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भव्य आयोजन श्रवण धाम पर कथा का आयोजन से पहले क्या बोले पंडित जगजीवन पांडेय जी

12 hrs ago
user_रिपोर्टर Goswami
रिपोर्टर Goswami
Advertising agency अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
12 hrs ago

भव्य आयोजन श्रवण धाम पर कथा का आयोजन से पहले क्या बोले पंडित जगजीवन पांडेय जी

More news from Ambedkar Nagar and nearby areas
  • अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया! OPD से OT तक पहुंचा
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    अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया! OPD से OT तक पहुंचा
    user_APDP NEWS
    APDP NEWS
    पत्रकार Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    4 hrs ago
  • जिंदगी से हारकर नहीं… बीमारी ने छीनी जान, घर की दहलीज पर बुझ गया एक सहारा।
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    जिंदगी से हारकर नहीं… बीमारी ने छीनी जान, घर की दहलीज पर बुझ गया एक सहारा।
    user_PRIMEABN
    PRIMEABN
    News Anchor अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे? *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी? *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई? जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी? *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी? मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे? *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी? *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई? जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी?
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    *कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* 

 _फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ 

अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी?
मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

 *‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* 

मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे?

 *दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* 

राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी?

 *अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* 

फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई?
जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी?
*कुर्सी पर ‘फर्जी डॉक्टर’, असली डॉक्टर कहां? मेडिकल कॉलेज में उठे बड़े सवाल!* 
_फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया तो खुला ‘कुर्सी कांड’ का सवाल—अगर नकली डॉक्टर डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच गया, तो असली डॉक्टर उस वक्त कहां थे? जांच हुई तो कहीं ‘बलि का बकरा’ तो नहीं बनाया गया?_ 
अंबेडकरनगर। राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सदरपुर में कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। असली सवाल तो अब यह उठ रहा है कि अगर कोई फर्जी व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर काम कर रहा था, तो उस समय जिम्मेदार असली डॉक्टर कहां थे।फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवालों की नई परत खुलने लगी है। आखिर किसी व्यक्ति को डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने, मरीजों के बीच बैठने अथवा चिकित्सकीय व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका कैसे मिला? क्या व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी?
मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर डालकर बाकी जिम्मेदारियों पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं होगी? हालांकि इसकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
*‘फर्जी’ पकड़ा गया, अब असली सवालों की बारी* 
मेडिकल कॉलेज में कथित फर्जी डॉक्टर की मौजूदगी ने सुरक्षा, पहचान सत्यापन, ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्ति की डिग्री, पंजीकरण, पहचान और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। अगर कोई जांच नहीं हुई तो सवाल व्यवस्था पर है और अगर जांच हुई थी तो फिर कथित फर्जी व्यक्ति अंदर तक पहुंचा कैसे?
*दावों में ‘सुधार’, जमीन पर ‘उधार’!* 
राजकीय महामाया मेडिकल कॉलेज पहले से ही विभिन्न अव्यवस्थाओं और शिकायतों को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में कथित फर्जी डॉक्टर का मामला व्यवस्था के लिए एक और बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते रहे हैं। प्राचार्य की ओर से भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सवाल यह है कि सुधार की रफ्तार इतनी तेज थी कि निगरानी व्यवस्था पीछे छूट गई या फिर फाइलों में व्यवस्था पहले ही दुरुस्त हो चुकी थी?
*अब जांच बताएगी—फर्जी कौन, जिम्मेदार कौन?* 
फिलहाल कथित फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर मेडिकल कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में भी बड़ी चूक हुई?
जांच अगर निष्पक्ष और विस्तृत हुई तो यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश, ड्यूटी अथवा डॉक्टर की कुर्सी तक पहुंच किसने और कैसे दी। साथ ही उस समय संबंधित असली डॉक्टर की ड्यूटी कहां थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या निगरानी की थी। क्योंकि मामला सिर्फ ‘फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया’ कहकर खत्म कर दिया गया तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाएंगे। अब जनता यह जानना चाहती है कि कुर्सी पर बैठा व्यक्ति फर्जी था तो व्यवस्था असली कितनी थी?
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • भव्य आयोजन श्रवण धाम पर कथा का आयोजन से पहले क्या बोले पंडित जगजीवन पांडेय जी
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    भव्य आयोजन श्रवण धाम पर कथा का आयोजन से पहले क्या बोले पंडित जगजीवन पांडेय जी
    user_रिपोर्टर Goswami
    रिपोर्टर Goswami
    Advertising agency अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • इकलौते बेटे की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत - छोटी बहन को स्कूल छोड़कर लौटते समय दुर्घटना - फैला मातम अंबेडकर नगर के जलालपुर क्षेत्र में सड़क हादसा हुआ जिसमें अपनी छोटी बहन को स्कूल छोड़कर लौट रहे भाई को अज्ञात पिकअप ने कुचल दिया और घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
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    इकलौते बेटे की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत - छोटी बहन को स्कूल छोड़कर लौटते समय दुर्घटना - फैला मातम 
अंबेडकर नगर के जलालपुर क्षेत्र में सड़क हादसा हुआ जिसमें अपनी छोटी बहन को स्कूल छोड़कर लौट रहे भाई को अज्ञात पिकअप ने कुचल दिया और घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
    user_ABN News Plus
    ABN News Plus
    पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
    9 hrs ago
  • यूपी में नदियों का रौद्र रूप बाढ़ से मचा हाहाकार नदियां उफान पर मकान पेड़ घाघरा में समाये 26 जिले बाढ़ की चपेट में लाखों की आबादी प्रभावित लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। बाढ़ के कारण प्रदेश के कई जिलों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। करीब 26 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं, जिससे लगभग चार लाख की आबादी प्रभावित हुई है। पीलीभीत में शारदा नदी का कटान तेज होने से किनारे बसे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तेज बहाव के चलते नदी किनारे बने मकान और विशाल पेड़ पानी में समा गए हैं। वहीं लखनऊ से सटे बाराबंकी में सरयू नदी की तेज धार के बीच मस्जिद का एक हिस्सा लटक गया है, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है। उधर, कानपुर-उन्नाव में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की जरूरत है।
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    यूपी में नदियों का रौद्र रूप बाढ़ से मचा हाहाकार नदियां उफान पर
मकान पेड़ घाघरा में समाये 26 जिले बाढ़ की चपेट में लाखों की आबादी प्रभावित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। बाढ़ के कारण प्रदेश के कई जिलों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। करीब 26 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं, जिससे लगभग चार लाख की आबादी प्रभावित हुई है।
पीलीभीत में शारदा नदी का कटान तेज होने से किनारे बसे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तेज बहाव के चलते नदी किनारे बने मकान और विशाल पेड़ पानी में समा गए हैं। वहीं लखनऊ से सटे बाराबंकी में सरयू नदी की तेज धार के बीच मस्जिद का एक हिस्सा लटक गया है, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
उधर, कानपुर-उन्नाव में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की जरूरत है।
    user_पत्रकार पांडे
    पत्रकार पांडे
    Comedy club जयसिंहपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • दादी दारू या दादा में सबसे पहले किसको छोड़ोगी कॉमेडी वीडियो🤑🤣
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    दादी दारू या दादा में सबसे पहले किसको छोड़ोगी कॉमेडी वीडियो🤑🤣
    user_Pradeep Karauni Official
    Pradeep Karauni Official
    Comedy club अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • कर्ज से जूझते आमजन को राहत, जिला जज के निर्देश पर फिरतू राम का ऋण कम रकम में निपटाया।
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    कर्ज से जूझते आमजन को राहत, जिला जज के निर्देश पर फिरतू राम का ऋण कम रकम में निपटाया।
    user_PRIMEABN
    PRIMEABN
    News Anchor अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
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