संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में दिनांक 23 जून 2026 से 30 जून 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान" के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं तथा स्थानीय समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर एक स्वस्थ, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना था। अभियान की शुरुआत 23 जून 2026 को गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम से हुई, जहाँ विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों पर आधारित जागरूकता वीडियो दिखाए गए। इस दौरान विद्यार्थियों ने "नशा मुक्ति मित्र" के रूप में Nasha Mukt Bharat Abhiyaan Portal पर स्वयं को पंजीकृत किया, साथ ही सिग्नेचर कैंपेन और प्रतिज्ञा ग्रहण समारोह भी आयोजित किए गए, जिसमें नशा मुक्त समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया। इसके अतिरिक्त, अभियान में नशा मुक्ति लोकगीत, जागरूकता सृजन कार्यक्रम, इंटरएक्टिव सत्र, Testimonial Sharing और Social Media Campaign जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी शामिल थे। दिनांक 25 जून 2026 को नशा मुक्ति के समर्थन में एक बाइक रैली, मानव श्रृंखला और सामूहिक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाइक रैली के माध्यम से महाविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने पूरे क्षेत्र में नशा विरोधी संदेश फैलाया, जबकि मानव श्रृंखला ने समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। सामूहिक चर्चा में विद्यार्थियों ने नशे के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श किया। 29 जून 2026 को एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें जनजातीय व कांग्रेस नेता अजीत पाल कुजूर और स्थानीय पत्रकार सूरज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने नशे की बुराइयों, उसके दुष्परिणामों तथा समाज व परिवार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। इस अवसर पर, प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने अपने संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को कमजोर करता है, और एक विकसित भारत तभी संभव है जब युवा नशामुक्त, शिक्षित, अनुशासित और जागरूक हों। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह करते हुए अभियान की सफलता के लिए सभी विभागों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। महाविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों, शिक्षकों के समर्पण और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान अत्यधिक सफल रहा, जिसने न केवल जागरूकता फैलाई बल्कि नशामुक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूत किया।
संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में दिनांक 23 जून 2026 से 30 जून 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान" के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं तथा स्थानीय समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर एक स्वस्थ, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना था। अभियान की शुरुआत 23 जून 2026 को गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम से हुई, जहाँ विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों पर आधारित जागरूकता वीडियो दिखाए गए। इस दौरान विद्यार्थियों ने "नशा मुक्ति मित्र" के रूप में Nasha Mukt Bharat Abhiyaan Portal पर स्वयं को पंजीकृत किया, साथ ही सिग्नेचर कैंपेन और प्रतिज्ञा ग्रहण समारोह भी
आयोजित किए गए, जिसमें नशा मुक्त समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया। इसके अतिरिक्त, अभियान में नशा मुक्ति लोकगीत, जागरूकता सृजन कार्यक्रम, इंटरएक्टिव सत्र, Testimonial Sharing और Social Media Campaign जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी शामिल थे। दिनांक 25 जून 2026 को नशा मुक्ति के समर्थन में एक बाइक रैली, मानव श्रृंखला और सामूहिक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाइक रैली के माध्यम से महाविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने पूरे क्षेत्र में नशा विरोधी संदेश फैलाया, जबकि मानव श्रृंखला ने समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। सामूहिक चर्चा में विद्यार्थियों ने नशे के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श किया। 29 जून 2026 को एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें जनजातीय व कांग्रेस नेता अजीत पाल कुजूर और स्थानीय पत्रकार सूरज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने नशे की बुराइयों, उसके दुष्परिणामों तथा
समाज व परिवार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। इस अवसर पर, प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने अपने संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को कमजोर करता है, और एक विकसित भारत तभी संभव है जब युवा नशामुक्त, शिक्षित, अनुशासित और जागरूक हों। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह करते हुए अभियान की सफलता के लिए सभी विभागों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। महाविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों, शिक्षकों के समर्पण और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान अत्यधिक सफल रहा, जिसने न केवल जागरूकता फैलाई बल्कि नशामुक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूत किया।
- संत जेवियर्स महाविद्यालय, महुआडांड़ में दिनांक 23 जून 2026 से 30 जून 2026 तक "नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान" के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं तथा स्थानीय समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर एक स्वस्थ, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना था। अभियान की शुरुआत 23 जून 2026 को गणित, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम से हुई, जहाँ विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों पर आधारित जागरूकता वीडियो दिखाए गए। इस दौरान विद्यार्थियों ने "नशा मुक्ति मित्र" के रूप में Nasha Mukt Bharat Abhiyaan Portal पर स्वयं को पंजीकृत किया, साथ ही सिग्नेचर कैंपेन और प्रतिज्ञा ग्रहण समारोह भी आयोजित किए गए, जिसमें नशा मुक्त समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया। इसके अतिरिक्त, अभियान में नशा मुक्ति लोकगीत, जागरूकता सृजन कार्यक्रम, इंटरएक्टिव सत्र, Testimonial Sharing और Social Media Campaign जैसे विभिन्न कार्यक्रम भी शामिल थे। दिनांक 25 जून 2026 को नशा मुक्ति के समर्थन में एक बाइक रैली, मानव श्रृंखला और सामूहिक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाइक रैली के माध्यम से महाविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों ने पूरे क्षेत्र में नशा विरोधी संदेश फैलाया, जबकि मानव श्रृंखला ने समाज में एकता, जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश दिया। सामूहिक चर्चा में विद्यार्थियों ने नशे के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श किया। 29 जून 2026 को एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें जनजातीय व कांग्रेस नेता अजीत पाल कुजूर और स्थानीय पत्रकार सूरज कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने नशे की बुराइयों, उसके दुष्परिणामों तथा समाज व परिवार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। इस अवसर पर, प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने अपने संदेश में कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को कमजोर करता है, और एक विकसित भारत तभी संभव है जब युवा नशामुक्त, शिक्षित, अनुशासित और जागरूक हों। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह करते हुए अभियान की सफलता के लिए सभी विभागों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। महाविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों, शिक्षकों के समर्पण और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान अत्यधिक सफल रहा, जिसने न केवल जागरूकता फैलाई बल्कि नशामुक्त समाज और विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूत किया।3
- झारखंड के चैनपुर में जमीन से जुड़े एक विवाद में एक महिला पर जानलेवा हमला किया गया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए, घटना के मुख्य आरोपी बरजू सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।1
- राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, गुमला जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 अभियान का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। यह महत्वपूर्ण अभियान 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। अभियान के पहले दिन, जिले के सभी 995 मतदान केन्द्रों पर संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी और अन्य संबंधित पदाधिकारियों की मौजूदगी में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तथा स्थानीय नागरिकों की सक्रिय सहभागिता के साथ इस पुनरीक्षण कार्यक्रम का आरंभ हुआ। इस दौरान लोगों को मतदाता सूची के अद्यतन, पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने, त्रुटियों में सुधार करने और आवश्यक प्रपत्रों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने अपने-अपने बूथों पर पहुंचकर अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के प्रति व्यापक जनजागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न विद्यालयों में भी विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने मतदाता जागरूकता रैलियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और चित्रकला, भाषण, निबंध तथा अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण के महत्व, शुद्ध एवं त्रुटिरहित मतदाता सूची की आवश्यकता, तथा लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी के महत्व को समझाते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए। इसी क्रम में राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत, पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक एक राज्यव्यापी विशेष सोशल मीडिया हैशटैग अभियान (#JharkhandSIR) का भी सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें गुमला जिले के नागरिकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। इस डिजिटल जनजागरूकता अभियान में जिले के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, शिक्षक, विद्यार्थी, विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के सदस्य तथा आम नागरिकों ने SIR-2026 से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां, पोस्टर, वीडियो और जागरूकता संदेश साझा कर अधिक से अधिक लोगों तक इसका संदेश पहुंचाया। सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिकों तक इस कार्यक्रम की प्रक्रिया, उद्देश्य, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के महत्व की जानकारी पहुंची, जिससे जिलेभर में इसे सकारात्मक जनसमर्थन मिला और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनभागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में यह पहल प्रभावी सिद्ध हुई। जिला प्रशासन ने जिले के सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान BLO द्वारा किए जाने वाले डोर टू डोर सर्वे में आवश्यक सहयोग प्रदान करें। प्रशासन ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया है कि वे मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण सत्यापित कराएं तथा आवश्यकतानुसार नए नाम जोड़ने, संशोधन अथवा अन्य आवश्यक प्रपत्र समय पर जमा कर लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।1
- झारखंड में 7 एकड़ 71 डिसमिल जमीन के फर्जी म्यूटेशन का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब कथित तौर पर इस जमीन को बेचने की कोशिश की गई, जिसके बाद इलाके में व्यापक हड़कंप मच गया है।1
- लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड मुख्यालय से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 143ए (NH 143A) की स्थिति बेहद खराब है, जिससे झारखंड सहित कई राज्यों को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पथ पर यात्रा करना मुश्किल हो गया है। विशेषकर बरसात के मौसम में राहगीरों को इस सड़क पर चलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, और स्थानीय लोग भी रोजमर्रा की परेशानियों से जूझ रहे हैं। यह समस्या संवेदक की घोर लापरवाही और सड़क निर्माण में तय मानकों का पालन न होने का सीधा परिणाम है, जिसके चलते आम जनता और राहगीर लगातार परेशान हो रहे हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए, उपायुक्त (DC) ने इसकी जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।1
- पुरानडीह ग्राम की रहने वाली आदिम जनजाति विधवा महिला संचारिया देवी को आधार कार्ड न होने के कारण कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति की पुष्टि महुआडार प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार बैठा ने मंगलवार की सुबह 11:00 बजे की। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बताया कि संचारिया देवी को नियमित राशन तो मिल रहा है, लेकिन आधार कार्ड की कमी के कारण वह अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। इस समस्या के समाधान के लिए जिला आधार कार्ड समन्वयक से संपर्क स्थापित किया गया है, और जल्द ही संचारिया देवी का आधार कार्ड बनवाने तथा उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।1
- छत्तीसगढ़ राज्य के DGP अरुण देव गौतम, जो हर मंगलवार को पुलिस कर्मचारियों के परिजनों से मिलते और उनकी परेशानियाँ सुनते हैं, ने 30 जून 2026 को एक अनोखा फैसला लिया। इस दिन DGP से मिलने के लिए 200 से अधिक निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिवार पहुँचे थे, जो पिछले 8-10 वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। इन परिवारों ने DGP से मिलने के लिए चार दिन पहले ही लिखित सूचना दी थी, लेकिन DGP ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया, जबकि वे अन्य लोगों से मिलते रहे। इस घटना से यह संकेत मिलता है कि DGP फिलहाल लंबे समय से नक्सल क्षेत्र में तैनात इन कर्मचारियों का स्थानांतरण करने के पक्ष में नहीं हैं। निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिजनों, जिनमें उनके माता-पिता, पत्नियाँ, बच्चे और भाई-बहन शामिल थे, में इस बात को लेकर काफी रोष देखा गया। वे सभी DGP से यह जानने आए थे कि उनके स्थानांतरण कब किए जाएँगे, लेकिन DGP ने सीधे मिलने से इनकार करके जवाब देने से परहेज किया। इन सभी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों ने अपने स्थानांतरण के लिए कई बार आवेदन किया है, जिन पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पर पुलिस विभाग ने जवाब दिया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों का मैदानी इलाकों में स्थानांतरण हर तीन साल में किया जाता है। ऐसे में यह समझ से परे है कि अगर यह नियम लागू है, तो फिर 200 से अधिक निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8-10 साल से नक्सल क्षेत्रों में कैसे फंसे हुए हैं। सँयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने DGP के इस रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि DGP चार घंटे का पॉडकास्ट कर सकते हैं, लेकिन चार दिन पहले से सूचना देने के बाद भी पुलिस परिवार के सदस्यों से एक मिनट भी मिलकर उनकी समस्या का समाधान नहीं कर सकते। दीवान ने यह भी कहा कि यदि DGP पर कोई दबाव है, तो वे उन्हें बताएँ ताकि संघ सीधे दबाव बनाने वाले व्यक्ति से बात कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि DGP ने पुलिस मुख्यालय को पुलिस बल से घेरकर छावनी बना दिया और परिवार के सदस्यों से मिलने से इनकार कर दिया, जिसका सीधा अर्थ है कि उनके पास सवालों के जवाब नहीं हैं। दीवान ने इसे एक निंदनीय कार्य बताया और कहा कि DGP ने पुलिस परिवार से मुलाकात न करके यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी मुद्दे पर स्वयं निर्णय लेने में हिचक रहे हैं और किसी और के निर्देश का पालन कर रहे हैं। उनके इस कृत्य से पूरे पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों और उनके परिजनों को निराशा हुई है, और पुलिस परिवार के बुजुर्ग माता-पिता, बच्चे और महिलाएँ इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।1
- चैनपुर थाना क्षेत्र के सरखी मोड़ के पास मंगलवार शाम करीब 5:00 बजे एक मिनी ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे झाड़ियों में पलट गई। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।1