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आदिवासी कांग्रेस ने दुमका से भोगनाडीह तक एक पदयात्रा का आयोजन किया है, जिसका शुभारंभ दुमका के पोखरा चौक से किया गया। यह पदयात्रा शहीद सिदो-कान्हू जी की प्रतिमा तक जाएगी, जिसका उद्देश्य इन अमर शहीदों को नमन करना है। इस पुनीत कार्य में प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश कोऑर्डिनेटर तथा देवघर जिला फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन प्रभारी अवधेश कुमार प्रजापति को भी सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह यात्रा सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलों और झानो जैसे शहीदों की स्मृति में निकाली जा रही है, जिनके अमर बलिदान को याद किया जा रहा है।
Awadhesh Kumar Prajapati
आदिवासी कांग्रेस ने दुमका से भोगनाडीह तक एक पदयात्रा का आयोजन किया है, जिसका शुभारंभ दुमका के पोखरा चौक से किया गया। यह पदयात्रा शहीद सिदो-कान्हू जी की प्रतिमा तक जाएगी, जिसका उद्देश्य इन अमर शहीदों को नमन करना है। इस पुनीत कार्य में प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश कोऑर्डिनेटर तथा देवघर जिला फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन प्रभारी अवधेश कुमार प्रजापति को भी सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह यात्रा सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलों और झानो जैसे शहीदों की स्मृति में निकाली जा रही है, जिनके अमर बलिदान को याद किया जा रहा है।
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- आदिवासी कांग्रेस ने दुमका से भोगनाडीह तक एक पदयात्रा का आयोजन किया है, जिसका शुभारंभ दुमका के पोखरा चौक से किया गया। यह पदयात्रा शहीद सिदो-कान्हू जी की प्रतिमा तक जाएगी, जिसका उद्देश्य इन अमर शहीदों को नमन करना है। इस पुनीत कार्य में प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश कोऑर्डिनेटर तथा देवघर जिला फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन प्रभारी अवधेश कुमार प्रजापति को भी सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह यात्रा सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलों और झानो जैसे शहीदों की स्मृति में निकाली जा रही है, जिनके अमर बलिदान को याद किया जा रहा है।1
- तमिलनाडु को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित 'स्टार्ट रन, स्टॉप ड्रग्स' मैराथन को मुख्यमंत्री विजय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।1
- झारखंड के देवघर जिले के पाथरोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत गंजेवारी पंचायत के बुढीकुरा गाँव निवासी बबलू कुमार दास ने कानून से इंसाफ की गुहार लगाई है। दास ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का घर मिलने के बाद से उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने दिलीप दास, सदानंद दास, उनके बेटे देवानंद दास और सदानंद दास के बड़े बेटे सहित उनके पूरे परिवार पर धमकी देने का आरोप लगाया है। बबलू कुमार दास के अनुसार, इन लोगों द्वारा उन्हें 'ब्याज से लेकर' धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मई महीने में एक घटना हुई थी, जिसमें उनके अकाउंट या नंबर पर ₹10,000 भेजने की धमकी दी गई थी, जिसे वे बुढीकुरा में बढ़ते साइबर या अन्य अपराधों से जोड़ते हैं।1
- बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद डरावनी और असंवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर पर न सिर्फ तड़पते मरीज की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगा है, बल्कि मरीज के हक में आवाज उठाने वाले एक युवक के साथ सरेआम हाथापाई और बदसलूकी करने का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना ने डॉक्टरों को 'धरती का दूसरा भगवान' कहे जाने वाले जुमले को तार-तार कर दिया है। जानकारी के अनुसार, बांका सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज तेज पेट दर्द से तड़प रहा था और बार-बार बेहोश हो रहा था। इसी दौरान अपने किसी परिचित को दिखाने पहुंचे ऋषभ मिश्रा नामक युवक ने उस लाचार मरीज पर ध्यान दिया और वहां मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से उसे तुरंत देखने व प्राथमिक उपचार शुरू करने की गुहार लगाई। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को देखने के बजाय संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं और उसे ओपीडी में ले जाने की बात पर अड़ गए, जबकि ओपीडी का निर्धारित समय पहले ही समाप्त हो चुका था। जब बार-बार अनुरोध करने पर भी डॉक्टर का दिल नहीं पघला, तो ऋषभ मिश्रा ने अस्पताल की इस अव्यवस्था और लापरवाही की जानकारी सीधे जिले के सिविल सर्जन को फोन पर दी। जैसे ही डॉक्टर को इस शिकायत का पता चला, वे आगबबूला हो गए और उन्होंने ऋषभ मिश्रा से तीखी बहस शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर युवक के साथ बदतमीजी करने लगे। विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों (कमांडो/गार्ड्स) और डॉक्टर ने मिलकर युवक के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। वायरल वीडियो में लाल चेक शर्ट पहने दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान बांका सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ. दिनकर झा के रूप में हुई है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले एक नागरिक को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी मरीज के परिजनों और ऋषभ मिश्रा को जबरन घसीटते और उनके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं, जबकि वहां मौजूद अन्य लोग घटना का वीडियो बनाते रहे, जिसे रोकने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने बांका की स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की नैतिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक चिकित्सक का पहला कर्तव्य इमरजेंसी में तड़पते मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता देना नहीं था, और यदि ओपीडी का समय समाप्त हो चुका था, तो मरीज को जानबूझकर ओपीडी में भेजने की जिद क्यों की जा रही थी, जो सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ है। साथ ही, यह भी प्रश्न उठाया गया है कि क्या डॉक्टरों को मिली सुरक्षाकर्मी इलाज मांगने आने वाले आम नागरिकों पर रौब झाड़ने और उन्हें पीटने के लिए रखे गए हैं, और क्या एक जागरूक नागरिक द्वारा सिविल सर्जन से शिकायत करने पर अस्पताल प्रशासन को उसके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करने का अधिकार मिल जाता है। डॉक्टरों का काम जिंदगी बचाना होता है, लेकिन बांका सदर अस्पताल का यह नजारा किसी 'गुंडागर्दी के अड्डे' से कम नहीं लग रहा था। यह वीडियो उन सभी दावों की पोल खोलता है जो बांका सदर अस्पताल को बेहतर बताने के लिए किए जाते हैं। अब यह देखना बाकी है कि इस वायरल वीडियो और डॉ. दिनकर झा के इस शर्मनाक व संवेदनहीन व्यवहार पर बांका के सिविल सर्जन और जिला प्रशासन द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाती है, या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।1
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- बांका के ऋषभ मिश्रा को 'व्यवस्था से लाचार' होने के कारण क्रांतिकारी बनने पर मजबूर होना पड़ा है। बताया गया है कि उन्होंने एक असहाय मरीज के लिए डॉक्टर से भी भिड़ंत की। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि अब युवा क्यों आगे बढ़ने लगे हैं, और यदि यह वीडियो अच्छा लगे तो दर्शकों से भी समाज के लिए एक कदम आगे बढ़ने का आह्वान किया गया है।1
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- शाहपुर के भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर क्रांतिकारी वीर योद्धा भारत भूषण तिवारी को 'एनकाउंटर' करके ले जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि पुलिस अधिकारी ने भारत भूषण तिवारी जैसे क्रांतिकारी वीर योद्धा का एनकाउंटर कैसे किया।1