आजमगढ़ के तहसील दिवस से एक 'ज्ञानवर्धक' नजारा सामने आया है, जहाँ एक दरोगा जी अपनी टोपी के भीतर मोबाइल फोन में झाँकते हुए पाए गए। इस दृश्य को देखकर लोग कटाक्ष कर रहे हैं कि दरोगा जी शायद 'गुप्त फाइलों' का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन लेखक के अनुसार वे 'डिजिटल युग' के सच्चे साधक प्रतीत होते हैं। यह 'एकाग्रता की पराकाष्ठा' है कि दरोगा जी ने पुराने ऋषि-मुनियों की गुफाओं जैसी अपनी टोपी को ही तपस्या का स्थान बना लिया। तहसील दिवस की भीड़ और फरियादियों की व्यथा के शोरगुल के बीच, टोपी के साये में मोबाइल पर ध्यान लगाना एक 'स्मार्ट पुलिसिंग' का नया आयाम है, जहाँ फरियादी अपनी समस्या बता रहे होंगे और दरोगा जी शायद रीलों या मैसेज की दुनिया में खोए होंगे। विडंबना तो यह है कि दरोगा जी आमतौर पर दुनिया को 'टोपी पहनाने' के लिए जाने जाते हैं, पर इस बार किसी ने वीडियो बनाकर उन्हें ही 'डिजिटल टोपी' पहना दी है। दरोगा जी की इस 'मौज' का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना से यह सीख मिलती है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान टोपी का इस्तेमाल केवल सिर ढकने के लिए ही नहीं, बल्कि उसके 'मल्टी-परपस' उपयोग के तरीके खोजे जा सकते हैं। जमाना बदल गया है, अब आप किसी को टोपी पहनाएं, उससे पहले ही कोई आपको 'वायरल टोपी' पहना देगा। अंत में, यह कटाक्ष भी किया गया है कि अगले तहसील दिवस पर दरोगा जी को कम से कम 'हेडफोन' भी टोपी के अंदर सेट कर लेने चाहिए, ताकि मोबाइल की आवाज़ बाहर न आए। यह सवाल उठाया गया है कि क्या दरोगा जी वाकई कोई ज़रूरी काम कर रहे थे या यह सिर्फ 'स्मार्टफोन' के मोह का परिणाम था।
आजमगढ़ के तहसील दिवस से एक 'ज्ञानवर्धक' नजारा सामने आया है, जहाँ एक दरोगा जी अपनी टोपी के भीतर मोबाइल फोन में झाँकते हुए पाए गए। इस दृश्य को देखकर लोग कटाक्ष कर रहे हैं कि दरोगा जी शायद 'गुप्त फाइलों' का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन लेखक के अनुसार वे 'डिजिटल युग' के सच्चे साधक प्रतीत होते हैं। यह 'एकाग्रता की पराकाष्ठा' है कि दरोगा जी ने पुराने ऋषि-मुनियों की गुफाओं जैसी अपनी टोपी को ही तपस्या का स्थान बना लिया। तहसील दिवस की भीड़ और फरियादियों की व्यथा के शोरगुल के बीच, टोपी के साये में मोबाइल पर ध्यान लगाना एक 'स्मार्ट पुलिसिंग' का नया आयाम है, जहाँ फरियादी अपनी समस्या बता रहे होंगे और दरोगा जी शायद रीलों या मैसेज की दुनिया में खोए होंगे। विडंबना तो यह है कि दरोगा जी आमतौर पर दुनिया को 'टोपी पहनाने' के लिए जाने जाते हैं, पर इस बार किसी ने वीडियो बनाकर उन्हें ही 'डिजिटल टोपी' पहना दी है। दरोगा जी की इस 'मौज' का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना से यह सीख मिलती है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान टोपी का इस्तेमाल केवल सिर ढकने के लिए ही नहीं, बल्कि उसके 'मल्टी-परपस' उपयोग के तरीके खोजे जा सकते हैं। जमाना बदल गया है, अब आप किसी को टोपी पहनाएं, उससे पहले ही कोई आपको 'वायरल टोपी' पहना देगा। अंत में, यह कटाक्ष भी किया गया है कि अगले तहसील दिवस पर दरोगा जी को कम से कम 'हेडफोन' भी टोपी के अंदर सेट कर लेने चाहिए, ताकि मोबाइल की आवाज़ बाहर न आए। यह सवाल उठाया गया है कि क्या दरोगा जी वाकई कोई ज़रूरी काम कर रहे थे या यह सिर्फ 'स्मार्टफोन' के मोह का परिणाम था।
- बस्ती में मंगलवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश की बस्ती इकाई द्वारा एक शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसे जिले के प्रमुख व्यापारी आयोजनों में से एक बताया गया। खचाखच भरे सभागार में जिले भर से आए व्यापारियों, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। इस पूरे आयोजन के दौरान व्यापारी एकजुटता, संगठन विस्तार और व्यापारिक हितों के संरक्षण का संकल्प प्रमुख रूप से देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि व्यापारी शिरोमणि लोकेश अग्रवाल थे, जबकि इसकी अध्यक्षता उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्ती मंडल अध्यक्ष डॉ. हरिमूर्ति सिंह 'मनोज' ने की। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. मनोज ने बस्ती शहर की वर्षों पुरानी वाहन पार्किंग समस्या और पटरी व ठेला व्यवसायियों के लिए स्थायी व्यापारिक स्थल उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रस्ताव देकर विस्तृत कार्ययोजना शासन को भेजी जा चुकी है और विशिष्ट अतिथि राणा दिनेश प्रताप सिंह से शासन स्तर पर प्रभावी पहल कर इस योजना को धरातल पर उतारने में सहयोग की अपील की। जिला अध्यक्ष राकेश सिंह ने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि संगठन हर स्तर पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करेगा। इस अवसर पर किशन सिंह ने पूर्व संगठन छोड़कर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश की सदस्यता ग्रहण की और उन्हें बस्ती मंडल का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया। विशिष्ट अतिथि राणा दिनेश प्रताप सिंह ने व्यापारियों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने और व्यापारिक समस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने का भरोसा दिलाया। मुख्य अतिथि एवं प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी समाज प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और संगठन उनके सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने नवमनोनीत पदाधिकारियों – प्रदेश, मंडल, जिला, नगर, युवा, महिला और उद्योग मंच के प्रतिनिधियों को संगठन के प्रति निष्ठा और व्यापारी हितों की रक्षा की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान प्रदेश एवं बस्ती मंडल की टीम ने डॉ. हरिमूर्ति सिंह 'मनोज' के नेतृत्व में सामूहिक शपथ ली, वहीं जिला इकाई ने जिला अध्यक्ष राकेश सिंह, नगर इकाई ने नगर अध्यक्ष राणा महेंद्र प्रताप, युवा मोर्चा ने जिला युवा अध्यक्ष कुलदीप श्रीवास्तव, महिला मोर्चा ने वंदना वर्मा तथा उद्योग मंच ने कमलेश चौधरी के नेतृत्व में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। कार्यक्रम के अंत में प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन व्यापारी समाज की आवाज को और अधिक मजबूती से उठाने के लिए निरंतर सक्रिय रहेगा। जिले भर से आए व्यापारियों की भारी भागीदारी ने संगठन की एकजुटता और प्रभाव का स्पष्ट संदेश दिया।1
- बस्ती जिले में स्थित खमरिया चौराहे की हालत बेहद खराब बताई गई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस चौराहे पर अक्सर ऐसी ही दयनीय स्थिति देखने को मिलती है।1
- बस्ती जिले के बस्ती-सदर ब्लॉक के अंतर्गत कोइलपुरा में कम्पोजिट विद्यालय स्थित है।4
- आजमगढ़ के तहसील दिवस से एक 'ज्ञानवर्धक' नजारा सामने आया है, जहाँ एक दरोगा जी अपनी टोपी के भीतर मोबाइल फोन में झाँकते हुए पाए गए। इस दृश्य को देखकर लोग कटाक्ष कर रहे हैं कि दरोगा जी शायद 'गुप्त फाइलों' का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन लेखक के अनुसार वे 'डिजिटल युग' के सच्चे साधक प्रतीत होते हैं। यह 'एकाग्रता की पराकाष्ठा' है कि दरोगा जी ने पुराने ऋषि-मुनियों की गुफाओं जैसी अपनी टोपी को ही तपस्या का स्थान बना लिया। तहसील दिवस की भीड़ और फरियादियों की व्यथा के शोरगुल के बीच, टोपी के साये में मोबाइल पर ध्यान लगाना एक 'स्मार्ट पुलिसिंग' का नया आयाम है, जहाँ फरियादी अपनी समस्या बता रहे होंगे और दरोगा जी शायद रीलों या मैसेज की दुनिया में खोए होंगे। विडंबना तो यह है कि दरोगा जी आमतौर पर दुनिया को 'टोपी पहनाने' के लिए जाने जाते हैं, पर इस बार किसी ने वीडियो बनाकर उन्हें ही 'डिजिटल टोपी' पहना दी है। दरोगा जी की इस 'मौज' का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना से यह सीख मिलती है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान टोपी का इस्तेमाल केवल सिर ढकने के लिए ही नहीं, बल्कि उसके 'मल्टी-परपस' उपयोग के तरीके खोजे जा सकते हैं। जमाना बदल गया है, अब आप किसी को टोपी पहनाएं, उससे पहले ही कोई आपको 'वायरल टोपी' पहना देगा। अंत में, यह कटाक्ष भी किया गया है कि अगले तहसील दिवस पर दरोगा जी को कम से कम 'हेडफोन' भी टोपी के अंदर सेट कर लेने चाहिए, ताकि मोबाइल की आवाज़ बाहर न आए। यह सवाल उठाया गया है कि क्या दरोगा जी वाकई कोई ज़रूरी काम कर रहे थे या यह सिर्फ 'स्मार्टफोन' के मोह का परिणाम था।1
- शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, जो एक शास्त्रीय और लोक गायक हैं, उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग में एक पंजीकृत कलाकार के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। वे जनपद संत कबीर नगर से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए पूर्व प्रत्याशी रह चुके हैं और भावी प्रत्याशी भी हैं।1
- एक भक्त ने अपने सभी परिजनों के साथ माई महारानी तरकुलही देवी के दर्शन किए। इस अवसर पर, उन्होंने 'जय माता दी' का उद्घोष करते हुए माता रानी से आशीर्वाद माँगा और यह कामना की कि उनका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे।1
- संतकबीरनगर जनपद में पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से, थाना महुली पुलिस की कम्युनिटी पुलिसिंग यूनिट ने बुधवार, 08 जुलाई को क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में पहुंचकर वृद्धजनों से मुलाकात की। इस दौरान पुलिस टीम ने उनके घर जाकर कुशलक्षेम जानी, उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें आवश्यक सहायता व मार्गदर्शन भी प्रदान किया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान में, पुलिसकर्मियों ने वृद्ध नागरिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे वृद्धावस्था पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी उपायों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या, उत्पीड़न या आपात स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करने के लिए जागरूक किया। वृद्धजनों ने पुलिस की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का उनके बीच पहुंचना सुरक्षा का एहसास कराने के साथ-साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग में विश्वास तथा आत्मबल भी बढ़ाता है। महुली पुलिस का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ संवेदनशील संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान करना भी है, जिससे कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच सहयोग, विश्वास और आत्मीयता और अधिक मजबूत हो सके और एक सुरक्षित, जागरूक व सशक्त समाज का निर्माण हो सके।1
- बस्ती जिले का कप्तानगंज थाना इन दिनों एक युवती द्वारा बनाए गए रील के वायरल होने के बाद चर्चा का विषय बन गया है। यह रील कथित तौर पर थाना गेट पर बनाया गया है, जिसके चलते यह मामला सुर्खियों में आया है।1