देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। पिछले महज 10 दिनों के भीतर पेट्रोल के दामों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे कुल ₹7.5 का बड़ा उछाल आया है। इस वृद्धि का सीधा असर आम मध्यम वर्ग और गरीब लोगों पर पड़ रहा है। पेट्रोल महंगा होने से न सिर्फ परिवहन का खर्च बढ़ा है, बल्कि दैनिक जीवन के खर्चे भी बढ़ गए हैं और हर चीज पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। इस संकट के बीच साल 2014 से पहले के रवैये को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। तब जब भी पेट्रोल के दाम बढ़ते थे, विपक्ष चिल्लाता था कि सरकार निकम्मी है और दिल्ली में बैठकर कुछ नहीं कर रही है। यहाँ तक कि मोदी जी खुद अपने भाषणों में कहते थे कि पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी देश की जनता पर हमला है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। लेकिन आज जब कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तो वही सवाल पूछने वाले लोग पूरी तरह खामोश हैं। आज सरकार के समर्थक तर्क दे रहे हैं कि पेट्रोल के दाम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और टैक्स की वजह से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल पूछा जा रहा है कि यही तर्क साल 2014 से पहले क्यों स्वीकार नहीं किया गया था? क्या तब पेट्रोल की कीमत केवल एक राजनीतिक मुद्दा थी और आज यह आर्थिक मजबूरी बन गई है, या फिर सत्ता में आते ही मापदंड बदल जाते हैं? लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना है, लेकिन जनता के लिए भी पुराने बयानों और आज की हकीकत की तुलना करना बेहद जरूरी है। अंत में एक सीधा सवाल उठाया गया है कि अगर तब सरकार की अक्षमता थी, तो आज क्या है?
देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। पिछले महज 10 दिनों के भीतर पेट्रोल के दामों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे कुल ₹7.5 का बड़ा उछाल आया है। इस वृद्धि का सीधा असर आम मध्यम वर्ग और गरीब लोगों पर पड़ रहा है। पेट्रोल महंगा होने से न सिर्फ परिवहन का खर्च बढ़ा है, बल्कि दैनिक जीवन के खर्चे भी बढ़ गए हैं और हर चीज पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ रहा है। इस संकट के बीच साल 2014 से पहले के रवैये को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। तब जब भी पेट्रोल के दाम बढ़ते थे, विपक्ष चिल्लाता था कि सरकार निकम्मी है और दिल्ली में बैठकर कुछ नहीं कर रही है। यहाँ तक कि मोदी जी खुद अपने भाषणों में कहते थे कि पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी देश की जनता पर हमला है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। लेकिन आज जब कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तो वही सवाल पूछने वाले लोग पूरी तरह खामोश हैं। आज सरकार के समर्थक तर्क दे रहे हैं कि पेट्रोल के दाम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और टैक्स की वजह से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल पूछा जा रहा है कि यही तर्क साल 2014 से पहले क्यों स्वीकार नहीं किया गया था? क्या तब पेट्रोल की कीमत केवल एक राजनीतिक मुद्दा थी और आज यह आर्थिक मजबूरी बन गई है, या फिर सत्ता में आते ही मापदंड बदल जाते हैं? लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना है, लेकिन जनता के लिए भी पुराने बयानों और आज की हकीकत की तुलना करना बेहद जरूरी है। अंत में एक सीधा सवाल उठाया गया है कि अगर तब सरकार की अक्षमता थी, तो आज क्या है?
- लखनऊ के सआदतगंज थाना क्षेत्र के अम्बरगंज वार्ड में वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव को लेकर शुरू हुई राजनीतिक रंजिश एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा कार्यकर्ता नावेद मुस्तफा ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 के पार्षद चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनीता यादव के पक्ष में सक्रिय रूप से प्रचार करने के कारण उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। इसी चुनावी रंजिश के चलते समाजवादी पार्टी के एक पूर्व पार्षद ने उनके विरुद्ध सआदतगंज थाने में झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। नावेद का कहना है कि क्षेत्र में भाजपा के प्रचार-प्रसार को लेकर उन्हें पहले भी कई बार रोका गया था। इस मामले में भाजपा की पूर्व पार्षद प्रत्याशी अनीता यादव के पति एवं वार्ड अध्यक्ष ओमकार सिंह यादव भी नावेद मुस्तफा के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक द्वेष के चलते नावेद को निशाना बनाया जा रहा है और उन्होंने संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, नावेद मुस्तफा ने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और बयान प्रसारित कर उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहा है, जिसके लिए उन्होंने शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। भाजपा के कई अन्य नेता और कार्यकर्ता भी नावेद मुस्तफा के समर्थन में लामबंद हो गए हैं। ये कार्यकर्ता जल्द ही पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग करेंगे।1
- लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मड़ियांव के दाऊद नगर, मामा कॉलोनी में आज भी सड़क न होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बाद यहाँ भयंकर जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में भारी कठिनाई होती है और स्थानीय निवासियों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग किए जाने के बावजूद आज तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। यदि राजधानी के मड़ियांव क्षेत्र में ही विकास का यह हाल है, तो दूरदराज़ के ग्रामीण इलाकों की बदहाली का सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से अनुरोध किया है कि वे इस गंभीर समस्या का शीघ्र संज्ञान लेकर यहाँ सड़क निर्माण एवं जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।1
- लखनऊ के साकेत नगर स्थित ओशियन ग्रैंड होटल में चल रहे एक वीआईपी जुएखाने पर क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम का हंटर चला है। डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी और एडीसीपी ऑपरेशन सुमित रामटेके के नेतृत्व में पुलिस की तेजतर्रार टीम को इस छापेमारी में बड़ी सफलता मिली है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने फड़ से 13 जुआरियों को रंगेहाथ दबोचा है, जिनके पास से साढ़े पांच लाख रुपये बरामद किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, होटल का मालिक ओम प्रकाश अग्रवाल पिछले कई दिनों से यहां यह वीआईपी जुआघर चलवा रहा था और होटल का प्रबंधन इन जुआरियों को अंदर ही तमाम सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध करा रहा था।1
- Dharmendra Kumar kashyap up 341
- जब से तुम्हें देखा है, दिल पूरी तरह से मदहोश हो गया है और अब इस ज़माने की कोई फ़िक्र नहीं बची है, क्योंकि तुम ही एकमात्र मंज़िल बन गए हो। बिना कुछ पिए ही तुम्हारी मोहब्बत का यह खुमार इस कदर चढ़ चुका है कि तुम्हारी हर एक अदा पर बार-बार बेइंतहा प्यार आ रहा है। निगाहों के इस गहरे नशे और इश्क़ के जादू ने दिल को पूरी तरह अपने काबू में कर लिया है।1