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बीकानेर के हृदय स्थल कोटगेट में पिछले कई वर्षों से सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय निवासियों को गंदगी और खराब सिस्टम के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कुंभकरण की नींद सो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
Shakir Husain social media reporter
बीकानेर के हृदय स्थल कोटगेट में पिछले कई वर्षों से सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय निवासियों को गंदगी और खराब सिस्टम के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कुंभकरण की नींद सो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
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- बीकानेर में वीआईपी दौरों के दौरान सुरक्षा के लिए खोदे गए गड्ढे सालों बाद भी नहीं भरे गए हैं। इन गहरे निशानों से वाहन चालकों को परेशानी और हादसों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग नए वीआईपी दौरों से पहले सड़कों की स्थायी मरम्मत की मांग कर रहे हैं।1
- बीकानेर के हृदय स्थल कोटगेट में पिछले कई वर्षों से सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय निवासियों को गंदगी और खराब सिस्टम के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कुंभकरण की नींद सो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।1
- श्रीकोलायत के हदां क्षेत्र में एक युवक को खेत पर बुलाकर बेरहमी से पीटा गया और गांव छोड़ने की धमकी दी गई। पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।1
- बीकानेर के जूनागढ़ किला मार्ग पर सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों का साम्राज्य हो गया है। इन जानलेवा गड्ढों के कारण आए दिन हादसे का खतरा बढ़ गया है, जिससे वाहन चालक और स्थानीय लोग बेहद परेशान हैं।2
- भीषण गर्मी के कारण नोखा शहर में पानी की गंभीर किल्लत और बिजली की भारी कटौती हो रही है। इस दोहरी मार से आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।1
- नोखा के जिला अस्पताल में भीषण गर्मी और सुविधाओं की कमी से मरीज बेहाल हैं। डॉक्टरों की कमी और पंखों-कूलरों के अभाव के चलते मरीजों को सीधा बीकानेर रेफर किया जा रहा है। जिला अस्पताल घोषित होने के बावजूद स्टाफ की कमी से लोगों में भारी रोष है।2
- बीकानेर के छत्तरगढ़-सत्तासर क्षेत्र से पत्रकार देवी सिंह उदावत ने एक विशेष समाचार दिया है। इस रिपोर्ट में स्थानीय मुद्दों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।1
- बीकानेर में वीआईपी दौरों और चुनावी सभाओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे सालों बाद भी सड़कों को खराब कर रहे हैं। इन अधूरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी और हादसों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आगामी वीआईपी दौरों से पहले ये पुराने 'जख्म' कब भरे जाएंगे।1