सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस कोड के तौर पर साड़ी अनिवार्य कर दी है, लेकिन भैंसदेही के पलासपानी पंचायत के जामुडोल गांव में आंगनबाड़ी के पास अपना कोई भवन नहीं है। नए सरकारी आदेश के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के दायरे में जहां आंगनबाड़ी भवन नहीं है या क्षतिग्रस्त है, वहाँ उसे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जामुडोल की प्राथमिक शाला में केवल एक कमरा है, जिसमें कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं। जगह की कमी के कारण पूरे बारह महीने बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता है, जो मानसून के मौसम में पूरी तरह से खुला रहता है। ऐसी स्थिति में, आंगनबाड़ी के बच्चों को स्कूल में स्थानांतरित करने के आदेश पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जब स्कूल के अपने बच्चे ही भारी बारिश में बरामदे में भीगने को मजबूर हैं, तो 3 से 6 साल के मासूम आंगनबाड़ी बच्चे कहाँ और कैसे बैठेंगे, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। भवन और जगह की कमी के कारण जामुडोल में आंगनबाड़ी अपने तय समय पर संचालित नहीं हो पा रही है। जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी के बच्चों को दोपहर 1 बजे ही छुट्टी दे दी जाती है, जिसके बाद कार्यकर्ता और सहायिका दोनों घर में विश्राम करती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ड्रेस कोड को अनिवार्य करने से पहले बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आवश्यक है। वे मांग करते हैं कि जामुडोल में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए, या जब तक भवन नहीं बनता, तब तक बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, क्योंकि बारिश के मौसम में छोटे बच्चों को खुले बरामदे में बैठाना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस कोड के तौर पर साड़ी अनिवार्य कर दी है, लेकिन भैंसदेही के पलासपानी पंचायत के जामुडोल गांव में आंगनबाड़ी के पास अपना कोई भवन नहीं है। नए सरकारी आदेश के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के दायरे में जहां आंगनबाड़ी भवन नहीं है या क्षतिग्रस्त है, वहाँ उसे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जामुडोल की प्राथमिक शाला में केवल एक कमरा है, जिसमें कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं। जगह की कमी के कारण पूरे बारह महीने बच्चों को बरामदे में
बैठकर पढ़ना पड़ता है, जो मानसून के मौसम में पूरी तरह से खुला रहता है। ऐसी स्थिति में, आंगनबाड़ी के बच्चों को स्कूल में स्थानांतरित करने के आदेश पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जब स्कूल के अपने बच्चे ही भारी बारिश में बरामदे में भीगने को मजबूर हैं, तो 3 से 6 साल के मासूम आंगनबाड़ी बच्चे कहाँ और कैसे बैठेंगे, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। भवन और जगह की कमी के कारण जामुडोल में आंगनबाड़ी अपने तय समय पर संचालित नहीं
हो पा रही है। जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी के बच्चों को दोपहर 1 बजे ही छुट्टी दे दी जाती है, जिसके बाद कार्यकर्ता और सहायिका दोनों घर में विश्राम करती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ड्रेस कोड को अनिवार्य करने से पहले बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आवश्यक है। वे मांग करते हैं कि जामुडोल में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए, या जब तक भवन नहीं बनता, तब तक बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, क्योंकि बारिश के मौसम में छोटे बच्चों को खुले बरामदे में बैठाना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
- सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस कोड के तौर पर साड़ी अनिवार्य कर दी है, लेकिन भैंसदेही के पलासपानी पंचायत के जामुडोल गांव में आंगनबाड़ी के पास अपना कोई भवन नहीं है। नए सरकारी आदेश के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के दायरे में जहां आंगनबाड़ी भवन नहीं है या क्षतिग्रस्त है, वहाँ उसे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जामुडोल की प्राथमिक शाला में केवल एक कमरा है, जिसमें कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं। जगह की कमी के कारण पूरे बारह महीने बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता है, जो मानसून के मौसम में पूरी तरह से खुला रहता है। ऐसी स्थिति में, आंगनबाड़ी के बच्चों को स्कूल में स्थानांतरित करने के आदेश पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जब स्कूल के अपने बच्चे ही भारी बारिश में बरामदे में भीगने को मजबूर हैं, तो 3 से 6 साल के मासूम आंगनबाड़ी बच्चे कहाँ और कैसे बैठेंगे, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। भवन और जगह की कमी के कारण जामुडोल में आंगनबाड़ी अपने तय समय पर संचालित नहीं हो पा रही है। जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी के बच्चों को दोपहर 1 बजे ही छुट्टी दे दी जाती है, जिसके बाद कार्यकर्ता और सहायिका दोनों घर में विश्राम करती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ड्रेस कोड को अनिवार्य करने से पहले बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आवश्यक है। वे मांग करते हैं कि जामुडोल में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए, या जब तक भवन नहीं बनता, तब तक बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, क्योंकि बारिश के मौसम में छोटे बच्चों को खुले बरामदे में बैठाना बिल्कुल भी उचित नहीं है।3
- भारतीय जनता पार्टी के डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म (DLP) पर संगठन की विचारधारा और डिजिटल प्रशिक्षण वर्ग को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई और उनकी समीक्षा भी की गई। इसी क्रम में, प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आठनेर नगर पहुँचे। उन्होंने नगर मंडल के शक्ति केंद्रों का दौरा किया, जहाँ उन्होंने नगर के तीनों शक्ति केंद्रों के प्रभारी, बूथ अध्यक्षों और बूथ समिति के सदस्यों के साथ डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म 2026 के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इसके अतिरिक्त, नगर में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने भी भाजपा मंडल की एक बैठक आयोजित की, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।1
- बैतूल नगर पालिका द्वारा शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने और सड़क किनारे बढ़ते अतिक्रमण पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से एक विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत कॉलेज चौक और गंज क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में सड़क किनारे अवैध रूप से लगाए गए फल, चाट, नाश्ते के ठेले तथा अन्य अस्थायी दुकानों को हटाया गया। नगर पालिका की टीम ने कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे सड़क पर दोबारा कब्जा न करें। अधिकारियों ने बताया कि सड़क किनारे अवैध रूप से लगाए गए इन ठेलों और दुकानों के कारण यातायात प्रभावित हो रहा था, जिससे आम नागरिकों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। नगर पालिका ने स्पष्ट किया है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त रखने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आगे भी इस प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। प्रशासन ने सभी दुकानदारों और ठेला संचालकों से अपील की है कि वे निर्धारित स्थानों पर ही व्यवसाय करें और नगर पालिका के निर्देशों का पालन करें।2
- आठनेर तहसील की ग्राम पंचायत टेमुरनी स्थित प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक श्री उत्तम साहू के स्थानांतरण को निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवाने एवं सहायक आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों का कहना है कि ज्ञापन दिए जाने के बावजूद अब तक उनकी मांग पर कोई सकारात्मक कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और वे पुनः इस संबंध में अपील कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, श्री उत्तम साहू के नेतृत्व में विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके कार्यों से प्रभावित होकर ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय परिसर में लगभग 275 फीट लंबी बाउंड्री वॉल, सांस्कृतिक मंच और प्रांगण में पेविंग ब्लॉक सहित कई विकास कार्य कराए गए हैं। श्री उत्तम साहू ने भी अपने व्यक्तिगत सहयोग से झूला एवं बाउंड्री वॉल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यालय का परीक्षा परिणाम पिछले कई वर्षों से शत-प्रतिशत रहा है और यहां के विद्यार्थियों ने जिले में प्रथम स्थान भी प्राप्त किया है, जिसके लिए विद्यालय को जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि श्री उत्तम साहू विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखते हैं, जिससे विद्यालय में अनुशासन एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति लगभग शत-प्रतिशत बनी रहती है। वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों की व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सहायता करने के साथ-साथ उनके लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था भी कराते हैं। ग्रामीणों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि प्राथमिक शाला में वर्तमान में तीन शिक्षक पदस्थ हैं, जिनमें से शिक्षिका श्रीमती पल्लवी पांडे मातृत्व अवकाश पर हैं। ऐसी स्थिति में, यदि श्री उत्तम साहू का स्थानांतरण किया जाता है, तो विद्यालय में केवल एक शिक्षक ही शेष रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित होंगी। इसलिए, उन्होंने जिला कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त से पुनः आग्रह किया है कि श्री उत्तम साहू की शैक्षिक कार्यकुशलता, विद्यालय के उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनका स्थानांतरण तत्काल निरस्त किया जाए और उन्हें प्राथमिक शाला टेमुरनी में यथावत पदस्थ रखा जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।1
- मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रस्तावित पांच दिवसीय सत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति में गर्माहट आ गई है। इसी बीच, विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने जनता से जनसमस्याओं, भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही से जुड़े मुद्दे साझा करने की अपील की है, ताकि उन्हें सदन में उठाया जा सके। कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विधानसभा सत्र की अवधि कम रखकर जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहती है। सिंघार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सदन में जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाएगी और इसी उद्देश्य से उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि वे किसी समस्या से प्रभावित हैं, तो अपने मुद्दे और सवाल साझा करें। जनता से सुझाव और शिकायतें प्राप्त करने के लिए उन्होंने एक संपर्क नंबर (8269889419) और ईमेल भी जारी किया है। हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1
- मुलताई नगर पालिका ने शहर में अतिक्रमण हटाने और जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। यह अभियान मुख्य रूप से परेगांव रोड स्थित सुभाष वार्ड में धोपड़े के खेत से लगे क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाने पर केंद्रित था। बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए, नगर पालिका के अतिक्रमण दल ने नालों से भी अवैध कब्जे हटाए, ताकि आगामी वर्षाकाल में जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। इस कार्रवाई के तहत नालों की गहन साफ-सफाई भी की गई, जिससे शहर की जल निकासी प्रणाली को बेहतर और सुगम बनाया जा सके। नगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान शहर को जलभराव की स्थिति से बचाने के लिए इस तरह के अभियान लगातार चलाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नालों पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के दौरान नगर पालिका का अतिक्रमण दल तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, खेड़ीसावलीगढ़ परतवाड़ा मार्ग पर हनुमान गुफा मंदिर के पास एक जानलेवा गड्ढा बन गया है। खेड़ी परतवाड़ा स्टेट हाइवे 43 पर, खेड़ीसावलीगढ़ से लगभग 4 किलोमीटर दूर, हनुमान गुफा मंदिर के निकट मुख्य मार्ग की पटरी पर बरसात के कारण अचानक यह बड़ा गड्ढा हो गया है। यह गड्ढा आने-जाने वाले वाहनों के लिए गंभीर खतरे का सबब बना हुआ है, जिससे लोगों की जान जोखिम में है। इस मार्ग की हालत पहले से ही जर्जर बताई गई है। सड़क मरम्मत का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी है, लेकिन सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने के कारण मौजूदा सड़क की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्राधिकरण की इस घोर अनदेखी से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है, क्योंकि वे अपनी जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक मार्ग पर यात्रा करने को मजबूर हैं।1