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ठुनाली सजवान का स्टोरी वीडियो शेयर करें

7 hrs ago
user_Parvat Paigaam
Parvat Paigaam
Media company प्रतापनगर, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
7 hrs ago

ठुनाली सजवान का स्टोरी वीडियो शेयर करें

More news from उत्तराखंड and nearby areas
  • Post by Parvat Paigaam
    2
    Post by Parvat Paigaam
    user_Parvat Paigaam
    Parvat Paigaam
    Media company प्रतापनगर, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    5 hrs ago
  • ‘‘हिमालय की गोद में स्थित माँ चंद्रवदनी शक्तिपीठ’’ ‘‘चंद्रकूट पर्वत पर विराजमान दिव्य आस्था का केंद्र’’ ‘‘चंद्रवदनी मंदिर: पौराणिक कथाओं और श्रद्धा का संगम’’ ‘‘गढ़वाल की धार्मिक विरासत का गौरव: चंद्रवदनी धाम’’ ‘‘उत्तराखंड का चंद्रवदनी मंदिर: आस्था, इतिहास और अनोखी परंपरा का संगम‘‘ उत्तराखंड के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक, माँ चंद्रवदनी मंदिर न केवल अपनी आध्यात्मिक महत्वता के लिए जाना जाता है, बल्कि इसका इतिहास, पौराणिक कथाएं और अनोखी परंपराएं भी इसे खास बनाती हैं। देवप्रयाग से करीब 33 किलोमीटर एवं जिला मुख्यालय नई टिहरी लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, चंद्रकूट पर्वत पर लगभग आठ हजार फीट की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर, हिमालय के मनोरम दृश्यों के बीच स्थित है। यहां का शांत वातावरण और रहस्यमयी इतिहास हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। ‘‘पौराणिक कथाओं में उल्लेख: सती का ‘कटीभाग‘ और चंद्रमुखी देवी‘‘ देवप्रयाग निवासी एवं वर्तमान में अमर उजाला समाचार पत्र में काम कर रहे श्री राजेश भट्ट ने बताया कि स्कंदपुराण, देवी भागवत और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस मंदिर का उल्लेख भुवनेश्वरी सिद्धपीठ के रूप में मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती का ‘कटीभाग‘ (कमर का हिस्सा) गिरा था, जिसके बाद यह एक प्रमुख शक्तिपीठ बन गया। एक अन्य कथा बताती है कि जब शिव सती के वियोग में व्याकुल होकर इस स्थान पर आए, तो देवी सती ने चंद्रमा जैसे शीतल मुख के साथ प्रकट होकर उन्हें शांत किया। इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम ‘चंद्रवदनी‘ पड़ा। ‘‘महाभारत काल से जुड़ा अश्वत्थामा का रहस्य‘‘ इस मंदिर से एक और दिलचस्प कहानी जुड़ी है, जिसका संबंध महाभारत से है। माना जाता है कि इसी चंद्रकूट पर्वत पर अश्वत्थामा को श्राप के बाद छोड़ा गया था और वह आज भी अमर रूप में हिमालय में विचरण करते हैं। यह कथा मंदिर के आध्यात्मिक और रहस्यमयी स्वरूप को और गहरा बनाती है। ‘‘सामाजिक परिवर्तन की मिसाल: बलि प्रथा का अंत‘‘ श्री राजेश भट्ट जी बताते हैं कि कभी गढ़वाल क्षेत्र में प्रचलित रही पशु बलि की प्रथा, जो 1805 में शुरू हुई थी, इस मंदिर में भी फैली हुई थी। लेकिन 1970 के दशक में भुवनेश्वरी महिला आश्रम के संस्थापक स्वामी मनमंथन ने इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। उनके प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि 1990 में इस मंदिर में हमेशा के लिए बलि प्रथा समाप्त हो गई, जो सामाजिक बदलाव की एक बड़ी मिसाल है। ‘‘आंखों पर पट्टी बांधकर वस्त्र परिवर्तन की अनोखी परंपरा‘‘ माँ चंद्रवदनी मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा इसकी मूर्ति के बजाय स्थापित पवित्र श्री यंत्र से जुड़ी है। यहां अन्य मंदिरों की तरह कोई मूर्ति नहीं है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान, मंदिर के मुख्य पुजारी अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर गर्भगृह के अंदर श्री यंत्र के वस्त्र बदलते हैं। मंदिर समिति के प्रबंधक आनंद भट्ट के अनुसार, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है क्योंकि श्री यंत्र की शक्ति इतनी प्रबल मानी जाती है कि इसे खुली आंखों से देखना वर्जित है। स्थानीय लोगों की मानें तो एक बार एक व्यक्ति ने बिना पट्टी बांधे गर्भगृह में प्रवेश किया था, जिसके बाद उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। यह परंपरा मंदिर के रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाती है।
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    ‘‘हिमालय की गोद में स्थित माँ चंद्रवदनी शक्तिपीठ’’
‘‘चंद्रकूट पर्वत पर विराजमान दिव्य आस्था का केंद्र’’
‘‘चंद्रवदनी मंदिर: पौराणिक कथाओं और श्रद्धा का संगम’’
‘‘गढ़वाल की धार्मिक विरासत का गौरव: चंद्रवदनी धाम’’
‘‘उत्तराखंड का चंद्रवदनी मंदिर: आस्था, इतिहास और अनोखी परंपरा का संगम‘‘
उत्तराखंड के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक, माँ चंद्रवदनी मंदिर न केवल अपनी आध्यात्मिक महत्वता के लिए जाना जाता है, बल्कि इसका इतिहास, पौराणिक कथाएं और अनोखी परंपराएं भी इसे खास बनाती हैं। देवप्रयाग से करीब 33 किलोमीटर एवं जिला मुख्यालय नई टिहरी लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, चंद्रकूट पर्वत पर लगभग आठ हजार फीट की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर, हिमालय के मनोरम दृश्यों के बीच स्थित है। यहां का शांत वातावरण और रहस्यमयी इतिहास हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
‘‘पौराणिक कथाओं में उल्लेख: सती का ‘कटीभाग‘ और चंद्रमुखी देवी‘‘
देवप्रयाग निवासी एवं वर्तमान में अमर उजाला समाचार पत्र में काम कर रहे श्री राजेश भट्ट ने बताया कि स्कंदपुराण, देवी भागवत और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस मंदिर का उल्लेख भुवनेश्वरी सिद्धपीठ के रूप में मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती का ‘कटीभाग‘ (कमर का हिस्सा) गिरा था, जिसके बाद यह एक प्रमुख शक्तिपीठ बन गया। एक अन्य कथा बताती है कि जब शिव सती के वियोग में व्याकुल होकर इस स्थान पर आए, तो देवी सती ने चंद्रमा जैसे शीतल मुख के साथ प्रकट होकर उन्हें शांत किया। इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम ‘चंद्रवदनी‘ पड़ा।
‘‘महाभारत काल से जुड़ा अश्वत्थामा का रहस्य‘‘
इस मंदिर से एक और दिलचस्प कहानी जुड़ी है, जिसका संबंध महाभारत से है। माना जाता है कि इसी चंद्रकूट पर्वत पर अश्वत्थामा को श्राप के बाद छोड़ा गया था और वह आज भी अमर रूप में हिमालय में विचरण करते हैं। यह कथा मंदिर के आध्यात्मिक और रहस्यमयी स्वरूप को और गहरा बनाती है।
‘‘सामाजिक परिवर्तन की मिसाल: बलि प्रथा का अंत‘‘
श्री राजेश भट्ट जी बताते हैं कि कभी गढ़वाल क्षेत्र में प्रचलित रही पशु बलि की प्रथा, जो 1805 में शुरू हुई थी, इस मंदिर में भी फैली हुई थी। लेकिन 1970 के दशक में भुवनेश्वरी महिला आश्रम के संस्थापक स्वामी मनमंथन ने इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। उनके प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि 1990 में इस मंदिर में हमेशा के लिए बलि प्रथा समाप्त हो गई, जो सामाजिक बदलाव की एक बड़ी मिसाल है।
‘‘आंखों पर पट्टी बांधकर वस्त्र परिवर्तन की अनोखी परंपरा‘‘
माँ चंद्रवदनी मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा इसकी मूर्ति के बजाय स्थापित पवित्र श्री यंत्र से जुड़ी है। यहां अन्य मंदिरों की तरह कोई मूर्ति नहीं है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान, मंदिर के मुख्य पुजारी अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर गर्भगृह के अंदर श्री यंत्र के वस्त्र बदलते हैं। मंदिर समिति के प्रबंधक आनंद भट्ट के अनुसार, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है क्योंकि श्री यंत्र की शक्ति इतनी प्रबल मानी जाती है कि इसे खुली आंखों से देखना वर्जित है। स्थानीय लोगों की मानें तो एक बार एक व्यक्ति ने बिना पट्टी बांधे गर्भगृह में प्रवेश किया था, जिसके बाद उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। यह परंपरा मंदिर के रहस्यमय और शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाती है।
    user_Vijaypal Rana
    Vijaypal Rana
    टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • 22 करोड़ की लागत से बौराड़ी मे बन रहा आईएसबीटी और सिटी सेंटर, ADB द्वारा किया जा रहा निर्माण कार्य
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    22 करोड़ की लागत से बौराड़ी मे बन रहा आईएसबीटी और सिटी सेंटर, ADB द्वारा किया जा रहा निर्माण कार्य
    user_Uklive Uttrakhand
    Uklive Uttrakhand
    टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    12 hrs ago
  • PM Ujjwala Yojana 2026 (3.0) Online Apply: फ्री गैस कनेक्शन कैसे मिलेगा, जानिए पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया
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    PM Ujjwala Yojana 2026 (3.0) Online Apply: फ्री गैस कनेक्शन कैसे मिलेगा, जानिए पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया
    user_Sewa Center 24
    Sewa Center 24
    Video Creator डुंडा, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    9 hrs ago
  • Post by Sachin Nayak🥷⚔️🇮🇳
    1
    Post by Sachin Nayak🥷⚔️🇮🇳
    user_Sachin Nayak🥷⚔️🇮🇳
    Sachin Nayak🥷⚔️🇮🇳
    Bhatwari, Uttar Kashi•
    9 hrs ago
  • फरहान उल हक़, सादिक हुसैन वारसी, और प्रमोद कुमार जी को संगठन में शामिल किए जाने पर दिली मुबारकबाद एवं हार्दिक शुभकामनाएं
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    फरहान उल हक़, 
सादिक हुसैन वारसी, और 
प्रमोद कुमार जी को संगठन में शामिल किए जाने पर दिली मुबारकबाद एवं हार्दिक शुभकामनाएं
    user_किसान मजदूर महासंग्राम संगठन
    किसान मजदूर महासंग्राम संगठन
    Farmer Dehradun, Uttarakhand•
    5 hrs ago
  • मुंबई में बनकर तैयार हुई म्यूजिकल सड़क
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    मुंबई में बनकर तैयार हुई म्यूजिकल सड़क
    user_Zeta News 24x7
    Zeta News 24x7
    Local News Reporter देहरादून, देहरादून, उत्तराखंड•
    6 hrs ago
  • Post by Parvat Paigaam
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    Post by Parvat Paigaam
    user_Parvat Paigaam
    Parvat Paigaam
    Media company प्रतापनगर, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
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