अयोध्या धाम में हनुमानगढ़ी और श्रीरामलला के दर्शन के लिए करोड़ों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, लेकिन इस दौरान वहाँ मौजूद 'VIP कल्चर' को लेकर आम भक्तों के मन में बड़े सवाल उठ रहे हैं। यह मुद्दा लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या भगवान के दरबार में भी ऐसी विशेष व्यवस्थाएँ होनी चाहिए। एक तरफ़ जहाँ आम श्रद्धालु घंटों तक लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को कथित तौर पर विशेष सुविधाएँ मिलने की बातें सामने आती रहती हैं। इसी असमानता को लेकर श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि जब भगवान के सामने सभी भक्त समान हैं, तो फिर VIP और आम भक्तों में यह अंतर क्यों? यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या अयोध्या में दर्शन व्यवस्था पूरी तरह से समान और पारदर्शी नहीं होनी चाहिए, और क्या भगवान के दरबार से VIP कल्चर समाप्त होना चाहिए।
अयोध्या धाम में हनुमानगढ़ी और श्रीरामलला के दर्शन के लिए करोड़ों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, लेकिन इस दौरान वहाँ मौजूद 'VIP कल्चर' को लेकर आम भक्तों के मन में बड़े सवाल उठ रहे हैं। यह मुद्दा लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या भगवान के दरबार में भी ऐसी विशेष व्यवस्थाएँ होनी चाहिए। एक तरफ़ जहाँ आम श्रद्धालु घंटों तक लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को कथित तौर पर विशेष सुविधाएँ मिलने की बातें सामने आती रहती हैं। इसी असमानता को लेकर श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि जब भगवान के सामने सभी भक्त समान हैं, तो फिर VIP और आम भक्तों में यह अंतर क्यों? यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या अयोध्या में दर्शन व्यवस्था पूरी तरह से समान और पारदर्शी नहीं होनी चाहिए, और क्या भगवान के दरबार से VIP कल्चर समाप्त होना चाहिए।
- अयोध्या धाम में हनुमानगढ़ी और श्रीरामलला के दर्शन के लिए करोड़ों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं, लेकिन इस दौरान वहाँ मौजूद 'VIP कल्चर' को लेकर आम भक्तों के मन में बड़े सवाल उठ रहे हैं। यह मुद्दा लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या भगवान के दरबार में भी ऐसी विशेष व्यवस्थाएँ होनी चाहिए। एक तरफ़ जहाँ आम श्रद्धालु घंटों तक लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को कथित तौर पर विशेष सुविधाएँ मिलने की बातें सामने आती रहती हैं। इसी असमानता को लेकर श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि जब भगवान के सामने सभी भक्त समान हैं, तो फिर VIP और आम भक्तों में यह अंतर क्यों? यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या अयोध्या में दर्शन व्यवस्था पूरी तरह से समान और पारदर्शी नहीं होनी चाहिए, और क्या भगवान के दरबार से VIP कल्चर समाप्त होना चाहिए।1
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफ़नी ट्रंप अपने दामाद माइकल बुलोस के साथ उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ताजमहल देखने पहुँचीं।1
- तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध तुंगनाथ धाम में बढ़ती भीड़, गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति को लेकर धाम के पुजारी ने एक बड़ा बयान जारी किया है।1
- मथुरा में "गोचरों का नेपथ्य" नामक काव्य महासंकलन का भव्य विमोचन वरिष्ठ कवि साहित्यकार डॉ. राजेन्द्र मिलन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुरुग्राम के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री बी. एस. बघेल थे, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल यादराम बघेल ने स्वागताध्यक्ष की भूमिका निभाई। यह महासंकलन भारत के 11 प्रदेशों के 163 हिंदी कवियों की कविताओं का संग्रह है। इस काव्य महासंकलन का प्रकाशन पलवल स्थित कल्पवक्ष पब्लिशिंग हाउस के एमडी श्री ओम प्रकाश बघेल द्वारा किया गया है। गाजियाबाद के श्री प्रेम कुमार पाल ने इसके संयोजन का कार्यभार संभाला, वहीं डॉ. जे. पी. बघेल मुंबई, शिव कुमार दीपक हाथरस, रविपाल खामोश वडोदरा और मथुरा के श्री रुपेश धनगर ने संयुक्त रूप से इसका संपादन किया है। विमोचन समारोह के अवसर पर पुण्यश्लोक महारानी अहिल्यादेवी होल्कर की 301वीं जयंती भी मनाई गई। कार्यक्रम के पश्चात एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न प्रदेशों से आए 60 से अधिक कवियों और कवयित्रियों ने अपनी काव्य रचनाओं का पाठ किया। इस साहित्यिक आयोजन में दिल्ली के श्री नत्थी सिंह बघेल और डॉ. हरि सिंह पाल, कासगंज के डॉ. राम प्रकाश पथिक, शिकोहाबाद के श्री पहुंचीलाल धनगर 'विषधर', कच्छ गुजरात की डॉ. संगीता पाल, मुंबई की डॉ. सुशीला पाल, फिरोजाबाद की सुश्री सरोज सौदामिनी, शिवपुरी (म.प्र.) की सुश्री मनु वैशाली, नागपुर (महाराष्ट्र) के डॉ. प्रभाकर लोंढे और शहडोल (छत्तीसगढ़) के जोहन पाल भार्गव सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।4
- उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में स्थित रोपवे पर एक श्रद्धालु के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना से दर्शन के लिए आए परदेशी श्रद्धालुओं को प्रताड़ना और भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। इस मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि परदेशी दर्शनार्थियों को बृज क्षेत्र में और कितनी पीड़ा सहनी पड़ेगी। सवाल उठाया गया है कि अपने देश वापस जाकर वे बृज के बारे में क्या बताएंगे, जब उन्हें यहाँ दर्शन करने में इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।1
- यह पोस्ट जोर देती है कि ताकत की बुलंदी पल भर का तमाशा है, चेतावनी देते हुए कि जिस डाल पर कोई बैठा है वह टूट भी सकती है। इसमें कहा गया है कि असली ताकत जनता का विश्वास है, और जो लोग घमंड में आकर इसे भूल जाते हैं, समय उन्हें याद दिला देता है। बंगाल में TMC के खिलाफ जनता का गुस्सा ऐसे ही घमंड का नतीजा बताया गया है। पोस्ट में आगे कहा गया है कि बंगाल में टीएमसी की हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई है, और यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब सरकार भाजपा की है।1