आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के विभिन्न टोल प्लाजाओं पर कार्यरत टोल कलेक्टर (टी.सी.) कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। औरास, उन्नाव सहित कई स्थानों पर चौबीसों घंटे सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों ने कम वेतन और अत्यधिक कार्यभार के कारण प्रशासन व प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित पारिश्रमिक मिल रहा है और न ही मूलभूत सुविधाएं। वर्तमान में इन कर्मचारियों को मात्र ₹11,700 मासिक वेतन दिया जा रहा है। वे लगातार 30 दिनों तक ड्यूटी करते हैं और इस दौरान उन्हें कोई साप्ताहिक अवकाश या त्योहारों पर भी छुट्टी नहीं मिलती। कर्मचारियों का कहना है कि इतनी कम आय में पूरे परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना पूरी तरह से असंभव हो गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि 1 अप्रैल 2026 से सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी ₹18,000 निर्धारित की जा चुकी है, लेकिन टोल प्लाजा पर इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और उन्हें उनके हक से वंचित रखा जा रहा है। टोल कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मासिक वेतन को बढ़ाकर सरकार के नियमानुसार न्यूनतम ₹18,000 करना शामिल है। इसके साथ ही, वे ड्यूटी का समय कड़ाई से 8 घंटे निर्धारित करने, महीने में कम से कम 4 साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य रूप से देने और त्योहारों पर छुट्टी या अतिरिक्त कार्य के एवज में उचित विशेष भुगतान सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए कर्मचारियों ने एक्सप्रेसवे के सभी टोल प्लाजा पर कार्यरत अपने साथियों से एक साथ आने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे, लेकिन चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब उनके हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वे सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए अपना हक लेकर रहेंगे।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के विभिन्न टोल प्लाजाओं पर कार्यरत टोल कलेक्टर (टी.सी.) कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। औरास, उन्नाव सहित कई स्थानों पर चौबीसों घंटे सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों ने कम वेतन और अत्यधिक कार्यभार के कारण प्रशासन व प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित पारिश्रमिक मिल रहा है और न ही मूलभूत सुविधाएं। वर्तमान में इन कर्मचारियों को मात्र ₹11,700 मासिक वेतन दिया जा रहा है। वे लगातार 30 दिनों तक ड्यूटी करते हैं और इस दौरान उन्हें कोई साप्ताहिक अवकाश या त्योहारों पर भी छुट्टी नहीं मिलती। कर्मचारियों का कहना है कि इतनी कम आय में पूरे परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना पूरी तरह से असंभव हो गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि 1 अप्रैल 2026 से सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी ₹18,000 निर्धारित की जा चुकी है, लेकिन टोल प्लाजा पर इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और उन्हें उनके हक से वंचित रखा जा रहा है। टोल कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मासिक वेतन को बढ़ाकर सरकार के नियमानुसार न्यूनतम ₹18,000 करना शामिल है। इसके साथ ही, वे ड्यूटी का समय कड़ाई से 8 घंटे निर्धारित करने, महीने में कम से कम 4 साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य रूप से देने और त्योहारों पर छुट्टी या अतिरिक्त कार्य के एवज में उचित विशेष भुगतान सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए कर्मचारियों ने एक्सप्रेसवे के सभी टोल प्लाजा पर कार्यरत अपने साथियों से एक साथ आने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे, लेकिन चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब उनके हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वे सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए अपना हक लेकर रहेंगे।
- लखनऊ के मलिहाबाद में कुंदन राठौर ने अपने मोहल्ले में खराब पड़े नल को बनवाने की अपील की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस समस्या को जल्द से जल्द ठीक करने का निवेदन किया है।1
- लखनऊ के बख्शी का तालाब (BKT) स्थित राम सागर मिश्र अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक और सफाई कर्मियों के बीच तीखी झड़प का मामला सामने आया है। यह विवाद टेंट की कुर्सियां उठाने से इनकार करने के बाद शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. वी.के. शर्मा ने सुपरवाइजर सहित करीब 21 सफाई कर्मियों को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। सीएमएस का आरोप है कि उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया था। यह अस्पताल पूर्व में राम नगर अस्पताल के नाम से जाना जाता था। इसके जवाब में, सफाई कर्मचारियों ने भी पलटवार करते हुए सीएमएस डॉ. शर्मा पर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। सीएमएस से नाराज होकर सभी सफाई कर्मियों ने अस्पताल में अपना साफ-सफाई का काम बंद कर दिया है और वे इमरजेंसी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं, जिसके कारण अस्पताल की पूरी सफाई व्यवस्था ठप हो चुकी है।1
- रायबरेली जिले के सरेनी थाना क्षेत्र स्थित गेगासो घाट पर एक महिला ने पारिवारिक विवाद के चलते गंगा नदी में छलांग लगा दी, जिससे वहाँ हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मिली जानकारी के अनुसार, महिला की पहचान रामपुर मजरे ऐहार गांव निवासी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पारिवारिक कलह से परेशान होकर महिला ने यह कदम उठाया था। घाट पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। पुलिस की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के चलते महिला की जान बच गई। घटना के बाद पुलिस ने महिला को सुरक्षित हिरासत में लेकर उसके परिजनों को सूचना दी। पुलिस ने महिला के परिवार वालों को बुलाकर उन्हें समझाइश दी और महिला को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पुलिस की इस संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।1
- लखनऊ में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, मृतका की शादी लगभग डेढ़ साल पहले हुई थी। इस मामले में नवविवाहिता के चाचा ने सीधे तौर पर पति और ससुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग पूरी न होने पर दोनों ने मिलकर महिला की हत्या कर दी।1
- लखनऊ में पल्लव चैरिटेबल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा 151 विभूतियों को सम्मानित किया गया।1
- अयोध्या के रामनगर धौरहरा में भाजपा कार्यकर्ता शिवम सिंह की दिनदहाड़े पीट-पीटकर की गई हत्या के मामले में लखनऊ की विभूतिखंड पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस हत्याकांड के तीन आरोपियों शांतनु रावत उर्फ अंकित रावत, हरि तिवारी और विवेक सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले में एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है, जिस पर पुलिस ने इनाम घोषित किया है। एडीसीपी ईस्ट डॉ. अमोल मुरकूट ने इन गिरफ्तारियों की पुष्टि करते हुए पुलिस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी है। हालांकि, इन गिरफ्तारियों के बाद अब पूरे अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में कानून के समान पैमाने को लेकर एक नया सवाल चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर सपा नेता अनूप सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में कई चर्चित मामलों में अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर, बुलडोजर और कठोर कार्रवाई देखने को मिली है।1
- उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कथित तौर पर बिजली लाइन पर फंसे एक व्यक्ति के शव को उतारने के दौरान लाइनमैन को करंट का झटका लग गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में यह दावा किया गया है कि बिजली विभाग के कर्मचारी और संविदा लाइनमैन वजीरगंज थाना क्षेत्र के भिनसुरा गांव में मौके पर पहुंचे थे। इसी बीच, पोल पर चढ़कर शव उतारने की कोशिश के दौरान अचानक लाइन में दोबारा करंट दौड़ने की बात सामने आई, जिससे शव हटा रहे लाइनमैन को भी बिजली का झटका लग गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।1