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लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार 🚨 लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?, गाड़ी में डालकर पीटा! खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी? कलम हमारी ताकत है! सच लिखना हमारी आदत है!

55 min ago
user_उमेश लोधी पत्रकार
उमेश लोधी पत्रकार
Local News Reporter Sadar, Lucknow•
55 min ago

लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार 🚨 लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?, गाड़ी में डालकर पीटा! खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी? कलम हमारी ताकत है! सच लिखना हमारी आदत है!

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    लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने  जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार 
🚨 लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने  जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार 
खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है।
शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा
पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है।
बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा?
खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी?
जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?, गाड़ी में डालकर पीटा!
खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है।
शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा
पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है।
बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा?
खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी?
जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?
कलम हमारी ताकत है! सच लिखना हमारी आदत है!
    user_उमेश लोधी पत्रकार
    उमेश लोधी पत्रकार
    Local News Reporter Sadar, Lucknow•
    55 min ago
  • थाना जानकीपुरम के अंतर्गत मड़ियाव गांव स्थित मौर्य आटा चक्की के पास खुलेआम जुआ खेला जा रहा है... लखनऊ न्यूज थाना जानकीपुरम के अंतर्गत मड़ियाव गांव स्थित मौर्य आटा चक्की के पास खुलेआम जुआ खेला जा रहा है... अब देखना यह है अब देखना यह है कि जानकीपुरम पुलिस इन पर क्या कार्रवाई करती है
    1
    थाना जानकीपुरम के अंतर्गत मड़ियाव गांव स्थित मौर्य आटा चक्की के पास खुलेआम जुआ खेला जा रहा है...
लखनऊ न्यूज 
थाना जानकीपुरम के अंतर्गत मड़ियाव गांव स्थित मौर्य आटा चक्की के पास खुलेआम जुआ खेला जा रहा है...
अब देखना यह है अब देखना यह है कि जानकीपुरम पुलिस इन पर क्या कार्रवाई करती है
    user_Sameer Safder naqvi
    Sameer Safder naqvi
    Video Creator सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • Post by Suresh Kumar
    1
    Post by Suresh Kumar
    user_Suresh Kumar
    Suresh Kumar
    लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लखनऊ:हजरतगंज में सपा युवजन सभा का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर फूंका पुतला। लखनऊ:हजरतगंज में सपा युवजन सभा का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर फूंका पुतला। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा।
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    लखनऊ:हजरतगंज में सपा युवजन सभा का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर फूंका पुतला। 
लखनऊ:हजरतगंज में सपा युवजन सभा का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर फूंका पुतला। 
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजा।
    user_Uma prakash
    Uma prakash
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
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    🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥

लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे?

राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे।

ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए।

⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है।

2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो!

मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है?

अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है।

✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनहित सर्व समाज सेवा समिति
लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश

#कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥
लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे?
राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे।
ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए।
⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है।
2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो!
मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है?
अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है।
✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनहित सर्व समाज सेवा समिति
लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश
#कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
    user_Soni Shukla Kranti Lucknow
    Soni Shukla Kranti Lucknow
    सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
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    🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥

लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे?

राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे।

ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए।

⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है।

2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो!

मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है?

अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है।

✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनहित सर्व समाज सेवा समिति
लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश

#कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥
लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे?
राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे।
ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए।
⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है।
2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो!
मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है?
अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है।
✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनहित सर्व समाज सेवा समिति
लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश
#कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
    user_Soni Shukla
    Soni Shukla
    Police Officer सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
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    1
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    user_Harsha Media Uttar Pradesh
    Harsha Media Uttar Pradesh
    Media and information sciences faculty सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
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    🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥

लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे?

राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे।

ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए।

⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है।

2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो!

मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है?

अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है।

✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
जनहित सर्व समाज सेवा समिति
लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश

#कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति
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लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे?
राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे।
ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए।
⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है।
2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो!
मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है?
अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है।
✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
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    user_Soni Shukla
    Soni Shukla
    Police Officer सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
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