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भारत में नदियों को 'माँ' का दर्जा दिया जाता है और लोग हाथ जोड़कर, प्रार्थना कर और दीये बहाकर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। हालांकि, एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में उस चीज़ का सम्मान करते हैं जिसकी हम इतनी श्रद्धा से पूजा करते हैं? हर साल, लाखों लोग आस्था और भक्ति के नाम पर नदी के किनारों पर एकत्रित होते हैं। विडंबना यह है कि इन्हीं किनारों पर लोग प्लास्टिक बैग, खाने का कचरा, कपड़े और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तुएँ फेंक देते हैं। कुछ लोग अपने अंडरगारमेंट्स और अन्य कपड़े सीधे नदी के पानी में धोते हैं, जबकि कुछ आस-पास के क्षेत्रों का उपयोग खुले में शौच या पेशाब करने के लिए करते हैं। इस तरह के कार्यों को भक्ति कैसे कहा जा सकता है, जब हमारे यही कृत्य उन नदियों को धीरे-धीरे ज़हरीला बना रहे हैं जिन्हें हम पवित्र मानते हैं और जिन्हें 'माँ' कहकर संबोधित करते हैं?

12 hrs ago
user_GROUND REPORT
GROUND REPORT
Court reporter बर्निगाड़, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
12 hrs ago

भारत में नदियों को 'माँ' का दर्जा दिया जाता है और लोग हाथ जोड़कर, प्रार्थना कर और दीये बहाकर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। हालांकि, एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में उस चीज़ का सम्मान करते हैं जिसकी हम इतनी श्रद्धा से पूजा करते हैं? हर साल, लाखों लोग आस्था और भक्ति के नाम पर नदी के किनारों पर एकत्रित होते हैं। विडंबना यह है कि इन्हीं किनारों पर लोग प्लास्टिक बैग, खाने का कचरा, कपड़े और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तुएँ फेंक देते हैं। कुछ लोग अपने अंडरगारमेंट्स और अन्य कपड़े सीधे नदी के पानी में धोते हैं, जबकि कुछ आस-पास के क्षेत्रों का उपयोग खुले में शौच या पेशाब करने के लिए करते हैं। इस तरह के कार्यों को भक्ति कैसे कहा जा सकता है, जब हमारे यही कृत्य उन नदियों को धीरे-धीरे ज़हरीला बना रहे हैं जिन्हें हम पवित्र मानते हैं और जिन्हें 'माँ' कहकर संबोधित करते हैं?

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  • भारत में नदियों को 'माँ' का दर्जा दिया जाता है और लोग हाथ जोड़कर, प्रार्थना कर और दीये बहाकर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। हालांकि, एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में उस चीज़ का सम्मान करते हैं जिसकी हम इतनी श्रद्धा से पूजा करते हैं? हर साल, लाखों लोग आस्था और भक्ति के नाम पर नदी के किनारों पर एकत्रित होते हैं। विडंबना यह है कि इन्हीं किनारों पर लोग प्लास्टिक बैग, खाने का कचरा, कपड़े और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तुएँ फेंक देते हैं। कुछ लोग अपने अंडरगारमेंट्स और अन्य कपड़े सीधे नदी के पानी में धोते हैं, जबकि कुछ आस-पास के क्षेत्रों का उपयोग खुले में शौच या पेशाब करने के लिए करते हैं। इस तरह के कार्यों को भक्ति कैसे कहा जा सकता है, जब हमारे यही कृत्य उन नदियों को धीरे-धीरे ज़हरीला बना रहे हैं जिन्हें हम पवित्र मानते हैं और जिन्हें 'माँ' कहकर संबोधित करते हैं?
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    भारत में नदियों को 'माँ' का दर्जा दिया जाता है और लोग हाथ जोड़कर, प्रार्थना कर और दीये बहाकर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। हालांकि, एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में उस चीज़ का सम्मान करते हैं जिसकी हम इतनी श्रद्धा से पूजा करते हैं?

हर साल, लाखों लोग आस्था और भक्ति के नाम पर नदी के किनारों पर एकत्रित होते हैं। विडंबना यह है कि इन्हीं किनारों पर लोग प्लास्टिक बैग, खाने का कचरा, कपड़े और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल वस्तुएँ फेंक देते हैं। कुछ लोग अपने अंडरगारमेंट्स और अन्य कपड़े सीधे नदी के पानी में धोते हैं, जबकि कुछ आस-पास के क्षेत्रों का उपयोग खुले में शौच या पेशाब करने के लिए करते हैं।

इस तरह के कार्यों को भक्ति कैसे कहा जा सकता है, जब हमारे यही कृत्य उन नदियों को धीरे-धीरे ज़हरीला बना रहे हैं जिन्हें हम पवित्र मानते हैं और जिन्हें 'माँ' कहकर संबोधित करते हैं?
    user_GROUND REPORT
    GROUND REPORT
    Court reporter बर्निगाड़, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    12 hrs ago
  • चारधाम यात्रा-2026 के दौरान श्री गंगोत्री एवं श्री यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। 19 अप्रैल 2026 को शुरू हुई यात्रा के पहले 47 दिनों में, यानी 04 जून 2026 तक, दोनों धामों में कुल 10,15,852 श्रद्धालुओं ने सुरक्षित और सुगम दर्शन किए हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.5 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2025 में यात्रा के पहले 47 दिनों में जहाँ 9,44,804 श्रद्धालुओं ने दोनों धामों की यात्रा की थी, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 10,15,852 हो गई है, जिससे कुल 71,048 श्रद्धालुओं की वृद्धि दर्ज की गई है। 47वें दिन तक श्री यमुनोत्री धाम में 4,98,367 और श्री गंगोत्री धाम में 5,17,485 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इस अवधि में कुल 99,165 यात्रा वाहनों का आवागमन हुआ, जिनमें 74,365 छोटे और 24,800 बड़े वाहन शामिल थे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के “सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन एवं सतत संवाद” के संकल्प के अनुरूप, पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, कमलेश उपाध्याय के निर्देशन में उत्तरकाशी पुलिस “सुविधा, सुरक्षा एवं सम्मान” के ध्येय के साथ यात्रा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यात्रा मार्ग से लेकर धामों तक श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिनमें सुदृढ़ यातायात प्रबंधन, प्रभावी आपदा प्रबंधन, सतत सुरक्षा निगरानी और सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से कड़ी नजर शामिल है। इन व्यवस्थाओं की अनेक श्रद्धालुओं द्वारा खुलकर सराहना की जा रही है। यात्रा संचालन को और अधिक सरल तथा सुगम बनाने हेतु दोनों धामों को 02 सुपर जोन, 12 जोन एवं 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं की निरंतर समीक्षा और निगरानी की जा रही है, तथा प्रत्येक गतिविधि और पल-पल की अपडेट ली जा रही है। उत्तरकाशी पुलिस चारधाम यात्रा-2026 के सुरक्षित, सुगम एवं सफल संचालन हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
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    चारधाम यात्रा-2026 के दौरान श्री गंगोत्री एवं श्री यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। 19 अप्रैल 2026 को शुरू हुई यात्रा के पहले 47 दिनों में, यानी 04 जून 2026 तक, दोनों धामों में कुल 10,15,852 श्रद्धालुओं ने सुरक्षित और सुगम दर्शन किए हैं।

यह संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.5 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2025 में यात्रा के पहले 47 दिनों में जहाँ 9,44,804 श्रद्धालुओं ने दोनों धामों की यात्रा की थी, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 10,15,852 हो गई है, जिससे कुल 71,048 श्रद्धालुओं की वृद्धि दर्ज की गई है। 47वें दिन तक श्री यमुनोत्री धाम में 4,98,367 और श्री गंगोत्री धाम में 5,17,485 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इस अवधि में कुल 99,165 यात्रा वाहनों का आवागमन हुआ, जिनमें 74,365 छोटे और 24,800 बड़े वाहन शामिल थे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के “सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन एवं सतत संवाद” के संकल्प के अनुरूप, पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, कमलेश उपाध्याय के निर्देशन में उत्तरकाशी पुलिस “सुविधा, सुरक्षा एवं सम्मान” के ध्येय के साथ यात्रा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यात्रा मार्ग से लेकर धामों तक श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिनमें सुदृढ़ यातायात प्रबंधन, प्रभावी आपदा प्रबंधन, सतत सुरक्षा निगरानी और सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से कड़ी नजर शामिल है। इन व्यवस्थाओं की अनेक श्रद्धालुओं द्वारा खुलकर सराहना की जा रही है।

यात्रा संचालन को और अधिक सरल तथा सुगम बनाने हेतु दोनों धामों को 02 सुपर जोन, 12 जोन एवं 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं की निरंतर समीक्षा और निगरानी की जा रही है, तथा प्रत्येक गतिविधि और पल-पल की अपडेट ली जा रही है। उत्तरकाशी पुलिस चारधाम यात्रा-2026 के सुरक्षित, सुगम एवं सफल संचालन हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
    user_Virendra singh negi
    Virendra singh negi
    डुंडा, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    8 hrs ago
  • एक संदेश में 'कॉकरोच जनता पार्टी' में शामिल होने का आह्वान किया गया है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे पार्टी को फॉलो रिक्वेस्ट भेजें और इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
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    एक संदेश में 'कॉकरोच जनता पार्टी' में शामिल होने का आह्वान किया गया है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे पार्टी को फॉलो रिक्वेस्ट भेजें और इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
    user_किसान मजदूर महासंग्राम संगठन युवा जिला सचिव जिला बिजनौर शादाब राणा
    किसान मजदूर महासंग्राम संगठन युवा जिला सचिव जिला बिजनौर शादाब राणा
    विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    57 min ago
  • एसएसपी टिहरी के अनुसार, चारधाम यात्रा सुचारु रूप से चल रही है। उन्होंने बताया कि यात्रा को तीन ज़ोन में विभाजित किया गया है ताकि संचालन बेहतर हो सके।
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    एसएसपी टिहरी के अनुसार, चारधाम यात्रा सुचारु रूप से चल रही है। उन्होंने बताया कि यात्रा को तीन ज़ोन में विभाजित किया गया है ताकि संचालन बेहतर हो सके।
    user_Uklive Uttrakhand
    Uklive Uttrakhand
    टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • देहरादून की प्रीमियम लोकेशन टर्नर रोड पर एक बेहतरीन आवासीय प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है, जो सपनों का घर बनाने और भविष्य के लिए एक शानदार निवेश का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। यह प्लॉट सी-15 लेन नंबर 1 के पास स्थित है, और इसका कुल क्षेत्रफल 64 गज है, जिसमें 19 फीट फ्रंट और 30 फीट गहराई शामिल है। यह प्राइम आवासीय लोकेशन एक विस्तृत पहुँच मार्ग और शांत व विकसित इलाके में है। प्लॉट के पास स्कूल, अस्पताल और बाज़ार जैसी आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हैं, साथ ही जीएमएस रोड और आईएसबीटी से आसान कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। विज्ञापन में बताया गया है कि यह प्लॉट सिर्फ एक घर बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश के रूप में भी आदर्श है, क्योंकि बैंक बैलेंस खत्म हो सकता है, लेकिन सही लोकेशन पर लिया गया प्लॉट हर साल अपनी कीमत बढ़ाता है। प्लॉट का दौरा करने और अधिक जानकारी के लिए, इच्छुक खरीदार मिस रितु सिंह से 9528242511 पर संपर्क कर सकते हैं।
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    देहरादून की प्रीमियम लोकेशन टर्नर रोड पर एक बेहतरीन आवासीय प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है, जो सपनों का घर बनाने और भविष्य के लिए एक शानदार निवेश का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। यह प्लॉट सी-15 लेन नंबर 1 के पास स्थित है, और इसका कुल क्षेत्रफल 64 गज है, जिसमें 19 फीट फ्रंट और 30 फीट गहराई शामिल है।

यह प्राइम आवासीय लोकेशन एक विस्तृत पहुँच मार्ग और शांत व विकसित इलाके में है। प्लॉट के पास स्कूल, अस्पताल और बाज़ार जैसी आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हैं, साथ ही जीएमएस रोड और आईएसबीटी से आसान कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। विज्ञापन में बताया गया है कि यह प्लॉट सिर्फ एक घर बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश के रूप में भी आदर्श है, क्योंकि बैंक बैलेंस खत्म हो सकता है, लेकिन सही लोकेशन पर लिया गया प्लॉट हर साल अपनी कीमत बढ़ाता है।

प्लॉट का दौरा करने और अधिक जानकारी के लिए, इच्छुक खरीदार मिस रितु सिंह से 9528242511 पर संपर्क कर सकते हैं।
    user_Uttarakhand Housing developers
    Uttarakhand Housing developers
    Real Estate Developer देहरादून, देहरादून, उत्तराखंड•
    14 hrs ago
  • विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर उत्तरकाशी के उजेली स्थित सुमन वन में एक महत्वपूर्ण वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वन विभाग, जिला गंगा समिति और स्वजल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में "Inspired by Nature for Climate – Our Future" थीम के अंतर्गत आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना और हरित आवरण में वृद्धि के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना था। इस दौरान सुमन वन में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिसमें उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवियों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल स्रोतों के संरक्षण तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की शपथ दिलाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार बनना अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी ने सभी से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का आह्वान किया। इसी अवसर पर, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिला परियोजना प्रबंधन इकाई स्वजल द्वारा 01 जून से 05 जून तक चलाए जा रहे "स्वच्छ गांव सुरक्षित जलवायु" अभियान के तहत, पंजाब सिंध क्षेत्र गंगा आरती घाट पर गंगा विचार मंच ने एक वृहद स्वच्छता अभियान चलाया। इस अभियान में चिन्मय मिशन नोएडा व उत्तरकाशी, विश्व भारती पब्लिक स्कूल नोएडा, दिल्ली विश्वविद्यालय, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा और लॉर्ड महावीरा स्कूल दिल्ली के छात्र-छात्राओं, अधिकारियों और स्वयंसेवियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस दौरान "एक पेड़ मां के नाम" और "एक कदम हरित भविष्य के नाम" अभियानों के अंतर्गत वृक्षारोपण भी किया गया, जो नमामि गंगे कार्यक्रम का हिस्सा था। इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी, सीएमओ डॉ बीएस रावत, सीवीओ एचएस बिष्ट, सीएचओ रजनीश सिंह, सीएओ एसएस वर्मा, वन क्षेत्राधिकारी रश्मि ध्यानी, पर्यावरण विशेषज्ञ स्वजल प्रताप मटूडा, गंगा विचार मंच के संयोजक लोकेंद्र बिष्ट, स्वामी चिद्रूपानंद, ब्रह्मचारी राघवेंद्रानंद, जितमणि पैन्यूली, उत्तम पंवार सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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    विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर उत्तरकाशी के उजेली स्थित सुमन वन में एक महत्वपूर्ण वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वन विभाग, जिला गंगा समिति और स्वजल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में "Inspired by Nature for Climate – Our Future" थीम के अंतर्गत आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना और हरित आवरण में वृद्धि के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करना था। इस दौरान सुमन वन में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिसमें उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवियों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल स्रोतों के संरक्षण तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की शपथ दिलाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार बनना अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी ने सभी से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।

इसी अवसर पर, विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में जिला परियोजना प्रबंधन इकाई स्वजल द्वारा 01 जून से 05 जून तक चलाए जा रहे "स्वच्छ गांव सुरक्षित जलवायु" अभियान के तहत, पंजाब सिंध क्षेत्र गंगा आरती घाट पर गंगा विचार मंच ने एक वृहद स्वच्छता अभियान चलाया। इस अभियान में चिन्मय मिशन नोएडा व उत्तरकाशी, विश्व भारती पब्लिक स्कूल नोएडा, दिल्ली विश्वविद्यालय, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा और लॉर्ड महावीरा स्कूल दिल्ली के छात्र-छात्राओं, अधिकारियों और स्वयंसेवियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। इस दौरान "एक पेड़ मां के नाम" और "एक कदम हरित भविष्य के नाम" अभियानों के अंतर्गत वृक्षारोपण भी किया गया, जो नमामि गंगे कार्यक्रम का हिस्सा था।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी डीपी बलूनी, सीएमओ डॉ बीएस रावत, सीवीओ एचएस बिष्ट, सीएचओ रजनीश सिंह, सीएओ एसएस वर्मा, वन क्षेत्राधिकारी रश्मि ध्यानी, पर्यावरण विशेषज्ञ स्वजल प्रताप मटूडा, गंगा विचार मंच के संयोजक लोकेंद्र बिष्ट, स्वामी चिद्रूपानंद, ब्रह्मचारी राघवेंद्रानंद, जितमणि पैन्यूली, उत्तम पंवार सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
    user_Virendra singh negi
    Virendra singh negi
    डुंडा, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    8 hrs ago
  • बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मार्च 2000 से लेकर 2025 तक लगातार 10 बार मुख्यमंत्री पद पर रहने के बाद राज्य का विकास किया है।
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    बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मार्च 2000 से लेकर 2025 तक लगातार 10 बार मुख्यमंत्री पद पर रहने के बाद राज्य का विकास किया है।
    user_Rajkumar mehra press reporter
    Rajkumar mehra press reporter
    Real Estate Agent विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    2 hrs ago
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