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बस्ती के एमेच्योर खो खो संघ के प्रति सादर प्रणाम और शुभकामनाएं व्यक्त की गई हैं।
Santosh Jaiswal
बस्ती के एमेच्योर खो खो संघ के प्रति सादर प्रणाम और शुभकामनाएं व्यक्त की गई हैं।
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- बस्ती के एमेच्योर खो खो संघ के प्रति सादर प्रणाम और शुभकामनाएं व्यक्त की गई हैं।2
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की कथित वसूली का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। मड़ियाव के चंद्राढाल पर तैनात एक टीएसआई (TSI) साहब यातायात व्यवस्था संभालने के बजाय 'सुविधा शुल्क' बटोरने में ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के अनुसार, बसों को बिना किसी चालान के बेधड़क निकलने देने के लिए बाकायदा ₹5,000 का रेट कार्ड तय किया गया था। खाकी वर्दी पहने ये साहब बूथ में बैठकर खुलेआम इस लेन-देन को संभाल रहे हैं, जिसे देखकर ऐसा लग रहा है मानो ट्रैफिक पुलिस नहीं, बल्कि किसी प्राइवेट कंपनी का 'टोल कलेक्शन सेंटर' चलाया जा रहा हो। इस घटना ने उत्तर प्रदेश के 'भ्रष्टाचार मुक्त' अभियान के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता का हेलमेट न लगाने पर तुरंत चालान काट दिया जाता है, लेकिन नियमों की नीलामी करने वाले इन वर्दीवालों पर कार्रवाई कौन करेगा? अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी इस 'हाई-टेक' वसूली का संज्ञान लेकर कोई ठोस एक्शन लेंगी, या फिर यह मामला भी किसी फाइल के नीचे दबा दिया जाएगा। जनता यह जानने को उत्सुक है कि क्या वाकई में सिस्टम बदल रहा है या फिर सिर्फ वसूली के तरीके 'डिजिटल' हो गए हैं।1
- भारत ने ओमान के पास एक जहाज़ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता काफी बढ़ गई है। देश के भीतर, सोनम वांगचुक का अनशन 15वें दिन में पहुंच गया है, जिसके बाद उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। वहीं, मुंबई के ताज महल पैलेस होटल को बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने वहां तलाशी अभियान चलाया है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर, अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव और बढ़ गया है। इसके चलते होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास के हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।1
- उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राममंदिर ट्रस्ट और SIT जांच को लेकर बड़ा खुलासा किया है।1
- संत कबीर नगर के खलीलाबाद में परमपिता परमेश्वर भोलेनाथ की कृपा से नई गाड़ी खरीदने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इस अत्यंत खुशी के अवसर पर भगवान भोलेनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए यह कामना की गई है कि उनकी कृपा हमेशा इसी तरह बनी रहे। भक्तिभाव और हर्ष के साथ 'जय महाकाल' का जयकारा भी लगाया गया है।1
- संतकबीर नगर के खलीलाबाद नगर पालिका परिषद के मोहल्ला गोरखल में गैस गोदाम के सामने वाली गली की सड़क पूरी तरह कीचड़ और जलभराव की चपेट में है। बरसात के बाद सड़क के दलदल में तब्दील हो जाने से यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है, जबकि बाइक सवारों को भी रोजाना आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह पानी जमा होने से सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो गया है, जिससे लगातार हादसे होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गली में जगह-जगह गंदा पानी जमा रहने से चारों तरफ भयंकर बदबू फैल रही है, जिसके कारण छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का जीना मुहाल हो गया है। आए दिन लोग फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। निवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर पालिका प्रशासन द्वारा अब तक समाधान के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस अव्यवस्था से नाराज होकर मोहल्ले के रविशंकर सिंह, सनी राय, सुमित श्रीवास्तव, गौरव राय, शैलेश यादव, शिवम राय और देवेंद्र सहित अन्य निवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल सड़क की मरम्मत कराने और जलनिकासी की उचित व्यवस्था करने की जोरदार मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आने-जाने में और भी बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।1
- उत्तर प्रदेश के जनपद संत कबीर नगर के अंतर्गत आने वाली तहसील खलीलाबाद के ब्लॉक बघौली की ग्राम पंचायत भगवानपुर का ए.एन.एम. (एनम) सेंटर बदहाली और गंदगी का शिकार होकर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जमीनी हकीकत यह है कि इस केंद्र पर चारों तरफ अत्यधिक गंदगी फैली हुई है और स्वच्छता का कोई नामोनिशान नहीं है। यह एनम सेंटर पूरी तरह से गिरा हुआ है, लेकिन न तो इसकी मरम्मत कराई गई और न ही किसी नए केंद्र का निर्माण कराया गया है। इस खंडहर हो चुके केंद्र के हालात इतने खराब हैं कि यहाँ इंसान तो क्या, कुत्ते भी नहीं बैठ सकते। ऐसे में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यहाँ बैठकर जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सकता। सरकारी बजट केवल कागजों में दिखाई देता है और अधिकारियों को दिखाने के लिए मात्र फोटोशूट कराकर भेज दिया जाता है। शिकायतों का अधिकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है क्योंकि सब कुछ सिर्फ कमीशन पर निर्भर है। इस घोर लापरवाही को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सीएमओ और ब्लॉक प्रभारी के निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। सरकारी बजट आखिर कहाँ चला जाता है, जबकि मात्र 10 से 15 लाख रुपये खर्च करके इसकी मरम्मत की जा सकती थी। जब कभी कोई दबाव पड़ता है तो केवल दिखावे के लिए फील्ड वर्क कर दिया जाता है, बाकी दिन सब घर बैठे रहते हैं और सारे काम कमिश्नर से जुड़े हुए हैं। इस बदहाली को देखते हुए तीखा सवाल उठाया गया है कि क्या स्वास्थ्य विभाग कभी इसे संज्ञान में लेने का कष्ट करेगा या यह एनम सेंटर केवल "शौच" का अड्डा ही बना रहेगा।1
- आगरा रेलवे स्टेशन पर 'इंसानियत' दिखाने और एक परेशान महिला यात्री की मदद करने पर स्टेशन के डिप्टी एसएस नरेंद्र चाहर के साथ आरपीएफ जवानों द्वारा बदसलूकी करने और उन्हें घसीटने का मामला सामने आया है। इस अहंकार के दंगल और वर्दी के तांडव के बाद हरकत में आए प्रशासन ने आरोपी चारों आरपीएफ सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। घटनाक्रम के अनुसार, एक महिला यात्री अपनी ट्रेन छूटते देख उतावली हो रही थी। वह स्टेशन पर सामान लेने उतरी थी, लेकिन इसी बीच ट्रेन चल पड़ी। स्टेशन पर मौजूद डिप्टी एसएस नरेंद्र चाहर जी ने अपना फर्ज निभाते हुए तुरंत वॉकी-टॉकी घुमाया और चलती हुई ट्रेन को रुकवा दिया। लेकिन यह नेक काम रेलवे स्टेशन के 'किंगमेकर्स' यानी आरपीएफ के जवानों को नागवार गुजरा। उन्हें लगा कि यह उनकी 'चेन पुलिंग' वाली पावर पर सीधा हमला है। इसके बाद जवानों ने उस महिला यात्री को ही चेन पुलिंग के आरोपी के रूप में दबोच लिया। जब स्टेशन के डिप्टी अधीक्षक नरेंद्र चाहर ने कानून और संवेदना का हवाला देते हुए आरपीएफ की इस कार्रवाई का विरोध किया, तो जवानों ने अपनी मर्यादा भूलकर खुद डिप्टी एसएस को ही ससम्मान घसीटते हुए वहां से हटा दिया। आरपीएफ जवानों के इस बर्ताव का नतीजा यह निकला कि चारों सिपाहियों—मेघराज, बालकिशन मीणा, बदन सिंह और जितेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया है। वर्दी पहनकर आम आदमी और रेल अधिकारी को घसीटने वाले इन जवानों को सस्पेंशन की सजा मिल चुकी है। इस पूरी घटना ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि क्या रेलवे स्टेशन यात्रियों की सेवा के लिए हैं या फिर घसीट-घसीट कर अपनी दादागिरी और अहंकार दिखाने के लिए? आगरा में अब मोहब्बत की जगह 'खाकी का घसीट' ट्रेंड कर रहा है। ऐसे में यात्रियों के लिए यही सीख है कि अगली बार स्टेशन पर अपनी सुरक्षा का खुद ध्यान रखें, कहीं आप भी किसी की 'इगो' का शिकार न बन जाएं।1