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छत्तीसगढ़ के मैनपाट इलाके में लोग सीएमडीसी (CMDC) का बहिष्कार करते हुए दिखाई दिए। इस घटना में लोगों ने सीएमडीसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दृश्य सामने आए हैं।
Dhanesh yadav
छत्तीसगढ़ के मैनपाट इलाके में लोग सीएमडीसी (CMDC) का बहिष्कार करते हुए दिखाई दिए। इस घटना में लोगों ने सीएमडीसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दृश्य सामने आए हैं।
More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
- छत्तीसगढ़ के मैनपाट इलाके में लोग सीएमडीसी (CMDC) का बहिष्कार करते हुए दिखाई दिए। इस घटना में लोगों ने सीएमडीसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दृश्य सामने आए हैं।4
- कथित तौर पर वायरल हुए एक ऑडियो पर महापौर मंजूषा भगत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस ऑडियो को लेकर कहा है कि यह उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश है। महापौर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष ने जांच शुरू होने से पहले ही इस मामले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।1
- रायगढ़ जिले में एक आंगनबाड़ी सहायिका पर शराब के लिए पैसे न देने पर उसके पति ने प्राणघातक हमला कर दिया, जिसके बाद घरघोड़ा पुलिस ने आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देश पर महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई करते हुए यह गिरफ्तारी की गई है। यह घटना 21 जून 2026 को सामने आई, जब पीड़ित सत्यवती राठिया (30 वर्ष) के चचेरे भाई पवन राठिया (25 वर्ष) ने थाना घरघोड़ा में रिपोर्ट दर्ज कराई। पवन ने बताया कि उसकी चचेरी बहन सत्यवती ग्राम देवगढ़ में आंगनबाड़ी सहायिका है और उसका पति इंद्रजीत राठिया राजमिस्त्री का काम करता है। सत्यवती अक्सर पति द्वारा शराब के नशे में विवाद और मारपीट की जानकारी देती थी, जिस पर परिजनों की समझाइश का कोई असर नहीं हुआ था। 21 जून की दोपहर, सत्यवती ने बताया कि उसके पति इंद्रजीत राठिया ने लगभग 1 बजे शराब पीने के लिए पैसे मांगे। पैसे देने से इनकार करने पर आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी और बांस के डंडे से उसके सिर और दोनों हाथों पर प्राणघातक हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सत्यवती को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रायगढ़ रेफर किया गया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना घरघोड़ा में आरोपी इंद्रजीत राठिया के खिलाफ अपराध क्रमांक 200/2026 धारा 119(1), 296, 351(3), 109(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने टीम गठित कर आरोपी इंद्रजीत राठिया (32 वर्ष), निवासी ग्राम देवगढ़ बाजारपारा को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा भी बरामद किया गया। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने इस मामले पर कड़ा संदेश दिया है कि रायगढ़ पुलिस महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, घरेलू प्रताड़ना और जानलेवा हमले जैसे मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति पर कार्य कर रही है, और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने समाज से महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहने और ऐसे मामलों की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील भी की है।1
- छत्तीसगढ़ के नागरिकों से उन बच्चों की मदद के लिए आगे आने की मार्मिक अपील की गई है जो काम की तलाश में बाहर गए हैं। इस गुहार में विशेष रूप से 'किसी की बेटी' का जिक्र किया गया है और सभी बच्चों के लिए सहायता मांगी गई है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे इस संदेश को सभी गांवों में यथासंभव साझा करें और इन बच्चों की सहायता करें, क्योंकि यह संभावना है कि इनमें से कोई अपना या संबंधी हो।1
- कबीरधाम जिले के ग्राम दामापुर बाजार निवासी 108 वर्षीय गजानंद सिंह परिहार आज के दौर में प्रेरणा के बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं, जिसका श्रेय वे पिछले 70 वर्षों से कर रहे नियमित योगाभ्यास को देते हैं। गजानंद सिंह आज भी योग के कठिन आसन और प्राणायाम बेहद सहजता के साथ कर लेते हैं, जो लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है। उनकी जीवनशैली इतनी अनुशासित है कि 108 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन सुबह-शाम 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। उनका दावा है कि योग और सात्विक दिनचर्या के बल पर ही उन्होंने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर जीवन की जंग जीती है। गजानंद सिंह का मानना है कि दीर्घायु और निरोग रहने के लिए संतुलित खान-पान और सकारात्मक सोच का होना अनिवार्य है। गजानंद सिंह ने आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यदि युवा आज से ही योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लें, तो वे भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। एक लंबी उम्र जीने के बाद भी उनकी सक्रियता समाज के लिए स्वस्थ जीवन जीने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।1
- सोशल मीडिया पर एक 'वायरल पुलिसकर्मी वीडियो' को लेकर इन दिनों जोरदार चर्चा चल रही है, जिसकी सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं। इसी के संदर्भ में, नारद मुनि न्यूज़ ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी खबर, वीडियो या दावे को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करें। इस अपील में स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों को केवल प्रमाणित और विश्वसनीय जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।1
- अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने आज एक कथित ऑडियो सुनने के बाद थाने आकर मीडिया के सामने रोते हुए अपना बयान दर्ज कराया।1
- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड मुख्यालय में 22 जून 2026 को सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग और संयुक्त सामाजिक संगठनों के तत्वावधान में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के तहत प्रतापपुर थाना परिसर के समीप से एक रैली निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होते हुए कदमपारा चौक पहुँची। वहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया और सांकेतिक पुतला दहन भी किया। कार्यक्रम के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार बंछोर ने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की, अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन और एकता को अत्यंत आवश्यक बताया। सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने अपने संबोधन में बताया कि रायपुर में 6 जून 2026 को हुई आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर तैयार एक संयुक्त ज्ञापन 22 जून को महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को सौंपा गया। इसी क्रम में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में भी ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 'वनवासी' शब्द के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि इससे आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता आहत होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी हैं और प्रकृति के रक्षक हैं। अपनी पहचान, परंपरा और संस्कृति से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” इसके अतिरिक्त, बीपीएस पोया ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्रोच्चारण संबंधी निर्देशों पर भी सवाल उठाया, शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और समावेशी बनाने की वकालत करते हुए विज्ञान एवं पर्यावरण आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मांगों में स्थानीय भर्ती में प्राथमिकता एवं 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करना, निजीकरण का विरोध, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, भू-माफियाओं पर नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाना, आदिवासी धर्म कोड की मान्यता, परिसीमन से जुड़े मुद्दों का समाधान, ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, उद्योग-व्यापार एवं खनन में आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, नक्सल प्रभावित निर्दोष बंदियों की रिहाई, डीलिस्टिंग का विरोध, आस्था केंद्रों एवं देवगुड़ियों का संरक्षण, पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, तथा आदिवासी शिक्षा, मातृभाषा और पाँचवीं अनुसूची के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार एवं प्रशासन द्वारा इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर बिमला अगरिया, गौरीशंकर नेताम, विनय पावले, लक्ष्मण आर्मो, सफलाल, अमर बहादुर सिंह आयाम, बनवारी खलखो, राजू सिंह आयाम, जीतन सोनहा, रामचंद्र मांझी, अंजली आयाम, लक्ष्मी बैगा, इंद्रपाल सिंह चेरवा, प्रदीप सिंह, राजेश सिंह पोया, राम सिंह पोया (GSU जिलाध्यक्ष), त्रिभुवन सिंह टेकाम, मंजू मिंज (पूर्व जिला पंचायत सदस्य) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1