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सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें। घुनघुटी में फिर बाघिन का आतंक! सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया।शहडोल-घुनघुटी मार्ग पर लगातार बाघिन की दस्तक से दहशत 28 जुलाई के बाद 31 जुलाई को फिर उसी इलाके में दिखी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घुनघुटी। जंगल से निकलकर सड़क किनारे पहुंच रही बाघिन अब राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। 31 जुलाई की शाम करीब 5 बजे घुनघुटी-शहडोल मार्ग NH-43 पर सड़क किनारे बैठी बाघिन अचानक कार की ओर मुंह खोलकर दौड़ने लगी। कार में बच्चों सहित राहगीर मौजूद थे। बाघिन के इस आक्रामक तेवर से लोगों में हड़कंप मच गया। गौरतलब है कि 28 जुलाई को भी इसी इलाके में बाघिन द्वारा कार चालक की ओर हमला करने का प्रयास किए जाने का वीडियो सामने आया था। अब कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र में दोबारा बाघिन की मौजूदगी और वाहन की ओर झपटने का प्रयास वन्यजीव एवं मानव सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि बाघिन के साथ शावक भी आसपास मौजूद हैं। ऐसे में शावकों को खतरा महसूस होने पर बाघिन के आक्रामक होने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के क्षेत्र में निगरानी कर रही है, लेकिन राहगीरों द्वारा बाघिन के करीब जाकर मोबाइल से वीडियो बनाना खतरे को और बढ़ा रहा है। वन विभाग को अब सड़क पर विशेष निगरानी और राहगीरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की जरूरत है।

4 hrs ago
user_Ashutosh tripathi
Ashutosh tripathi
Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago

सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें। घुनघुटी में फिर बाघिन का आतंक! सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया।शहडोल-घुनघुटी मार्ग पर लगातार बाघिन की दस्तक से दहशत 28 जुलाई के बाद 31 जुलाई को फिर उसी इलाके में दिखी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घुनघुटी। जंगल से निकलकर सड़क किनारे पहुंच रही बाघिन अब राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। 31 जुलाई की शाम करीब 5 बजे घुनघुटी-शहडोल मार्ग NH-43 पर सड़क किनारे बैठी बाघिन अचानक कार की ओर मुंह खोलकर दौड़ने लगी। कार में बच्चों सहित राहगीर मौजूद थे। बाघिन के इस आक्रामक तेवर से लोगों में हड़कंप मच गया। गौरतलब है कि 28 जुलाई को भी इसी इलाके में बाघिन द्वारा कार चालक की ओर हमला करने का प्रयास किए जाने का वीडियो सामने आया था। अब कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र में दोबारा बाघिन की मौजूदगी और वाहन की ओर झपटने का प्रयास वन्यजीव एवं मानव सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि बाघिन के साथ शावक भी आसपास मौजूद हैं। ऐसे में शावकों को खतरा महसूस होने पर बाघिन के आक्रामक होने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के क्षेत्र में निगरानी कर रही है, लेकिन राहगीरों द्वारा बाघिन के करीब जाकर मोबाइल से वीडियो बनाना खतरे को और बढ़ा रहा है। वन विभाग को अब सड़क पर विशेष निगरानी और राहगीरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की जरूरत है।

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  • सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें। घुनघुटी में फिर बाघिन का आतंक! सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया।शहडोल-घुनघुटी मार्ग पर लगातार बाघिन की दस्तक से दहशत 28 जुलाई के बाद 31 जुलाई को फिर उसी इलाके में दिखी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घुनघुटी। जंगल से निकलकर सड़क किनारे पहुंच रही बाघिन अब राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। 31 जुलाई की शाम करीब 5 बजे घुनघुटी-शहडोल मार्ग NH-43 पर सड़क किनारे बैठी बाघिन अचानक कार की ओर मुंह खोलकर दौड़ने लगी। कार में बच्चों सहित राहगीर मौजूद थे। बाघिन के इस आक्रामक तेवर से लोगों में हड़कंप मच गया। गौरतलब है कि 28 जुलाई को भी इसी इलाके में बाघिन द्वारा कार चालक की ओर हमला करने का प्रयास किए जाने का वीडियो सामने आया था। अब कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र में दोबारा बाघिन की मौजूदगी और वाहन की ओर झपटने का प्रयास वन्यजीव एवं मानव सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि बाघिन के साथ शावक भी आसपास मौजूद हैं। ऐसे में शावकों को खतरा महसूस होने पर बाघिन के आक्रामक होने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के क्षेत्र में निगरानी कर रही है, लेकिन राहगीरों द्वारा बाघिन के करीब जाकर मोबाइल से वीडियो बनाना खतरे को और बढ़ा रहा है। वन विभाग को अब सड़क पर विशेष निगरानी और राहगीरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की जरूरत है।
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    सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें।

घुनघुटी में फिर बाघिन का आतंक!
सड़क किनारे बैठी थी बाघिन, कार देखते ही गुर्राकर दौड़ी—बच्चों के साथ राहगीरों की थमी सांसें
आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया।शहडोल-घुनघुटी मार्ग पर लगातार बाघिन की दस्तक से दहशत
28 जुलाई के बाद 31 जुलाई को फिर उसी इलाके में दिखी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
घुनघुटी। जंगल से निकलकर सड़क किनारे पहुंच रही बाघिन अब राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। 31 जुलाई की शाम करीब 5 बजे घुनघुटी-शहडोल मार्ग NH-43 पर सड़क किनारे बैठी बाघिन अचानक कार की ओर मुंह खोलकर दौड़ने लगी। कार में बच्चों सहित राहगीर मौजूद थे। बाघिन के इस आक्रामक तेवर से लोगों में हड़कंप मच गया।
गौरतलब है कि 28 जुलाई को भी इसी इलाके में बाघिन द्वारा कार चालक की ओर हमला करने का प्रयास किए जाने का वीडियो सामने आया था। अब कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र में दोबारा बाघिन की मौजूदगी और वाहन की ओर झपटने का प्रयास वन्यजीव एवं मानव सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
बताया जा रहा है कि बाघिन के साथ शावक भी आसपास मौजूद हैं। ऐसे में शावकों को खतरा महसूस होने पर बाघिन के आक्रामक होने की आशंका बनी हुई है। वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के क्षेत्र में निगरानी कर रही है, लेकिन राहगीरों द्वारा बाघिन के करीब जाकर मोबाइल से वीडियो बनाना खतरे को और बढ़ा रहा है।
वन विभाग को अब सड़क पर विशेष निगरानी और राहगीरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम करने की जरूरत है।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • 🚨 महा-ब्रेकिंग: ग्राम पंचायत तगावर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा गरीब का आशियाना, जनता कब तक रहेगी गुलाम? 💥 #BREAKING_NEWS 📍 स्थान: ग्राम पंचायत तगावर (शहडोल) 🤬 'नाली गायब, सड़क बनी मुसीबत'... पंचायत के भ्रष्टाचार से ढह गई रोहिणी यादव के पक्के मकान की दीवार, अब पूरे घर पर मंडराया खतरा! ग्राम पंचायत तगावर से विकास के दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाली खबर सामने आ रही है। पंचायत की तानाशाही और घटिया निर्माण कार्य के कारण आज एक गरीब परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गया है। 🔍 क्या है पूरा मामला? जानिए भ्रष्टाचार की क्रोनोलॉजी: 3 साल पहले की लापरवाही: पंचायत द्वारा 3 साल पहले यहाँ PCC रोड का निर्माण कराया गया था। इंजीनियरिंग का खेल: जहाँ पानी की निकासी के लिए पुलिया/पोल डालना बेहद जरूरी था, वहाँ भ्रष्टाचार के चलते पोल नहीं डाला गया। मकान पर आफत: पोल न होने के कारण जलभराव इस कदर बढ़ा कि रोहिणी यादव के पक्के मकान की दीवार भरभरा कर गिर गई। अब स्थिति इतनी बदतर है कि पूरा मकान कभी भी जमींदोज हो सकता है। 📢 निजी खर्च पर बनाई नाली, फिर भी पंचायत की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली! हैरानी की बात यह है कि पीड़ित परिवार ने अपनी सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत खर्च पर नाली का निर्माण भी कराया, लेकिन पंचायत प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पंचायत में बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई के नाम पर सिर्फ 'शून्य' मिला है। 🔥 जनता का तीखा सवाल: क्या पंचायत ने लोगों को गुलाम बना दिया है? आज तगावर की जनता पूछ रही है कि क्या ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों को इतना गुलाम बना दिया है कि लोग अपने हक, अधिकार और विकास पर आवाज भी नहीं उठा सकते? चंद रुपयों के भ्रष्टाचार के लिए किसी के आशियाने को उजाड़ देना कहाँ का न्याय है? ⚠️ उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग: इस गंभीर लापरवाही के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि: भ्रष्ट ग्राम पंचायत तगावर के खिलाफ तत्काल जांच बैठाई जाए। रोहिणी यादव के मकान को बचाने के लिए तुरंत पानी निकासी का पुख्ता इंतजाम (पोल/पुलिया) किया जाए। पीड़ित परिवार को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। #TagavarPanchayat #CorruptionMPExtreme #ShahdolNews #RationingCorruption #Jaisinghnagar #CMHelpline181 #GramPanchayatGhotala
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    🚨 महा-ब्रेकिंग: ग्राम पंचायत तगावर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा गरीब का आशियाना, जनता कब तक रहेगी गुलाम?
💥 #BREAKING_NEWS
📍 स्थान: ग्राम पंचायत तगावर (शहडोल)
🤬 'नाली गायब, सड़क बनी मुसीबत'... पंचायत के भ्रष्टाचार से ढह गई रोहिणी यादव के पक्के मकान की दीवार, अब पूरे घर पर मंडराया खतरा!
ग्राम पंचायत तगावर से विकास के दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाली खबर सामने आ रही है। पंचायत की तानाशाही और घटिया निर्माण कार्य के कारण आज एक गरीब परिवार बेघर होने की कगार पर पहुंच गया है।
🔍 क्या है पूरा मामला? जानिए भ्रष्टाचार की क्रोनोलॉजी:
3 साल पहले की लापरवाही: पंचायत द्वारा 3 साल पहले यहाँ PCC रोड का निर्माण कराया गया था।
इंजीनियरिंग का खेल: जहाँ पानी की निकासी के लिए पुलिया/पोल डालना बेहद जरूरी था, वहाँ भ्रष्टाचार के चलते पोल नहीं डाला गया।
मकान पर आफत: पोल न होने के कारण जलभराव इस कदर बढ़ा कि रोहिणी यादव के पक्के मकान की दीवार भरभरा कर गिर गई। अब स्थिति इतनी बदतर है कि पूरा मकान कभी भी जमींदोज हो सकता है।
📢 निजी खर्च पर बनाई नाली, फिर भी पंचायत की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली!
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित परिवार ने अपनी सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत खर्च पर नाली का निर्माण भी कराया, लेकिन पंचायत प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पंचायत में बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई के नाम पर सिर्फ 'शून्य' मिला है।
🔥 जनता का तीखा सवाल: क्या पंचायत ने लोगों को गुलाम बना दिया है?
आज तगावर की जनता पूछ रही है कि क्या ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों को इतना गुलाम बना दिया है कि लोग अपने हक, अधिकार और विकास पर आवाज भी नहीं उठा सकते? चंद रुपयों के भ्रष्टाचार के लिए किसी के आशियाने को उजाड़ देना कहाँ का न्याय है?
⚠️ उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग:
इस गंभीर लापरवाही के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि:
भ्रष्ट ग्राम पंचायत तगावर के खिलाफ तत्काल जांच बैठाई जाए।
रोहिणी यादव के मकान को बचाने के लिए तुरंत पानी निकासी का पुख्ता इंतजाम (पोल/पुलिया) किया जाए।
पीड़ित परिवार को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
#TagavarPanchayat #CorruptionMPExtreme #ShahdolNews #RationingCorruption #Jaisinghnagar #CMHelpline181 #GramPanchayatGhotala
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने की महाकाल की अगवानी और की पूजा अर्चना उज्जैन मध्य प्रदेश l
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    सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने की महाकाल की अगवानी और की पूजा अर्चना उज्जैन मध्य प्रदेश l
    user_मुकेश कुमार दुबे (MJ *CC)
    मुकेश कुमार दुबे (MJ *CC)
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • डा प्रणय तिवारी शराब की राक्षसी दुकानों पर हल्ला बोल, असामाजिक पेय समाज के बीच आबकारी एक्ट का उल्लंघन करते हुए ब्योहारी अथर्व पैरामेडिकल, इंदिरा गांधी कम्प्यूटर कालेज,एवं विद्यालयों तथा महाविद्यालय की लाईन में मुख्य मार्ग से पांच मीटर की दूरी पर संचालित शराब के ठेके की दुकान भले ही आबकारी नियमानुसार प्रदाय की गई हो परंतु इसकी लोकेशन भारतीय संविधान के एकदम विपरीत है, ज्ञात होना चाहिए कि जहां से महिलाओं, बच्चों, छात्रों,के शैक्षणिक संस्थानों में आने जाने का प्रमुख मार्ग हो वहां पर मदिरा की दुकान को खोलना मन‌ मस्तिष्क में प्रतिकूल प्रभाव डालता है एवं मुख्य सड़क से एकदम सटा हुआ होना तो सीधे सीधे इस बात की ओर इशारा करता है कि हमें कमाई से मतलब है भाड़ में जाएं नियम और कानून इसके अतिरिक्त यहां पर घनी बस्ती है और छोटे छोटे बच्चे, लड़कियां एवं मदिरापान को माननीय उच्चतम ने पूरी तरह से बहिष्कृत कर रखा है मदिरापान स्वयं की, परिवार की और राष्ट्र की मौत है,ये तो राज्य सरकारों के राजस्व नियमों के अंतर्गत एक निर्धारित सीमा के अंतर्गत ही ठेके पर संचालित की जाएं या ना की जाएं वह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है वह भी मदिरालयों को कोई संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है क्योंकि बात चाहे चिकित्सा विज्ञान की हो या दर्शनशास्त्र की या अपराधशास्त्र एवं मनोविज्ञान की प्रत्येक दृष्टिकोण में शराब केवल अमानुषिक, अमानवीय, अपराधिक गतिविधियों को ही बढ़ाता है। द्वितीय यह कि शराब चाहे बुद्ध दर्शन में हो,चाहे जैन दर्शन में हो चाहे हिंदू दर्शन में हो सभी में इसे राक्षसी प्रवृत्ति की ही संज्ञा दी गई है कोई ऐसा अधिकारी या नेता है जो यह लिखकर दे सके की शराब ना पिएंगे तो राष्ट्रीय विकास अवरुद्ध हो जाएगा इसलिए शराब तो पीनी पड़ेगी जब चारों दिशाओं से इस विनाशकारी शराब नामक विष का केवल विरोध ही है,समाज‌ में कोई स्थान ही नहीं है तो इसका संचालन तो हिटलरशाही का उदाहरण ही कहा जाएगा, 200 वर्षों तक अंग्रेजों ने अफीम का नशा लगवाकर समूचे भारतवर्ष की अस्मिता को तार तार किया था एवं उस अफीम एवं गांजे की खेती ने भारतवर्ष की पौराणिक संस्कृति, स्वतंत्रता,एकता,अखण्डता,सम्प्रभुता सब कुछ छीन लिया था, उन्हें नशे से बाहर लाने के लिए सहस्रों शीश राष्ट्रीय बलिवेदी पर हवन हुए थे । और आज के वर्तमान माहौल पर विचार जरा गंभीरता पूर्वक करिए किस प्रकार से देश की युवा पीढ़ी जो भारतीय सेनाओं में जाकर देश की सुरक्षा करती है शराब उन सबकी नसों में बहकर उनके रक्त को पानी कर रहा है और वाह रे मेरे देश उन देशों से सीख लीजिए जहां के वायुमार्ग से भी शराब परिवहन वायुयान तक नहीं गुजर सकता यदि उन मर्यादाओं का उल्लंघन ऐसे देश पाते हैं जो शराब नाम से घृणा करते हैं वो फैसले लेने के लिए किसी चार्जशीट या पुलिस प्राथमिकी की प्रतीक्षा नहीं करते हैं सीधे उनका मिलन ऊपर वाले से करवा देते हैं। शराब तो अन्याय और अनाचार,पाप और अपराध की जननी है जिसका समर्थन हमारे भारतवर्ष के ना तो वेद,पुराण, उपनिषद,संहिताओं‌ में ही‌ है अपितु उनके प्रति आकर्षण मात्र से छात्र हो,आचार्य हो ,गृहणी हो, अधिकारी हो या कोई भी तीसमार खान हो उन्हें कुल कलंक के नाम से ही अपमानित कर बुलाया जाएगा। शराब का शनै: शनै: मनमानी पन और धड़ल्ले से उसका गांव गांव तक प्रचार प्रसार कर देश को दीमक की तरह खोखला किया जा रहा है, पारिवारिक विघटन,विवाह विच्छेद,एसिड अटैक,लूट ,चोरी, बालात्कार,अपहरण, हत्याएं, एवं वो अपराध जो कोई मनुष्य अपने होश करने की विचेरेगा तक नहीं वो‌ शराब के सेवन के बाद वही अपराध बड़ी आसानी से कर‌ डालता है एवं होश आने के पश्चात पछताता है। परिवार के मुखिया हों या बच्चे यदि इस गैर कानूनी पेय का सेवन कर लिया तो उस परिवार के सर्वनाश को कोई नहीं रोक सकता, उन्हें सुधारने के लिए नशामुक्ति केन्द्र एवं पुनर्वास केंद्र बनाए जाते हैं जहां किसी की ग़रीबी या अमीरी से कोई लेना-देना नहीं होता है उन्हें तो बस पीड़ित के परिवारजनों से पैसे ही ऐंठने रहते हैं। अनावश्यक रूप से एक सामाजिक बीमारी को पनपाया जाता रहा है, पनपाया जा रहा है यदि शराब पाप और अधर्म की राक्षसी प्रवृत्ति ना होती तो उसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से हटवाया ही क्यों जाता ? मैं जानता हूं कि इस लेख में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्चतम न्यायालय, भारतीय संविधान मेरे ही पक्ष में है और एक सड़क का भिखारी तक इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि वो शराब को पीने के प्रमुख प्रचारक के रूप में अपने हस्ताक्षर करे,
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    डा प्रणय तिवारी शराब की राक्षसी दुकानों पर हल्ला बोल, असामाजिक पेय समाज के बीच 
आबकारी एक्ट का उल्लंघन करते हुए ब्योहारी अथर्व पैरामेडिकल, इंदिरा गांधी कम्प्यूटर कालेज,एवं विद्यालयों तथा महाविद्यालय की लाईन में मुख्य मार्ग से पांच मीटर की दूरी पर संचालित शराब के ठेके की दुकान भले ही आबकारी नियमानुसार प्रदाय की गई हो परंतु इसकी लोकेशन भारतीय संविधान के एकदम विपरीत है, ज्ञात होना चाहिए कि जहां से महिलाओं, बच्चों, छात्रों,के शैक्षणिक संस्थानों में आने जाने का प्रमुख मार्ग हो वहां पर मदिरा की दुकान को खोलना मन‌ मस्तिष्क में प्रतिकूल प्रभाव डालता है एवं मुख्य सड़क से एकदम सटा हुआ होना तो सीधे सीधे इस बात की ओर इशारा करता है कि हमें कमाई से मतलब है भाड़ में जाएं नियम और कानून इसके अतिरिक्त यहां पर घनी बस्ती है और छोटे छोटे बच्चे, लड़कियां एवं मदिरापान को माननीय उच्चतम ने पूरी तरह से बहिष्कृत कर रखा है मदिरापान स्वयं की, परिवार की और राष्ट्र की मौत है,ये तो राज्य सरकारों के राजस्व नियमों के अंतर्गत एक निर्धारित सीमा के अंतर्गत ही ठेके पर संचालित की जाएं या ना की जाएं वह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है वह भी मदिरालयों को कोई संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है क्योंकि बात चाहे चिकित्सा विज्ञान की हो या दर्शनशास्त्र की या अपराधशास्त्र एवं मनोविज्ञान की प्रत्येक दृष्टिकोण में शराब केवल अमानुषिक, अमानवीय, अपराधिक गतिविधियों को ही बढ़ाता है।
द्वितीय यह कि शराब चाहे बुद्ध दर्शन में हो,चाहे जैन दर्शन में हो चाहे हिंदू दर्शन में हो सभी में इसे राक्षसी प्रवृत्ति की ही संज्ञा दी गई है कोई ऐसा अधिकारी या नेता है जो यह लिखकर दे सके की शराब ना पिएंगे तो राष्ट्रीय विकास अवरुद्ध हो जाएगा इसलिए शराब तो पीनी पड़ेगी जब चारों दिशाओं से इस विनाशकारी शराब नामक विष का केवल विरोध ही है,समाज‌ में कोई स्थान ही नहीं है तो इसका संचालन तो हिटलरशाही का उदाहरण ही कहा जाएगा, 200 वर्षों तक अंग्रेजों ने अफीम का नशा लगवाकर समूचे भारतवर्ष की अस्मिता को तार तार किया था एवं उस अफीम एवं गांजे की खेती ने भारतवर्ष की पौराणिक संस्कृति, स्वतंत्रता,एकता,अखण्डता,सम्प्रभुता सब कुछ छीन लिया था, उन्हें नशे से बाहर लाने के लिए सहस्रों शीश राष्ट्रीय बलिवेदी पर हवन हुए थे ।
और आज के वर्तमान माहौल पर विचार जरा गंभीरता पूर्वक करिए किस प्रकार से देश की युवा पीढ़ी जो भारतीय सेनाओं में जाकर देश की सुरक्षा करती है शराब उन सबकी नसों में बहकर उनके रक्त को पानी कर रहा है और वाह रे मेरे देश उन देशों से सीख लीजिए जहां के वायुमार्ग से भी शराब परिवहन वायुयान तक नहीं गुजर सकता यदि उन मर्यादाओं का उल्लंघन ऐसे देश पाते हैं जो शराब नाम से घृणा करते हैं वो फैसले लेने के लिए किसी चार्जशीट या पुलिस प्राथमिकी की प्रतीक्षा नहीं करते हैं सीधे उनका मिलन ऊपर वाले से करवा देते हैं। 
शराब तो अन्याय और अनाचार,पाप और अपराध की जननी है जिसका समर्थन हमारे भारतवर्ष के ना तो वेद,पुराण, उपनिषद,संहिताओं‌ में ही‌ है अपितु उनके प्रति आकर्षण मात्र से छात्र हो,आचार्य हो ,गृहणी हो, अधिकारी हो या कोई भी तीसमार खान हो उन्हें कुल कलंक के नाम से ही अपमानित कर बुलाया जाएगा।
शराब का शनै: शनै: मनमानी पन और धड़ल्ले से उसका गांव गांव तक प्रचार प्रसार कर देश को दीमक की तरह खोखला किया जा रहा है, पारिवारिक विघटन,विवाह विच्छेद,एसिड अटैक,लूट ,चोरी, बालात्कार,अपहरण, हत्याएं, एवं वो अपराध जो कोई मनुष्य अपने होश करने की विचेरेगा तक नहीं वो‌ शराब के सेवन के बाद वही अपराध बड़ी आसानी से कर‌ डालता है एवं होश आने के पश्चात पछताता है। परिवार के मुखिया हों या बच्चे यदि इस गैर कानूनी पेय का सेवन कर लिया तो उस परिवार के सर्वनाश को कोई नहीं रोक सकता, उन्हें सुधारने के लिए नशामुक्ति केन्द्र एवं पुनर्वास केंद्र बनाए जाते हैं जहां किसी की ग़रीबी या अमीरी से कोई लेना-देना नहीं होता है उन्हें तो बस पीड़ित के परिवारजनों से पैसे ही ऐंठने रहते हैं।
अनावश्यक रूप से एक सामाजिक बीमारी को पनपाया जाता रहा है, पनपाया जा रहा है यदि शराब पाप और अधर्म की राक्षसी प्रवृत्ति ना होती तो उसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से हटवाया ही क्यों जाता ? 
मैं जानता हूं कि इस लेख में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्चतम न्यायालय, भारतीय संविधान मेरे ही पक्ष में है और एक सड़क का भिखारी तक इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि वो शराब को पीने के प्रमुख प्रचारक के रूप में अपने हस्ताक्षर करे,
    user_Dr Pranay Tiwari
    Dr Pranay Tiwari
    Doctor ब्योहारी, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    14 min ago
  • उमरिया जिले की आबकारी विभाग अवैध प्रकारी को रोकने में नाकामयाब अवैध प्रकारी को रोकने के लिए मैदान में उतरे भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता उन्होंने अवैध प्रकारी करते हुए लोगों को किया नौरोजाबाद पुलिस के हवाले। उमरिया जिले के आबकारी विभाग एवं पुलिस विभाग का कारभार अब भगवती मानव कल्याण संगठन संभाल रहा है बिरसिंहपुर नौरोजाबाद में आबकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी, ठेकेदार के गुर्गे दोपहिया-चार पहिया वाहनों से कर रहे गांव-गांव शराब की पैकारी पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल, भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं ने पकड़ी अवैध शराब, डायल 112 को दी सूचना बिरसिंहपुर (उमरिया शासन के स्पष निर्देश हैं कि शराब की बिक्री केवल लाइसेंसी अहाते और निर्धारित दुकान से ही की जाए, लेकिन बिरसिंहपुर नौरोजाबाद क्षेत्र में इन नियमों को ठेके पर लेकर बैठे ठेकेदार द्वारा खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नौरोजाबाद शराब भट्टी के ठेकेदार द्वारा अपने गुर्गों के माध्यम से मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों में शराब भरकर गांव-गांव, शहर के वार्डों, ढाबों, पान-गुमटियों और टपरों तक अवैध रूप से शराब पहुंचाई जा रही है। यह पैकारी सुबह से लेकर देर रात तक बेरोकटोक जारी है, जिससे क्षेत्र में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और युवा वर्ग बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाइसेंसी दुकान पर तो शराब बिकती ही है, लेकिन असली खेल दुकान बंद होने के बाद शुरू होता है। ठेकेदार के लड़के कमीशन के लालच में 20 से 50 रुपये अधिक दाम लेकर हर जगह शराब की होम डिलीवरी जैसा काम कर रहे हैं। गांव के चौक-चौराहों और ढाबों पर खुलेआम शराब पिलाई जा रही है, जिससे आए दिन विवाद और मारपीट की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत संबंधित थाने और आबकारी विभाग से की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसी स्थिति में जो काम पुलिस और आबकारी विभाग को करना चाहिए था, वह काम आज भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं राजू सिंह,अमेले सिंह, आशु नायक, लखन नायक, उदय नायक,सुनील, गणेश परस्ते, मनोज मरावी ,भुवनेश्वर सिंह, ने कर दिखाया। सोमवार को संगठन के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली कि दोपहिया वाहन पर बड़ी मात्रा में शराब लेकर कुछ लोग गांव की ओर जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए पीछा किया नायक मोहल्ला में रूक कर विजय किराना स्टोर में शराब देखकर चले गए भगवती मानव कल्याण कार्यकर्ताओं ने मौके से देशी50 पाव और 24 बोतल बियर बरामद होने की बात कही जा रही है। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने तत्काल डायल 112 पर फोन लगाकर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब्त शराब और बियर को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया। कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मांग की है कि केवल शराब पकड़ने वाले को ही नहीं, बल्कि इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे खड़े शराब ठेकेदार के खिलाफ भी आबकारी अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। भगवती मानव कल्याण संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका संगठन लंबे समय से समाज में व्याप्त नशे के खिलाफ अभियान चला रहा है। उनका उद्देश्य लोगों को नशामुक्त बनाना है, जबकि शासन की दुकान का ठेका लेकर कुछ लोग अवैध पैकारी कर उनके प्रयासों को विफल कर रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध पैकारी पर रोक नहीं लगी तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर आबकारी और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर क्यों विभागीय अधिकारी लाइसेंसी दुकानों की जांच नहीं करते? क्यों पैकारी करने वाले वाहनों की चेकिंग नहीं होती? क्या इस अवैध कमाई में कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत तो नहीं है? जनता इन सवालों का जवाब चाहती है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी से मांग की है कि बिरसिंहपुर नौरोजाबाद भट्टी के स्टॉक और बिक्री रजिस्टर का मिलान किया जाए, सीसीटीवी फुटेज खंगाली जाए और पैकारी में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि अवैध शराब बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग सके।
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    उमरिया जिले की आबकारी विभाग अवैध प्रकारी को रोकने में नाकामयाब अवैध प्रकारी को रोकने के लिए मैदान में उतरे भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ता उन्होंने अवैध प्रकारी करते हुए लोगों को किया नौरोजाबाद पुलिस के हवाले।
उमरिया जिले के आबकारी विभाग एवं पुलिस विभाग का कारभार अब भगवती मानव कल्याण संगठन संभाल रहा है बिरसिंहपुर नौरोजाबाद में आबकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी, ठेकेदार के गुर्गे दोपहिया-चार पहिया वाहनों से कर रहे गांव-गांव शराब की पैकारी
पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल, भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं ने पकड़ी अवैध शराब, डायल 112 को दी सूचना
बिरसिंहपुर (उमरिया शासन के स्पष निर्देश हैं कि शराब की बिक्री केवल लाइसेंसी अहाते और निर्धारित दुकान से ही की जाए, लेकिन बिरसिंहपुर नौरोजाबाद क्षेत्र में इन नियमों को ठेके पर लेकर बैठे ठेकेदार द्वारा खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार नौरोजाबाद शराब भट्टी के ठेकेदार द्वारा अपने गुर्गों के माध्यम से मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों में शराब भरकर गांव-गांव, शहर के वार्डों, ढाबों, पान-गुमटियों और टपरों तक अवैध रूप से शराब पहुंचाई जा रही है। यह पैकारी सुबह से लेकर देर रात तक बेरोकटोक जारी है, जिससे क्षेत्र में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और युवा वर्ग बर्बाद हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाइसेंसी दुकान पर तो शराब बिकती ही है, लेकिन असली खेल दुकान बंद होने के बाद शुरू होता है। ठेकेदार के लड़के कमीशन के लालच में 20 से 50 रुपये अधिक दाम लेकर हर जगह शराब की होम डिलीवरी जैसा काम कर रहे हैं। गांव के चौक-चौराहों और ढाबों पर खुलेआम शराब पिलाई जा रही है, जिससे आए दिन विवाद और मारपीट की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत संबंधित थाने और आबकारी विभाग से की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ऐसी स्थिति में जो काम पुलिस और आबकारी विभाग को करना चाहिए था, वह काम आज भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं राजू सिंह,अमेले सिंह, आशु नायक, लखन नायक, उदय नायक,सुनील, गणेश परस्ते, मनोज मरावी ,भुवनेश्वर सिंह, ने कर दिखाया। सोमवार को संगठन के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली कि दोपहिया वाहन पर बड़ी मात्रा में शराब लेकर कुछ लोग गांव की ओर जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए पीछा किया नायक मोहल्ला में रूक कर विजय किराना स्टोर में शराब देखकर चले गए भगवती मानव कल्याण कार्यकर्ताओं ने मौके से देशी50 पाव और 24 बोतल बियर बरामद होने की बात कही जा रही है।
इसके बाद कार्यकर्ताओं ने तत्काल डायल 112 पर फोन लगाकर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब्त शराब और बियर को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया। कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मांग की है कि केवल शराब पकड़ने वाले को ही नहीं, बल्कि इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे खड़े शराब ठेकेदार के खिलाफ भी आबकारी अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
भगवती मानव कल्याण संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका संगठन लंबे समय से समाज में व्याप्त नशे के खिलाफ अभियान चला रहा है। उनका उद्देश्य लोगों को नशामुक्त बनाना है, जबकि शासन की दुकान का ठेका लेकर कुछ लोग अवैध पैकारी कर उनके प्रयासों को विफल कर रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध पैकारी पर रोक नहीं लगी तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर आबकारी और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर क्यों विभागीय अधिकारी लाइसेंसी दुकानों की जांच नहीं करते? क्यों पैकारी करने वाले वाहनों की चेकिंग नहीं होती? क्या इस अवैध कमाई में कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत तो नहीं है? जनता इन सवालों का जवाब चाहती है।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी से मांग की है कि बिरसिंहपुर नौरोजाबाद भट्टी के स्टॉक और बिक्री रजिस्टर का मिलान किया जाए, सीसीटीवी फुटेज खंगाली जाए और पैकारी में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि अवैध शराब बिक्री पर पूरी तरह से रोक लग सके।
    user_Om Agrawal
    Om Agrawal
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    8 min ago
  • 4 से 5 दिन पहले सूरज बली बैग की संदिग्ध मौत बैगा परिवार में टूटा दुखों का पहाड़ *तीन दिन से नहीं जला चूल्हा, बुझ गया गरीब बैगा परिवार का चिराग* ! *सूरजबली बैगा की संदिग्ध मौत से सहारा टोला में मातम, परिजनों ने हत्या की आशंका जताकर एसपी से लगाई न्याय की गुहार* जिला उमरिया। तहसील मानपुर के अंतर्गत ग्राम सेहरा टोला निवासी छोटेलाल बैगा के परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि तीन दिन से घर में चूल्हा तक नहीं जला। परिवार का कमाने-खाने का सहारा और घर का चिराग सूरजबली बैगा अब इस दुनिया में नहीं है। नेशनल हाईवे-43 के पास संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों के मुताबिक सूरजबली बैगा को राधेलाल प्रजापति घर से अपने साथ लेकर गया था। इसके बाद जब परिजन राधेलाल से सूरजबली के बारे में पूछने पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। परिजनों का कहना है कि इसके करीब चार-पांच दिन बाद सूरजबली का शव मिला, जिसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। “हमारे बेटे को कौन लेकर गया था, उसकी मौत कैसे हुई—पुलिस सच्चाई सामने लाए” परिजनों ने सूरजबली की मौत को लेकर गंभीर आशंका जताई है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत उनके बेटे की हत्या की गई हो सकती है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि गणेश प्रजापति द्वारा सूरजबली के नाम पर पिकअप वाहन और पल्सर मोटरसाइकिल लिए जाने तथा बीमा कराए जाने की बात सामने आई है। परिवार ने पुलिस से इन सभी दस्तावेजों और लेन-देन की गहन जांच कराने की मांग की है, ताकि यदि कोई साजिश है तो उसका खुलासा हो सके। गरीब परिवार का दर्द—“हमारे घर का चिराग बुझा दिया” सूरजबली की मौत के बाद परिवार की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि वह परिवार की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। तीन दिन से चूल्हा नहीं जला… घर में मातम है… मां-बाप की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। जिस बेटे से परिवार की उम्मीदें जुड़ी थीं, आज वही घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। परिजनों ने पुलिस अधीक्षक विजय कुमार भागवानी से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए सूरजबली की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जिन लोगों पर परिजनों को संदेह है, उनसे पूछताछ की जाए और वाहन, बीमा सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। परिजनों ने स्पष्ट मांग की है कि यदि जांच में हत्या या किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल—सूरजबली की मौत का सच क्या है? क्या सूरजबली की मौत महज हादसा थी या इसके पीछे कोई साजिश थी? उसे आखिरी बार कौन अपने साथ लेकर गया था? चार-पांच दिन बाद उसका शव किन परिस्थितियों में मिला? और मृतक के नाम पर वाहन एवं बीमा से जुड़े आरोपों की वास्तविकता क्या है?
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    4 से 5 दिन पहले सूरज बली बैग की संदिग्ध मौत बैगा परिवार में टूटा दुखों का पहाड़
*तीन दिन से नहीं जला चूल्हा, बुझ गया गरीब बैगा परिवार का चिराग* !
*सूरजबली बैगा की संदिग्ध मौत से सहारा टोला में मातम, परिजनों ने हत्या की आशंका जताकर एसपी से लगाई न्याय की गुहार* 
जिला उमरिया। तहसील मानपुर के अंतर्गत ग्राम सेहरा टोला निवासी छोटेलाल बैगा के परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि तीन दिन से घर में चूल्हा तक नहीं जला। परिवार का कमाने-खाने का सहारा और घर का चिराग सूरजबली बैगा अब इस दुनिया में नहीं है। नेशनल हाईवे-43 के पास संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
परिजनों के मुताबिक सूरजबली बैगा को राधेलाल प्रजापति घर से अपने साथ लेकर गया था। इसके बाद जब परिजन राधेलाल से सूरजबली के बारे में पूछने पहुंचे तो कथित तौर पर उन्हें कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। परिजनों का कहना है कि इसके करीब चार-पांच दिन बाद सूरजबली का शव मिला, जिसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
“हमारे बेटे को कौन लेकर गया था, उसकी मौत कैसे हुई—पुलिस सच्चाई सामने लाए”
परिजनों ने सूरजबली की मौत को लेकर गंभीर आशंका जताई है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत उनके बेटे की हत्या की गई हो सकती है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि गणेश प्रजापति द्वारा सूरजबली के नाम पर पिकअप वाहन और पल्सर मोटरसाइकिल लिए जाने तथा बीमा कराए जाने की बात सामने आई है। परिवार ने पुलिस से इन सभी दस्तावेजों और लेन-देन की गहन जांच कराने की मांग की है, ताकि यदि कोई साजिश है तो उसका खुलासा हो सके।
गरीब परिवार का दर्द—“हमारे घर का चिराग बुझा दिया”
सूरजबली की मौत के बाद परिवार की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि वह परिवार की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
तीन दिन से चूल्हा नहीं जला… घर में मातम है… मां-बाप की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। जिस बेटे से परिवार की उम्मीदें जुड़ी थीं, आज वही घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।
परिजनों ने पुलिस अधीक्षक विजय कुमार भागवानी से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए सूरजबली की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जिन लोगों पर परिजनों को संदेह है, उनसे पूछताछ की जाए और वाहन, बीमा सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।
परिजनों ने स्पष्ट मांग की है कि यदि जांच में हत्या या किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल—सूरजबली की मौत का सच क्या है?
क्या सूरजबली की मौत महज हादसा थी या इसके पीछे कोई साजिश थी? उसे आखिरी बार कौन अपने साथ लेकर गया था? चार-पांच दिन बाद उसका शव किन परिस्थितियों में मिला? और मृतक के नाम पर वाहन एवं बीमा से जुड़े आरोपों की वास्तविकता क्या है?
    user_Shambhu nath Soni
    Shambhu nath Soni
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    35 min ago
  • सावधान रहें, सुरक्षित रहें आमजन जलमग्न होने पर पुल-पुलियों को पार करने का न करें प्रयास, बाणसागर बांध से लगातार किया जा रहा जल प्रवाह, बनाएं उचित दूरी, कलेक्टर , पार्थ जायसवाल #शहडोल #shahdol Jansampark Madhya Pradesh
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    सावधान रहें, सुरक्षित रहें

आमजन जलमग्न होने पर पुल-पुलियों को पार करने का न करें प्रयास, बाणसागर बांध से लगातार किया जा रहा जल प्रवाह, बनाएं उचित दूरी,
                                                          कलेक्टर , पार्थ जायसवाल

#शहडोल #shahdol Jansampark Madhya Pradesh
    user_अजय कुमार केवट
    अजय कुमार केवट
    Local News Reporter सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • न्यू बरौंधा की पुलिया में पानी का टैंकर धंसा मार्ग हुआ संकीर्ण, दुर्घटना की संभावना आखिरकार जिस बात का डर व्यक्त किया जा रहा था वही हुई आज अपरान्ह 11:45 न्यू बरौंधा पुलिया में पानी का टैंकर धंस गया लगातार अवगत करवाने के बाद भी शासन प्रशासन होश में नहीं आया और अब तो न्यू बरौंधा की पुलिया दोनों ओर से ढह रही है, थोड़े मोड़े बचे रास्ते से दो‌ पहिया वाहन किसी तरह से निकल रहे हैं परंतु कुछ कहा नहीं जा सकता है अभी बच्चों को विद्यालय ले गई विभिन्न विद्यालयों की बसें और वाहन भी हैं जिन पर सुरक्षात्मक तरीके से शासन प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है अन्यथा दुर्घटना कभी बतलाकर नहीं आती है,इस बात को चारों ओर फैला दिया गया है। शासन प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि नगरपालिका को पुलिया की इतनी ही चिंता होती तो‌ दस वर्षों से पुलिया की रेलिंग के लिए जब एक अकेला मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय सलाहकार, चिकित्सक, पत्रकार चिल्ला रहा था अनेकों सीएम हेल्पलाइन नंबर लगाईं कि लोग लगातार रेलिंग की कमी के कारण वाहनों के साथ दनादन नीचे‌ गिर रहे थे,घायल भी हो रहे थे परंतु उन‌ बेचारों के पास विस्थापन का दर्द या फिर शासन प्रशासन के भाई लोगों से डर इस कदर बढ़ गया है कि वो अपनी समस्या तक बतलाने में झिझकते हैं कि कहीं उसका खामियाजा ना भुगतना पड़ जाए परंतु नहीं भ्रष्टाचारियों के पास फर्जी प्रतिवेदन आदतन शिकायत कर्ता है चाहे भले ही शिकायतकर्ता की शिक्षा के बारे में घण्टा कुछ ना मालुम हो परंतु ये दया तौर पर नौकरी पाने वाले अल्पज्ञानी इन्हें तो केवल अपनी ग्रेडिंग सुधारनी है, जब दुर्घटना संभावित ही थी,एक बार बड़ा हादसा ईश्वर की दया से टल ही गया था तो ठीक इंजीनियरिंग के साथ ठोस निर्माण सामग्रियों का प्रयोग करते हुए वर्षा ऋतु के पूर्व ही जनहितकारी योजना को आकार दिया जा सकता था, परंतु केवल मिट्टी का ढेर लगा दिया गया यह तो कोई स्थाई समाधान नहीं हुआ जिला कलेक्टर झमाझम बारिश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए लगातार दिशा निर्देश देते जा रहे हैं चाहे वो किसी भी जिले के क्यों न हों एवं उसी तारतम्य में बचाव दलों को भी सतर्क किया जाता है व्यवस्थाएं की जाती हैं परंतु अब तो इस झमाझम बारिश के बीच तो केवल जीवन के कार्यों में ही रुकावट आएगी और मौसम के सामान्य होने की प्रतीक्षा की जाएगी । ब्योहारी से शहडोल का मार्ग भी अत्यंत खराब है, गड्ढों में पानी का भराव दुर्घटनाओं को जन्म देता है,वाहन चालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है सभी के भीतर एक अज्ञात डर समाया रहता है।
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    न्यू बरौंधा की पुलिया में पानी का टैंकर धंसा मार्ग हुआ संकीर्ण, दुर्घटना की संभावना 
आखिरकार जिस बात का डर व्यक्त किया जा रहा था वही हुई आज अपरान्ह 11:45 न्यू बरौंधा पुलिया में पानी का टैंकर धंस गया लगातार अवगत करवाने के बाद भी शासन प्रशासन होश में नहीं आया और अब तो न्यू बरौंधा की पुलिया दोनों ओर से ढह रही है, थोड़े मोड़े बचे रास्ते से दो‌ पहिया वाहन किसी तरह से निकल रहे हैं परंतु कुछ कहा नहीं जा सकता है अभी बच्चों को विद्यालय ले गई विभिन्न विद्यालयों की बसें और वाहन भी हैं जिन पर सुरक्षात्मक तरीके से शासन प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है अन्यथा दुर्घटना कभी बतलाकर नहीं आती है,इस बात को चारों ओर फैला दिया गया है।
शासन प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि नगरपालिका को पुलिया की इतनी ही चिंता होती तो‌ दस वर्षों से पुलिया की रेलिंग के लिए जब एक अकेला मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय सलाहकार, चिकित्सक, पत्रकार चिल्ला रहा था अनेकों सीएम हेल्पलाइन नंबर लगाईं कि लोग लगातार रेलिंग की कमी के कारण वाहनों के साथ दनादन नीचे‌ गिर रहे थे,घायल भी हो रहे थे परंतु उन‌ बेचारों के पास विस्थापन का दर्द या फिर शासन प्रशासन के भाई लोगों से डर इस कदर बढ़ गया है कि वो अपनी समस्या तक बतलाने में झिझकते हैं कि कहीं उसका खामियाजा ना भुगतना पड़ जाए परंतु नहीं भ्रष्टाचारियों के पास फर्जी प्रतिवेदन आदतन शिकायत कर्ता है चाहे भले ही शिकायतकर्ता की शिक्षा के बारे में घण्टा कुछ ना मालुम हो परंतु ये दया तौर पर नौकरी पाने वाले अल्पज्ञानी इन्हें तो केवल अपनी ग्रेडिंग सुधारनी है, जब दुर्घटना संभावित ही थी,एक बार बड़ा हादसा ईश्वर की दया से टल ही गया था तो ठीक इंजीनियरिंग के साथ ठोस निर्माण सामग्रियों का प्रयोग करते हुए वर्षा ऋतु के पूर्व ही जनहितकारी योजना को आकार दिया जा सकता था, परंतु केवल मिट्टी का ढेर लगा दिया गया यह तो कोई स्थाई समाधान नहीं हुआ जिला कलेक्टर झमाझम बारिश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए लगातार दिशा निर्देश देते जा रहे हैं चाहे वो किसी भी जिले के क्यों न हों एवं उसी तारतम्य में बचाव दलों को भी सतर्क किया जाता है व्यवस्थाएं की जाती हैं परंतु अब तो इस झमाझम बारिश के बीच तो केवल जीवन के कार्यों में ही रुकावट आएगी और मौसम के सामान्य होने की प्रतीक्षा की जाएगी ।
ब्योहारी से शहडोल का मार्ग भी अत्यंत खराब है, गड्ढों में पानी का भराव दुर्घटनाओं को जन्म देता है,वाहन चालकों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है सभी के भीतर एक अज्ञात डर समाया रहता है।
    user_Dr Pranay Tiwari
    Dr Pranay Tiwari
    Doctor ब्योहारी, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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