चैती छठ महापर्व संपन्न, हिसुआ में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने किया पारण संजय वर्मा लोक आस्था का महान पर्व चैती छठ नहाय-खाय से शुरू होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ विधिवत संपन्न हो गया। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत श्रद्धा, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। व्रतियों ने 25 मार्च की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने व्रत का पारण किया। परंपरा के अनुसार, पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है। हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के तमसा नदी घाट पर हजारों की संख्या में व्रती माताएं सुबह तड़के ही पहुंच गईं। सुबह 4 बजे से ही घाटों पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। कई लोगों ने घरों में बनाए गए कृत्रिम जलाशयों में भी पूजा-अर्चना की। घाटों पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। व्रतियों ने विधि-विधान से सूर्य भगवान की पूजा कर परिवार और समाज के सुख-समृद्धि की कामना की। तमसा नदी घाट के अलावा सिंघौंली, बलियारी, बगोदर दोना, तुंगी और मंझवे घाटों पर भी भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार में सज-धज कर पूजा में शामिल हुईं, वहीं पुरुष और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ सहभागी बने। पूरे वातावरण में भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और मंत्रोच्चारण की गूंज रही। इस बार छठ पर्व पर स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने घाटों को साफ-सुथरा बनाए रखा। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। पूजा में ठेकुआ, खीर, लड्डू और फलों से सजी सूप और डाला आकर्षण का केंद्र रहे। चैती छठ बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो सूर्य उपासना के माध्यम से स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति का संदेश देता है।
चैती छठ महापर्व संपन्न, हिसुआ में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने किया पारण संजय वर्मा लोक आस्था का महान पर्व चैती छठ नहाय-खाय से शुरू होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ विधिवत संपन्न हो गया। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत श्रद्धा, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। व्रतियों ने 25 मार्च की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने व्रत का पारण किया। परंपरा के अनुसार, पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है। हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के तमसा नदी घाट पर हजारों की संख्या में व्रती माताएं सुबह तड़के ही पहुंच गईं। सुबह 4 बजे से ही घाटों पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। कई लोगों ने घरों में बनाए गए कृत्रिम जलाशयों में भी पूजा-अर्चना की। घाटों पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत
नजारा देखने को मिला। व्रतियों ने विधि-विधान से सूर्य भगवान की पूजा कर परिवार और समाज के सुख-समृद्धि की कामना की। तमसा नदी घाट के अलावा सिंघौंली, बलियारी, बगोदर दोना, तुंगी और मंझवे घाटों पर भी भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार में सज-धज कर पूजा में शामिल हुईं, वहीं पुरुष और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ सहभागी बने। पूरे वातावरण में भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और मंत्रोच्चारण की गूंज रही। इस बार छठ पर्व पर स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने घाटों को साफ-सुथरा बनाए रखा। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। पूजा में ठेकुआ, खीर, लड्डू और फलों से सजी सूप और डाला आकर्षण का केंद्र रहे। चैती छठ बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो सूर्य उपासना के माध्यम से स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति का संदेश देता है।
- Post by Md Istekhar1
- चैती छठ महापर्व संपन्न, हिसुआ में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने किया पारण संजय वर्मा लोक आस्था का महान पर्व चैती छठ नहाय-खाय से शुरू होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ विधिवत संपन्न हो गया। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन व्रत श्रद्धा, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। व्रतियों ने 25 मार्च की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने व्रत का पारण किया। परंपरा के अनुसार, पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है। हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के तमसा नदी घाट पर हजारों की संख्या में व्रती माताएं सुबह तड़के ही पहुंच गईं। सुबह 4 बजे से ही घाटों पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। कई लोगों ने घरों में बनाए गए कृत्रिम जलाशयों में भी पूजा-अर्चना की। घाटों पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। व्रतियों ने विधि-विधान से सूर्य भगवान की पूजा कर परिवार और समाज के सुख-समृद्धि की कामना की। तमसा नदी घाट के अलावा सिंघौंली, बलियारी, बगोदर दोना, तुंगी और मंझवे घाटों पर भी भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं पारंपरिक परिधान और सोलह श्रृंगार में सज-धज कर पूजा में शामिल हुईं, वहीं पुरुष और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ सहभागी बने। पूरे वातावरण में भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और मंत्रोच्चारण की गूंज रही। इस बार छठ पर्व पर स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने घाटों को साफ-सुथरा बनाए रखा। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। पूजा में ठेकुआ, खीर, लड्डू और फलों से सजी सूप और डाला आकर्षण का केंद्र रहे। चैती छठ बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो सूर्य उपासना के माध्यम से स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति का संदेश देता है।2
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- गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न छठघाटो पर सैकड़ों छठव्रतीयो ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया इसी के साथ चार दिनो तक चलने वाले महापर्व छठ शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ, स्थानीय प्रशासन के द्वारा छठव्रतीयो और श्रृद्धालुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया,1
- धनार्जय नदी में आस्था का संगम, शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ छठ महापर्व विवेक कुमार नरहट (नवादा): नवादा जिले के नरहट प्रखंड अंतर्गत पुंथर पंचायत स्थित धनार्जय नदी के तट पर लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया। इस दौरान आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ पूजा की शुरुआत की और अगले दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। घाटों पर साफ-सफाई और सजावट की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरा वातावरण भक्ति में सराबोर नजर आया। पूजा के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे सामाजिक सौहार्द और एकता की मिसाल देखने को मिली। घाटों पर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में छठ पूजा सफलतापूर्वक संपन्न होने पर लोगों ने संतोष जताया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा।4
- राजबल्लभ प्रसाद के आवेदन पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की एक जांच टीम धर्मशिला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुची लोगों ने किया धर्मशिला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल का किया घेराव2