यममुख न्यू बरौंधा तिराहा भूल गए मौत का कहर ,बारिश से ढही पुलिया न्यू बरौंधा तिराहे पर कुछ माह पूर्व ही गति अवरोधक चिन्ह,विकल्प ना हो पाने के कारण लाशें जानवरों से भी बदतर हालत में तिराहे के समक्ष ही पड़ी थीं और प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है आई एन सी ऐसा कोई नियम एमपीआरडीसी को बाध्य नहीं करती जो कि मानवाधिकारों एवं मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर भारतीय संविधान की अवहेलना करें,पी डब्ल्यू डी हो, नगरपालिका अधिकारी हो, या माननीय संविधान के प्रतिनिधि माननीय विधायक कोई भी कोई भी हों सबके नियमावली की जननी भारतीय संविधान ही है और संविधान लोकतंत्र से बनता है एवं लोक से लोकतांत्रिक व्यवस्था का संचालन होता है जब नागरिक की काल के ग्रास बनते जाएंगे एवं प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा अपने प्राणों का भुगतान करके करेंगे तब क्या मतदान पितृपक्षके कौवे करेंगे, दिवंगत आत्माएं करेंगी,गत दस वर्षों से लगातार न्यू बरौंधा तिराहे पर संकीर्ण स्थान होने के कारण एवं न्यू बरौंधा प्रवेश द्वार ना दिख पाने के कारण अत्यंत तीव्र गति से वाहन निकलते हैं एवं अंदर बाहर आने जाने वालों को सम्हलने का मौका नहीं मिलता और वो मतदाता चुनावी समय में जिन्हें देवों की तरह पूजा जाता है एवं पद प्राप्त होने के उपरांत पड़ी रहीं लाशें सड़कों पर यही औकात है सड़ते हुए जानवरों की तरह मरते रहो विस्थापित ग्राम बरौंधा जो वर्तमान में आदर्श ग्राम न्यू बरौंधा है की पुलिया निर्माण को लेकर अनवरत दस वर्षों से लगातार मानवाधिकारों एवं आने जाने वाले छात्र-छात्राओं, नागरिकों फिजियोथेरेपी संबंधी सुविधाओं एवं रोजमर्रा की आवश्यकता के लिए हजारों की संख्या में निवासियों एवं शासन प्रशासन संबंधी गतिविधियों का आवागमन बना रहता है, इसके पूर्व गत 10 वर्षों में कई लोग पुलिया निर्माण की गुणवत्ता हीनता एवं रेलिंग विहीन होने के कारण पुलिया के नीचे कुछ हाथठेला वाले गिरे,अन्य गिरे, कर्मचारी गिरे , चौपहिया पलटे , मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर पलट गई, और आज तो यह समस्या अत्यंत गंभीर हो चुकी है,जब पुलिया की जर्जर स्थिति की ओर शासन प्रशासन का ध्यानाकर्षण करवाया जा रहा था तब तो उस पर केवल एक मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय सलाहकार के कारण अत्यंत हल्के में लिया गया जिसके कारण पुलिया अनायास ढह गई और महीनों आवागमन अवरुद्ध रहा परन्तु यदि छात्रों से भरी बस से गुजरते वक्त पुलिया ढह जाती तब तो भारी हृदयविदारक एवं अविस्मरणीय दुर्घटना घट जाती तब क्या जवाब देती नगरपालिका अधिकारी ब्योहारी वो भी क्षेत्रीय विधायक महोदय को कौन सा बहाना बनाकर प्रस्तुत करती ,अब पुनः वही स्थिति निर्मित हो रही है ना तो रेलिंग ही बनी है ना ही ठोस दक्ष इंजीनियरिंग के आधार पर जनता के प्राणों की रक्षा के उपाय के निवारण का उपाय ही निकाला गया है , प्रत्यक्ष समक्ष आ ही गया पुलिया साधारण बारिश तक नहीं झेल सकी और ढहना प्रारंभ हो गई परंतु नगरपालिका के अधिकारी उनका जनता के प्राणों के रक्षार्थ कोई भी सार्थक कदम नहीं उठा पाए हैं याद रखना चाहिए शासन को भी और प्रशासन को भी कि प्राण हैं तभी मतदान हैं
यममुख न्यू बरौंधा तिराहा भूल गए मौत का कहर ,बारिश से ढही पुलिया न्यू बरौंधा तिराहे पर कुछ माह पूर्व ही गति अवरोधक चिन्ह,विकल्प ना हो पाने के कारण लाशें जानवरों से भी बदतर हालत में तिराहे के समक्ष ही पड़ी थीं और प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है आई एन सी ऐसा कोई नियम एमपीआरडीसी को बाध्य नहीं करती जो कि मानवाधिकारों एवं मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर भारतीय संविधान की अवहेलना करें,पी डब्ल्यू डी हो, नगरपालिका अधिकारी हो, या माननीय संविधान के प्रतिनिधि माननीय विधायक कोई भी कोई भी हों सबके नियमावली की जननी भारतीय संविधान ही है और संविधान लोकतंत्र से बनता है एवं लोक से लोकतांत्रिक व्यवस्था का संचालन होता है जब नागरिक की काल के ग्रास बनते जाएंगे एवं प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा अपने प्राणों का भुगतान करके करेंगे तब क्या मतदान पितृपक्षके कौवे करेंगे, दिवंगत आत्माएं करेंगी,गत दस वर्षों से लगातार न्यू बरौंधा तिराहे पर संकीर्ण स्थान होने के कारण एवं न्यू बरौंधा प्रवेश द्वार ना दिख पाने के कारण अत्यंत तीव्र गति से वाहन निकलते हैं एवं अंदर बाहर आने जाने वालों को सम्हलने का मौका नहीं मिलता और वो मतदाता चुनावी समय में जिन्हें देवों की तरह पूजा जाता है एवं पद प्राप्त होने के उपरांत पड़ी रहीं लाशें सड़कों पर यही औकात है सड़ते हुए जानवरों की तरह मरते रहो विस्थापित ग्राम बरौंधा जो वर्तमान में आदर्श ग्राम न्यू बरौंधा है की पुलिया निर्माण को लेकर अनवरत दस वर्षों से लगातार मानवाधिकारों एवं आने
जाने वाले छात्र-छात्राओं, नागरिकों फिजियोथेरेपी संबंधी सुविधाओं एवं रोजमर्रा की आवश्यकता के लिए हजारों की संख्या में निवासियों एवं शासन प्रशासन संबंधी गतिविधियों का आवागमन बना रहता है, इसके पूर्व गत 10 वर्षों में कई लोग पुलिया निर्माण की गुणवत्ता हीनता एवं रेलिंग विहीन होने के कारण पुलिया के नीचे कुछ हाथठेला वाले गिरे,अन्य गिरे, कर्मचारी गिरे , चौपहिया पलटे , मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर पलट गई, और आज तो यह समस्या अत्यंत गंभीर हो चुकी है,जब पुलिया की जर्जर स्थिति की ओर शासन प्रशासन का ध्यानाकर्षण करवाया जा रहा था तब तो उस पर केवल एक मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय सलाहकार के कारण अत्यंत हल्के में लिया गया जिसके कारण पुलिया अनायास ढह गई और महीनों आवागमन अवरुद्ध रहा परन्तु यदि छात्रों से भरी बस से गुजरते वक्त पुलिया ढह जाती तब तो भारी हृदयविदारक एवं अविस्मरणीय दुर्घटना घट जाती तब क्या जवाब देती नगरपालिका अधिकारी ब्योहारी वो भी क्षेत्रीय विधायक महोदय को कौन सा बहाना बनाकर प्रस्तुत करती ,अब पुनः वही स्थिति निर्मित हो रही है ना तो रेलिंग ही बनी है ना ही ठोस दक्ष इंजीनियरिंग के आधार पर जनता के प्राणों की रक्षा के उपाय के निवारण का उपाय ही निकाला गया है , प्रत्यक्ष समक्ष आ ही गया पुलिया साधारण बारिश तक नहीं झेल सकी और ढहना प्रारंभ हो गई परंतु नगरपालिका के अधिकारी उनका जनता के प्राणों के रक्षार्थ कोई भी सार्थक कदम नहीं उठा पाए हैं याद रखना चाहिए शासन को भी और प्रशासन को भी कि प्राण हैं तभी मतदान हैं
- डा प्रणय तिवारी शराब की राक्षसी दुकानों पर हल्ला बोल, असामाजिक पेय समाज के बीच आबकारी एक्ट का उल्लंघन करते हुए ब्योहारी अथर्व पैरामेडिकल, इंदिरा गांधी कम्प्यूटर कालेज,एवं विद्यालयों तथा महाविद्यालय की लाईन में मुख्य मार्ग से पांच मीटर की दूरी पर संचालित शराब के ठेके की दुकान भले ही आबकारी नियमानुसार प्रदाय की गई हो परंतु इसकी लोकेशन भारतीय संविधान के एकदम विपरीत है, ज्ञात होना चाहिए कि जहां से महिलाओं, बच्चों, छात्रों,के शैक्षणिक संस्थानों में आने जाने का प्रमुख मार्ग हो वहां पर मदिरा की दुकान को खोलना मन मस्तिष्क में प्रतिकूल प्रभाव डालता है एवं मुख्य सड़क से एकदम सटा हुआ होना तो सीधे सीधे इस बात की ओर इशारा करता है कि हमें कमाई से मतलब है भाड़ में जाएं नियम और कानून इसके अतिरिक्त यहां पर घनी बस्ती है और छोटे छोटे बच्चे, लड़कियां एवं मदिरापान को माननीय उच्चतम ने पूरी तरह से बहिष्कृत कर रखा है मदिरापान स्वयं की, परिवार की और राष्ट्र की मौत है,ये तो राज्य सरकारों के राजस्व नियमों के अंतर्गत एक निर्धारित सीमा के अंतर्गत ही ठेके पर संचालित की जाएं या ना की जाएं वह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है वह भी मदिरालयों को कोई संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है क्योंकि बात चाहे चिकित्सा विज्ञान की हो या दर्शनशास्त्र की या अपराधशास्त्र एवं मनोविज्ञान की प्रत्येक दृष्टिकोण में शराब केवल अमानुषिक, अमानवीय, अपराधिक गतिविधियों को ही बढ़ाता है। द्वितीय यह कि शराब चाहे बुद्ध दर्शन में हो,चाहे जैन दर्शन में हो चाहे हिंदू दर्शन में हो सभी में इसे राक्षसी प्रवृत्ति की ही संज्ञा दी गई है कोई ऐसा अधिकारी या नेता है जो यह लिखकर दे सके की शराब ना पिएंगे तो राष्ट्रीय विकास अवरुद्ध हो जाएगा इसलिए शराब तो पीनी पड़ेगी जब चारों दिशाओं से इस विनाशकारी शराब नामक विष का केवल विरोध ही है,समाज में कोई स्थान ही नहीं है तो इसका संचालन तो हिटलरशाही का उदाहरण ही कहा जाएगा, 200 वर्षों तक अंग्रेजों ने अफीम का नशा लगवाकर समूचे भारतवर्ष की अस्मिता को तार तार किया था एवं उस अफीम एवं गांजे की खेती ने भारतवर्ष की पौराणिक संस्कृति, स्वतंत्रता,एकता,अखण्डता,सम्प्रभुता सब कुछ छीन लिया था, उन्हें नशे से बाहर लाने के लिए सहस्रों शीश राष्ट्रीय बलिवेदी पर हवन हुए थे । और आज के वर्तमान माहौल पर विचार जरा गंभीरता पूर्वक करिए किस प्रकार से देश की युवा पीढ़ी जो भारतीय सेनाओं में जाकर देश की सुरक्षा करती है शराब उन सबकी नसों में बहकर उनके रक्त को पानी कर रहा है और वाह रे मेरे देश उन देशों से सीख लीजिए जहां के वायुमार्ग से भी शराब परिवहन वायुयान तक नहीं गुजर सकता यदि उन मर्यादाओं का उल्लंघन ऐसे देश पाते हैं जो शराब नाम से घृणा करते हैं वो फैसले लेने के लिए किसी चार्जशीट या पुलिस प्राथमिकी की प्रतीक्षा नहीं करते हैं सीधे उनका मिलन ऊपर वाले से करवा देते हैं। शराब तो अन्याय और अनाचार,पाप और अपराध की जननी है जिसका समर्थन हमारे भारतवर्ष के ना तो वेद,पुराण, उपनिषद,संहिताओं में ही है अपितु उनके प्रति आकर्षण मात्र से छात्र हो,आचार्य हो ,गृहणी हो, अधिकारी हो या कोई भी तीसमार खान हो उन्हें कुल कलंक के नाम से ही अपमानित कर बुलाया जाएगा। शराब का शनै: शनै: मनमानी पन और धड़ल्ले से उसका गांव गांव तक प्रचार प्रसार कर देश को दीमक की तरह खोखला किया जा रहा है, पारिवारिक विघटन,विवाह विच्छेद,एसिड अटैक,लूट ,चोरी, बालात्कार,अपहरण, हत्याएं, एवं वो अपराध जो कोई मनुष्य अपने होश करने की विचेरेगा तक नहीं वो शराब के सेवन के बाद वही अपराध बड़ी आसानी से कर डालता है एवं होश आने के पश्चात पछताता है। परिवार के मुखिया हों या बच्चे यदि इस गैर कानूनी पेय का सेवन कर लिया तो उस परिवार के सर्वनाश को कोई नहीं रोक सकता, उन्हें सुधारने के लिए नशामुक्ति केन्द्र एवं पुनर्वास केंद्र बनाए जाते हैं जहां किसी की ग़रीबी या अमीरी से कोई लेना-देना नहीं होता है उन्हें तो बस पीड़ित के परिवारजनों से पैसे ही ऐंठने रहते हैं। अनावश्यक रूप से एक सामाजिक बीमारी को पनपाया जाता रहा है, पनपाया जा रहा है यदि शराब पाप और अधर्म की राक्षसी प्रवृत्ति ना होती तो उसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से हटवाया ही क्यों जाता ? मैं जानता हूं कि इस लेख में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्चतम न्यायालय, भारतीय संविधान मेरे ही पक्ष में है और एक सड़क का भिखारी तक इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि वो शराब को पीने के प्रमुख प्रचारक के रूप में अपने हस्ताक्षर करे,2
- सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें। घुनघुटी में फिर बाघिन का आतंक! सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया।शहडोल-घुनघुटी मार्ग पर लगातार बाघिन की दस्तक से दहशत 28 जुलाई के बाद 31 जुलाई को फिर उसी इलाके में दिखी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घुनघुटी। जंगल से निकलकर सड़क किनारे पहुंच रही बाघिन अब राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। 31 जुलाई की शाम करीब 5 बजे घुनघुटी-शहडोल मार्ग NH-43 पर सड़क किनारे बैठी बाघिन अचानक कार की ओर मुंह खोलकर दौड़ने लगी। कार में बच्चों सहित राहगीर मौजूद थे। बाघिन के इस आक्रामक तेवर से लोगों में हड़कंप मच गया। गौरतलब है कि 28 जुलाई को भी इसी इलाके में बाघिन द्वारा कार चालक की ओर हमला करने का प्रयास किए जाने का वीडियो सामने आया था। अब कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र में दोबारा बाघिन की मौजूदगी और वाहन की ओर झपटने का प्रयास वन्यजीव एवं मानव सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि बाघिन के साथ शावक भी आसपास मौजूद हैं। ऐसे में शावकों को खतरा महसूस होने पर बाघिन के आक्रामक होने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के क्षेत्र में निगरानी कर रही है, लेकिन राहगीरों द्वारा बाघिन के करीब जाकर मोबाइल से वीडियो बनाना खतरे को और बढ़ा रहा है। वन विभाग को अब सड़क पर विशेष निगरानी और राहगीरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की जरूरत है।1
- 🚨 महा-ब्रेकिंग: ग्राम पंचायत तगावर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा गरीब का आशियाना, जनता कब तक रहेगी गुलाम? 💥 #BREAKING_NEWS 📍 स्थान: ग्राम पंचायत तगावर (शहडोल) 🤬 'नाली गायब, सड़क बनी मुसीबत'... पंचायत के भ्रष्टाचार से ढह गई रोहिणी यादव के पक्के मकान की दीवार, अब पूरे घर पर मंडराया खतरा! ग्राम पंचायत तगावर से विकास के दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाली खबर सामने आ रही है। पंचायत की तानाशाही और घटिया निर्माण कार्य के कारण आज एक गरीब परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गया है। 🔍 क्या है पूरा मामला? जानिए भ्रष्टाचार की क्रोनोलॉजी: 3 साल पहले की लापरवाही: पंचायत द्वारा 3 साल पहले यहाँ PCC रोड का निर्माण कराया गया था। इंजीनियरिंग का खेल: जहाँ पानी की निकासी के लिए पुलिया/पोल डालना बेहद जरूरी था, वहाँ भ्रष्टाचार के चलते पोल नहीं डाला गया। मकान पर आफत: पोल न होने के कारण जलभराव इस कदर बढ़ा कि रोहिणी यादव के पक्के मकान की दीवार भरभरा कर गिर गई। अब स्थिति इतनी बदतर है कि पूरा मकान कभी भी जमींदोज हो सकता है। 📢 निजी खर्च पर बनाई नाली, फिर भी पंचायत की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली! हैरानी की बात यह है कि पीड़ित परिवार ने अपनी सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत खर्च पर नाली का निर्माण भी कराया, लेकिन पंचायत प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पंचायत में बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई के नाम पर सिर्फ 'शून्य' मिला है। 🔥 जनता का तीखा सवाल: क्या पंचायत ने लोगों को गुलाम बना दिया है? आज तगावर की जनता पूछ रही है कि क्या ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों को इतना गुलाम बना दिया है कि लोग अपने हक, अधिकार और विकास पर आवाज भी नहीं उठा सकते? चंद रुपयों के भ्रष्टाचार के लिए किसी के आशियाने को उजाड़ देना कहाँ का न्याय है? ⚠️ उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग: इस गंभीर लापरवाही के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि: भ्रष्ट ग्राम पंचायत तगावर के खिलाफ तत्काल जांच बैठाई जाए। रोहिणी यादव के मकान को बचाने के लिए तुरंत पानी निकासी का पुख्ता इंतजाम (पोल/पुलिया) किया जाए। पीड़ित परिवार को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। #TagavarPanchayat #CorruptionMPExtreme #ShahdolNews #RationingCorruption #Jaisinghnagar #CMHelpline181 #GramPanchayatGhotala1
- सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ रीवा का वीडियो, महिलाओं की सुरक्षा पर उठा बड़ा सवाल *सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ रीवा का वीडियो, महिलाओं की सुरक्षा पर उठा बड़ा सवाल* *रीवा (मध्यप्रदेश)।* रीवा जिले से एक शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। *आप वीडियो में साफ देख सकते हैं* कि कैसे सार्वजनिक स्थल पर मौजूद महिलाओं को सरेआम *'मॉल'* जैसे अभद्र शब्द बोलकर अपमानित किया जा रहा है। यह वीडियो रीवा का बताया जा रहा है। जब महिलाएं अपने हक और सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की मांग के लिए वीडियो बना रही थीं, उसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई। यह न सिर्फ महिलाओं का अपमान है, बल्कि मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा के दावों की पोल भी खोलता है। कई सामाजिक कार्यकर्ता सहित तमाम लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। *प्रशासन से मांग है कि -* वीडियो की सत्यता की जांच कर, महिलाओं को अपमानित करने वाले वीडियो बनाने वाले पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। *Tag - @महिला आयोग @रीवा महिला पुलिस @Rewa SP @Collector Rewa*1
- श्री श्री 1008 श्री जुगल किशोर जू सरकार धाम पन्ना दिनांक 1 सितंबर 2026 दिन मंगलवार के आज के दर्शन श्री श्री 1008 श्री जुगल किशोर जू सरकार धाम पन्ना दिनांक 1 सितंबर 2026 दिन मंगलवार के आज के दर्शन2
- खबर अमरपाटन/ लगातार बारिश ने बढ़ाई चिंता । गऊघाट पुल पर जलस्तर बढ़ा, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा। ताला ,मुकुंदपुर लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं ब्रेकिंग मैहर लगातार बारिश ने बढ़ाई चिंता । गऊघाट पुल पर जलस्तर बढ़ा, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा। ताला ,मुकुंदपुर लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। ताला थाना क्षेत्र अंतर्गत मुकुंदपुर के मुरजुआ नदी पर बने गऊघाट पुल के ऊपर से पानी बहने लगा है। जलस्तर बढ़ने से मुकुंदपुर वाया ताला - अमरपाटन मुख्य मार्ग बंद हो गया है। जिससे मुकुंदपुर, जमुना, कस्तरा सहित दर्जनों गांवों का आवागमन संपर्क पूरी तरह टूट गया है। सूचना मिलते ही ताला पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पुल के दोनों तरफ बैरिकेड और जाली लगाकर आवाजाही पर रोक लगा दी है। लोगों को पुल पार न करने की समझाइश दी जा रही है। वहीं ग्राम कस्तरा का रपटा भी उफान पर है, जिससे कस्तरा गांव पूरी तरह से टापू बन गया है। पुलिस लगातार जलस्तर की मॉनिटरिंग कर रही है और लोगों से नदी के पास न जाने की अपील कर रही है। इसके बावजूद कुछ लोग तेज बहाव में नदी में तैराकी कर रहे हैं, जो किसी बड़ी मुसीबत को दावत दे सकता है।2
- न्यू बरौंधा की पुलिया में पानी का टैंकर धंसा मार्ग हुआ संकीर्ण, दुर्घटना की संभावना आखिरकार जिस बात का डर व्यक्त किया जा रहा था वही हुई आज अपरान्ह 11:45 न्यू बरौंधा पुलिया में पानी का टैंकर धंस गया लगातार अवगत करवाने के बाद भी शासन प्रशासन होश में नहीं आया और अब तो न्यू बरौंधा की पुलिया दोनों ओर से ढह रही है, थोड़े मोड़े बचे रास्ते से दो पहिया वाहन किसी तरह से निकल रहे हैं परंतु कुछ कहा नहीं जा सकता है अभी बच्चों को विद्यालय ले गई विभिन्न विद्यालयों की बसें और वाहन भी हैं जिन पर सुरक्षात्मक तरीके से शासन प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है अन्यथा दुर्घटना कभी बतलाकर नहीं आती है,इस बात को चारों ओर फैला दिया गया है। शासन प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि नगरपालिका को पुलिया की इतनी ही चिंता होती तो दस वर्षों से पुलिया की रेलिंग के लिए जब एक अकेला मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय सलाहकार, चिकित्सक, पत्रकार चिल्ला रहा था अनेकों सीएम हेल्पलाइन नंबर लगाईं कि लोग लगातार रेलिंग की कमी के कारण वाहनों के साथ दनादन नीचे गिर रहे थे,घायल भी हो रहे थे परंतु उन बेचारों के पास विस्थापन का दर्द या फिर शासन प्रशासन के भाई लोगों से डर इस कदर बढ़ गया है कि वो अपनी समस्या तक बतलाने में झिझकते हैं कि कहीं उसका खामियाजा ना भुगतना पड़ जाए परंतु नहीं भ्रष्टाचारियों के पास फर्जी प्रतिवेदन आदतन शिकायत कर्ता है चाहे भले ही शिकायतकर्ता की शिक्षा के बारे में घण्टा कुछ ना मालुम हो परंतु ये दया तौर पर नौकरी पाने वाले अल्पज्ञानी इन्हें तो केवल अपनी ग्रेडिंग सुधारनी है, जब दुर्घटना संभावित ही थी,एक बार बड़ा हादसा ईश्वर की दया से टल ही गया था तो ठीक इंजीनियरिंग के साथ ठोस निर्माण सामग्रियों का प्रयोग करते हुए वर्षा ऋतु के पूर्व ही जनहितकारी योजना को आकार दिया जा सकता था, परंतु केवल मिट्टी का ढेर लगा दिया गया यह तो कोई स्थाई समाधान नहीं हुआ जिला कलेक्टर झमाझम बारिश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए लगातार दिशा निर्देश देते जा रहे हैं चाहे वो किसी भी जिले के क्यों न हों एवं उसी तारतम्य में बचाव दलों को भी सतर्क किया जाता है व्यवस्थाएं की जाती हैं परंतु अब तो इस झमाझम बारिश के बीच तो केवल जीवन के कार्यों में ही रुकावट आएगी और मौसम के सामान्य होने की प्रतीक्षा की जाएगी । ब्योहारी से शहडोल का मार्ग भी अत्यंत खराब है, गड्ढों में पानी का भराव दुर्घटनाओं को जन्म देता है,वाहन चालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है सभी के भीतर एक अज्ञात डर समाया रहता है।2
- 🚨 चित्रकूट ब्रेकिंग | मझगवां में झोलाछाप डॉक्टर पर गंभीर आरोप मझगवां में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद मासूम की मौत! कानपुर पटनी निवासी घनश्याम मवाशी के करीब 4 माह के मासूम बच्चे की तबीयत खराब होने पर परिजन ने कल मझगवां स्थित अवधेश गर्ग के क्लीनिक में इलाज कराया। इलाज के बाद परिजन बच्चे को लेकर अपने गृह ग्राम कानपुर पटनी चले गए। बताया जा रहा है कि रात में बच्चे की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। बरसात के चलते परिजन सुबह बच्चे को लेकर मझगवां अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। 👉 परिजनों ने इलाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 👉 मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। नोट: यह खबर परिजनों द्वारा बताए गए घटनाक्रम और आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का बयान एवं प्रशासनिक जांच सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। #चित्रकूट #मझगवां #ब्रेकिंगन्यूज #मासूमकीमौत #स्वास्थ्यव्यवस्था #कानपुरपटनी 🚨 चित्रकूट ब्रेकिंग | मझगवां में झोलाछाप डॉक्टर पर गंभीर आरोप मझगवां में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद मासूम की मौत! कानपुर पटनी निवासी घनश्याम मवाशी के करीब 4 माह के मासूम बच्चे की तबीयत खराब होने पर परिजन ने कल मझगवां स्थित अवधेश गर्ग के क्लीनिक में इलाज कराया। इलाज के बाद परिजन बच्चे को लेकर अपने गृह ग्राम कानपुर पटनी चले गए। बताया जा रहा है कि रात में बच्चे की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। बरसात के चलते परिजन सुबह बच्चे को लेकर मझगवां अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। 👉 परिजनों ने इलाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 👉 मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। नोट: यह खबर परिजनों द्वारा बताए गए घटनाक्रम और आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का बयान एवं प्रशासनिक जांच सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। #चित्रकूट #मझगवां #ब्रेकिंगन्यूज #मासूमकीमौत #स्वास्थ्यव्यवस्था #कानपुरपटनी1