्ष), निवासी मिर्जापुर, उत्तरप्रदेश तथा देवचंद यादव (20 वर्ष), निवासी कैमूर, बिहार के रूप में बताई। तलाशी के दौरान प्लास्टिक बोरे से 21.400 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे उक्त अवैध मादक पदार्थ उड़ीसा से खरीदकर उत्तर प्रदेश में बिक्री के लिए ले जा रहे थे। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 107/26, धारा 20(सी) एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकांत सिन्हा, साइबर सेल प्रभारी सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा सहित कोतवाली व साइबर सेल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और खरीद-फरोख्त में संलिप्त लोगों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।2