उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद के उझानी में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी हैं। जहां एक ओर योगी-मोदी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर अरबों-खरबों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर उझानी का सरकारी अस्पताल पूरी तरह राम भरोसे चल रहा है। अस्पताल के चिकित्साधीक्षक लगातार सुधार का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से सहयोग न मिलने की वजह से इसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पूरा अस्पताल इस समय मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले मेडिकल विद्यार्थियों के सहारे चल रहा है। अस्पताल में बदहाली का आलम यह है कि यहां वर्षों से कोई नेत्र चिकित्सक तैनात नहीं हो सका है और न ही यहां कोई एमबीबीएस डॉक्टर या सर्जन नियुक्त किया गया है। इसके चलते इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है। मामले में चिकित्साधीक्षक देवेंद्र कुमार ने बताया कि पूरे जनपद में ही नेत्र चिकित्सक नहीं हैं। फील्ड में काम कर रहे चिकित्सक केवल शनिवार को बैठते हैं, बाकी दिन नेत्र ओपीडी बंद रहती है। अस्पताल की इस बदहाली और अव्यवस्थाओं से मरीजों में भारी नाराजगी है। मरीजों का कहना है कि उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा और अच्छा इलाज नहीं मिल पा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उझानी अस्पताल में योग्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जल्द तैनाती करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद के उझानी में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी हैं। जहां एक ओर योगी-मोदी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर अरबों-खरबों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर उझानी का सरकारी अस्पताल पूरी तरह राम भरोसे चल रहा है। अस्पताल के चिकित्साधीक्षक लगातार सुधार का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से सहयोग न मिलने की वजह से इसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पूरा अस्पताल इस समय मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले मेडिकल विद्यार्थियों के सहारे चल रहा है। अस्पताल में बदहाली का आलम यह है कि यहां वर्षों से कोई नेत्र चिकित्सक तैनात नहीं हो सका है और न ही यहां कोई एमबीबीएस डॉक्टर या सर्जन नियुक्त किया गया है। इसके चलते इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है। मामले में चिकित्साधीक्षक देवेंद्र कुमार ने बताया कि पूरे जनपद में ही नेत्र चिकित्सक नहीं हैं। फील्ड में काम कर रहे चिकित्सक केवल शनिवार को बैठते हैं, बाकी दिन नेत्र ओपीडी बंद रहती है। अस्पताल की इस बदहाली और अव्यवस्थाओं से मरीजों में भारी नाराजगी है। मरीजों का कहना है कि उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा और अच्छा इलाज नहीं मिल पा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उझानी अस्पताल में योग्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जल्द तैनाती करने की मांग की है।
- उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद के उझानी में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी हैं। जहां एक ओर योगी-मोदी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर अरबों-खरबों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर उझानी का सरकारी अस्पताल पूरी तरह राम भरोसे चल रहा है। अस्पताल के चिकित्साधीक्षक लगातार सुधार का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से सहयोग न मिलने की वजह से इसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पूरा अस्पताल इस समय मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले मेडिकल विद्यार्थियों के सहारे चल रहा है। अस्पताल में बदहाली का आलम यह है कि यहां वर्षों से कोई नेत्र चिकित्सक तैनात नहीं हो सका है और न ही यहां कोई एमबीबीएस डॉक्टर या सर्जन नियुक्त किया गया है। इसके चलते इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है। मामले में चिकित्साधीक्षक देवेंद्र कुमार ने बताया कि पूरे जनपद में ही नेत्र चिकित्सक नहीं हैं। फील्ड में काम कर रहे चिकित्सक केवल शनिवार को बैठते हैं, बाकी दिन नेत्र ओपीडी बंद रहती है। अस्पताल की इस बदहाली और अव्यवस्थाओं से मरीजों में भारी नाराजगी है। मरीजों का कहना है कि उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा और अच्छा इलाज नहीं मिल पा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी से उझानी अस्पताल में योग्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों की जल्द तैनाती करने की मांग की है।1
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- उत्तर प्रदेश के बदायूं जिला पुरुष अस्पताल में वैक्सीनेशन के बाद एक 4 माह के मासूम की मौत का दुखद मामला सामने आया है। ग्राम कुलुआढेर निवासी कुंवरपाल अपने चार माह के बेटे को नियमित टीकाकरण के लिए अस्पताल लेकर आए थे। परिजनों का गंभीर आरोप है कि वहां तैनात एएनएम (ANM) सुमन ने बच्चे को एक ही बार में कई वैक्सीन लगा दीं, जिसके बाद मासूम की तबीयत काफी बिगड़ गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे बच्चे के इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन आखिरकार मासूम की जान नहीं बच सकी। बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों ने एएनएम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस पर पक्ष आना बाकी है।4
- बदायूं के बिसौली नगर पालिका अध्यक्ष अबरार अहमद ने आगामी कांवड़ यात्रा के मद्देनजर नगर की सफाई, स्ट्रीट लाइट और पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की है। बुधवार को आयोजित एक बैठक के दौरान पालिका अध्यक्ष ने पूजा स्थलों पर नियमित साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कांवड़ मार्ग पर नियमित रूप से कूड़ा उठाने और 24 घंटे सफाई व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है। इसके अलावा, मार्ग में शुद्ध पेयजल, पर्याप्त रोशनी, सार्वजनिक शौचालयों की दिन में कई बार सफाई और कीटाणुनाशक दवाओं के छिड़काव के निर्देश भी दिए गए हैं। पालिका अध्यक्ष अबरार अहमद ने अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए साफ कहा कि कांवड़ यात्रा से जुड़े सभी कार्य समय सीमा के भीतर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे होने चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही, ढिलाई या उदासीनता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी और अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में पालिका की टीम तत्काल एक्शन मोड में आकर श्रद्धालुओं की समस्याओं का समाधान करेगी। इस बैठक के दौरान प्रधान लिपिक मशकूर खान, लिपिक राजीव कुमार, यशोदा नंदन, सफाई नायक राजेश बाबू, अजय कुमार, विक्रम और शिवम मुख्य रूप से उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश के बदायूं में 15 जुलाई को भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने राष्ट्रीय आह्वान पर मालवीय आवास गृह पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष साहू के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान सदर तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित एक सात सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार (फ्री ट्रेड) समझौते का कड़ा विरोध करते हुए इसे देश के खिलाफ बताया। धरने को संबोधित करते हुए देश बचाओ मोर्चा के यार्वेंद्र यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील देश के किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने इस समझौते को किसानों का 'डेथ वारंट' करार दिया जो किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस समझौते को तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया, तो देश बचाओ मोर्चा पूरे देश में व्यापक जनआंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी। इसके अलावा, जिला महासचिव वीयीशु दास ने बदायूं के विकासखंड उसावा के ग्राम टिकरा में लंबे समय से बंद पड़े आंगनबाड़ी केंद्र का मुद्दा उठाया। उन्होंने इसकी जांच कराकर इसे दोबारा शुरू करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में महेंद्र पाल, भगवान दास, नूरुद्दीन, रजनेश उपाध्याय, शिवम शर्मा, रामवीर सिंह, नन्ने शर्मा, शिशपाल सागर, अशोक, मुंशी, वलवीर, मोर सिंह, धर्मेंद्र सिंह आर्य और जान मोहम्मद सहित कई लोग मौजूद रहे।1
- बदायूं जिले के सहसवान अंतर्गत रामपुर से आज की ताजा खबर सामने आ रही है। यहाँ हवा नहीं पड़ रही है और दो किलोमीटर तक का क्षेत्र बंद है।1
- बदायूं के वजीरगंज थाना क्षेत्र के बगरैन कस्बे में सरकारी रास्ते को लेकर खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें बीच सड़क पर जमकर लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले। इस पूरी मारपीट का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस मामले में पुलिस ने एक पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।1