यूपी में नदियों का रौद्र रूप बाढ़ से मचा हाहाकार नदियां उफान पर मकान पेड़ घाघरा में समाये 26 जिले बाढ़ की चपेट में लाखों की आबादी प्रभावित लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। बाढ़ के कारण प्रदेश के कई जिलों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। करीब 26 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं, जिससे लगभग चार लाख की आबादी प्रभावित हुई है। पीलीभीत में शारदा नदी का कटान तेज होने से किनारे बसे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तेज बहाव के चलते नदी किनारे बने मकान और विशाल पेड़ पानी में समा गए हैं। वहीं लखनऊ से सटे बाराबंकी में सरयू नदी की तेज धार के बीच मस्जिद का एक हिस्सा लटक गया है, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है। उधर, कानपुर-उन्नाव में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की जरूरत है।
यूपी में नदियों का रौद्र रूप बाढ़ से मचा हाहाकार नदियां उफान पर मकान पेड़ घाघरा में समाये 26 जिले बाढ़ की चपेट में लाखों की आबादी प्रभावित लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। बाढ़ के कारण प्रदेश के कई जिलों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। करीब 26 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं, जिससे लगभग चार लाख की आबादी प्रभावित हुई है। पीलीभीत में शारदा नदी का कटान तेज होने से किनारे बसे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तेज बहाव के चलते नदी किनारे बने मकान और विशाल पेड़ पानी में समा गए हैं। वहीं लखनऊ से सटे बाराबंकी में सरयू नदी की तेज धार के बीच मस्जिद का एक हिस्सा लटक गया है, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है। उधर, कानपुर-उन्नाव में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की जरूरत है।
- युवक का पार्थिव शरीर 17 दिन बाद वतन पहुंचा: दुबई में हुई थी मौत, विधायक राज बाबू उपाध्याय और अब्दुल हक़ ने की मदद सुल्तानपुर के कूरेभार थाना अंतर्गत दबौलिया निवासी सत्यदेव तिवारी (23) का पार्थिव शरीर 12 सितंबर को 17 दिन बाद उनके पैतृक गांव पहुंचा। शव घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल दुखद हो गया। पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सत्यदेव 23 सितंबर 2025 को रोजगार के लिए संयुक्त अरब अमीरात गए थे। वहां वह प्लंबर का काम करते थे। परिजनों के मुताबिक, 27 अगस्त 2026 को कंपनी के इंचार्ज ने फोन पर सत्यदेव के निधन की सूचना दी। खबर मिलते ही परिवार सदमे में आ गया। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता सत्यदेव के पार्थिव शरीर को सुरक्षित वतन लाने की थी। मृतक के चचेरे भाई आनंद तिवारी ने कादीपुर नगर पंचायत के मोहल्ला तुलसी नगर निवासी समाजसेवी अब्दुल हक़ से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब्दुल हक़ ने तुरंत प्रयास शुरू किए। उन्होंने भारतीय दूतावास, अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों से लगातार संपर्क किया। विधायक राज बाबू उपाध्याय की पहल और सहयोग से भी इस प्रयास को मदद मिली। इन प्रयासों से पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हुई। सत्यदेव तिवारी के पार्थिव शरीर को वतन लाने में समाजसेवी अब्दुल हक़ की भूमिका की क्षेत्र में सराहना हो रही है। एक हिंदू परिवार की दुख की घड़ी में मुस्लिम समाजसेवी द्वारा मदद करना हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और इंसानियत की मिसाल बन गया। समाजसेवी अब्दुल हक़ ने कहा, “मुसीबत के समय किसी जरूरतमंद परिवार के साथ खड़ा होना ही सच्ची इंसानियत है। हिंदू हो या मुसलमान, दुख की घड़ी में एक-दूसरे की मदद करना हमारा फर्ज है।” उन्होंने भारतीय दूतावास, अधिकारियों, विधायक राज बाबू उपाध्याय और सभी सहयोगियों का आभार जताया। उन्होंने आगे कहा कि विदेश में किसी भारतीय की मृत्यु के बाद उसके परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में दल, धर्म और मजहब से ऊपर उठकर मानवता के लिए काम करना ही सच्ची समाजसेवा है। सत्यदेव तिवारी के निधन से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।1
- जिंदगी से लड़ रहे प्रेम, मदद को आगे आया सेवार्थम* *डॉ. आशीष तिवारी ने दिए 51 हजार रुपये, परिवार के लिए राशन की भी कराई व्यवस्था* *जिंदगी से लड़ रहे प्रेम, मदद को आगे आया सेवार्थम* *डॉ. आशीष तिवारी ने दिए 51 हजार रुपये, परिवार के लिए राशन की भी कराई व्यवस्था* लंभुआ/सुलतानपुर। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल प्रेम कुमार निषाद उम्र लगभग 33 वर्ष जौनपुर के शेखर क्रांति हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सिर में गंभीर चोट के बाद उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। परिजनों के मुताबिक प्रेम वेंटिलेटर पर हैं।रामगढ़ निषाद बस्ती निवासी प्रेम कुमार निषाद पुत्र स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य बताए जा रहे हैं। वह ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। हादसे के बाद इलाज का भारी खर्च परिवार के लिए मुश्किल बन गया है। जानकारी मिलने पर सेवार्थम फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आशीष तिवारी ने पीड़ित परिवार की मदद के लिए तत्काल पहल की। फाउंडेशन की टीम ने रामगढ़ पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और बाद में जौनपुर अस्पताल पहुंचकर प्रेम के स्वास्थ्य की जानकारी ली।डॉ. आशीष तिवारी ने प्रेम के इलाज के लिए 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए खाद्य सामग्री और राशन की भी व्यवस्था कराई। उन्होंने परिजनों को आगे भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।प्रेम के इलाज में आर्थिक मदद जुटाने के लिए डॉ. तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों से सहयोग की अपील की। इसके बाद कई लोग मदद के लिए आगे आए और सहायता राशि प्रेम के खाते में भेजी जा रही है।गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती प्रेम के लिए परिवार, सेवार्थम फाउंडेशन और समाज के लोगों का सहयोग उम्मीद की किरण बना हुआ है। फाउंडेशन ने सक्षम लोगों से अपनी सामर्थ्य के अनुसार पीड़ित परिवार की मदद करने की अपील की है।1
- अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया! OPD से OT तक पहुंचा1
- जिंदगी से हारकर नहीं… बीमारी ने छीनी जान, घर की दहलीज पर बुझ गया एक सहारा।1
- *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे? *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी? *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई? जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी? *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे? *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी? *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई? जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी?2
- भव्य आयोजन श्रवण धाम पर कथा का आयोजन से पहले क्या बोले पंडित जगजीवन पांडेय जी1
- सुल्तानपुर लोक अदालत में उमड़ी भीड़: डीएलएसए सचिव मुक्ता त्यागी बोलीं- प्रचार-प्रसार का दिखा असर, बढ़े मामलों की संख्या सुल्तानपुर में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के तहत राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। दीवानी न्यायालय में जिला जज सुनील कुमार (चतुर्थ) ने इसका शुभारंभ किया। जिला जज सुनील कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र का मूड यही है कि अधिक से अधिक मामलों का निपटारा समझौते और मध्यस्थता से हो। उन्होंने जोर दिया कि अगर मामलों का समय पर निपटारा नहीं किया गया, तो सभी विभागों पर बोझ बढ़ेगा और समस्याएं बढ़ती जाएंगी। वहीं, डीएलएसए सचिव मुक्ता त्यागी ने बताया कि न्यायालय परिसर में लोगों की बड़ी संख्या और उत्साह को देखकर लगता है कि प्रचार-प्रसार सही दिशा में हुआ और आम जनता तक पूरी जानकारी पहुंची। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मुकदमों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है: प्री-लिटिगेशन और पोस्ट-लिटिगेशन। प्री-लिटिगेशन में वे मामले शामिल हैं जो अभी न्यायालय में दर्ज नहीं हुए हैं, जैसे बैंक लोन रिकवरी, बिजली बिल और जल कर से जुड़े विवाद। पोस्ट-लिटिगेशन में चेक बाउंस, सुलह योग्य आपराधिक मुकदमे, बिजली बिल विवाद और जल कर विवाद जैसे लंबित मामले आते हैं। इन मामलों के लिए अलग-अलग विभागों के स्टॉल लगाए गए और विशेष पीठों का गठन किया गया। मुक्ता त्यागी ने यह भी बताया कि पिछली लोक अदालत की तुलना में इस बार मामलों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, लोक अदालत में आए गोसाईंगंज के मिरदासपुर निवासी चंद्रभान वर्मा ने बताया कि उन्हें आईडीबीआई बैंक से मैसेज आया था कि उनका खाता एनपीए हो गया है और लोक अदालत में निपटारा करने को कहा गया था। लेकिन, उन्हें यहां आईडीबीआई बैंक का कोई प्रतिनिधि नहीं मिला।1
- बेटे ने पिता की याद में गढ़ दी अमर निशानी, मूर्ति अनावरण बना क्षेत्र में चर्चा का विषय इंद्रसेन दुबे की पहल को महंत बृज मोहन दास ने बताया ‘पुत्र धर्म’ की मिसाल, बोले—एक पिता की स्मृति से निकला सर्व समाज के लिए संदेश* *राजेश बाबा जनसंदेश टाइम्स संवाददाता कुड़वार सुल्तानपुर* कुड़वार। पिता की यादें अक्सर तस्वीरों और स्मृतियों तक सिमट जाती हैं, लेकिन *भंडरा परशुरामपुर के मझारी पश्चिम* में एक बेटे ने अपने पिता की स्मृति को ऐसी पहचान देने का प्रयास किया, जो वर्षों तक लोगों की आंखों के सामने रहेगी। *शुक्रवार शाम स्वर्गीय कपिल देव दुबे की मूर्ति का अनावरण* इसी भाव और श्रद्धा के साथ किया गया। *आयोजन उनके पुत्र एवं पत्रकार इंद्रसेन दुबे की पहल पर हुआ*, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा बटोरी। *अयोध्या से पहुंचे महंत बृज मोहन दास ने मूर्ति का अनावरण किया*। कार्यक्रम में उन्होंने इंद्रसेन दुबे के प्रयास की जमकर सराहना की। महंत ने कहा कि *पिता की स्मृति में ऐसा कार्य करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि पुत्र धर्म निभाने का एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इंद्रसेन दुबे ने अपने पिता की स्मृति को सम्मान देने के साथ-साथ सर्व समाज के सामने एक ऐसा संदेश रखा है, जिसमें संस्कार, सम्मान और अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य की भावना दिखाई देती है।* मूर्ति अनावरण के दौरान माहौल *श्रद्धा और भावुकता* से भरा रहा। उपस्थित लोगों ने *स्वर्गीय कपिल देव दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और सामाजिक जुड़ाव को याद किया।* लोगों के बीच इस बात की चर्चा रही कि आज के दौर में जहां पुरानी पीढ़ी की स्मृतियां धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं, वहीं इंद्रसेन दुबे ने अपने पिता की याद को सार्वजनिक स्मृति से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया है। कार्यक्रम के दौरान महंत बृज मोहन दास ने विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक मुद्दों पर मीडिया से बातचीत की और अपनी राय रखी। *इस अवसर पर क्षेत्र के सम्मानित पूर्व प्रमुख यशभद्र सिंह ‘मोनू’, जय प्रभु शैक्षिक संस्थान के प्रबंधक प्रखर सिंह, पूर्व प्रमुख कुड़वार वीरभद्र सिंह बबलू ,भाजपा नेता विकास शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार शिवेंद्र अमिताभ पांडे, नयन बहादुर सिंह समेत वरिष्ठ समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी व कुड़वार थाना की पुलिस प्रशासन उप निरीक्षक दिनेश यादव सचिन ढाका समेत दर्जनों सिपाही मौजूद रहे* । *‘मूर्ति नहीं, पिता की यादों को सम्मान देने की पहल’* *स्वर्गीय कपिल देव दुबे की मूर्ति की स्थापना को लोग केवल एक अनावरण कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटे की अपने पिता के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहे हैं।* इंद्रसेन दुबे की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि माता-पिता की स्मृतियों को सम्मान देना आने वाली पीढ़ियों को संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। कार्यक्रम के बाद क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की रही कि इंद्रसेन दुबे ने पिता की स्मृति को सिर्फ याद नहीं किया, बल्कि उसे एक ऐसी पहचान देने का प्रयास किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान की सीख ले सकें। *कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों का सम्मानित स्वजनों का जन् प्रतिनिधियों का और क्षेत्र वासियों का पत्रकार इंद्रसेन दुबे ने सभी का आभार व्यक्त किया*1
- कर्ज से जूझते आमजन को राहत, जिला जज के निर्देश पर फिरतू राम का ऋण कम रकम में निपटाया।1