बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद डरावनी और असंवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर पर न सिर्फ तड़पते मरीज की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है, बल्कि मरीज के हक में आवाज उठाने वाले एक युवक के साथ सरेआम हाथापाई और बदसलूकी करने का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने डॉक्टरों को 'धरती का दूसरा भगवान' कहे जाने वाले जुमले को तार-तार कर दिया है। जानकारी के अनुसार, बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज तेज पेट दर्द से तड़प रहा था और बार-बार बेहोश हो रहा था। इसी दौरान अपने किसी परिचित को दिखाने पहुंचे ऋषभ मिश्रा नामक युवक ने उस लाचार मरीज पर ध्यान दिया और वहां मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से उसे तुरंत देखने व प्राथमिक उपचार शुरू करने की गुहार लगाई। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को देखने के बजाय संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं और उसे ओपीडी में ले जाने की बात पर अड़ गए, जबकि ओपीडी का निर्धारित समय पहले ही समाप्त हो चुका था। जब बार-बार अनुरोध करने पर भी डॉक्टर का दिल नहीं पघला, तो ऋषभ मिश्रा ने अस्पताल की इस अव्यवस्था और लापरवाही की जानकारी सीधे जिले के सिविल सर्जन को फोन पर दी। जैसे ही डॉक्टर को इस शिकायत का पता चला, वे आगबबूला हो गए और उन्होंने ऋषभ मिश्रा से तीखी बहस शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर युवक के साथ बदतमीजी करने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों (कमांडो/गार्ड्स) और डॉक्टर ने मिलकर युवक के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। वायरल वीडियो में लाल चेक शर्ट पहने दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान बांका सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ. दिनकर झा के रूप में हुई है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले एक नागरिक को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी मरीज के परिजनों और ऋषभ मिश्रा को जबरन घसीटते और उनके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं, जबकि वहां मौजूद अन्य लोग घटना का वीडियो बनाते रहे, जिसे रोकने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने बांका की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की नैतिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक चिकित्सक का पहला कर्तव्य इमरजेंसी में तड़पते मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता देना नहीं था, और यदि ओपीडी का समय समाप्त हो चुका था, तो मरीज को जानबूझकर ओपीडी में भेजने की जिद क्यों की जा रही थी, जो सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। साथ ही, यह भी प्रश्न उठाया गया है कि क्या डॉक्टरों को मिली सुरक्षाकर्मी इलाज मांगने आने वाले आम नागरिकों पर रौब झाड़ने और उन्हें पीटने के लिए रखे गए हैं, और क्या एक जागरूक नागरिक द्वारा सिविल सर्जन से शिकायत करने पर अस्पताल प्रशासन को उसके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करने का अधिकार मिल जाता है। डॉक्टरों का काम जिंदगी बचाना होता है, लेकिन बांका सदर अस्पताल का यह नजारा किसी 'गुंडागर्दी के अड्डे' से कम नहीं लग रहा था। यह वीडियो उन सभी दावों की पोल खोलता है जो बांका सदर अस्पताल को बेहतर बताने के लिए किए जाते हैं। अब यह देखना बाकी है कि इस वायरल वीडियो और डॉ. दिनकर झा के इस शर्मनाक व संवेदनहीन व्यवहार पर बांका के सिविल सर्जन और जिला प्रशासन द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद डरावनी और असंवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर पर न सिर्फ तड़पते मरीज की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है, बल्कि मरीज के हक में आवाज उठाने वाले एक युवक के साथ सरेआम हाथापाई और बदसलूकी करने का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने डॉक्टरों को 'धरती का दूसरा भगवान' कहे जाने वाले जुमले को तार-तार कर दिया है। जानकारी के अनुसार, बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज तेज पेट दर्द से तड़प रहा था और बार-बार बेहोश हो रहा था। इसी दौरान अपने किसी परिचित को दिखाने पहुंचे ऋषभ मिश्रा नामक युवक ने उस लाचार मरीज पर ध्यान दिया और वहां मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से उसे तुरंत देखने व प्राथमिक उपचार शुरू करने की गुहार लगाई। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को देखने के बजाय संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं और उसे ओपीडी में ले जाने की बात पर अड़ गए, जबकि ओपीडी का निर्धारित समय पहले ही समाप्त हो चुका था। जब बार-बार अनुरोध करने पर भी डॉक्टर का दिल नहीं पघला, तो ऋषभ मिश्रा ने अस्पताल की इस अव्यवस्था और लापरवाही की जानकारी सीधे जिले के सिविल सर्जन को फोन पर दी। जैसे ही डॉक्टर को इस शिकायत का पता चला, वे आगबबूला हो गए और उन्होंने ऋषभ मिश्रा से तीखी बहस शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर युवक के साथ बदतमीजी करने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों (कमांडो/गार्ड्स) और डॉक्टर ने मिलकर युवक के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। वायरल वीडियो में लाल चेक शर्ट पहने दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान बांका सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ. दिनकर झा के रूप में हुई है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले एक नागरिक को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी मरीज के परिजनों और ऋषभ मिश्रा को जबरन घसीटते और उनके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं, जबकि वहां मौजूद अन्य लोग घटना का वीडियो बनाते रहे, जिसे रोकने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने बांका की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की नैतिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक चिकित्सक का पहला कर्तव्य इमरजेंसी में तड़पते मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता देना नहीं था, और यदि ओपीडी का समय समाप्त हो चुका था, तो मरीज को जानबूझकर ओपीडी में भेजने की जिद क्यों की जा रही थी, जो सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। साथ ही, यह भी प्रश्न उठाया गया है कि क्या डॉक्टरों को मिली सुरक्षाकर्मी इलाज मांगने आने वाले आम नागरिकों पर रौब झाड़ने और उन्हें पीटने के लिए रखे गए हैं, और क्या एक जागरूक नागरिक द्वारा सिविल सर्जन से शिकायत करने पर अस्पताल प्रशासन को उसके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करने का अधिकार मिल जाता है। डॉक्टरों का काम जिंदगी बचाना होता है, लेकिन बांका सदर अस्पताल का यह नजारा किसी 'गुंडागर्दी के अड्डे' से कम नहीं लग रहा था। यह वीडियो उन सभी दावों की पोल खोलता है जो बांका सदर अस्पताल को बेहतर बताने के लिए किए जाते हैं। अब यह देखना बाकी है कि इस वायरल वीडियो और डॉ. दिनकर झा के इस शर्मनाक व संवेदनहीन व्यवहार पर बांका के सिविल सर्जन और जिला प्रशासन द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
- बांका जिले में मुहर्रम के अवसर पर आपसी सद्भाव और भाईचारे की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। लोगों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को पूरे सम्मान के साथ याद करते हुए ताजिया निशान जुलूस निकाला। बाराहाट प्रखंड के डफरपुर स्थित हुसैनी अखाड़ा नौजवान कमेटी द्वारा निकाले गए इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान युवाओं ने भेड़ामोड़ चौक और बाराहाट बाजार में एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करतब दिखाकर उपस्थित जनसमूह का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पूरे कार्यक्रम में सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ, जो बांका में मुहर्रम के एक अनोखे नजारे के रूप में सामने आया।1
- सम्राट चौधरी के क्षेत्र देवघरा में अतिक्रमण पर हुई कार्रवाई से सभी स्थानीय लोग बेहद प्रसन्न दिखाई दिए। लोगों की इस खुशी को देखकर रिपोर्टर सिंटू राणा भी आश्चर्यचकित रह गए। यह घटना टेटीया बंबर और देवघर से संबंधित है, जिसे बिहार सरकार से जुड़े सम्राट चौधरी के क्षेत्र के अंतर्गत बताया गया है।1
- भागलपुर जिले के सनहौला प्रखंड के छोटी नाकी गांव में मोहर्रम की 10वीं तारीख पर निकले जुलूस में पारंपरिक लाठी-कला का एक आकर्षक प्रदर्शन देखने को मिला। इस अवसर पर अखाड़े के युवाओं ने अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और अनुशासन का माहौल बना रहा।1
- आदिवासी कांग्रेस ने दुमका से भोगनाडीह तक एक पदयात्रा का आयोजन किया है, जिसका शुभारंभ दुमका के पोखरा चौक से किया गया। यह पदयात्रा शहीद सिदो-कान्हू जी की प्रतिमा तक जाएगी, जिसका उद्देश्य इन अमर शहीदों को नमन करना है। इस पुनीत कार्य में प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश कोऑर्डिनेटर तथा देवघर जिला फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन प्रभारी अवधेश कुमार प्रजापति को भी सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह यात्रा सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलों और झानो जैसे शहीदों की स्मृति में निकाली जा रही है, जिनके अमर बलिदान को याद किया जा रहा है।1
- 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में डीएसपी पद पर चयनित हुए सुमित कुमार पासवान का शुक्रवार को नालंदा के कराय परशुराय प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव मुसाढ़ी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुष्पमाला पहनाकर और अंगवस्त्र भेंटकर उनका अभिनंदन किया, जिसे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया गया। मुसाढ़ी गांव निवासी उदय नारायण पासवान के पुत्र सुमित कुमार पासवान का स्वागत स्थानीय लोगों ने बैंड-बाजे, फूल-माला और तिलक लगाकर किया। इस अवसर पर उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी व्यक्त की और उन्हें बधाई दी। ग्रामीणों ने सुमित की सफलता को युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। स्वागत कार्यक्रम के तहत, सुमित कुमार पासवान ने मकरौता गांव के पास बाबा चौहरमल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। इसी क्रम में मकरौता पंचायत के मुखिया निरंजन उर्फ जितेंद्र प्रसाद ने उन्हें अंबेडकर के विचारों को मन में रखकर आगे बढ़ने की सलाह दी। ग्रामीणों ने बताया कि उनके पिता उदय नारायण पासवान पहले से ही सरकारी कर्मचारी रह चुके हैं, और उनके बड़े भाई अमित कुमार इनकम टैक्स ऑफिसर हैं, जबकि दूसरे पुत्र सुमित कुमार पासवान ने 581वीं रैंक के साथ यह सफलता हासिल की है। उनका तीसरा पुत्र प्रमजित कुमार अभी पढ़ाई कर रहा है। डीएसपी सुमित कुमार से मिलने के लिए उनके गांव में आसपास की सैकड़ों छात्राएं भी पहुंचीं। सभी छात्राओं ने अपने हाथों में 'वेलकम डीएसपी सुमित कुमार' का पोस्टर लिए हुए था और 'स्वागतम डीएसपी, स्वागतम डीएसपी' गीत गाकर उनका अभिनंदन किया। डीएसपी सुमित कुमार ने सभी छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि पढ़ाई ही एकमात्र ऐसा गुण है जिससे सब कुछ हासिल किया जा सकता है।4
- बांका जिले में मुहर्रम के पावन अवसर पर आस्था, परंपरा और भाईचारे की एक अनुपम मिसाल देखने को मिली। ताजिया जुलूस के दौरान विशेष रूप से युवाओं का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था, जिसने इस पूरे आयोजन को एक नई ऊर्जा और भव्यता प्रदान की।1
- बिहार के तारापुर में 27 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव के संभावित आगमन को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं। शुक्रवार को मुंगेर के जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर और एसपी सैयद इमरान मसूद ने अधिकारियों के साथ संभावित कार्यक्रम स्थलों, हेलीपैड और मार्गों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सद्गुरु के साथ हेलीकॉप्टर से तारापुर पहुँच सकते हैं, जहाँ बिहार सरकार द्वारा ईशा फाउंडेशन को उपलब्ध कराई गई लगभग 15 एकड़ भूमि का निरीक्षण प्रस्तावित है। इस संभावित दौरे के मद्देनजर कृषि विभाग परिसर में दो हेलीपैड तैयार किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने हेलीपैड के समीप स्थित 11 केवी बिजली तार को हटाने का निर्देश दिया, साथ ही निर्माणाधीन आईबी भवन का भी निरीक्षण कर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने को कहा। इस अवसर पर एसडीओ राकेश रंजन कुमार और एसडीपीओ कुमार देवेंद्र सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड में मोहर्रम का त्योहार आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। इस अवसर पर बाराचट्टी थाना क्षेत्र के सुलेबट्टा मैदान में एक भव्य मेले और अखाड़े का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मेले में आस-पास के दर्जनों गांवों से अखाड़ा दल शामिल होने पहुंचे। मिली जानकारी के अनुसार, सोभ, छौड़ा और बान गांव से कुल दो भव्य ताजिया और 15 अखाड़ा दल सुलेबट्टा मैदान पहुंचे, जहाँ खिलाड़ियों ने लाठी-डंडे और पारंपरिक तरीकों से हैरतअंगेज करतब दिखाए। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के महिला, पुरुष और बच्चों ने भारी संख्या में पहुँचकर जुलूस देखा और मेले का भरपूर आनंद लिया, जिसने कौमी एकता की एक अनूठी मिसाल पेश की। मेले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। क्षेत्र के सभी संवेदनशील इलाकों में मजिस्ट्रेट की सीधी निगरानी में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। बाराचट्टी थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार गश्त करते नजर आए, जिसके कारण पूरा महोत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।1
- मुंगेर जिले के तारापुर थाना क्षेत्र के रणगांव के समीप गुरुवार को एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो वाहन ने डायल 112 पुलिस वाहन को टक्कर मार दी। जानकारी के अनुसार, स्कॉर्पियो चालक सुल्तानगंज में एक मुंडन संस्कार में शामिल होने के बाद यात्रियों को लेकर कोडरमा लौट रहा था। रणगांव स्थित यूनियन बैंक के पास जांच में जुटी डायल 112 टीम के वाहन को इस स्कॉर्पियो ने तेज गति से आकर टक्कर मार दी। टक्कर के बाद स्कॉर्पियो वाहन अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे खड़े औरंगा निवासी श्रीकांत वर्मा को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। डायल 112 पर तैनात एसआई हारून रसीद ने घायल श्रीकांत वर्मा को अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए भागलपुर रेफर कर दिया गया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो वाहन और उसके चालक को हिरासत में ले लिया। एसआई हारून रसीद के आवेदन पर चालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है और थानाध्यक्ष राजकुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है।1