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झारखंड के पाकुड़ में सियारों के झुंड ने एक घर में घुसकर ढाई माह की बच्ची को मार डाला और दूसरी बच्ची को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में दहशत फैल गई है और ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
Jitendra Das
झारखंड के पाकुड़ में सियारों के झुंड ने एक घर में घुसकर ढाई माह की बच्ची को मार डाला और दूसरी बच्ची को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में दहशत फैल गई है और ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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- यह संदेश उन अनकहे ज़ख्मों और दर्दों को बयां करता है जो सीधे शरीर पर नहीं, बल्कि भविष्य पर पड़ते हैं; जिनका इज़हार शब्दों से नहीं, बल्कि आँखों से बहते आँसुओं से होता है। यह सिर्फ एक ख़बर नहीं, बल्कि लाखों टूटते सपनों की चीख, बिखरते भविष्य की गवाही और एक पूरी पीढ़ी द्वारा महसूस की जा रही गहरी पीड़ा का मार्मिक चित्रण है।1
- बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद डरावनी और असंवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर पर न सिर्फ तड़पते मरीज की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है, बल्कि मरीज के हक में आवाज उठाने वाले एक युवक के साथ सरेआम हाथापाई और बदसलूकी करने का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने डॉक्टरों को 'धरती का दूसरा भगवान' कहे जाने वाले जुमले को तार-तार कर दिया है। जानकारी के अनुसार, बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज तेज पेट दर्द से तड़प रहा था और बार-बार बेहोश हो रहा था। इसी दौरान अपने किसी परिचित को दिखाने पहुंचे ऋषभ मिश्रा नामक युवक ने उस लाचार मरीज पर ध्यान दिया और वहां मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से उसे तुरंत देखने व प्राथमिक उपचार शुरू करने की गुहार लगाई। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को देखने के बजाय संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं और उसे ओपीडी में ले जाने की बात पर अड़ गए, जबकि ओपीडी का निर्धारित समय पहले ही समाप्त हो चुका था। जब बार-बार अनुरोध करने पर भी डॉक्टर का दिल नहीं पघला, तो ऋषभ मिश्रा ने अस्पताल की इस अव्यवस्था और लापरवाही की जानकारी सीधे जिले के सिविल सर्जन को फोन पर दी। जैसे ही डॉक्टर को इस शिकायत का पता चला, वे आगबबूला हो गए और उन्होंने ऋषभ मिश्रा से तीखी बहस शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर युवक के साथ बदतमीजी करने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों (कमांडो/गार्ड्स) और डॉक्टर ने मिलकर युवक के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। वायरल वीडियो में लाल चेक शर्ट पहने दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान बांका सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ. दिनकर झा के रूप में हुई है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले एक नागरिक को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी मरीज के परिजनों और ऋषभ मिश्रा को जबरन घसीटते और उनके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं, जबकि वहां मौजूद अन्य लोग घटना का वीडियो बनाते रहे, जिसे रोकने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने बांका की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की नैतिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक चिकित्सक का पहला कर्तव्य इमरजेंसी में तड़पते मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता देना नहीं था, और यदि ओपीडी का समय समाप्त हो चुका था, तो मरीज को जानबूझकर ओपीडी में भेजने की जिद क्यों की जा रही थी, जो सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। साथ ही, यह भी प्रश्न उठाया गया है कि क्या डॉक्टरों को मिली सुरक्षाकर्मी इलाज मांगने आने वाले आम नागरिकों पर रौब झाड़ने और उन्हें पीटने के लिए रखे गए हैं, और क्या एक जागरूक नागरिक द्वारा सिविल सर्जन से शिकायत करने पर अस्पताल प्रशासन को उसके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करने का अधिकार मिल जाता है। डॉक्टरों का काम जिंदगी बचाना होता है, लेकिन बांका सदर अस्पताल का यह नजारा किसी 'गुंडागर्दी के अड्डे' से कम नहीं लग रहा था। यह वीडियो उन सभी दावों की पोल खोलता है जो बांका सदर अस्पताल को बेहतर बताने के लिए किए जाते हैं। अब यह देखना बाकी है कि इस वायरल वीडियो और डॉ. दिनकर झा के इस शर्मनाक व संवेदनहीन व्यवहार पर बांका के सिविल सर्जन और जिला प्रशासन द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।1
- बाराहाट थाना क्षेत्र के लीलावरण, महाराणा, सबलपुर और सोन डीहा दक्षिणी सहित कई स्थानों पर मुहर्रम पर्व का अद्भुत संगम देखने को मिला। यह पर्व आस्था, परंपरा और उत्साह के साथ मनाया गया।1
- बांका के ऋषभ मिश्रा को 'व्यवस्था से लाचार' होने के कारण क्रांतिकारी बनने पर मजबूर होना पड़ा है। बताया गया है कि उन्होंने एक असहाय मरीज के लिए डॉक्टर से भी भिड़ंत की। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि अब युवा क्यों आगे बढ़ने लगे हैं, और यदि यह वीडियो अच्छा लगे तो दर्शकों से भी समाज के लिए एक कदम आगे बढ़ने का आह्वान किया गया है।1
- 15 जुलाई से बांका समेत पूरे बिहार में जमीन रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, खरीदार और विक्रेता को कागजी दस्तावेज लेकर निबंधन कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। अब रजिस्ट्री के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होगा। इसके तहत, रजिस्ट्री दस्तावेज का PDF लिंक सीधे मोबाइल पर प्राप्त होगा। पहचान की पुष्टि के लिए आधार का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कम समय में, आसान और पारदर्शी तरीके से पूरी होगी। यह बदलाव जमीन रजिस्ट्री के काम को और भी आसान बनाएगा। बांका में भी अब पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था शुरू होने वाली है, जो इस डिजिटल परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।1
- यह संदेश उस असहनीय पीड़ा को व्यक्त करता है जो शरीर पर नहीं बल्कि सीधे भविष्य पर गहरे ज़ख्म लगाती है। यह ऐसा दर्द है जो शब्दों में समा नहीं पाता, बल्कि केवल आँखों से आँसुओं के रूप में बह निकलता है। यह वस्तुतः लाखों टूटते सपनों की चीख है, उनकी गवाही है, और एक पूरी पीढ़ी की गहरी वेदना का प्रतीक है।1
- भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद से सियासी गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। विशेष रूप से, यह चर्चा है कि क्या स्वर्ण समाज भारतीय जनता पार्टी से नाराज़ है और इस घटना का राजनीतिक असर क्या होगा।1
- बांका जिले के बौंसी थाना क्षेत्र अंतर्गत घोरिल्ला कैरी गांव में शुक्रवार तड़के सर्पदंश की एक दर्दनाक घटना सामने आई। इस घटना में एक 15 वर्षीय किशोर की मौत हो गई।1
- हाजीपुर में केले को लेकर हुए एक विवाद ने खूनी मोड़ ले लिया है, जिसमें एक भतीजे के हमले से उसके चाचा की मौत हो गई और चाची गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह घटना परिवार के सदस्यों के बीच केले को लेकर हुए विवाद के कारण सामने आई, जहाँ भतीजे ने अपने चाचा और चाची पर हमला कर दिया। इस हमले में चाचा की मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल चाची को इलाज के लिए ले जाया गया है।1