150 साल पुराने मंदिर का अजूबा,,, लेटकर देखें या हाथी पर बैठकर, सीधे दिखते हैं भगवान के चरण एंकर-नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में स्थित है 150 साल पुराना ऐतिहासिक ‘श्री गोपाल लाल जी मंदिर’। यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का ऐसा नायाब नमूना है जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। करोंदी के पालीवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर में श्री राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रतिमाएं खड्गासन मुद्रा में विराजित हैं। मान्यता है कि यहाँ स्थापित स्वरूप मथुरा के विग्रहों के समकक्ष माने जाते हैं। इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार इसका कोण है। गर्भगृह को इस तकनीकी सटीकता से बनाया गया है कि भक्त चाहे फर्श पर लेटकर दंडवत प्रणाम करे, मंदिर के सामने खड़ा हो, या फिर बाहर हाथी की पीठ पर सवार हो—हर स्थिति में भगवान के श्रीचरण सीधे और स्पष्ट नजर आते हैं। जन्माष्टमी के महापर्व पर इस अद्भुत मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा है। इस अलौकिक वास्तुकला और प्रभु के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त तेंदूखेड़ा पहुंच रहे हैं। डेढ़ सदी पहले बिना किसी आधुनिक तकनीक के तैयार किया गया यह मंदिर आस्था और भारतीय वास्तु विज्ञान के बेजोड़ तालमेल का जीवंत उदाहरण है।
150 साल पुराने मंदिर का अजूबा,,, लेटकर देखें या हाथी पर बैठकर, सीधे दिखते हैं भगवान के चरण एंकर-नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में स्थित है 150 साल पुराना ऐतिहासिक ‘श्री गोपाल लाल जी मंदिर’। यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का ऐसा नायाब नमूना है जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। करोंदी के पालीवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर में श्री राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रतिमाएं खड्गासन मुद्रा में विराजित हैं। मान्यता है कि यहाँ स्थापित स्वरूप मथुरा के विग्रहों के समकक्ष माने जाते हैं। इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार इसका कोण है। गर्भगृह को इस तकनीकी सटीकता से बनाया गया है कि भक्त चाहे फर्श पर लेटकर दंडवत प्रणाम करे, मंदिर के सामने खड़ा हो, या फिर बाहर हाथी की पीठ पर सवार हो—हर स्थिति में भगवान के श्रीचरण सीधे और स्पष्ट नजर आते हैं। जन्माष्टमी के महापर्व पर इस अद्भुत मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा है। इस अलौकिक वास्तुकला और प्रभु के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त तेंदूखेड़ा पहुंच रहे हैं। डेढ़ सदी पहले बिना किसी आधुनिक तकनीक के तैयार किया गया यह मंदिर आस्था और भारतीय वास्तु विज्ञान के बेजोड़ तालमेल का जीवंत उदाहरण है।
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- तेन्दूखेड़ा में स्थित 150_साल_पुराने_मंदिर_का_अजूबा ✍️Dharmendra sahu1
- भाजपा सरकार संजू शर्मा की लोकप्रियता से डरी ED का सहारा। मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक संजय शर्मा की लगातार लोकप्रियता बढ़ रही है पूरे मध्य प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम पहुंचा है जनप्रिय नेता बन गए हैं संजय शर्मा बीजेपी सरकार डरी उनके समर्थक बोल रहे ED का सहारा लेने लगीभाजपा , Sanjay Sharma जनप्रिय नेता उनका कद बड़ा हुआ।1
- जिला पंचायत सीईओ श्री गोमे ने जन्माष्टमी पर दयोदय गौशाला एवं कन्या छात्रावास का किया निरीक्षण सागर, देवरी विधानसभा के नरानपुर/उमरखोह के लोग आज भी अंधेरे में जीवन गुजारने मजबूर, नाली बिन सड़क तालाब एक हाल में संचालित शासकीय स्कूल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शासन के निर्देशानुसार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सागर श्री जगदीश कुमार गोमे द्वारा जनपद पंचायत सागर अंतर्गत दयोदय गौशाला, रतौना एवं शासकीय अनुसूचित जाति महाविद्यालयीन कन्या छात्रावास, बड़तूमा का निरीक्षण किया गया। दयोदय गौशाला, रतौना के भ्रमण के दौरान नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया भी उपस्थित थे। इस अवसर पर पूजा-अर्चना कर गौशाला की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। विधायक श्री लारिया एवं सीईओ जिला पंचायत श्री गोमे ने गौशाला परिसर में श्रमदान करते हुए साफ-सफाई एवं स्वच्छता कार्य में सहभागिता की। उन्होंने गौशाला में स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण बनाए रखने तथा गौवंश के बेहतर रख-रखाव के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर जोर दिया। जिला पंचायत सीईओ श्री गोमे ने गौशाला में गौवंश के रख-रखाव, चारा-पानी एवं अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसी क्रम में श्री गोमे ने शासकीय अनुसूचित जाति महाविद्यालयीन कन्या छात्रावास, बड़तूमा का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं से संवाद कर छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं, व्यवस्थाओं एवं उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। छात्राओं से चर्चा के दौरान उनकी आवश्यकताओं को जाना तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावास की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने, छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा उनकी समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।4
- https://youtu.be/QDRUUQC6gLo?si=jBj38GMhpUbOH6vn #Narsinghpur DFO कल्पना तिवारी ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारी के खिलाफ SP से की शिकायत1
- *बरगी बांध के 21 में से 13 गेट खुले, नर्मदा किनारे अलर्ट* *जलाशय का जलस्तर 422.45 मीटर पर, नरसिंहपुर में तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह!* जबलपुर! नरसिंहपुर। 4 सितंबर 2026 बरगी बांध जलाशय में लगातार पानी की आवक को देखते हुए बांध के 21 गेटों में से 13 गेट खोल दिए गए हैं। वर्तमान में जलाशय का जलस्तर 422.45 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि पूर्ण जलभराव स्तर 422.76 मीटर है। जलाशय में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नर्मदा नदी के किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। जानकारी के अनुसार, बरगी जलाशय में वर्तमान में करीब 3990 क्यूमेक पानी की आवक हो रही है, जबकि 4012 क्यूमेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। जलाशय की डिजाइन लाइव स्टोरेज क्षमता 3180 एमसीएम के विरुद्ध वर्तमान लाइव स्टोरेज 3113 एमसीएम दर्ज किया गया है। जलाशय के कुल 21 गेटों में से 13 गेट औसतन 1.96 मीटर की ऊंचाई तक खुले हुए हैं। बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए नरसिंहपुर जिले में भी सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन की ओर से नर्मदा नदी के तटीय एवं निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों से नदी के किनारे जाने से बचने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की गई है। लोगों को विशेष रूप से नदी के तटीय क्षेत्रों से दूर रहने और जलस्तर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी1
- Available for Sale Locality : देवरी विधानसभा के गौरझामर के पास Area (dimensions) : 15 एकड़ जमीन रास्ते से लगी हुई स्टेट हाईवे से 50 मी दूर Property Type : Agricultural / Farm Land बहुत अच्छी जमीन पानी में कुआं एवं बोर दो कमरा तार फेंसिंग के साथ1
- 150 साल पुराने मंदिर का अजूबा,,, लेटकर देखें या हाथी पर बैठकर, सीधे दिखते हैं भगवान के चरण एंकर-नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में स्थित है 150 साल पुराना ऐतिहासिक ‘श्री गोपाल लाल जी मंदिर’। यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का ऐसा नायाब नमूना है जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है। करोंदी के पालीवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर में श्री राधा-कृष्ण की मनोहारी प्रतिमाएं खड्गासन मुद्रा में विराजित हैं। मान्यता है कि यहाँ स्थापित स्वरूप मथुरा के विग्रहों के समकक्ष माने जाते हैं। इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार इसका कोण है। गर्भगृह को इस तकनीकी सटीकता से बनाया गया है कि भक्त चाहे फर्श पर लेटकर दंडवत प्रणाम करे, मंदिर के सामने खड़ा हो, या फिर बाहर हाथी की पीठ पर सवार हो—हर स्थिति में भगवान के श्रीचरण सीधे और स्पष्ट नजर आते हैं। जन्माष्टमी के महापर्व पर इस अद्भुत मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा है। इस अलौकिक वास्तुकला और प्रभु के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त तेंदूखेड़ा पहुंच रहे हैं। डेढ़ सदी पहले बिना किसी आधुनिक तकनीक के तैयार किया गया यह मंदिर आस्था और भारतीय वास्तु विज्ञान के बेजोड़ तालमेल का जीवंत उदाहरण है।1