झारखंड सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है, जिसके तहत अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में आधुनिक मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को उनके ही जिले में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी और उन्हें समय पर उपचार मिल सकेगा। इन अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू), प्रसूति कक्ष और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह मुस्तैद रहेंगी। सरकार का लक्ष्य इसके माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है। इस योजना से खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार का मानना है कि मजबूत स्वास्थ्य ढांचा ही समग्र विकास का असली आधार है। इसी विचार के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना को चरणबद्ध तरीके से सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे आम जनता को सुलभ, प्रभावी और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं प्राप्त हो सकें।
झारखंड सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है, जिसके तहत अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में आधुनिक मातृ एवं शिशु अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को उनके ही जिले में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी और उन्हें समय पर उपचार मिल सकेगा। इन अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू), प्रसूति कक्ष और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह मुस्तैद रहेंगी। सरकार का लक्ष्य इसके माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है। इस योजना से खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार का मानना है कि मजबूत स्वास्थ्य ढांचा ही समग्र विकास का असली आधार है। इसी विचार के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना को चरणबद्ध तरीके से सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे आम जनता को सुलभ, प्रभावी और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं प्राप्त हो सकें।
- झारखंड के गढ़वा में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुधीर चंद्रवंशी ने अपनी 10 डिसमिल जमीन दान कर दी है।1
- गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत सोनदाग पंचायत के भलुआनी गोटा टोला गांव में शनिवार अपराह्न 3:00 बजे 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम के तहत एक विधिक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न कानूनी अधिकारों और सामाजिक कुरीतियों से संबंधित कानूनों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में मौजूद पारा लीगल वॉलंटियर (पीएलवी) राजेश कुमार चौधरी ने ग्रामीणों को बाल विवाह, नशाखोरी, डायन प्रथा, बाल मजदूरी, महिलाओं व बच्चों के अधिकार तथा निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह और बाल मजदूरी कानूनन अपराध हैं और इनके दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने लोगों से डायन प्रथा जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने और नशाखोरी से दूर रहने का आह्वान किया। राजेश कुमार चौधरी ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी कानूनी विवाद या अन्याय की स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता ली जा सकती है। इस कार्यक्रम के दौरान मनोज कुमार सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिनका कानूनी प्रक्रिया के अनुसार समाधान बताया गया। ग्रामीणों ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे कानून के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।1
- गढ़वा में चर्चा बटोर रहे एक वीडियो और भाषण में, डॉक्टर साहब द्वारा NEET पास एक छात्रा को कॉलेज की टाइमिंग के दौरान बेहद सरल तरीके से भारत के संस्कार और सभ्यता के बारे में समझाया गया है। इस वायरल वीडियो में डॉ. कुमार विश्वास, डॉ. विकास दिव्यकीर्ति या अन्य प्रसिद्ध शिक्षकों और अनिरुद्धाचार्य जी व डॉ. अर्चना प्रिया जी जैसे कथावाचकों के प्रेरक विचारों की सीख मिलती है, जो अक्सर छात्रों को जीवन-मूल्यों का मार्गदर्शन देते हैं। इसके तहत शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार और बड़ों के आदर को बेहद जरूरी बताया गया है। इसमें भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं का महत्व समझाते हुए माता-पिता, विशेषकर पिता की सहमति और आशीर्वाद से विवाह करने की महत्ता बताई गई है। इसके अलावा, शिक्षकों द्वारा छात्रों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि वे अपना कीमती समय व्यर्थ के प्रेम प्रसंगों और भटकाव में बर्बाद करने के बजाय अपना पूरा ध्यान करियर, शिक्षा और अपने लक्ष्यों पर केंद्रित करें।1
- लातेहार में मानव संसाधन विकास कार्यक्रम के तहत 32वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) द्वारा आयोजित 25 दिवसीय "ऑपरेटिंग सिस्टम (बेसिक कंप्यूटर कोर्स)" का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 जून से 11 जुलाई 2026 तक बी-समवाय, लातेहार में आयोजित किया गया था। इस समापन समारोह में वार्ड पार्षद, मीडिया प्रतिनिधियों और एसएसबी के अधिकारियों व जवानों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने इस पहल को युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी और बेहद उपयोगी बताया। इस प्रशिक्षण में लातेहार जिले के डुरुवा, धनकारा, कल्याणपुर, गुरगु और आसपास के क्षेत्रों से कुल 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान इन प्रतिभागियों को फाइल प्रबंधन, इंटरनेट, नेटवर्किंग, डिवाइस कंट्रोल, सुरक्षा प्रणाली, एमएस वर्ड, पावर पॉइंट और एमएस एक्सेल जैसे तकनीकी विषयों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। समारोह के दौरान 32वीं वाहिनी के कमांडेंट राजेश सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत आधार है। उन्होंने रेखांकित किया कि एसएसबी द्वारा नक्सल प्रभावित और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि तकनीक और जनकल्याण से जुड़े कई कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र सौंपे गए और एसएसबी ने भविष्य में भी ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का आश्वासन दिया।1
- लातेहार में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 32वीं वाहिनी द्वारा मानव संसाधन विकास कार्यक्रम के तहत आयोजित 25 दिवसीय "ऑपरेटिंग सिस्टम (बेसिक कंप्यूटर कोर्स)" का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। कमांडेंट राजेश सिंह के नेतृत्व में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 जून से बी-समवाय, लातेहार में चलाया जा रहा था। इस विशेष कोर्स का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, जिसमें डुरूवा, धनकारा और उसके आसपास के गांवों के कुल 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस कोर्स के दौरान युवाओं को यूजर फ्रेंडली इंटरफेस, फाइल प्रबंधन, मल्टीटास्किंग, डिवाइस कंट्रोल और इंटरनेट की बुनियादी जानकारियों के साथ-साथ एम.एस. वर्ड, पावर पॉइंट व एक्सेल का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर कमांडेंट राजेश सिंह ने कंप्यूटर ज्ञान को डिजिटल युग में आत्मनिर्भर भविष्य की कुंजी बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एसएसबी द्वारा नक्सल क्षेत्रों में कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और चिकित्सा शिविर जैसे अन्य कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 32वीं वाहिनी ने भविष्य में भी ऐसे जन कल्याणकारी कार्यक्रमों को जारी रखने का आश्वासन दिया है।1
- लातेहार जिले के महुआडार प्रखंड अंतर्गत दुरूप ग्राम पंचायत में बसे अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति बहुल नीचे दोना ग्राम के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव में नल-जल योजना की जलमीनार खड़ी है और बिजली के पोल, तार व ट्रांसफार्मर भी लगाए गए हैं, लेकिन यह सारा ढांचा पूरी तरह से बेकार पड़ा हुआ है। आधुनिक युग के इस दौर में भी यहाँ के लोग पानी और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए तरसने को मजबूर हैं। गांव में सिंचाई की कोई सुविधा उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीण पूरी तरह से वर्षा आधारित खेती के भरोसे हैं। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार का कोई साधन न होने की वजह से ग्रामीणों को लगातार पलायन करना पड़ रहा है।1
- झारखंड के गढ़वा में आयोजित एक भरी सभा के बीच कांग्रेस नेता सुरेंद्र तिवारी ने सवाल उठाते हुए पूछा कि यहां से कोई चुनाव क्यों नहीं लड़ता है।1
- चिनिया थाना क्षेत्र के चिखुरापत्थर गांव के श्रद्धालुओं से भरी एक अर्टिगा कार छत्तीसगढ़ के बाबा बक्चराज कुंवर धाम में पूजा-अर्चना कर लौटते समय हादसे का शिकार हो गई। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे छत्तीसगढ़ के जंगल क्षेत्र में कार अचानक अनियंत्रित होकर एक पेड़ से जा टकराई, जिससे कार सवार कई लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना में करीब 8 से 10 लोगों के घायल होने की प्रारंभिक सूचना मिल रही है। स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से सभी घायलों को एंबुलेंस से नजदीकी अस्पताल भेजा गया है, जिनमें चिखुरापत्थर गांव के रामचंद्र तुरिया भी शामिल बताए जा रहे हैं। गाड़ी गांव के ही गुडन यादव चला रहे थे। हादसे की पूरी और आधिकारिक जानकारी तथा घायलों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि प्रशासन द्वारा की जानी अभी बाकी है, वहीं घटना के बाद से परिजनों और पूरे गांव में चिंता का माहौल है।1