अंबेडकरनगर की टांडा कोतवाली पुलिस और कोतवाल दीपक रघुवंशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखे सवाल खड़े किए गए हैं कि क्या वे पीड़ित अभिषेक यादव को पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी न्याय नहीं मांगने देंगे? पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा गया है कि यदि इतनी सक्रियता छैमार गैंग के खिलाफ दिखाई गई होती, तो वह दुर्दांत अपराधी इस क्षेत्र में अपना नेटवर्क सक्रिय नहीं कर पाता। उस अपराधी को नोएडा एसटीएफ ने मार गिराया और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी। अभिषेक यादव के कथित आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि इस गरीब का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस ने हाल ही में 10 जुलाई को उसके खिलाफ दूसरा मामला दर्ज किया है, जबकि इससे पहले सिर्फ एक अज्ञात मामले में उसे नामजद किया गया था। कोतवाल दीपक रघुवंशी पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि उन्होंने सम्मनपुर थानाध्यक्ष रहते हुए संजय गुप्ता जैसे एक और गरीब पर मुकदमा दर्ज कर गुंडा एक्ट की रिपोर्ट भेजी थी, जिसे बाद में एडीएम न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। इस पूरे मामले को एक जमीनी विवाद बताया गया है। अभिषेक यादव ने 8 जुलाई को अपने खेत से खुद डायल 112 पर फोन कर सहायता मांगी थी क्योंकि चंद्रिका प्रसाद ने उसके खेत में लगे आम के पेड़ को काट दिया था। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि यदि अभिषेक को लूटपाट ही करनी थी, तो वह खुद पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर पर फोन क्यों करता? असल विवाद यह है कि अभिषेक के चाचा की 40 लाख रुपये की जमीन को चंद्रिका प्रसाद ने महज 12 लाख रुपये में लिखवा लिया था, जिसमें से 3 लाख रुपये अभी भी बाकी हैं और इस मामले का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है।
अंबेडकरनगर की टांडा कोतवाली पुलिस और कोतवाल दीपक रघुवंशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखे सवाल खड़े किए गए हैं कि क्या वे पीड़ित अभिषेक यादव को पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी न्याय नहीं मांगने देंगे? पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा गया है कि यदि इतनी सक्रियता छैमार गैंग के खिलाफ दिखाई गई होती, तो वह दुर्दांत अपराधी इस क्षेत्र में अपना नेटवर्क सक्रिय नहीं कर पाता। उस अपराधी को नोएडा एसटीएफ ने मार गिराया और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी। अभिषेक यादव के कथित आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि इस गरीब का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस ने हाल ही में 10 जुलाई को उसके खिलाफ दूसरा मामला दर्ज किया है, जबकि इससे पहले सिर्फ एक अज्ञात मामले में उसे नामजद किया गया था। कोतवाल दीपक रघुवंशी पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि उन्होंने सम्मनपुर थानाध्यक्ष रहते हुए संजय गुप्ता जैसे एक और गरीब पर मुकदमा दर्ज कर गुंडा एक्ट की रिपोर्ट भेजी थी, जिसे बाद में एडीएम न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। इस पूरे मामले को एक जमीनी विवाद बताया गया है। अभिषेक यादव ने 8 जुलाई को अपने खेत से खुद डायल 112 पर फोन कर सहायता मांगी थी क्योंकि चंद्रिका प्रसाद ने उसके खेत में लगे आम के पेड़ को काट दिया था। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि यदि अभिषेक को लूटपाट ही करनी थी, तो वह खुद पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर पर फोन क्यों करता? असल विवाद यह है कि अभिषेक के चाचा की 40 लाख रुपये की जमीन को चंद्रिका प्रसाद ने महज 12 लाख रुपये में लिखवा लिया था, जिसमें से 3 लाख रुपये अभी भी बाकी हैं और इस मामले का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है।
- अंबेडकरनगर की टांडा कोतवाली पुलिस और कोतवाल दीपक रघुवंशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखे सवाल खड़े किए गए हैं कि क्या वे पीड़ित अभिषेक यादव को पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी न्याय नहीं मांगने देंगे? पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा गया है कि यदि इतनी सक्रियता छैमार गैंग के खिलाफ दिखाई गई होती, तो वह दुर्दांत अपराधी इस क्षेत्र में अपना नेटवर्क सक्रिय नहीं कर पाता। उस अपराधी को नोएडा एसटीएफ ने मार गिराया और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी। अभिषेक यादव के कथित आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि इस गरीब का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस ने हाल ही में 10 जुलाई को उसके खिलाफ दूसरा मामला दर्ज किया है, जबकि इससे पहले सिर्फ एक अज्ञात मामले में उसे नामजद किया गया था। कोतवाल दीपक रघुवंशी पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि उन्होंने सम्मनपुर थानाध्यक्ष रहते हुए संजय गुप्ता जैसे एक और गरीब पर मुकदमा दर्ज कर गुंडा एक्ट की रिपोर्ट भेजी थी, जिसे बाद में एडीएम न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। इस पूरे मामले को एक जमीनी विवाद बताया गया है। अभिषेक यादव ने 8 जुलाई को अपने खेत से खुद डायल 112 पर फोन कर सहायता मांगी थी क्योंकि चंद्रिका प्रसाद ने उसके खेत में लगे आम के पेड़ को काट दिया था। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि यदि अभिषेक को लूटपाट ही करनी थी, तो वह खुद पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर पर फोन क्यों करता? असल विवाद यह है कि अभिषेक के चाचा की 40 लाख रुपये की जमीन को चंद्रिका प्रसाद ने महज 12 लाख रुपये में लिखवा लिया था, जिसमें से 3 लाख रुपये अभी भी बाकी हैं और इस मामले का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है।1
- अमरोहा जनपद के कोतवाली हसनपुर क्षेत्र के गांव दियाबली में तीन अपराधियों को जिला बदर किया गया है। इन अपराधियों को जिला बदर किए जाने की सूचना गांव वालों को डुगडुगी बजाकर दी गई है।1
- अमरोहा के गजरौला में आगामी 26 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले भव्य भगवान श्री दक्ष प्रजापति जयंती महोत्सव की तैयारियों को लेकर आर.पी. फार्म हाउस में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनपद की चारों विधानसभाओं से समिति के पदाधिकारी, सोशल मीडिया एवं मीडिया प्रकोष्ठ के सदस्य और समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से गांव और नगर स्तर पर गठित टीमों के कार्यों की समीक्षा की गई और जनसंपर्क अभियान को और अधिक तेज करने की रणनीति तैयार की गई। समिति के अध्यक्ष डॉ. उत्तम सिंह प्रजापति ने बताया कि इस महोत्सव में 35 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गांव-गांव और घर-घर जाकर समाज के लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह भव्य आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज की एकता, संगठन, संस्कृति और गौरव का प्रतीक बनेगा। इसके साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों की भी भागीदारी रहेगी। बैठक के समापन पर सभी पदाधिकारियों ने इस महोत्सव को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर सोनिया प्रजापति, मास्टर रूपकिशोर, विजय प्रजापति, रजनीश कुमार, विजयपाल कारीगर, योगेश प्रजापति, डॉ. धर्मेंद्र प्रजापति, उमेश कुमार, नीरज प्रजापति, डॉ. अमित कुमार, डॉ. सुमित कुमार, सचिन प्रधान, सोनू प्रजापति, राजकुमार प्रजापति, लोकेश प्रजापति, पुनित कुमार, हरपाल सिंह, सुरेश कुमार, नरेश कुमार यादव, गुड्डू सिंह सहित समाज के अन्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 208 जोड़ों के सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर बायोमैट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अंतिम सूची तैयार कर ली गई है।1
- अमरोहा के ब्रजघाट में आगामी कांवड़ यात्रा की सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने के लिए एडीजी रमित शर्मा और डीआईजी मुनिराज पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने एसपी लखन सिंह यादव के साथ मिलकर पूरे कांवड़ मार्ग का सघन निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अधीनस्थों को सख्त निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा हर हाल में सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कांवड़ मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखने, सुचारू ट्रैफिक व्यवस्था, मजबूत बैरिकेडिंग और सभी आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह अलर्ट पर रखने के कड़े आदेश दिए गए हैं।1
- अमरोहा के हसनपुर में तारा रोड पर स्थित संजीवनी अस्पताल के संचालक पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं। मरीज की मौत के बाद भड़के परिजनों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पीड़ित परिवार अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। परिजनों के अनुसार, अमित नाम के व्यक्ति अपने मरीज का इलाज कराने के लिए हसनपुर के संजीवनी अस्पताल लेकर आए थे। आरोप है कि वहां न तो कोई अल्ट्रासाउंड कराया गया और न ही मरीज की कोई जांच रिपोर्ट देखी गई। इसके बावजूद, बिना किसी योग्य डॉक्टर या सर्जन के ही अस्पताल संचालक ने खुद ही मरीज का ऑपरेशन कर डाला। इस लापरवाही के बाद मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। हालत नाजुक होने पर मरीज को आनन-फानन में मेरठ रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मेरठ में भी बिना पैसे दिए उन्हें मरीज का शव नहीं सौंपा गया। इस घटना से बेहद आहत परिजन अब प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।1
- बुलंदशहर के स्याना में बुगरासी रोड स्थित एक ओयो गेस्ट हाउस के बाहर बच्चों की सुपुर्दगी को लेकर पति-पत्नी के बीच सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। दिल्ली से अपने माता-पिता के साथ आए गुंजित सिंह और उनकी पत्नी के बीच बच्चों को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते विवाद और आपसी भिड़ंत में बदल गई। इस हंगामे को देखने के लिए बुगरासी रोड पर राहगीरों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गुंजित सिंह और उनकी पत्नी की शादी 10 वर्ष पहले हुई थी। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें 4 वर्षीय फतह सिंह और 7 वर्षीय सुप्रीत सिंह शामिल हैं। दोनों के बीच बच्चों की सुपुर्दगी को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। पति और उसके माता-पिता का आरोप है कि महिला गेस्ट हाउस में रहकर बच्चों की सुपुर्दगी देने के एवज में पैसे मांग रही थी। इसके साथ ही पति ने ओयो संचालक पर भी पत्नी के साथ मिलकर रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है। माहौल बिगड़ता देख स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और उन्हें कोतवाली ले आई। कोतवाली प्रभारी राम नारायण सिंह ने बताया कि पति-पत्नी के बीच बच्चों की सुपुर्दगी का यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से अलग-अलग वार्ता कर मामले की बारीकी से जांच कर रही है और न्यायालय के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है और कोर्ट में लंबित मामले को लेकर सड़क पर इस तरह का विवाद करना उचित नहीं है।2