नन्हे हाथों ने रचाया 'अक्ती' का ब्याह: पुतरी-पुतरा के विवाह से गूंजा गांव, उत्साह के साथ शुरू हुआ खेती का नया सीजन* नन्हे हाथों ने रचाया 'अक्ती' का ब्याह: पुतरी-पुतरा के विवाह से गूंजा गांव, उत्साह के साथ शुरू हुआ खेती का नया सीजन *खरोरा अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर ग्रामीण अंचलों में परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़े-बुजुर्गों की उपस्थिति में छोटे-छोटे बच्चों ने पूरी निष्ठा और रीति-रिवाज के साथ पुतरी-पुतरी (गुड्डा-गुड़िया) का विवाह रचाया। इस पारंपरिक आयोजन ने न केवल बच्चों को आनंदित किया, बल्कि भावी पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ने का काम किया। चुरमाटी से लेकर मायन नाच तक किरण सोनी के निवास पर आयोजित इस विवाह समारोह में उन सभी रस्मों का पालन किया गया जो एक वास्तविक विवाह में होती हैं। अक्षय तृतीया के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तेल-माटी और चुरमाटी विधि-विधान के साथ मिट्टी लाकर रस्मों की शुरुआत की गई। हल्दी की रस्म और मायन नाच के दौरान महिलाएं और बच्चे पारंपरिक गीतों पर झूमते नजर आए। गाजे-बाजे के साथ जब बारात किरण सोनी के घर पहुंची, तो आतिशबाजी और उत्साह के साथ बारातियों का भव्य स्वागत किया गया। लोक मान्यता और कृषि का महत्व अक्षय तृतीया, जिसे स्थानीय भाषा में 'अक्ती' कहा जाता है, केवल एक त्योहार नहीं बल्कि नए कृषि वर्ष का उद्घोष है। मांगलिख शुरुआत इस दिन को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, जिसमें किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती पुतरी-पुतरा का विवाह इसी विश्वास का प्रतीक है कि आने वाला समय खुशहाली लाएगा। खेती-किसानी का शुभारंभ इस दिन किसान भाई मंदिर और देवालयों में जाकर ठाकुर देव की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन खेतों में धान की बुआई (मुट्ठी लेई) करने से फसल अक्षय (जिसका क्षय न हो) होती है और अन्न के भंडार भरे रहते हैं।अक्ती का यह पर्व हमें मिट्टी और संस्कारों से जोड़ता है। बच्चों द्वारा किया गया यह आयोजन हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवित रखने का एक प्रयास है।" , योगेश चंद्राकर ने बताया कि इस दिन किए गए दान, तप और पूजा का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसीलिए इसे 'अक्षय' कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी तिथि से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। इस दिन माटी की पूजा करना धरती माता के प्रति सम्मान प्रकट करने का तरीका है, जिससे पर्यावरण और कृषि के बीच संतुलन बना रहे। हंसी-ठिठोली और बाजे-गाजे के साथ संपन्न हुआ यह विवाह उत्सव गांव की एकता और समृद्ध संस्कृति की सुंदर तस्वीर पेश करता है। इस अवसर पर किरण सोनी, राखी मानिकपुरी ,भूमि ,खुशी प्रियंका सोनी, मंजू देवगन , अमेरिका सोनी बीरजू सोनी , आकाश सोनी। , मोंटी सोनी आदि उपस्थित रहे। श्री रोहित वर्मा जी की खबर
नन्हे हाथों ने रचाया 'अक्ती' का ब्याह: पुतरी-पुतरा के विवाह से गूंजा गांव, उत्साह के साथ शुरू हुआ खेती का नया सीजन* नन्हे हाथों ने रचाया 'अक्ती' का ब्याह: पुतरी-पुतरा के विवाह से गूंजा गांव, उत्साह के साथ शुरू हुआ खेती का नया सीजन *खरोरा अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर ग्रामीण अंचलों में परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। बड़े-बुजुर्गों की उपस्थिति में छोटे-छोटे बच्चों ने पूरी निष्ठा और रीति-रिवाज के साथ पुतरी-पुतरी (गुड्डा-गुड़िया) का विवाह रचाया। इस पारंपरिक आयोजन ने न केवल बच्चों को आनंदित किया, बल्कि भावी पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ने का काम किया। चुरमाटी से लेकर मायन नाच तक किरण सोनी के निवास पर आयोजित इस विवाह समारोह में उन सभी रस्मों का पालन किया गया जो एक वास्तविक विवाह में होती हैं। अक्षय तृतीया के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तेल-माटी और चुरमाटी विधि-विधान के साथ मिट्टी लाकर रस्मों की शुरुआत की गई। हल्दी की रस्म और मायन नाच के दौरान महिलाएं और बच्चे पारंपरिक गीतों पर झूमते नजर आए। गाजे-बाजे के साथ जब बारात किरण सोनी के घर पहुंची, तो आतिशबाजी और उत्साह के साथ बारातियों का भव्य स्वागत किया गया। लोक मान्यता और कृषि का महत्व अक्षय तृतीया, जिसे स्थानीय भाषा में 'अक्ती' कहा जाता है, केवल एक त्योहार नहीं बल्कि नए कृषि वर्ष का उद्घोष है। मांगलिख शुरुआत इस दिन को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, जिसमें किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती पुतरी-पुतरा का विवाह इसी विश्वास का प्रतीक है कि आने वाला समय खुशहाली लाएगा। खेती-किसानी का शुभारंभ इस दिन किसान भाई मंदिर और देवालयों में जाकर ठाकुर देव की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन खेतों में धान की बुआई (मुट्ठी लेई) करने से फसल अक्षय (जिसका क्षय न हो) होती है और अन्न के भंडार भरे रहते हैं।अक्ती का यह पर्व हमें मिट्टी और संस्कारों से जोड़ता है। बच्चों द्वारा किया गया यह आयोजन हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवित रखने का एक प्रयास है।" , योगेश चंद्राकर ने बताया कि इस दिन किए गए दान, तप और पूजा का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसीलिए इसे 'अक्षय' कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी तिथि से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। इस दिन माटी की पूजा करना धरती माता के प्रति सम्मान प्रकट करने का तरीका है, जिससे पर्यावरण और कृषि के बीच संतुलन बना रहे। हंसी-ठिठोली और बाजे-गाजे के साथ संपन्न हुआ यह विवाह उत्सव गांव की एकता और समृद्ध संस्कृति की सुंदर तस्वीर पेश करता है। इस अवसर पर किरण सोनी, राखी मानिकपुरी ,भूमि ,खुशी प्रियंका सोनी, मंजू देवगन , अमेरिका सोनी बीरजू सोनी , आकाश सोनी। , मोंटी सोनी आदि उपस्थित रहे। श्री रोहित वर्मा जी की खबर
- चकरभाठा में कृष्णा सोसाइटी के पास नाली में फसी गाय का छतौना के गौ सेवा धाम ने किया रेस्क्यू सोमवार की रात 10:00 बजे गौ सेवा धाम छतौना के सेवक प्रहलाद यादव जी से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की रात 9:28 पर गौ सेवा धाम छतौना को एक कालर से फोन से सूचना प्राप्त हुई की चकरभाठा में कृष्णा सोसाइटी के पास रूपचंद ज्वेलर्स के सामने नाली में एक गाय फस गई है जो निकल नहीं पा रही सूचना मिलते ही गौ सेवा धाम छतौना की टीम घटना स्थल पहुंची जहां जाकर गाय का रेस्क्यू कर नाली से बाहर निकाल गया एवं प्राथमिक उपचार किया गया है अब गाय की हालत सामान्य है1
- डोमसरा में मासिक बैठक सम्पन्न, जैविक खेती और जल संरक्षण पर किसानों को किया गया जागरूक पंडरिया (कबीरधाम)। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत डोमसरा में कबीर किसान समूह द्वारा विशेष कार्यक्रम एवं मासिक बैठक का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ एग्रिकान समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को सतत कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बेल वृक्ष की पूजा-अर्चना और वृक्षारोपण से हुई, जहां किसानों ने प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया। इस मौके पर समलिया साहू ने कहा कि अक्षय तृतीया खेती की नई शुरुआत का प्रतीक है और यह दिन समृद्धि एवं शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। बैठक में रासायनिक खाद की संभावित कमी को देखते हुए किसानों को जैविक खेती अपनाने की सलाह दी गई। हरी खाद (सनई), ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, राइजोबियम और पीएसबी जैसे बायो-इनपुट्स के उपयोग के साथ-साथ नीमास्त्र, जीवामृत और पंचपर्णी जैसे घरेलू जैविक घोलों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन उपायों से खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।1
- महिला अधिकारी अपने ही बात मे फंस गई, जब खुला पोल। Wait for end #breakingnews #bilaspurbreakingnews #bilaspurchhattisgarh #ChhattisgarhNews1
- बिलासपुर में सुकून फाउंडेशन का ऐतिहासिक परिचय सम्मेलन — रिश्तों को नई दिशा, समाज सेवा का प्रेरणादायक संदेश1
- हमारे गांव का तालाब है जो कि इतना ज्यादा गंदा है कि इसमें लोग नहाना भी पसंद नहीं करते यहां के लोगों को नजर ही नहीं पड़ती यहां के पंच सरपंच भी ध्यान नही दे रहे ऐसे में आम नागरिक क्या ही कर सकता है।। मेरा आग्रह है कि आप हमारी मदद करें।।1
- बिलासपुर में लेंसकार्ट की दुकानों के बाहर हिंदू संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। व्यापार विहार, इंदु चौक सहित कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने कंपनी पर सनातन विरोधी होने का आरोप लगाते हुए लोगों से खरीदारी न करने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए अपने विरोध को दर्ज कराया। हिंदू संगठन के पदाधिकारी ठाकुर राम सिंह ने कहा कि जो भी सनातन के खिलाफ बोलेगा, उसका विरोध किया जाएगा। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है और प्रशासन की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है।1
- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर मे पांच इस्थाई जजों का सपत ग्रहण समारोह हुवा संपन्न सोमवार की शाम 7:30 पर पी आर ओ द्वारा जारी किये गए प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी के अनुसार सौमवार को प्रातः 10:30 बजे माननीय श्री न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, माननीय श्री न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल, माननीय श्री न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, माननीय श्री न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरू एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण किया। माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के द्वारा अपने न्यायालय कक्ष में उन्हें शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के समस्त माननीय न्यायाधीशगण उपस्थित रहे। यह उल्लेखनीय है कि विधि एवं विधायी कार्य विभाग नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में माननीय श्री न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत, माननीय श्री न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल, माननीय श्री न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, माननीय श्री न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरू एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए जाने हेतु अधिसूचना जारी की है। उक्त शपथ ग्रहण कार्यक्रम में अध्यक्ष एवं सचिव उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, अतिरिक्त महाधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्तागण एवं अन्य अधिवक्तागण, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री, न्यायिक अकादमी एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारीगण, प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।1
- बादाम फेंककर याद दिलाने वाले मामले में नया मोड़।। अधिकारी का आया बड़ा बयान #ktnews #छत्तीसगढ़ #reels #trending #बिलासपुर1
- इसी घर के नामांतरण के लिए घटी बादाम कांड वाली घटना। #bqdamkandbiladpur #bilaspurbreakingnews #bilaspurchhattisgarh1