नवादा: 'बाल विवाह मुक्ति रथ' ने भरी बदलाव की हुंकार, पकरीबरावां के दीऔरा में सम्मानित हुईं साहसी महिलाएँ पकरीबरावां से अवधेश कुमार के खास रिपोर्ट पकरीबरावां (नवादा): नवादा जिले को बाल विवाह के अभिशाप से पूर्णतः मुक्त करने के लिए सरकार और नागरिक समाज की साझा मुहिम अब धरातल पर रंग लाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर पकरीबरावां प्रखंड के दीऔरा गांव में एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वे ग्रामीण महिलाएं रहीं, जिन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती देते हुए बाल विवाह रोकने में प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग किया। कल्याणी कुमारी ने महिलाओं को किया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान तटवासी समाज न्यास की प्रतिनिधि कल्याणी कुमारी ने बाल विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने वाली जांबाज महिलाओं को 'स्टॉल' (अंगवस्त्र) प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक शिक्षित और जागरूक महिला ही समाज की असल रक्षक है। जिन महिलाओं ने अपने आस-पड़ोस में होने वाले बाल विवाह की सूचना देकर बच्चियों का भविष्य बचाया, वे समाज के लिए प्रेरणापुंज हैं। 'बाल विवाह मुक्ति रथ' का 100 दिवसीय सफर भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर संचालित '100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान' के तहत जिले भर में भ्रमण कर रहे 'बाल विवाह मुक्ति रथ' की यात्रा का जिला स्तरीय समापन भी इसी अवसर पर हुआ। इस दौरान तटवासी समाज न्यास के निदेशक कन्हैया कुमार सिंह ने अभियान के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में संदेश देते हुए कहा, "अब दुनिया को यह स्वीकार करना होगा कि बाल विवाह कोई सामान्य सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि विवाह की आड़ में मासूम बच्चों के साथ होने वाला बलात्कार है। यह एक जघन्य अपराध है और कानून की नजर में पूरी तरह दंडनीय है।" आंकड़ों में अभियान की सफलता की कहानी नवादा सदर एसडीओ अमित अनुराग द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया यह रथ पिछले 30 दिनों से जिले की धमनियों (सड़कों) पर दौड़ रहा था। अभियान की उपलब्धियां किसी भी सामाजिक आंदोलन के लिए मिसाल हैं: दूरी और पहुंच: रथ ने जिले के दुर्गम इलाकों सहित कुल 2075 किलोमीटर का सफर तय किया और सीधे 50 गांवों के हृदय तक पहुँचा। जनभागीदारी: इस पूरी मुहिम से जिले के लगभग 2,25,000 लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े।ग शैक्षणिक प्रभाव: जिले के 25 स्कूलों में जाकर 10,500 बच्चों एवं शिक्षकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाया गया। * धार्मिक सहयोग: 30 धार्मिक स्थलों पर 110 धर्मगुरुओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया गया, ताकि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व वर-वधू की आयु की अनिवार्य जांच सुनिश्चित करें। तीन चरणों की अभेद्य रणनीति इस अभियान को सफल बनाने के लिए तीन स्तरों पर घेराबंदी की गई थी। प्रथम चरण में शिक्षण संस्थानों को जोड़ा गया। द्वितीय चरण में धर्मगुरुओं और विवाह से जुड़ी सेवाओं जैसे कैटरर्स, सजावट वाले, बैंड-बाजा और टेंट हाउस मालिकों को सख्त चेतावनी दी गई कि बाल विवाह में सहयोग करना उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकता है। तीसरे चरण में पंचायतों के माध्यम से जन-जन तक यह संदेश पहुँचाया गया कि बाल विवाह बच्चों को कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के अंतहीन दुष्चक्र में धकेल देता है। उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ता नवादा तटवासी समाज न्यास, जो देश के सबसे बड़े नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' का प्रमुख सहयोगी है, ने इस समापन समारोह में विश्वास जताया कि 'बाल विवाह मुक्त नवादा' का सपना अब हकीकत में बदलने वाला है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह को बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक शपथ दिलाई गई। इस ऐतिहासिक मौके पर अभय कुमार सहित दर्जनों गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
नवादा: 'बाल विवाह मुक्ति रथ' ने भरी बदलाव की हुंकार, पकरीबरावां के दीऔरा में सम्मानित हुईं साहसी महिलाएँ पकरीबरावां से अवधेश कुमार के खास रिपोर्ट पकरीबरावां (नवादा): नवादा जिले को बाल विवाह के अभिशाप से पूर्णतः मुक्त करने के लिए सरकार और नागरिक समाज की साझा मुहिम अब धरातल पर रंग लाने लगी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर पकरीबरावां प्रखंड के दीऔरा गांव में एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वे ग्रामीण महिलाएं रहीं, जिन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती देते हुए बाल विवाह रोकने में प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग किया। कल्याणी कुमारी ने महिलाओं को किया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान तटवासी समाज न्यास की प्रतिनिधि कल्याणी कुमारी ने बाल विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने वाली जांबाज महिलाओं को 'स्टॉल' (अंगवस्त्र) प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक शिक्षित और जागरूक महिला ही समाज की असल रक्षक है। जिन महिलाओं ने अपने आस-पड़ोस में होने वाले बाल विवाह की सूचना देकर बच्चियों का भविष्य बचाया, वे समाज के लिए प्रेरणापुंज हैं। 'बाल विवाह मुक्ति रथ' का 100 दिवसीय सफर भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर संचालित '100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान' के तहत जिले भर में भ्रमण कर रहे 'बाल विवाह मुक्ति रथ' की यात्रा का जिला स्तरीय समापन भी इसी अवसर पर हुआ। इस दौरान तटवासी समाज न्यास के निदेशक कन्हैया कुमार सिंह ने अभियान के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में संदेश देते हुए कहा, "अब दुनिया को यह स्वीकार करना होगा कि बाल विवाह कोई सामान्य सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि विवाह की आड़ में मासूम बच्चों के साथ होने वाला बलात्कार है। यह एक जघन्य अपराध है और कानून की नजर में पूरी तरह दंडनीय है।" आंकड़ों में अभियान की सफलता
की कहानी नवादा सदर एसडीओ अमित अनुराग द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया यह रथ पिछले 30 दिनों से जिले की धमनियों (सड़कों) पर दौड़ रहा था। अभियान की उपलब्धियां किसी भी सामाजिक आंदोलन के लिए मिसाल हैं: दूरी और पहुंच: रथ ने जिले के दुर्गम इलाकों सहित कुल 2075 किलोमीटर का सफर तय किया और सीधे 50 गांवों के हृदय तक पहुँचा। जनभागीदारी: इस पूरी मुहिम से जिले के लगभग 2,25,000 लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े।ग शैक्षणिक प्रभाव: जिले के 25 स्कूलों में जाकर 10,500 बच्चों एवं शिक्षकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाया गया। * धार्मिक सहयोग: 30 धार्मिक स्थलों पर 110 धर्मगुरुओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया गया, ताकि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व वर-वधू की आयु की अनिवार्य जांच सुनिश्चित करें। तीन चरणों की अभेद्य रणनीति इस अभियान को सफल बनाने के लिए तीन स्तरों पर घेराबंदी की गई थी। प्रथम चरण में शिक्षण संस्थानों को जोड़ा गया। द्वितीय चरण में धर्मगुरुओं और विवाह से जुड़ी सेवाओं जैसे कैटरर्स, सजावट वाले, बैंड-बाजा और टेंट हाउस मालिकों को सख्त चेतावनी दी गई कि बाल विवाह में सहयोग करना उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकता है। तीसरे चरण में पंचायतों के माध्यम से जन-जन तक यह संदेश पहुँचाया गया कि बाल विवाह बच्चों को कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के अंतहीन दुष्चक्र में धकेल देता है। उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ता नवादा तटवासी समाज न्यास, जो देश के सबसे बड़े नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' का प्रमुख सहयोगी है, ने इस समापन समारोह में विश्वास जताया कि 'बाल विवाह मुक्त नवादा' का सपना अब हकीकत में बदलने वाला है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह को बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक शपथ दिलाई गई। इस ऐतिहासिक मौके पर अभय कुमार सहित दर्जनों गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
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- नवादा जिला के सिरदला प्रखंड अंतर्गत फुलवरिया गांव मे बिचाली की पुंज मे अचानक आग लगने से कई बिचाली की पुंज जलकर राख हो गई, सुचना पर पहुंचे फायर ब्रिगेड की टीम ने काफी मकसद के बाद आग पर काबू पाया, जबतक आग पर काबू पाया तब तक कई पुंज जल कर राख हो गया,1
- छठी पूजन समारोह में शामिल हुए पूर्व मंत्री सहित कई गणमान्य लोग संजय वर्मा हिसुआ (नवादा): हिसुआ–गया रोड स्थित एक निजी परिसर में नवजात बच्ची के जन्म की खुशी में सोमवार को “छठी पूजन समारोह” का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। यह समारोह डॉक्टर बीपीन कुमार और उनकी पत्नी डॉक्टर राजलक्ष्मी की पुत्री राज श्री के जन्म उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में परिवारजनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। बताया गया कि नवजात बच्ची राज श्री, देवेंद्र प्रसाद के बड़े भाई रामदेव प्रसाद यादव की पोती हैं। इसी खुशी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ छठी पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें परिजनों और रिश्तेदारों ने भाग लेकर बच्ची को आशीर्वाद दिया। समारोह के दौरान पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की गई और नवजात के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए। इस अवसर पर पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद, समाजसेवी राजीव सिन्हा, डॉ. रमेश कुमार, मनोज कुशवाहा और शंभू शर्मा सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने परिवार को बधाई देते हुए नवजात बच्ची के स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग, रिश्तेदार और शुभचिंतक मौजूद रहे। समारोह स्थल को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। “छठी पूजन समारोह” का एक बड़ा बैनर लगाया गया था, जिस पर “Welcome New Baby Girl” लिखा हुआ था। रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजे इस बैनर ने पूरे कार्यक्रम के माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान लोगों में उत्साह और खुशी का माहौल बना रहा। अतिथियों के लिए भोजन की भी विशेष व्यवस्था की गई थी। समारोह में शामिल लोगों ने नवजात बच्ची को आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। यह आयोजन पारिवारिक सौहार्द और सामाजिक एकजुटता का भी एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।2
- चेवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 61 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच चेवाड़ा। प्रखंड क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चेवाड़ा में सोमवार को गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान कुल 61 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के काउंसिलर नीरज कुमार ने बताया कि शिविर के दौरान गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य जांच, वजन, ब्लड प्रेशर तथा आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। साथ ही गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जांच कराने, पौष्टिक आहार लेने और सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में ही प्रसव कराने के प्रति जागरूक किया गया। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई, ताकि समय रहते उचित उपचार मिल सके। इस मौके पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रबंधक संतोष कुमार भी उपस्थित रहे और स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए इस तरह के जांच शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे। स्वास्थ्य जांच के दौरान अस्पताल के अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी मौजूद रहे और गर्भवती महिलाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान किया। स्वास्थ जांच की कार्यक्रम सोमवार कि शाम 4:00 बजे संपन्न हुआ।1
- शेखपुरा – ड्राइवर एसोसिएशन ऑफ़ बिहार के तत्वाधान में सोमवार को शहर में दर्जनों ड्राइवरों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केदार होटल से जुलूस की शुरुआत करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होकर बाईपास तक प्रदर्शन किया और सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखा। ड्राइवर की मृत्यु को आपदा श्रेणी में शामिल करने की मांग प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के सदस्यों ने मांग करते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान ड्राइवर की मृत्यु होने पर उसे आपदा की श्रेणी में शामिल किया जाए। साथ ही सड़क दुर्घटना के बाद ड्राइवरों के लिए मुफ्त चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। 60 वर्ष के बाद पेंशन योजना लागू करने की मांग संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि ड्राइवरों के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन योजना लागू की जाए और जो ड्राइवर इसके पात्र हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से पेंशन का लाभ दिया जाए। इसके अलावा ड्राइवरों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था और आरक्षण की भी मांग की गई। वाहनों में CCTV कैमरा लगाने की मांग मौके पर संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि सभी वाहनों के आगे और पीछे CCTV कैमरा लगाया जाए ताकि किसी दुर्घटना या विवाद की स्थिति में फोटो और वीडियो के आधार पर सही दोषी की पहचान कर कार्रवाई की जा सके। 1 सितंबर को ड्राइवर दिवस घोषित करने की मांग प्रदर्शनकारियों ने 1 सितंबर को “ड्राइवर दिवस” घोषित करने की मांग भी उठाई, ताकि साल में एक दिन ड्राइवरों को सम्मान और अवकाश मिल सके। साथ ही ड्राइवरों को “द्वितीय सैनिक” का दर्जा देने की भी मांग की गई। ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रत्येक सरकारी अस्पताल के ICU में ड्राइवरों के लिए एक बेड आरक्षित किया जाए। इसके साथ ही ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया जाए, ताकि सड़क पर मारपीट या दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सके। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ड्राइवर मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की।1
- लव-कुश जंगल में युवक का शव मिलने से सनसनी, एफएसएल टीम कर रही जांच मेसकौर (नवादा)। नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड अंतर्गत सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के रसलपुर गांव के समीप स्थित लव-कुश जंगल में सोमवार की सुबह एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने सुबह शौच के लिए जाने के दौरान जंगल के पास एक व्यक्ति को मृत अवस्था में पड़ा देखा। इसके बाद आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई और तत्काल इसकी सूचना सीतामढ़ी थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष पप्पू शर्मा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। ग्रामीणों की पहचान के आधार पर मृतक की पहचान मुन्ना यादव (35 वर्ष) के रूप में हुई है। वह गांधीनगर गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। मृतक के पिता का नाम स्वर्गीय जाहुरी यादव बताया गया है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए नवादा से एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। चार दिन पहले हुआ था पति-पत्नी में विवाद स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मृतक मुन्ना यादव का अपनी पत्नी के साथ अक्सर घरेलू विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि करीब चार दिन पहले भी पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद उसकी पत्नी अपने मायके चली गई थी। तब से मुन्ना यादव घर से बाहर थे। सोमवार की सुबह उनका शव लव-कुश जंगल के पास मिलने से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शनिवार को घर से निकले थे, फिर नहीं लौटे मृतक की चाची नीलम देवी ने बताया कि शनिवार को दिन में करीब एक बजे मुन्ना यादव खिचड़ी खाकर अपने भगना अखिलेश कुमार के साथ घर से निकले थे। इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटे। सोमवार को उनकी लाश रसलपुर गांव के समीप लव-कुश जंगल में मिलने की खबर मिली, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। मां ने बहू पर लगाया हत्या का आरोप मृतक की मां ने बताया कि चार दिन पहले बेटे और बहू के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद बहू अपने मायके चली गई थी। बहू का नाम राखी देवी है, जो गया जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के तिलोरा गांव की रहने वाली बताई जाती है। मृतक के दो छोटे बच्चे भी हैं। पुत्र दिलखुश कुमार (6 वर्ष) और पुत्री स्वीटी कुमारी (3 वर्ष) हैं। मां ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे की हत्या में बहू का ही हाथ हो सकता है। उन्होंने पुलिस से मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा खुला4
- India national cricket team ने शानदार प्रदर्शन करते हुए T20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने दमदार खेल दिखाकर इतिहास रच दिया और देशभर में जश्न का माहौल बन गया। इस जीत के साथ भारतीय क्रिकेट ने एक और सुनहरा अध्याय अपने नाम कर लिया।1
- Post by Kanhai chaudhary1