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प्रयागराज में बाढ़ का कहर, झूंसी-छतनाग का दाह संस्कार स्थल जलमग्न प्रयागराज। गंगा के बढ़ते जलस्तर के चलते संगम नगरी के तटीय इलाकों में बाढ़ का असर लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। झूंसी-छतनाग स्थित दाह संस्कार स्थल भी बाढ़ के पानी की चपेट में आकर जलमग्न हो गया है। घाट परिसर में पानी भर जाने से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण घाट तक पहुंचने वाले रास्तों पर भी पानी का असर दिखाई दे रहा है। इससे स्थानीय लोगों और अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रयागराज में गंगा के बढ़ते जलस्तर से घाटों के डूबने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो दाह संस्कार की व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है
SUNIL KUMAR YADAV
प्रयागराज में बाढ़ का कहर, झूंसी-छतनाग का दाह संस्कार स्थल जलमग्न प्रयागराज। गंगा के बढ़ते जलस्तर के चलते संगम नगरी के तटीय इलाकों में बाढ़ का असर लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। झूंसी-छतनाग स्थित दाह संस्कार स्थल भी बाढ़ के पानी की चपेट में आकर जलमग्न हो गया है। घाट परिसर में पानी भर जाने से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण घाट तक पहुंचने वाले रास्तों पर भी पानी का असर दिखाई दे रहा है। इससे स्थानीय लोगों और अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रयागराज में गंगा के बढ़ते जलस्तर से घाटों के डूबने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो दाह संस्कार की व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है
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- धधकते गैस सिलेंडर के पास पहुंचकर हेड कांस्टेबल देवव्रत रॉय ने टाला बड़ा हादसा जान की परवाह किए बिना आग की लपटों के बीच पहुंचे पुलिसकर्मी, सूझबूझ और तत्परता से बुझाई आग; स्थानीय लोगों ने की जमकर सराहना खीरी/कोरांव/प्रयागराज। लेड़ियारी बाजार में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के समीप ईश्वरचंद्र के घर में खाना बनाते समय अचानक गैस सिलेंडर में आग लग गई। सिलेंडर से उठती तेज लपटों को देखकर परिवार के साथ आसपास के लोगों में भी हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट गई, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए अधिकांश लोग सुरक्षित दूरी पर खड़े रहे। घटना की जानकारी मिलते ही ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल देवव्रत रॉय तत्काल मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने बिना समय गंवाए साहस, सूझबूझ और तत्परता का परिचय दिया। वह धधकते गैस सिलेंडर के पास पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। उनकी तत्परता और प्रयास से कुछ ही समय में सिलेंडर में लगी आग पर काबू पा लिया गया। समय रहते आग बुझ जाने से संभावित बड़ा हादसा टल गया। यदि आग पर काबू पाने में थोड़ी भी देरी होती तो आसपास के मकानों और बाजार में मौजूद लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। आग बुझने के बाद परिवार के साथ स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। पुलिसकर्मी के साहस की लोगों ने की सराहना घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने हेड कांस्टेबल देवव्रत रॉय की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर प्रशंसा की। लोगों का कहना था कि जब धधकते सिलेंडर को देखकर हर कोई भयभीत होकर पीछे हट रहा था, उस समय देवव्रत रॉय ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना आगे बढ़कर स्थिति को संभालने का साहस दिखाया। स्थानीय लोगों के मुताबिक उनकी तत्परता से न केवल एक परिवार को संभावित खतरे से बचाया गया, बल्कि आसपास के लोगों और मकानों पर मंडरा रहा बड़ा संकट भी टल गया। घटना के बाद क्षेत्र में उनकी बहादुरी की चर्चा होती रही। लोगों ने उनके साहस की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। सेना से पुलिस तक, सेवा का जज्बा कायम स्थानीय लोगों के अनुसार हेड कांस्टेबल देवव्रत रॉय पूर्व में भारतीय सेना में भी सेवा दे चुके हैं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवाएं शुरू कीं। लोगों का कहना है कि सेना में देशसेवा के दौरान विकसित हुआ अनुशासन, साहस और संकट की घड़ी में निर्णय लेने का जज्बा आज भी उनके कार्य व्यवहार में दिखाई देता है। बताया जाता है कि हाल ही में वह दरोगा पद की परीक्षा में महज कुछ अंकों से पीछे रह गए, अन्यथा वर्तमान में खीरी थाने में उपनिरीक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे होते। स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान एक मृदुभाषी, मिलनसार और सहयोगी पुलिसकर्मी के रूप में है। अपने सरल व्यवहार और लोगों की मदद के लिए तत्पर रहने के कारण वह क्षेत्रवासियों के बीच खास जगह बनाए हुए हैं। बुधवार की घटना में एक बार फिर उनके साहस और कर्तव्यपरायणता ने यह साबित किया कि वर्दी केवल जिम्मेदारी का प्रतीक नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में आमजन के लिए भरोसे और सुरक्षा की ढाल भी है।2
- #कौशाम्बी : मनौरी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में छात्र भी घायल, पैर में आकर लगी ईंट... पूरी खबर पढ़ने के लिए चैनल को फेसबुक यूट्यूब इंस्टाग्राम पर फॉलो करें...1
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- प्रयागराज में ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने हेतु रिक्शा को लाइन में खड़ा करने की हिदायत प्रयागराज शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयागराज पुलिस लगातार अलर्ट मोड पर है। आज देर शाम सिविल लाइंस क्षेत्र में एडिशनल डीसीपी पुष्कर वर्मा के आदेश पर पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से ई-रिक्शा व ऑटो चालकों से अपील की है पुलिस ने चालकों से कहा कि वे अपने रिक्शा लाइन में खड़ा करें, बेतरतीब ढंग से सड़क पर वाहन खड़ा न करें। ऐसा न करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।1
- प्रयागराज के शांतिपुरम में भाजपा नेत्री मिथिलेश सोमवंशी ने महिला सखी गुड़िया जी के साथ किया ललही छठ का पूजन प्रयागराज के शांतिपुरम में भाजपा नेत्री मिथिलेश सोमवंशी ने महिला सखी गुड़िया जी के साथ किया ललही छठ का पूजन प्रयागराज। फाफामऊ क्षेत्र के शांतिपुरम में ललही छठ के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों का सुंदर संगम देखने को मिला। भाजपा नेत्री श्रीमती मिथिलेश सोमवंशी जी ने अपनी महिला सखी गुड़िया जी के साथ विधि-विधान से ललही छठ का पूजन किया और परिवार की सुख-समृद्धि तथा बच्चों के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। पूजन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से ललही छठ की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर व्रती महिलाओं ने भगवान गणेश, माता षष्ठी तथा लोक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हुए संतान के मंगलमय भविष्य के लिए प्रार्थना की। पूजा के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि से जुड़ा है पर्व ललही छठ, जिसे हलषष्ठी या हरछठ के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय लोक परंपराओं में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। मान्यता है कि इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए व्रत और पूजा करती हैं। यह पर्व विशेष रूप से मातृशक्ति की श्रद्धा, त्याग और अपनी संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। ललही छठ के अवसर पर महिलाएं परंपरागत रूप से हल से जुड़ी वस्तुओं और विशेष पूजन सामग्री का उपयोग करती हैं। कई स्थानों पर तालाब, कुंड अथवा पूजा स्थल के समीप सामूहिक रूप से पूजा करने की परंपरा भी है। महिलाएं व्रत रखकर लोककथाओं का श्रवण करती हैं और पूजा के बाद परिवार के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश शांतिपुरम में आयोजित पूजन के दौरान भाजपा नेत्री मिथिलेश सोमवंशी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं में ऐसे पर्वों का विशेष स्थान है। ललही छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां और संतान के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद का पर्व है। ऐसे त्योहार हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। इस दौरान महिला सखी गुड़िया जी समेत अन्य महिलाओं ने भी श्रद्धा और उत्साह के साथ पूजन में सहभागिता की। पूजा-अर्चना के बाद सभी ने एक-दूसरे को ललही छठ की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। ललही छठ के पावन अवसर पर शांतिपुरम में महिलाओं की आस्था, भक्ति और पारंपरिक संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली।2
- उत्तर मध्य रेलवे जीएम ने प्रयागराज-नारायणपुर बाजार रेलखंड का किया विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने बुधवार को प्रयागराज-नारायणपुर बाजार रेलखंड का गहन विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेल संरक्षा, यात्री सुविधाओं और जारी विकास परियोजनाओं की जमीनी हकीकत परखी। निरीक्षण दल में प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक श्री शरद चंद्रायन तथा मंडल रेल प्रबंधक (प्रयागराज) श्री रजनीश अग्रवाल सहित मंडल के अन्य शाखाधिकारी शामिल रहे।1
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- एक महीने से जलभराव, आश्वासन निकला खोखला, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार कौशाम्बी : जनपद के सिराथू तहसील के मोंगरीकड़ा गांव में पिछले एक महीने से जलनिकासी ठप होने के कारण पूरे गांव में गंदा पानी भरा है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूली बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, जबकि ग्रामीण संक्रामक बीमारियों के खतरे के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं आरोप है कि ग्राम प्रधान और ग्राम सेवक ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन आज तक एक फावड़ा भी नहीं चला ग्रामीणों के अनुसार करीब 15 दिन पहले ग्राम प्रधान यशवंत तिवारी और ग्राम सेवक जितेन्द्र प्रकाश त्रिपाठी ने जेसीबी से खुदाई कर एक-दो दिन में जलनिकासी शुरू कराने तथा पांच दिन के भीतर नाला निर्माण शुरू कराने का भरोसा दिया था। लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो जेसीबी पहुंची और न ही नाला निर्माण का काम शुरू हुआ गांव की गलियों में भरे गंदे पानी से लोगों का निकलना दूभर हो गया है बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और मच्छरों व गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया समेत अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है आक्रोशित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराने और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जब एक महीने से गांव पानी में डूबा है, तो आखिर जिम्मेदारों के आश्वासन कागज से जमीन पर कब उतरेंगे।3