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Lalpur chowk Sonapur gaon
Mohammed Ashfak
Lalpur chowk Sonapur gaon
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- फिल्म: आखिरी गुलाम (गरीबी) अभिनेता चिंटू तिवारी1
- 🎤 भोजपुरी सिंगर अनिरुद्ध यादव का बड़ा आरोप: “मेरा गाना चोरी हुआ” भोजपुरी संगीत जगत में एक नया विवाद सामने आया है। चर्चित गायक अनिरुद्ध यादव ने मीडिया के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका लोकप्रिय गाना “लभरवा जहर खाइले बा” बिना अनुमति के इस्तेमाल किया गया है। अनिरुद्ध यादव का कहना है कि उन्होंने इस गाने को काफी मेहनत और रचनात्मकता के साथ तैयार किया था, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इसे कॉपी कर प्रस्तुत किया गया, जिससे उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह सीधे-सीधे उनके काम की चोरी है और वे इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर रहे हैं। गायक ने यह भी बताया कि कलाकारों की मेहनत और मौलिकता का सम्मान होना चाहिए। अगर ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में रचनात्मक लोगों का मनोबल टूट सकता है। वहीं, इस आरोप के बाद भोजपुरी इंडस्ट्री में हलचल तेज हो गई है और लोग इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब देखना होगा कि इस विवाद में आगे क्या मोड़ आता है और क्या संबंधित पक्ष अपनी सफाई देते हैं या नहीं।1
- आज 2023 के महिला आरक्षण बिल को बिना देरी के, तत्काल लागू करों नारों से साथ पूर्वी गुमटी से रेलवे स्टेशन तक ऐपवा व भाकपा-माले के बैनर तले मार्च निकाला गया। मार्च के नेतृत्व भाकपा-माले नगर सचिव सुधीर सिंह ने किया।रेलवे स्टेशन परिसर पहुँच कर मार्च सभा में तब्दील हो गया।सभा का संचालन भाकपा-माले जिला कमिटी सदस्य रौशन कुशवहा ने किया। ऐपवा नेत्री संगिता सिंह ने कही कि ये सरकार द्वारा इसे जनगणना और परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने को चुनावी चाल बनाना चाहती है। हमारी मांग है कि मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% कोटा हो, न कि वर्षों बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के बाद । भाकपा-माले राज्य कमिटी सदस्य क्यामुदीन अंसारी ने कहा कि बिल 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया था, इसलिए इसे 2024 या आगामी चुनावों में तुरंत लागू किया जाना चाहिए था जो कि वर्तमान सरकार ने ऐसा नहीं किया और आज झुठ मुठ का घरियाली आंसु बहा रही है। भाकपा-माले जिला कार्यलय सचिव दिलराज प्रितम ने कहा कि वर्तमान सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा है, जिससे आरक्षण लागू होने में 2029 या उससे बाद तक की देरी हो सकती है। सरकार इसे परिसीमन से जोड़कर आगामी चुनावों के लिए एक "चुनावी पैंतरा" के रूप में इस्तेमाल कर रही है, न कि वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए।हमारी मांग है कि 33% आरक्षण के भीतर ही अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए कोटा (Sub-quota) सुनिश्चित किया जाए ।दूसरा इससे दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ने पर उच्च आबादी वाले उत्तरी राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे उनका प्रभाव कम हो जाएगा इसलिए 2023 में महिला आरक्षण बिल को तत्काल लागू करने जरूरत है।साथ ही महिला आरक्षण में दलित-पिछडी़ समुदाय की महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित जाति जनगणना शीघ्र प्रकाशित करों। निष्पक्ष परिसीमन के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाओं। महिला आरक्षण का झुठा प्राचार बंद करो।मार्च में शामिल जिला कमिटी सदस्य बालमुकुंद चौधरी,अमित कुमार बंटी, नगर कमिटी सदस्य रणधीर राणा, विकास कुमार, कलावती देवी, गायत्री देवी, अनिल वर्मा ,सत्यदेव कुमार, किरण प्रसाद, संतविलास राम, रितेश कुमार, राजु सहीत दर्जनों लोग थे।1
- आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर नगर पंचायत क्षेत्र में दिलमपुर एक ऐसी शव यात्रा निकली, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। अमूमन जहां मृत्यु के बाद माहौल गमगीन होता है और आंखों में आंसू होते हैं, वहीं शाहपुर में एक बुजुर्ग महिला की अंतिम विदाई किसी उत्सव की तरह मनाई गई। शाहपुर दिलमपुर निवासी स्वर्गीय डॉक्टर जनार्दन पांडेय की पत्नी कौशल्या देवी जो नारद पांडे पुत्र व रमेश पांडेय की दादी के निधन के बाद उनके परिजनों ने दुखी होने के बजाय उनके द्वारा जीए गए लंबी और खुशहाल उम्र को सेलिब्रेट करने का निर्णय लिया। परिजनों का मानना था कि दादी ने अपना जीवन पूरी गरिमा के साथ जिया और अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़कर गई हैं, इसलिए उनकी विदाई 'विजय यात्रा' की तरह होनी चाहिए। शव यात्रा के दौरान पूरी सड़क पर उत्सव जैसा नजारा दिखा। शव वाहन के आगे-आगे डीजे और ढोल-नगाड़े बज रहे थे। बैंड-बाजे की धुन पर परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग झूमते-नाचते हुए श्मशान घाट की ओर बढ़ रहे थे। इस अनोखी शव यात्रा को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। शाहपुर के स्थानीय निवासियों के लिए यह दृश्य भावुक करने वाला भी था और प्रेरणादायक भी। लोगों ने कहा कि यह इस बात का प्रतीक है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पूरी आयु जीकर और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाकर जाता है, तो उसकी मृत्यु शोक का नहीं बल्कि उसके जीवन के सफल समापन का अवसर होती है। यह शव यात्रा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ लोग इसे 'मृत्यु पर विजय' और 'परंपरा से हटकर एक नई सोच' के रूप में देख रहे हैं।4
- बाबा वैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग प्रातः कालीन सरदारी पूजा का दर्शन करें1
- आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पूरा घर उसकी चपेट में आ गया। स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की। इस घटना में घर का सामान जलकर राख हो गया, राहत कार्य जारी है।1
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