20 साल से ‘कैंसर बनी कुशलगढ़–थांदला सड़क, 300 करोड़ का टेंडर मंजूर फिर भी जनता बेहाल कुशलगढ़ से थांदला होते हुए राजस्थान–मध्यप्रदेश सीमा तक जाने वाला प्रमुख सड़क मार्ग बीते 20 वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों ने इस सड़क को न सिर्फ क्षतिग्रस्त बल्कि जानलेवा बना दिया है। दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन—सभी के लिए यह मार्ग लगातार खतरे का कारण बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से एक गंभीर बीमारी की तरह पीड़ित है, जिसे लोग “कैंसर की संज्ञा दे रहे हैं। अब तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, अनेक परिवार अपनों को खो चुके हैं और हर गड्ढा किसी न किसी परिवार के लिए स्थायी जख्म बन गया है। जानकारी के अनुसार कुशलगढ़ से एमपी बॉर्डर तक लगभग 80 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर स्वीकृत हो चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य शुरू न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि जब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होता, तब तक कम से कम जानलेवा गड्ढों को तुरंत भरवाया जाए, ताकि आमजन की जान जोखिम में न पड़े। लोगों ने पक्ष–विपक्ष दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों से राजनीति से ऊपर उठकर इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की अपील की है।
20 साल से ‘कैंसर बनी कुशलगढ़–थांदला सड़क, 300 करोड़ का टेंडर मंजूर फिर भी जनता बेहाल कुशलगढ़ से थांदला होते हुए राजस्थान–मध्यप्रदेश सीमा तक जाने वाला प्रमुख सड़क मार्ग बीते 20 वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों ने इस सड़क को न सिर्फ क्षतिग्रस्त बल्कि जानलेवा बना दिया है। दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन—सभी के लिए यह मार्ग लगातार खतरे का कारण बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से एक गंभीर बीमारी की तरह पीड़ित है, जिसे लोग “कैंसर की संज्ञा दे रहे हैं। अब तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, अनेक परिवार अपनों को खो चुके हैं और हर गड्ढा किसी न किसी परिवार के लिए स्थायी जख्म बन गया है। जानकारी के अनुसार कुशलगढ़ से एमपी बॉर्डर तक लगभग 80 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर स्वीकृत हो चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य शुरू न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि जब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होता, तब तक कम से कम जानलेवा गड्ढों को तुरंत भरवाया जाए, ताकि आमजन की जान जोखिम में न पड़े। लोगों ने पक्ष–विपक्ष दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों से राजनीति से ऊपर उठकर इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की अपील की है।
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- आज जामली में टूर्नामेंट क्रिकेट चल रहा है चल रहा है1
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- कुशलगढ़ से थांदला होते हुए राजस्थान–मध्यप्रदेश सीमा तक जाने वाला प्रमुख सड़क मार्ग बीते 20 वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों ने इस सड़क को न सिर्फ क्षतिग्रस्त बल्कि जानलेवा बना दिया है। दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन—सभी के लिए यह मार्ग लगातार खतरे का कारण बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से एक गंभीर बीमारी की तरह पीड़ित है, जिसे लोग “कैंसर की संज्ञा दे रहे हैं। अब तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, अनेक परिवार अपनों को खो चुके हैं और हर गड्ढा किसी न किसी परिवार के लिए स्थायी जख्म बन गया है। जानकारी के अनुसार कुशलगढ़ से एमपी बॉर्डर तक लगभग 80 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर स्वीकृत हो चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य शुरू न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि जब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होता, तब तक कम से कम जानलेवा गड्ढों को तुरंत भरवाया जाए, ताकि आमजन की जान जोखिम में न पड़े। लोगों ने पक्ष–विपक्ष दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों से राजनीति से ऊपर उठकर इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की अपील की है।1
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