Shuru
Apke Nagar Ki App…
अंगदान से शरीर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, इस झूठी मान्यता को तोड़ने के लिए अनिल ने 430 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा की है। उन्होंने लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने का प्रयास किया कि अंगदान के संबंध में फैली धारणाएँ निराधार हैं।
हमीरपुरी पत्रकार
अंगदान से शरीर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, इस झूठी मान्यता को तोड़ने के लिए अनिल ने 430 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा की है। उन्होंने लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने का प्रयास किया कि अंगदान के संबंध में फैली धारणाएँ निराधार हैं।
More news from हिमाचल प्रदेश and nearby areas
- अंगदान से शरीर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, इस झूठी मान्यता को तोड़ने के लिए अनिल ने 430 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा की है। उन्होंने लोगों तक यह महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने का प्रयास किया कि अंगदान के संबंध में फैली धारणाएँ निराधार हैं।1
- हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत करयाली के नव-निर्वाचित प्रधान शुभम राणा ने पंचायत की पहली मासिक बैठक को संबोधित करते हुए नशे के कारोबार और सेवन के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने जोर दिया कि उनकी पंचायत में नशे से संबंधित किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधान राणा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह महिला हो या पुरुष, नशे के कारोबार में लिप्त पाया जाता है, या 'चिट्टे' जैसे मादक पदार्थों का सेवन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर पंचायत द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे लोगों को पंचायत द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। पंचायत ने लोगों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक करने का काम भी किया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में कई अन्य फैसले भी लिए गए। पंचायत क्षेत्र में आने वाले फेरी वालों के लिए ₹100 का शुल्क निर्धारित किया गया है, और उन्हें अपना पहचान पत्र पंचायत में बनवाना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, किन्नरों को ₹3100 की राशि देने का निर्णय लिया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों और महिला मंडलों के सहयोग से जल स्रोतों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने का भी संकल्प लिया गया है। ग्राम पंचायत करयाली के प्रधान शुभम राणा ने नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों पर पंचायत द्वारा सख्त कार्रवाई करने और कड़े निर्देश जारी करने की बात पर फिर से जोर दिया है।1
- नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने 03 जुलाई को बिलासपुर के घुमारवीं में तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विभागीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें विशेष रूप से राज्य में स्थापित किए जा रहे कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) सेंटर, स्किल अकादमी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा विभाग की भावी कार्य योजना की विस्तार से समीक्षा शामिल थी। मंत्री ने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य हिमाचल के युवाओं को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में घुमारवीं में स्किल अकादमी स्थापित करने तथा मल्टी स्किल एवं डिजिटल यूनिवर्सिटी विकसित करने की घोषणा की है। बैठक के दौरान मंत्री राजेश धर्माणी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घुमारवीं में निर्माणाधीन स्किल अकादमी सेंटर का कार्य हर हाल में 30 जुलाई तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने बताया कि यह अत्याधुनिक स्किल सेंटर लगभग 4.5 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। स्किल अकादमी सेंटर में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मीडिया, भाषा कौशल तथा उद्योगों एवं रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप विभिन्न आधुनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी तथा उन्हें स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसका उद्देश्य युवाओं को केवल प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल से सशक्त बनाना है जिनकी आवश्यकता वर्तमान और भविष्य के उद्योगों में होगी। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए अधिक उपयोगी एवं रोजगारोन्मुख बनाने को कहा। मंत्री ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने विभाग को तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक रोहित राठौर, डिप्टी डायरेक्टर संजीव सहोत्रा, ललित शर्मा, रविंदर बनियाल, ज्वाइंट कंट्रोलर (फाइनेंस) नाग सिंह यादव, दिनेश शर्मा (ज्वाइंट डायरेक्टर), हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के जनरल मैनेजर अमित काल्थिक, घुमारवीं आईटीआई के प्रिंसिपल जनक सिंह, अनुदेशक कमल देव, करण सिंह ढटवालिया तथा विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।3
- उपमंडल बंगाणा के अंतर्गत आधार कार्ड अपडेट करवाने के उद्देश्य से एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया है। यह शिविर आधार कार्ड से संबंधित विभिन्न अपडेट सेवाओं को प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था।1
- आर्मी इंटेलिजेंस से सेवानिवृत्त अधिकारी मनोज कुमार कौशल ने ऊना जिला मुख्यालय में एक पत्रकार वार्ता के दौरान राजस्व विभाग में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि जिले की घनारी और अम्ब तहसीलों में जमीन की रजिस्ट्री और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। कौशल के अनुसार, राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इन मामलों को अंजाम दिया गया, जिसमें जमीन के वास्तविक मालिकों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी गई। मनोज कौशल ने बताया कि हरियाणा के कुछ लोग इन तहसीलों में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी करवाने पहुंचे थे, जहां उनकी पूरी प्रक्रिया संपन्न करा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए, फोटो भी खिंचवाए गए और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। हालांकि, बाद में जब हरियाणा में इस मामले की जांच शुरू हुई, तब यह सामने आया कि जिन जमीनों की पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई थी, उनके वास्तविक मालिकों को इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच अब हरियाणा में भी शुरू हो चुकी है और यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हुई, तो हिमाचल प्रदेश के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। कौशल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में इस प्रकार की शिकायतों के बावजूद न तो सरकार गंभीरता दिखा रही है और न ही संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने उपायुक्त ऊना, जतिन लाल से मुलाकात कर पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी के दस्तावेज और संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने जोर दिया कि आम लोगों की संपत्तियों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बेहद गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।1
- अंब और घनारी तहसीलों में जमीन घोटाले से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के दायरे में '247 सुपर फास्ट' मामले शामिल हैं।1
- प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने 3 जुलाई को जिला ऊना के एक दिवसीय प्रवास के दौरान हरोली विधानसभा क्षेत्र के एसडीपीओ कार्यालय परिसर में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर 'आईना' का विधिवत लोकार्पण किया। यह आधुनिक तकनीक से सुसज्जित केंद्र सुबह 11 बजे शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुदृढ़ बनाना है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि 'आईना' के माध्यम से कानून-व्यवस्था का बेहतर प्रबंधन, निगरानी, नागरिक सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने आगामी दिनों में पुलिस भर्तियों में तेज़ी लाने और कुछ स्थानों पर होमगार्ड जवानों की सेवाएं लेने की बात कही। साथ ही, हरोली विधानसभा क्षेत्र के पुलिस विभाग को चार गाड़ियाँ भी दी गई हैं। उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अब कोई भी शातिर इन कैमरों की निगाह से बच नहीं पाएगा। एसपी ऊना सचिन हीरामेठ ने जानकारी दी कि हरोली विधानसभा क्षेत्र में लगभग दो सौ कैमरे विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं, जिनमें सात हाई-टेक कैमरे भी शामिल हैं। इन सात हाई-टेक कैमरों को बॉर्डर एरिया और मुख्य चौकों पर स्थापित किया गया है, जिनकी विशेषता है कि ये गाड़ियों को डिटेक्ट कर खुद ही चालान कर सकते हैं, और रात के अंधेरे में भी इनकी क्वालिटी बहुत अच्छी है। इन कैमरों की बदौलत हर बॉर्डर पर आने-जाने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी। इस सेंटर का कंट्रोल रूम हरोली मिनी सचिवालय में बनाया गया है, और आने वाले दिनों में जिला ऊना मुख्यालय पर लगाए जा रहे कैमरों का भी जल्द उद्घाटन कर उन्हें शुरू किया जाएगा।1